अभिनेता अनुपम खैर ने बताया कि 1975 की इमरजेंसी का अनुभव उन्हें जयप्रकाश नारायण का किरदार निभाने में कैसे मददगार रहा। जानिए कंगना रनौत की तैयारी और 12 सितंबर को ज़ी सिनेमा पर फिल्म देखने के लिए विवरण।
“इमरजेंसी के समय का माहौल मैंने अपनी आँखों से देखा है”: अनुपम खैर
1975 में जब भारत में इमरजेंसी लागू हुई थी, तब अनुपम खैर नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में छात्र थे। उन्होंने कहा, “मैं उस समय एनएसडी में था, जब इमरजेंसी लगाई गई। माहौल बेहद तनावपूर्ण था, हर तरफ डर और अनिश्चितता का माहौल था। मैंने वह सब अपनी आँखों से देखा है। इस अनुभव ने मुझे जयप्रकाश नारायण के किरदार की पीड़ा और संघर्ष को सहज रूप से समझने में मदद की।”
अनुपम खैर ने कंगना रनौत के निर्देशन और तैयारी की भी सराहना की। उन्होंने कहा, “कंगना ने सेट पर सभी कलाकारों के लिए पूरा होमवर्क किया था। उन्होंने हमें हर किरदार से संबंधित जानकारी और संदर्भ उपलब्ध करवाए, जिससे मेरा काम केवल अभिनय पर केंद्रित हो गया। एक्टर और निर्देशक दोनों के रूप में उनका दृष्टिकोण सराहनीय है।”
अब फिल्म “इमरजेंसी” का वर्ल्ड टेलीविज़न प्रीमियर ज़ी सिनेमा पर 12 सितंबर, रात 8 बजे होने जा रहा है। अनुपम खैर ने कहा, “टेलीविज़न की पहुँच बहुत बड़ी है। हर कोई थिएटर तक नहीं जा पाता, लेकिन ज़ी सिनेमा के ज़रिए देशभर के परिवार इस ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कहानी को अपने घरों में देख सकेंगे और इस पर चर्चा कर सकेंगे। मैं सभी दर्शकों से आग्रह करता हूँ कि इसे अपने परिवार के साथ देखें।”
फिल्म की कहानी, 1975 की इमरजेंसी की सच्ची घटनाओं पर आधारित है और आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। यह एक भावपूर्ण और प्रेरक फिल्म है, जो दर्शकों को उस दौर की समझ और संदेश तक जोड़ती है।
