चार मौतों के बाद भी मिली जल्दी जमानत: विधायक गोलू शुक्ला के ड्राइवर पर पुलिस कार्रवाई पर सवाल
इंदौर | इंदौर विधानसभा क्षेत्र के विधायक गोलू शुक्ला के परिवार से जुड़ी बस की टक्कर में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। इस हादसे में महेंद्र सोलंकी, उनकी पत्नी जयश्री और दोनों बेटे तेजस व जिगर की मौके पर मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए। घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई और ड्राइवर को मिली तत्काल जमानत ने पूरे शहर में नाराजगी और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया है।
हादसे के बाद त्वरित गिरफ्तारी, लेकिन कमजोर धाराएं
दुर्घटना के तुरंत बाद बस चालक शिव सोनवानिया और क्लीनर शंकर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। शुरुआत में पुलिस ने बीएनएस धारा 105 (गैर इरादतन हत्या) और धारा 110 (गैर इरादतन हत्या का प्रयास) जैसी गंभीर धाराएं लगाईं, जिनमें लंबी सजा और सख्त प्रावधान हैं।
लेकिन बाद में जिन धाराओं को शामिल किया गया, वे अपेक्षाकृत हल्की और आसानी से जमानत योग्य थीं। उदाहरण के लिए:
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बीएनएस 281 – रैश ड्राइविंग, अधिकतम 6 माह की सजा
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बीएनएस 125A – ऐसा काम जिससे दूसरों का जीवन संकट में आए, अधिकतम 3 साल की सजा
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बीएनएस 106(1) – लापरवाही से मौत, अधिकतम 5 साल की सजा
इन कमजोर धाराओं के कारण, अदालत ने शनिवार रात 11:30 बजे ही ड्राइवर को सांवेर जिला कोर्ट से जमानत दे दी।
परिजनों और समाज का गुस्सा
मृतक सोलंकी परिवार के रिश्तेदारों और समाजजनों का कहना है कि इतनी बड़ी त्रासदी के बाद पुलिस ने जानबूझकर गंभीर धाराएं नहीं लगाईं, जिससे आरोपी तुरंत जमानत पर बाहर आ सका।
- मृतकों के परिजनों ने रविवार सुबह लव-कुश चौराहा से घटनास्थल तक पैदल मार्च निकालने का निर्णय लिया।
- वहीं करणी सेना ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए चक्का जाम करने का एलान किया है।
लोगों का आरोप है कि विधायक के दबाव में पुलिस ने नरमी बरती और न्यायिक प्रक्रिया कमजोर की।
विधायक गोलू शुक्ला का विवादित बयान
हादसे के बाद विधायक गोलू शुक्ला ने बयान दिया कि दुर्घटना का कारण बाइक सवार की गलती थी, जो खड़ी बस से टकरा गया था। उन्होंने मृतक परिवार के लिए संवेदना भी व्यक्त की।
लेकिन मृतक परिवार ने उनके बयान को भ्रामक और झूठा बताते हुए कहा कि बस चालक की लापरवाही और तेज रफ्तार ही चारों मौतों की वजह बनी।
पुलिस का पक्ष
इंदौर की एसपी यांगचेन डोलकर भूटिया ने कहा कि मामला रैश ड्राइविंग और लापरवाही से जुड़ा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गंभीर धाराएं जैसे शराब पीकर गाड़ी चलाना या जानलेवा लापरवाही इस मामले में शामिल नहीं की गई हैं।
लेकिन पुलिस की इस दलील से सवाल और गहरे हो गए हैं—क्या चार लोगों की मौत जैसी गंभीर घटना में केवल “रैश ड्राइविंग” जैसी धारा लगाना पर्याप्त है?
उठते सवाल और न्याय की मांग
इंदौर का यह हादसा अब कानूनी कार्रवाई, राजनीतिक दबाव और न्याय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।
- क्या पुलिस ने जानबूझकर हल्की धाराएं लगाकर आरोपी को बचाने की कोशिश की?
- क्या विधायक परिवार की वजह से पूरे मामले को कमजोर बनाया गया?
- चार मौतों जैसे बड़े हादसे में त्वरित जमानत मिलना क्या न्यायिक प्रक्रिया पर आघात नहीं है?
मृतक परिवार और समाजजन ने स्पष्ट कहा है कि वे न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रखेंगे। आने वाले दिनों में यह मामला जनआंदोलन और राजनीतिक विवाद का बड़ा मुद्दा बन सकता है।


