इंदौर, मध्यप्रदेश – मध्यप्रदेश के बावनगजा में 17 जनवरी 2026 को एक ऐतिहासिक और भव्य धार्मिक आयोजन होने जा रहा है। विश्व प्रसिद्ध श्री सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी ट्रस्ट कमेटी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में विश्व की सबसे प्राचीन और विशाल जिन प्रतिमा का Mahamastakabhishek संपन्न होगा। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, बल्कि श्रद्धालुओं और समाज के लिए आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक अनुभव का भी अवसर प्रस्तुत करेगा।
कार्यक्रम के मुख्य आयोजक और धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि यह आयोजन श्रंमण संस्कृति के महामहिम पट्टाचार्य परम पूज्य आचार्य भगवान विशुद्ध सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से आयोजित किया जा रहा है। इस आयोजन में उनके परम शिष्य और ओजस्वी वक्ता प्रसन्न मनः प्रणुत सागर जी महाराज का पावन सान्निध्य रहेगा, जिससे इस धार्मिक महोत्सव की आध्यात्मिक गरिमा और भी बढ़ जाएगी।
विश्व की सबसे प्राचीन जिन प्रतिमा का Mahamastakabhishek
बावनगजा में स्थित यह जिन प्रतिमा न केवल भारत में बल्कि विश्वभर में अपनी प्राचीनता और विशालकाय संरचना के लिए प्रसिद्ध है। ट्रस्ट के अध्यक्ष विनोद डोसी ने बताया कि इस महामस्तकाभिषेक का आयोजन श्रद्धालुओं के लिए एक ऐसा अवसर है, जहाँ वे प्रत्यक्ष रूप से भगवान आदिनाथ के पवित्र अभिषेक में भाग लेकर अपने जीवन को पुण्य और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह आयोजन श्रद्धा, भक्ति, त्याग और पुण्य का अद्वितीय महासंगम होगा।
महामस्तकाभिषेक में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति की उम्मीद है। प्रतिमा के मस्तक पर किए जाने वाले अभिषेक में पारंपरिक जैन विधियों के अनुसार जल प्रयोग किया जाएगा। इस अवसर पर विशेष मंत्रोच्चारण और धार्मिक गीतों का आयोजन भी किया जाएगा, जो उपस्थित श्रद्धालुओं के मन और आत्मा को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करेगा।
श्रद्धालुओं के लिए सुलभ व्यवस्थाएं
ट्रस्ट कमेटी ने श्रद्धालुओं की सुविधा और आयोजन की सुचारू व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। आयोजन स्थल पर भोजन और जल वितरण की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा, बच्चों और बुजुर्गों के लिए अलग से आरामदायक स्थान बनाए गए हैं। इसके साथ ही, ट्रस्ट ने नगर और आसपास के इलाकों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवागमन और सुरक्षा व्यवस्था को भी सुनिश्चित किया है।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
Mahamastakabhishek केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह Jain धर्म और श्रंमण संस्कृति के महत्व को भी उजागर करता है। जैन धर्म में जिन प्रतिमा का अभिषेक करना अत्यंत पुण्य का कार्य माना जाता है। यह अनुष्ठान श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति प्रदान करने के साथ-साथ धर्म और संस्कृति की समझ को भी गहरा करता है।
विशेष रूप से बच्चों और युवाओं के लिए यह आयोजन शिक्षा का एक माध्यम भी है। युवा इस कार्यक्रम के माध्यम से Jain धर्म के मूल सिद्धांतों जैसे अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और तप के महत्व को समझते हैं। इसके अलावा, ऐसे आयोजनों के जरिए समाज में भाईचारा, एकता और नैतिक मूल्यों का प्रचार भी होता है।
प्रसिद्ध संतों और महामंडलेश्वरों की उपस्थिति
इस भव्य आयोजन में कई प्रतिष्ठित Jain संतों और महामंडलेश्वरों की उपस्थिति होगी। पट्टाचार्य परम पूज्य आचार्य भगवान विशुद्ध सागर जी महाराज के आशीर्वाद में कार्यक्रम संपन्न होगा। उनके शिष्य, ओजस्वी वक्ता प्रसन्न मनः प्रणुत सागर जी महाराज, श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करेंगे और अभिषेक की धार्मिक विधियों का संचालन करेंगे।
इसके अलावा, आयोजन में अन्य वरिष्ठ संत महात्मा भी भाग लेंगे, जिनकी उपस्थिति आयोजन की गरिमा को और बढ़ाएगी। संत महात्मा उपस्थित श्रद्धालुओं को उपदेश देंगे और उनके जीवन में धर्म के महत्व के बारे में मार्गदर्शन करेंगे।
समाज और स्थानीय समुदाय की भागीदारी
वनगजा के स्थानीय समाज और विभिन्न संघों ने इस आयोजन में सक्रिय भागीदारी निभाई है। ट्रस्ट कमेटी ने स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से आयोजन स्थल की सजावट, भोजन व्यवस्था और कार्यक्रम संचालन की जिम्मेदारी सुनिश्चित की है।
स्थानीय समाज प्रचारक और आयोजक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह लोगों को एक साथ जोड़ने, एकता और सहिष्णुता की भावना को बढ़ावा देने और धार्मिक संस्कृति को संरक्षित करने का अवसर प्रदान करता है।
आध्यात्मिक अनुभव और श्रद्धा का महत्व
महामस्तकाभिषेक का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करना है। अभिषेक के दौरान प्रतिमा पर किए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठान, मंत्रोच्चारण और भजन-कीर्तन श्रद्धालुओं के मन में भक्ति और श्रद्धा की भावना को उत्पन्न करेंगे।
ट्रस्ट अध्यक्ष विनोद डोसी ने कहा कि श्रद्धालु इस अवसर का लाभ उठाकर अपने जीवन में पुण्य, संयम और भक्ति की भावना को स्थापित कर सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सपरिवार इस भव्य आयोजन में पधारें और धर्म और संस्कृति के महत्व को अपने जीवन में अपनाएं।
आयोजन की तैयारियां जोरों पर
17 जनवरी 2026 को होने वाले महामस्तकाभिषेक के लिए ट्रस्ट कमेटी द्वारा व्यापक तैयारियां की गई हैं। आयोजन स्थल पर साफ-सफाई, सजावट, आवागमन व्यवस्था, भोजन वितरण और सुरक्षा व्यवस्थाओं का पूरा ध्यान रखा गया है। इसके अलावा, भजन-कीर्तन और मंत्रोच्चारण के लिए मंच और ध्वनि प्रणाली का प्रबंध भी किया गया है।
समाप्ति और शुभकामनाएं
इस भव्य धार्मिक आयोजन में भाग लेने वाले श्रद्धालु अपने जीवन को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध कर सकते हैं। ट्रस्ट कमेटी और आयोजक सभी से अपील कर रहे हैं कि वे इस पुण्य अवसर में शामिल होकर भगवान आदिनाथ के महामस्तकाभिषेक में भाग लें और अपने जीवन में भक्ति, संयम और धार्मिक मूल्य स्थापित करें।
राजेश जैन दद्दू ने कहा, “यह आयोजन हमारे समाज और धर्म के लिए गर्व का विषय है। हम सभी श्रद्धालुओं का स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि यह Mahamastakabhishek सभी के लिए आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव का अद्भुत अवसर साबित होगा।”

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