उड़ता भोपाल: राजधानी बनी ड्रग्स माफियाओं का गढ़, दिल्ली-हरियाणा तक फैला नशे का जाल
कभी झीलों की नगरी कहलाने वाला भोपाल अब “उड़ता भोपाल” बन गया है। ड्रग्स फैक्ट्रियों से नशे का जाल दिल्ली, हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्र तक फैला।कभी झीलों-झरनों और हरियाली के लिए जानी जाने वाली मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल अब “उड़ता भोपाल” नाम से सुर्खियों में है। यहां ड्रग्स माफियाओं ने गहरी जड़ें जमा ली हैं। भोपाल से नशे का कारोबार सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं, बल्कि दिल्ली, हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्र तक फैल चुका है।
बड़े ड्रग्स फैक्ट्री पकड़े गए
पिछले एक साल में भोपाल से दो बड़ी ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ –
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कटारा हिल्स फैक्ट्री (अक्टूबर 2024): गुजरात ATS और NCB ने छापा मारकर लगभग 900 किलो एमडी ड्रग बरामद की, जिसकी कीमत करीब 1,814 करोड़ रुपये थी।
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जगदीशपुर फैक्ट्री (इस्लामनगर, बैरसिया रोड): यहां DRI की टीम ने करीब 61 किलो ड्रग्स जब्त की, जिसकी कीमत लगभग 92 करोड़ रुपये आंकी गई। पेचीदा बात ये कि यह फैक्ट्री थाने से केवल 1 किलोमीटर दूर थी, लेकिन पुलिस को भनक तक नहीं लगी।
क्यों बन रहा है भोपाल नशे का हब?
- भोपाल की भौगोलिक स्थिति तस्करों के लिए बिल्कुल मुफीद है।
- यहां से राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक सीधी कनेक्टिविटी है।
- चेक पोस्ट की कमी और पुलिस की ढीली पकड़ से माफिया आसानी से खेप पहुंचा देता है।
- भोपाल के सुनसान इलाके फैक्ट्रियों के लिए सुरक्षित ठिकाने बन रहे हैं।
- यहां बनने वाला माल ज्यादातर दूसरे राज्यों में भेजा जाता है, ताकि स्थानीय स्तर पर कम खपत दिखे और पुलिस पकड़ न पाए।
नशे से आगे का गंदा खेल
भोपाल में ड्रग्स का खेल सिर्फ तस्करी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें युवाओं का शोषण भी जुड़ा हुआ है।
- शहर में डीजे पार्टियों के जरिए युवाओं को नशे की लत लगाई जाती थी।
- ऐसी पार्टियों में युवतियों के नशे में वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया जाता था।
- भोपाल क्राइम ब्रांच ने इस गिरोह से जुड़े यासीन अहमद और शाहवर अहमद समेत 4 आरोपियों को पकड़ा।
- उनके मोबाइल से करीब 30 से ज्यादा लड़कियों के आपत्तिजनक वीडियो मिले।
- जांच में शाहवर के दुबई कनेक्शन भी सामने आए।
“उड़ता भोपाल” अब एक खतरनाक हकीकत है। शहर जो कभी “झीलों की नगरी” कहलाता था, आज ड्रग्स की फैक्ट्रियों, नशे के कारोबार और माफियाओं के गढ़ में तब्दील हो रहा है। यह सिर्फ समाज नहीं, बल्कि भोपाल के युवाओं और भविष्य पर सीधा खतरा है।
