Swami Ramanandacharya Jayanti 2026: प्रेम, समन्वय और समरसता का भव्य आयोजन – थांदला
थांदला। आगामी 9 और 10 जनवरी 2026 को नगर में जगद्गुरु Swami Ramanandacharya की 726वीं जयंती बड़े ही भव्य रूप से मनाई जाएगी। यह आयोजन नगर के हिन्दू सनातनी समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे प्रेम, समन्वय और समरसता का संदेश फैलाने वाला कार्यक्रम माना जा रहा है। आयोजन में नगर के लगभग 20 हजार हिन्दू परिवार शामिल होने की संभावना है, जबकि संत महात्माओं की संख्या लगभग 300 के करीब रहेगी।
इस दो दिवसीय उत्सव का मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि समाज में भाईचारा, सहिष्णुता और एकता को बढ़ावा देना भी है। नगर के घर-घर जाकर नागरिकों को इस आयोजन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। आयोजन के संयोजक विश्वास सोनी और महेश नागर ने स्थानीय जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष प्रदीप गादिया, कोषाध्यक्ष रजनीकांत शाह, सचिव हितेश शाह, पूर्व अध्यक्ष नगीरलाल शाह और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों को पत्रिका वितरित करते हुए आयोजन में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया।
संघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया ने कहा कि स्वामी रामनन्दाचार्यजी की जयंती का यह महापर्व आपसी प्रेम, समन्वय और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। पूर्व अध्यक्ष नगीरलाल शाह ने भी बताया कि ऐसे आयोजनों से युवाओं में धर्म और संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ती है और आपसी वैमनस्य समाप्त करने में मदद मिलती है।
आयोजन की तैयारियां और भूमिका
नगर के मेट्रो गार्डन में होने वाले इस भव्य धार्मिक आयोजन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले हैं:
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नटवर सोनी और राजीव सोनी – मेढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज के अध्यक्ष
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विश्वास सोनी – कार्यक्रम संयोजक
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पवन नाहर – मीडिया प्रभारी
इस आयोजन का मार्गदर्शन पिपलखुटा महंत 1008 दयरामदासजी महाराज कर रहे हैं। आयोजकों के अनुसार 9 जनवरी 2026 को विभिन्न प्रांतों के महामंडलेश्वर, आचार्य और संत महात्मा थांदला पहुंचेंगे। मुख्य संत महात्माओं में शामिल होंगे:
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महामंडलेश्वर 1008 शांतिस्वरूपानंद गिरिजी महाराज (उज्जैन)
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महामंडलेश्वर 1008 भगवानदासजी महाराज (अयोध्या)
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108 रविशरणजी महाराज (अयोध्या)
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गौ भक्त रघुवीरदासजी महाराज (तलावड़ा)
संत महात्माओं की उपस्थिति में रात्रि 8 बजे भजन संध्या का आयोजन होगा, जिसमें महाकाल भक्त नितिन बागवान मधुर भजनों के माध्यम से उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोहेंगे।
10 जनवरी 2026 का कार्यक्रम
दूसरे दिन, 10 जनवरी 2026, सुबह 8 बजे नगर में बैंड बाजा और बग्गी के साथ संत महात्माओं का स्वागत किया जाएगा। इसके बाद नगर के प्रमुख मार्गों पर विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें नगर के सभी हिन्दू समाज के पुरुष और महिला सहभागी होंगे।
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प्रातः 11 बजे संत-महात्माओं के आशीर्वचन प्राप्त होंगे।
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तत्पश्चात सभी के लिए महाप्रसादी का आयोजन किया जाएगा।
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दोपहर 2 बजे संत-महात्माओं को भेंट और विदाई समारोह के माध्यम से सम्मानित किया जाएगा।
आयोजन स्थल श्री नरनारायण पुरम (मेट्रो गार्डन) पर यथोचित तैयारियां की जा रही हैं। समिति ने पुरुष और महिला वर्ग के लिए अलग-अलग बैठक व्यवस्था सुनिश्चित की है, ताकि सभी सहज रूप से भाग ले सकें।
आयोजन का महत्व और उद्देश्य
यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है। इसका उद्देश्य समाज में भाईचारा, एकता और सहयोग को बढ़ावा देना है। स्वामी रामनन्दाचार्यजी की जयंती का यह महापर्व समुदाय में निम्नलिखित संदेश देता है:
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समाज में प्रेम और भाईचारा बढ़ाना: आयोजन विभिन्न वर्गों और समुदायों को एक साथ लाकर समाज में समरसता पैदा करता है।
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युवाओं में जागरूकता: धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से युवा पीढ़ी धर्म और संस्कृति के प्रति जागरूक होती है।
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धार्मिक और सामाजिक शिक्षा: संत-महात्माओं के आशीर्वचन लोगों के लिए मार्गदर्शक बनते हैं।
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सामूहिक सहभागिता: जैन और हिन्दू समाज के सहयोग से यह दर्शाता है कि भिन्न समुदाय मिलकर समाज और धर्म को सशक्त बना सकते हैं।
आयोजन के संयोजक ने कहा कि संत-महात्माओं की उपस्थिति और उनके आशीर्वचन समाज में शांति, सहयोग और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करेंगे।
नागरिकों से अपील
समिति ने नगर के सभी सनातनी धर्मावलंबियों से अपील की है कि वे पूरा परिवार लेकर इस भव्य आयोजन में शामिल हों, ताकि धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से यह महापर्व सफल हो सके। इस आयोजन में भाग लेने से न केवल धार्मिक लाभ मिलेगा, बल्कि समाज में भाईचारा और आपसी सहयोग भी बढ़ेगा।
निष्कर्ष
Swami Ramanandacharya की जयंती का यह आयोजन नगर में धर्म, समाज और संस्कृति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का अवसर है, बल्कि समाज में समरसता, प्रेम और सहयोग का संदेश भी फैलाता है। नगर के सभी हिन्दू और जैन परिवारों की सहभागिता इसे और भी भव्य बनाएगी।
आयोजन समिति ने सुनिश्चित किया है कि सभी नागरिक, चाहे पुरुष हों या महिलाएं, सुविधाजनक और सुरक्षित वातावरण में भाग ले सकें। यह जयंती निश्चित रूप से समाज में एकता और धार्मिक चेतना का प्रेरक उदाहरण साबित होगी।

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