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मुंबई में Marathi- Gujrati -Marwari विवाद सुलझाने की पहल, आम्रि गिरगांवकर और निलेश चंद्र मुनि के साथ खुला संवाद

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Published On: 6 January 2026
Mumbai Initiative to Resolve Marathi-Gujarati-Marwari Conflict, Open Dialogue with Amhi Girgaonkar and Muni Nilesh Chandra
— Mumbai Initiative to Resolve Marathi-Gujarati-Marwari Conflict, Open Dialogue with Amhi Girgaonkar and Muni Nilesh Chandra

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जन कल्याण पार्टी के नेतृत्व में मराठी और परप्रांतीय विवाद सुलझाने की ऐतिहासिक पहल

Mumbai। महाराष्ट्र की आर्थिक राजधानी मुंबई में Marathi- Gujrati -Marwari समुदायों के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद और मतभेद को खत्म करने के लिए जन कल्याण पार्टी ने ऐतिहासिक पहल की। इस पहल के तहत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हार्दिक हुंडिया और जैन मुनि निलेश चंद्र विजय ने आम्रि गिरगांवकर के साथ मिलकर प्रेस क्लब, मुंबई में खुला संवाद आयोजित किया। इस संवाद का उद्देश्य था दोनों पक्षों के बीच मतभेदों को समझना, सुलह के रास्ते तलाशना और समाज में भाईचारे को बढ़ावा देना।

विवाद की पृष्ठभूमि

Mumbai में हाल ही में मराठी और परप्रांतीय समुदायों के बीच मतभेद बढ़ते जा रहे थे। इस विवाद की जड़ स्थानीय राजनीति और व्यक्तिगत स्वार्थ में है। जैन मुनि निलेश चंद्र के अनुसार, कुछ जैन संत और बिल्डर मिलकर अपने स्वार्थ के लिए भाई-भाई के बीच दुराव और गलतफहमी पैदा कर रहे थे।

हार्दिक हुंडिया ने कहा कि समाज में धर्म के नाम पर स्वार्थ नहीं होना चाहिए। हमें ऐसे संत चाहिए जो समाज को जोड़ने वाले हों, न कि धर्म के नाम पर व्यक्तिगत लाभ उठाने वाले। उन्होंने कहा, “समाज सुषुप्त अवस्था में है। हमें धर्म के नाम पर लड़ाई करने वाले संत नहीं चाहिए, बल्कि समाज को जोड़ने वाले राष्ट्रीय संत चाहिए।”

प्रेस क्लब में खुला संवाद

इस संवाद में आम्रि गिरगांवकर के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। पत्रकारों की भारी संख्या ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

जैन मुनि निलेश चंद्र ने कहा:

  • महाराष्ट्र में रहने के लिए महाराष्ट्र की भाषा का सम्मान करना अनिवार्य है।
  • उन्होंने कहा कि वे कबूतरों की सुरक्षा के लिए अपनी जान देने तक को तैयार हैं।
  • उनका मुख्य उद्देश्य समाज में भाईचारे को बढ़ाना और विवाद खत्म करना है।

हार्दिक हुंडिया ने कहा:

  • समाज में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन इसे सुलह और संवाद के जरिए खत्म करना हमारी जिम्मेदारी है।
  • धर्म के नाम पर व्यापार करने वाले संतों की कोई आवश्यकता नहीं है।
  • हमें समाज जोड़ने वाले संत चाहिए, जैसे कि निलेश चंद्र मुनि।

आम्रि गिरगांवकर ने भी इस पहल का स्वागत किया और कहा कि मराठी और परप्रांतीय समुदायों के बीच सुलह के प्रयासों को सम्मान मिलना चाहिए।

Marathi Gujrati Marwari Conflict

विवाद सुलझाने के प्रयास

इस पहल के तहत दोनों पक्षों ने अपने मत रखे और मतभेदों को कम करने का प्रयास किया। मुनि निलेश चंद्र और हार्दिक हुंडिया ने मिलकर भाई-भाई के बीच मतभेद कम करने की रणनीति बनाई।

  • आम्रि गिरगांवकर के पदाधिकारियों ने अपने सवाल मुनि निलेश चंद्र के सामने रखे।
  • संत ने संतुलित और खुले दिल से इन सवालों का जवाब दिया।
  • दोनों पक्षों ने समाज में भाईचारे और समझौते की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया।
  • विवादों के पीछे की राजनीतिक स्वार्थपूर्ण गतिविधियों को उजागर किया गया।
जन कल्याण पार्टी की पहल

जन कल्याण पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री रमेश जैन ने कहा कि महाराष्ट्र में समाज की एकता के लिए जो काम पहले किसी ने नहीं किया, वो मुनि निलेश चंद्र और हार्दिक हुंडिया ने किया।

उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों से समाज में भाई-भाई की दूरी कम होगी और प्रेम और सौहार्द का माहौल बन सकेगा। उन्होंने मुनि और पार्टी अध्यक्ष का धन्यवाद किया और कहा कि उनके कदम ऐतिहासिक हैं।

प्रेस क्लब में कार्यक्रम की विशेष बातें
  1. आम्रि गिरगांवकर के पदाधिकारियों का खेस पहनाकर सम्मान किया गया।
  2. पत्रकारों की भारी संख्या में उपस्थिति रही।
  3. मराठी और परप्रांतीय मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई।
  4. दोनों पक्षों ने अपने मत रखे और मतभेदों को सुलझाने का प्रयास किया।
  5. मुनि निलेश चंद्र ने समाज के लिए अपने विचार साझा किए और भाईचारे को बढ़ावा देने की शपथ ली।
रिणाम और निष्कर्ष

Mumbai में Marathi- Gujrati -Marwari समुदायों के बीच बढ़ते विवाद को सुलझाने के लिए जन कल्याण पार्टी और राष्ट्रीय संतों की यह पहल ऐतिहासिक मानी जा रही है।

  • इस पहल से यह संदेश गया कि संवाद, समझ और सम्मान से ही मतभेदों को हल किया जा सकता है।
  • समुदायों के बीच सहानुभूति, भाईचारा और सहयोग की भावना मजबूत होगी।
  • भविष्य में ऐसे संवाद और पहल समाज में सौहार्द और शांति बनाए रखने में मदद करेंगे।
  • इस पहल से यह भी स्पष्ट हुआ कि धर्म और राजनीति का स्वार्थपूर्ण उपयोग समाज को बांटने के बजाय जोड़ने में किया जाना चाहिए।
सोशल और सांस्कृतिक महत्व

यह पहल न केवल विवाद सुलझाने में मददगार साबित होगी, बल्कि Marathi और परप्रांतीय समुदायों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक एकता को भी बढ़ावा देगी।

  • दोनों पक्षों ने अपने मत रखकर समाज में खुले संवाद का महत्व दिखाया।
  • युवा और नागरिकों को भी यह संदेश गया कि विवाद को लड़ाई से नहीं, बल्कि संवाद और समझ से हल किया जा सकता है।
  • भविष्य में ऐसी पहल महाराष्ट्र और मुंबई में सामाजिक सौहार्द और भाईचारे को मजबूत करने में मॉडल बन सकती है।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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