मध्य प्रदेश विकास की राह में है , ऐसे में टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 जैसे इवेंट इसकी रफ़्तार को दोगुना कर देते है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर प्रदेश के विकास के अगले दस वर्षों का रोडमैप प्रस्तुत किया और यह संदेश दिया कि टियर-2 भारत, विशेष रूप से मध्यप्रदेश, अब तकनीकी क्रांति का नेतृत्व करेगा।

स्टार्टअप , इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बढ़ावा
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उद्योग दुनिया से जुड़े सभी प्रतिनिधियों से वन-टू-वन इंटरेक्शन किया , जिनमें निवेश, नवाचार और औद्योगिक जैसे अहम् हिस्सों पर चर्चा हुई । बैठक का लक्ष्य यह था कि राज्य में स्टार्टअप इकोसिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया जाए ताकि प्रदेश के युवाओ के लिए रोजगार के नए विकल्प निकले जा सके।
क्या हैं मध्यप्रदेश अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी नीति 2025′ ?
‘मध्यप्रदेश अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी नीति 2025’ इस कॉन्क्लेव का आकर्षण रही। इस नीति में राज्य को अंतरिक्ष और उपग्रह प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की रणनीति बताई गई है। योजना के तहत उज्जैन को स्पेस इनोवेशन हब बनाने की घोषणा की गई है।
यह नीति IN-SPACe के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार की गई है ताकि निजी क्षेत्र उपग्रह डिजाइन, प्रक्षेपण सेवाओं और डेटा एनालिटिक्स में योगदान दे सके। इस पहल से न केवल अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा बल्कि राज्य में उच्च तकनीक उद्योगों के नए द्वार भी खुलेंगे। इंदौर का यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि मध्यप्रदेश अब केवल दर्शक नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी उन्नति का अगुवा बनने को तैयार है।
