MP RERA Chairman AP Srivastava Gets Relief: Supreme Court Closes Case, Will Continue Till March 2026
Bhopal News (MP RERA Update): मध्य प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (MP RERA) के चेयरमैन एपी श्रीवास्तव (AP Shrivastava) को बड़ी राहत मिली है। लगभग एक साल से चल रहे विवाद में मप्र हाईकोर्ट (MP High Court) और फिर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने उनके खिलाफ शुरू हुई जांच की प्रक्रिया को खारिज कर दिया है। इसका सीधा मतलब है कि श्रीवास्तव अब अपना कार्यकाल 31 मार्च 2026 तक पूरा करेंगे।
मामला क्या था?
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अगस्त 2024 में कुछ बिल्डरों और संगठनों ने RERA Chairman AP Shrivastava के खिलाफ पद के दुरुपयोग और भर्ती से जुड़ी शिकायतें की थीं।
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केस ईओडब्ल्यू (EOW Bhopal) और अन्य जांच एजेंसियों को भेजा गया।
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हाईकोर्ट ने जांच नोटिस जारी किया था, लेकिन श्रीवास्तव ने सुप्रीम कोर्ट में जाकर दलील दी कि नोटिस प्रक्रिया procedural lapses से जारी हुआ।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने खुद बताया कि चीफ जस्टिस के आदेश पर जांच नोटिस वापस ले लिया गया है।
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इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी साफ कर दिया कि इस मामले में कोई नई जांच नहीं होगी और पूरा केस बंद कर दिया गया।
आरोप क्या थे?
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पद दुरुपयोग का आरोप – शिकायतकर्ताओं का कहना था कि आकृति बिल्डर्स (Akriti Group) से पहले निजी समझौता करने के बावजूद चेयरमैन ने खुद ही उस बिल्डर के खिलाफ मामलों की सुनवाई जारी रखी।
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नियुक्ति और भर्ती में अनियमितताएँ – प्रभाष जेटली और अन्य एक्टिविस्ट्स का आरोप था कि RERA में बिना मंजूरी के सीधे भर्ती की गई, और 65 वर्ष से अधिक उम्र वालों की नियुक्ति की गई।
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रियल एस्टेट सेक्टर को लेकर बिल्डरों की नाराजगी – CREDAI और अन्य संगठनों ने आरोप लगाया कि RERA जरूरत से ज्यादा समय लेकर प्रोजेक्ट क्लीयरेंस रोकता है, जिससे देरी और नुकसान होता है।

आकृति बिल्डर्स केस (Akriti Group Case)
भोपाल के बहुचर्चित आकृति ग्रुप (Akriti Builders/AG8 Group) पर कड़े फैसलों के कारण भी श्रीवास्तव विवादों में रहे।
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चेयरमैन रहते हुए उन्होंने आकृति के कई प्रोजेक्ट रद्द कर दिए।
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आरोप यह लगा कि खुद आकृति गार्डन प्रोजेक्ट में उनका व्यक्तिगत समझौता था, इसलिए उन्हें सुनवाई से अलग होना चाहिए था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
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रेरा के एक अन्य सदस्य ने इसी कारण खुद को सुनवाई से अलग कर लिया था।
कानूनी स्थिति
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अभी तक EOW में सिर्फ Preliminary Enquiry (PE) दर्ज है, FIR नहीं।
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अगर भविष्य में आरोप साबित होते हैं, तभी FIR और चार्जशीट दाखिल होगी।
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RERA Act की धारा 26 के तहत चेयरमैन को हटाने का अधिकार सिर्फ मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के पास है।
अब आगे क्या?
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मामला पूरी तरह बंद हो गया है।
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AP Srivastava का कार्यकाल 1 अप्रैल 2021 से शुरू हुआ था।
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कानूनी नियम के अनुसार उनका कार्यकाल 5 साल या अधिकतम 65 वर्ष की आयु तक रहेगा।
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यानी अब वे 31 मार्च 2026 तक RERA Chairman बने रहेंगे।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश RERA चेयरमैन एपी श्रीवास्तव के खिलाफ विवाद और जांच की प्रक्रिया अब समाप्त हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल उन्हें कानूनी राहत देता है, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में भी एक अहम संकेत है कि बिल्डरों और नियामकों के बीच टकराव फिलहाल शांत हो गया है।
