बोरीवली संभवनाथ जैन संघ से जुड़े एक साधु पर गंभीर आरोप सामने आए हैं। हार्दिक हुंडिया ने संघों से अनुशासनहीनता के मामलों में सख्त कार्रवाई की अपील की है।
बोरीवली जैन संघ में साधु पर गंभीर आरोप, हार्दिक हुंडिया बोले—संघ जागेंगे तो शिथिलाचारी भागेंगे
संभवनाथ जैन संघ की कथित कार्रवाई की सराहना, धार्मिक अनुशासन बनाए रखने के लिए सभी जैन संघों से सतर्क रहने की अपील
मुंबई/बोरीवली। मुंबई के बोरीवली स्थित संभवनाथ जैन संघ से जुड़े एक साधु के खिलाफ गंभीर आरोपों को लेकर जैन समाज में चर्चा शुरू हो गई है। जैन समाज से जुड़े हार्दिक हुंडिया ने एक प्रेस नोट जारी कर दावा किया है कि संघ के ट्रस्टियों ने कथित अनुशासनहीनता के मामले में एक साधु को साधुवेश त्यागकर गृहस्थ जीवन में लौटने के लिए कहा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
संघ के ट्रस्टियों की कार्रवाई को बताया उदाहरण
हार्दिक हुंडिया ने प्रेस नोट में बताया कि बोरीवली संभवनाथ जैन संघ के एक ट्रस्टी से बातचीत के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि धर्मसूरी समुदाय से जुड़े एक साधु पर कथित अनुचित आचरण के आरोप सामने आने के बाद संघ के ट्रस्टियों ने बैठक कर कार्रवाई की।
हुंडिया के अनुसार, ट्रस्टियों ने संबंधित साधु को साधुवेश छोड़कर सांसारिक जीवन में लौटने के लिए कहा। उन्होंने इस कथित निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि धार्मिक मर्यादाओं और अनुशासन की रक्षा के लिए संघों को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
हर जैन संघ को जागरूक होने की जरूरत : हुंडिया
हार्दिक हुंडिया ने कहा कि जैन साधु-संतों के प्रति समाज में गहरी श्रद्धा और विश्वास है। ऐसे में यदि किसी साधु के विरुद्ध अनुशासनहीनता की शिकायत सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई आवश्यक है।
उन्होंने कहा, “अगर संघ जाग गए तो शिथिलाचारी भाग जाएंगे।”
हुंडिया ने सभी जैन संघों और महासंघों से अपील की कि धार्मिक परंपराओं की गरिमा बनाए रखने के लिए अनुशासन संबंधी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए।
धार्मिक मर्यादा और समाज की सुरक्षा पर दिया जोर
प्रेस नोट में हुंडिया ने पूर्व में अन्य जैन संघों से जुड़े कथित विवादों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समाज को धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से युवाओं और बच्चों की सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी गंभीर शिकायत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और आरोप प्रमाणित होने पर धार्मिक नियमों तथा कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी
यह समाचार हार्दिक हुंडिया द्वारा जारी प्रेस नोट में किए गए दावों पर आधारित है। संबंधित साधु के विरुद्ध लगाए गए आरोपों, संघ द्वारा कथित रूप से की गई कार्रवाई और पूर्व घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित जैन संघ, आरोपित पक्ष और पुलिस का आधिकारिक बयान भी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन आरोपों को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।


