जनता की थाली में ज़हर! Jabalpur में सीवेज से सब्जी खेती का खुलासा
मध्य प्रदेश के Jabalpur शहर से सामने आई एक गंभीर रिपोर्ट ने आमजन, प्रशासन और न्यायपालिका—तीनों को झकझोर कर रख दिया है। पानी की किल्लत से जूझ रहे शहर में अब सब्जियों के ज़रिए ज़हर लोगों की थाली तक पहुँच रहा है। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPPCB) की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि शहर के अधिकांश नालों का पानी सीवेज से बुरी तरह दूषित है और इसी पानी का उपयोग खुलेआम सब्जियों की खेती के लिए किया जा रहा है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इसे जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए राज्य सरकार से तत्काल कार्रवाई की रिपोर्ट तलब की है। कोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि इस मुद्दे पर लापरवाही बरती गई, तो सख्त कदम उठाए जाएंगे।
हाईकोर्ट में पेश रिपोर्ट से मचा हड़कंप
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की Jabalpur खंडपीठ में प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट ने शहर की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, जबलपुर के प्रमुख नालों—ओमती नाला, मोती नाला, खूनी नाला, उदरना नाला समेत कई अन्य—में बहने वाला पानी अत्यधिक मात्रा में बिना उपचारित सीवेज से दूषित है।
यह पानी न केवल पीने और नहाने के लिए, बल्कि किसी भी प्रकार की सिंचाई के लिए भी पूरी तरह अनुपयुक्त बताया गया है। इसके बावजूद, इसी पानी से सब्जियों की खेती की जा रही है, जो सीधे स्थानीय बाजारों और फिर आम लोगों की रसोई तक पहुँच रही हैं।
सब्जियों के ज़रिए स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा
रिपोर्ट में बताया गया है कि दूषित नालों के पानी में उगाई जा रही सब्जियां मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे पानी में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और विषैले तत्व सब्जियों के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे पेट संबंधी रोग, त्वचा संक्रमण, टाइफाइड, हैजा और दीर्घकालिक बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस पानी का उपयोग किसी भी मानवीय गतिविधि के लिए नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।
विधि छात्र के पत्र से जनहित याचिका तक
इस पूरे मामले की शुरुआत एक जागरूक विधि छात्र के पत्र से हुई। छात्र ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर जबलपुर के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में नालों के दूषित पानी से हो रही सब्जी की खेती की जानकारी दी थी।
पत्र में चेतावनी दी गई थी कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह स्थिति बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट में बदल सकती है। चीफ जस्टिस ने पत्र की गंभीरता को समझते हुए इसे जनहित याचिका (PIL) के रूप में दर्ज करने के आदेश दिए।
संयुक्त जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
हाईकोर्ट के निर्देश पर कृषि विभाग, स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण मंडल की एक संयुक्त टीम ने 23 नवंबर 2025 को जबलपुर के विभिन्न नालों से पानी के नमूने एकत्र किए।
जांच रिपोर्ट में पाया गया कि:
- बीओडी (Biological Oxygen Demand) स्तर मानक से कई गुना अधिक था
- टोटल कोलीफॉर्म और फेकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी थी
ये सभी संकेत इस बात की पुष्टि करते हैं कि नालों में बह रहा पानी पूरी तरह से बिना उपचारित सीवेज है और इसका किसी भी तरह का उपयोग जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम की पोल खुली
रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि जबलपुर शहर में प्रतिदिन लगभग 174 मेगा लीटर वेस्ट वॉटर नालों के माध्यम से बहता है। वहीं, नगर निगम द्वारा स्थापित 13 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STP) केवल 58 मेगा लीटर प्रतिदिन पानी का ही उपचार कर पा रहे हैं।
हालांकि इन प्लांट्स की कुल क्षमता 154.38 मेगा लीटर प्रतिदिन बताई गई है, लेकिन वास्तविक संचालन क्षमता इससे कहीं कम है। परिणामस्वरूप, बड़ी मात्रा में सीवेज बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे नालों और नदियों—नर्मदा और हिरन—में प्रवाहित हो रहा है।
करोड़ों खर्च, फिर भी हालात बदतर
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि जबलपुर में सीवेज प्रबंधन को लेकर अब तक करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। हाल ही में अमृत 2.0 सीवर योजना के तहत नगर निगम को 1202.38 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी मिली है।
इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है। इससे प्रशासनिक लापरवाही और योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हाईकोर्ट का सख्त रुख, सरकार को कार्रवाई के निर्देश
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल पर्यावरण नहीं, बल्कि सीधे आम नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है।
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि:
- प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सभी सुझावों पर तत्काल अमल किया जाए
- दूषित पानी से सिंचाई पर प्रभावी रोक लगाई जाए
- उठाए गए कदमों की विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट अदालत में पेश की जाए
इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 2 फरवरी को निर्धारित की गई है।
निष्कर्ष: चेतावनी भी, अवसर भी
Jabalpur की यह स्थिति पूरे प्रदेश के लिए एक चेतावनी है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या केवल एक शहर तक सीमित नहीं रहेगी। वहीं, हाईकोर्ट की सक्रियता और रिपोर्ट के सार्वजनिक होने से अब उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन इस दिशा में गंभीर और ठोस कार्रवाई करेगा।
यह मामला न केवल प्रदूषण नियंत्रण, बल्कि सुरक्षित खाद्य प्रणाली और नागरिकों के मूल अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेती है।

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