Yogi Adityanath से टोक्यो में भावपूर्ण भेंट, जैन मंत्रों की गूंज
नागदा – जापान के टोक्यो यामानाशी में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के आधिकारिक दौरे के दौरान एक अत्यंत भावपूर्ण और आध्यात्मिक क्षण देखने को मिला। इस अवसर पर राष्ट्रसंत, युगप्रभावक, पुण्यसम्राट गुरुदेव श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी महाराजा की परम भक्त तुलसी बहन ने मुख्यमंत्री से आत्मीय भेंट की, जिससे कार्यक्रम को विशेष आध्यात्मिक गरिमा मिली।
तुलसी बहन का आध्यात्मिक मार्ग
तुलसी बहन, जिनका जापानी मूल नाम ‘चूरूसी’ है, पहली बार 2005 में भारत के राजस्थान पर्यटन के दौरान गुरुदेव श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी महाराजा के दर्शन और उनके उपदेशों से अत्यंत प्रभावित हुईं। इसके बाद वर्ष 2006 में उन्होंने पुनः भारत आकर गुरुदेव की आज्ञा लेकर जैन साधना मार्ग पर अग्रसर होने का निर्णय लिया। उनके सतत प्रयासों और गुरुदेव के मार्गदर्शन से उन्हें “तुलसी” नाम प्रदान किया गया।
वर्तमान में तुलसी बहन जापान के नागानोकेन क्षेत्र में निवास कर रही हैं। वे जैन धर्म, गुरु परंपरा और पुण्यसम्राट गुरुदेव के उपदेशों का प्रचार-प्रसार कर रही हैं। उनके प्रयासों से जापान में कई परिवार भारतीय अध्यात्म और जैन दर्शन से जुड़ रहे हैं, शाकाहारी जीवन अपनाकर अहिंसा के मार्ग पर अग्रसर हुए हैं और सात्विक जीवन शैली को अपने जीवन में शामिल कर रहे हैं।
जैन धर्म और अहिंसा का प्रसार
अखिल भारतीय श्री राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी ब्रजेश बोहरा ने बताया कि तुलसी बहन के सतत प्रयासों और गुरुदेव के आशीर्वाद से जापान में हजारों लोग शाकाहारी जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित हुए हैं। कई परिवार मांसाहार का त्याग कर सात्विक जीवन अपनाने लगे हैं। यह प्रयास केवल भोजन की सीमा तक सीमित नहीं हैं; बल्कि जैन धर्म के मूल सिद्धांत—अहिंसा, संयम और आत्म-शुद्धि—को जीवन में उतारने की दिशा में भी यह कदम है।
कार्यक्रम का भावपूर्ण क्षण
कार्यक्रम का सबसे रोमांचक और भावपूर्ण क्षण तब आया जब तुलसी बहन की बड़ी बहन के सुपुत्र ‘नेमिश’—जिन्हें 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ के नाम पर रखा गया है—ने मुख्यमंत्री के समक्ष शुद्ध हिंदी में जैन श्लोक का सस्वर उच्चारण किया। विदेशी भूमि पर संस्कारित स्वर में गूंजता जैन मंत्र सुनकर पूरा सभागार भावविभोर हो गया। यह न केवल जैन संस्कृति की गहराई का परिचायक था, बल्कि भारतीय संस्कृति और भाषा के वैश्विक प्रभाव का भी प्रतीक बना।
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath को भेंट
तुलसी बहन ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री को श्रद्धापूर्वक महावीर स्वामी की सुंदर प्रतिमा और पुण्यसम्राट गुरुदेव का चित्र भेंट किया। मुख्यमंत्री ने इस भेंट को आदरपूर्वक स्वीकार किया। इस दौरान उनका तुलसी बहन के साथ संवाद शुद्ध हिंदी में हुआ, जो भारतीय संस्कृति के वैश्विक स्तर पर प्रभाव और संवाद का जीवंत उदाहरण बना।
गुरु परंपरा का अंतरराष्ट्रीय प्रभाव
टोक्यो की धरती पर गुरु परंपरा की यह उपस्थिति जैन धर्म के अंतरराष्ट्रीय विस्तार और पुण्यसम्राट गुरुदेव की दिव्य महिमा का प्रेरक प्रतीक सिद्ध हुई। कार्यक्रम ने यह स्पष्ट किया कि भारतीय संस्कृति, जैन धर्म और गुरु परंपरा का वैश्विक स्तर पर सकारात्मक प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
तुलसी बहन के सतत प्रयासों से जापान में कई परिवारों ने अहिंसात्मक जीवन अपनाया, जैन धर्म के उपदेशों का पालन किया और भारतीय आध्यात्मिक मूल्यों से प्रेरित होकर सात्विक जीवन की ओर अग्रसर हुए। इस अवसर ने यह संदेश भी दिया कि धार्मिक और आध्यात्मिक शिक्षा के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक संबंध और मानवता के मूल्यों को बढ़ावा दिया जा सकता है।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के साथ तुलसी बहन का यह भावपूर्ण मिलन न केवल आध्यात्मिक था, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और जैन धर्म के वैश्विक प्रसार का प्रतीक भी बना। विदेशी भूमि पर भारतीय भाषा, जैन मंत्र और गुरु परंपरा की उपस्थिति ने यह प्रमाणित किया कि भारतीय संस्कृति की गहनता और मूल्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभावी हैं। इस प्रकार, टोक्यो में यह कार्यक्रम जैन धर्म और पुण्यसम्राट गुरुदेव के उपदेशों के प्रचार-प्रसार का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया।

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