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पत्रकार पारस Jain “पार्श्वमणि” को राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार 2026 से सम्मानित

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Published On: 29 January 2026
Paras Jain Awarded National Pride Award 2026 for 35 Years of Excellence in Journalism
— Paras Jain Awarded National Pride Award 2026 for 35 Years of Excellence in Journalism

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पत्रकार जगत के कोहिनूर पारस Jain “पार्श्वमणि” को राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार 2026 से सम्मानित

जयपुर (राजस्थान):
गणतंत्र दिवस के अवसर पर, देशभर में समाज सेवा और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करने के लिए “राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार 2026” का आयोजन राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC), जयपुर में किया गया। इस भव्य आयोजन में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।

इस समारोह में राजस्थान के कोटा जिले के प्रतिष्ठित पत्रकार पारस Jain “पार्श्वमणि” को उनके 35 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में किए गए अविस्मरणीय योगदान के लिए “राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार 2026” से नवाजा गया। पारस जैन “पार्श्वमणि” ने पिछले तीन दशकों से अधिक समय तक समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कार्य किया है, और उनका यह योगदान इस पुरस्कार से सराहा गया।

समारोह का उद्देश्य और पुरस्कार की परिभाषा

राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार का उद्देश्य
यह पुरस्कार उन व्यक्तियों को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है, जिन्होंने अपने कार्यों के माध्यम से समाज और देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हैं। इस आयोजन में ऐसे व्यक्तित्वों को पहचाना गया, जिन्होंने शिक्षा, सामाजिक सेवा, स्वास्थ्य, कला, संस्कृति, नवाचार, प्रशासन और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

इस पुरस्कार समारोह का आयोजन “यस इंडिया फाउंडेशन” द्वारा किया गया था, और इसमें देशभर से प्रतिष्ठित लोग उपस्थित थे। पारस जैन “पार्श्वमणि” को उनकी पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया।

पारस Jain “पार्श्वमणि” का पत्रकारिता में योगदान

35 वर्षों का संघर्ष और समर्पण
पारस Jain “पार्श्वमणि” ने अपनी पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए अनगिनत प्रयास किए हैं। उन्होंने समाज के मुद्दों को उजागर किया और लोगों के बीच जागरूकता फैलाने का कार्य किया। उनके लिए पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक मिशन है, जो समाज की सच्चाई और जरूरतमंद लोगों की आवाज़ को उठाने का माध्यम है।

उनकी सोच है: “नज़रें अपनी बदले, नज़ारे बदल जाएंगे। अगर हम सभी को अपना मानेंगे तो सब हमारे हो जाएंगे।” यह विचार न केवल पत्रकारिता में, बल्कि हर क्षेत्र में कार्य करने वालों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनते हैं।

पारस Jain को पहले भी मिले कई सम्मान

पहले भी हुए सम्मानित
इसके पहले भी पारस जैन “पार्श्वमणि” को कई पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा जा चुका है। जयपुर में आयोजित एक समारोह में उन्हें “वर्तमान का श्रवण कुमार” के रूप में सम्मानित किया गया था। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में भी उन्हें “मुख्य अतिथि” के रूप में सम्मानित किया गया था, जहां आचार्य 108 श्री विमर्श सागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके योगदान को सराहा गया।

समारोह में अन्य महत्वपूर्ण शख्सियतों की उपस्थिति

सम्मान समारोह में प्रमुख अतिथि
इस समारोह में राजस्थान और अन्य राज्यों के कई प्रतिष्ठित लोग शामिल हुए, जिन्होंने पारस जैन “पार्श्वमणि” को उनके शानदार कार्य के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर मुख्य रूप से जिन लोगों ने भाग लिया, उनमें प्रकाश बज, जिनेंद्र पापड़ीवाल, निर्मल जैन, विनोद जैन लांबावास कोटा, डॉ. अखिल बंसल, श्रीमति अंजली जैन, अजीत जैन बंसल, जयेंद्र जैन, विमल कमलेश जैन दरा वाले, विवेक जैन कोटा, राजेंद्र जैन श्रीमाल कोटा, महावीर जैन पराना निवाई, विष्णु जी जैन निवाई, रविंद्र जैन काला बूंदी, बाबूलाल जैन नैनवा, महावीर सरावगी नैनवा, विमल जोला निवाई आदि शामिल थे। इन सभी ने पारस जैन “पार्श्वमणि” को उनके योगदान के लिए शुभकामनाएं और सम्मान समर्पित किया।

राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार का महत्व

समाज में बदलाव लाने की प्रेरणा
यह पुरस्कार उन व्यक्तित्वों को सम्मानित करता है, जिन्होंने अपने कार्यों से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में योगदान दिया है। पारस जैन “पार्श्वमणि” को यह पुरस्कार इसलिए दिया गया क्योंकि उन्होंने पत्रकारिता के माध्यम से हमेशा समाज के सही पक्ष को सामने रखा और समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई। उनका मानना है कि पत्रकारिता के जरिए समाज में बदलाव लाया जा सकता है और यह एक ऐसी ताकत है, जो हर किसी के लिए प्रभावशाली हो सकती है।

पारस जैन की सोच और प्रेरणा

“समानता और सामूहिक प्रयास”
पारस Jain का जीवन और उनका कार्य उनके आदर्शों और विचारों को प्रतिबिंबित करता है। उनका मानना है कि समाज को एकजुट करने और समानता की दिशा में काम करने की जरूरत है। उनके अनुसार, “हम ना सोचे हमें क्या मिला है, हम यह सोचे क्या है अर्पण फूल समता के बाटे।” यह सोच न केवल पत्रकारिता के क्षेत्र में, बल्कि हर क्षेत्र में एक आदर्श बन सकती है, जिसमें सभी लोग मिलकर समाज में बदलाव लाने के लिए काम करें।

निष्कर्ष: एक प्रेरणा

समाज के लिए प्रेरणा का स्त्रोत
पारस Jain “पार्श्वमणि” को राष्ट्रीय गौरव पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया जाना न केवल पत्रकारिता बल्कि समाज सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान का प्रतीक है। यह पुरस्कार उनके कठिन परिश्रम, ईमानदारी और समाज के प्रति उनके समर्पण को पहचानता है। उनका जीवन और कार्य हमें प्रेरित करता है कि हम भी अपने कार्यों के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कदम उठाएं।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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