मध्य प्रदेश में बेमौसम बारिश से फसलों को भारी नुकसान, किसानों की चिंताएं बढ़ीं
मध्य प्रदेश में इस बार मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राज्य के कई हिस्सों में बेमौसम बारिश और चक्रवाती हवाओं के कारण खरीफ और रबी की फसलों को गंभीर नुकसान हुआ है। मालवा, निमाड़, ग्वालियर-चंबल और विंध्य-महाकोशल क्षेत्रों में सोयाबीन, धान, मक्का, उड़द, सरसों, गेहूं, मटर, तिल और अन्य फसलों को नुकसान की खबरें मिल रही हैं।
मालवा-निमाड़ में फसलों को नुकसान
मालवा और निमाड़ क्षेत्र में लगातार बारिश से सोयाबीन और मक्का की फसल प्रभावित हुई है। किसानों ने बताया कि खेतों में खड़ी सोयाबीन की बालियां काली पड़ने लगी हैं, जबकि कटकर रखी धान और मक्का भीग जाने से उनकी गुणवत्ता खराब हो रही है। खंडवा जिले में बारिश ने पहले सोयाबीन की फसल को प्रभावित किया और अब पानी से भीगी फसल में मक्का के अंकुरण की समस्या बढ़ गई है। यहाँ अनुमानित नुकसान लगभग 50 से 60 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
महाकोशल-विंध्य में बारिश का असर
महाकोशल और विंध्य क्षेत्र में भी किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। डिंडौरी जिले में सोयाबीन की फसल विशेष रूप से प्रभावित हुई है। धान की फसल जो कटकर रखी गई थी, वह भीग गई है, जिससे उसमें अंकुरण होने की संभावना बनी हुई है। उड़द और अन्य दालों की फसल पहले ही खराब हो चुकी थी। अनूपपुर में पानी भरने से खेतों की स्थिति खराब हो गई है। हालांकि, कृषि विभाग के अनुसार 15 प्रतिशत से कम नुकसान वाले खेतों को नुकसान के दायरे में नहीं रखा जाएगा और जल्द ही फसल सर्वे की प्रक्रिया शुरू होगी।
ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में रबी फसलों को खतरा
ग्वालियर-चंबल अंचल में खरीफ के मौसम में हुई बारिश से पहले ही फसलें बर्बाद हो चुकी थीं। अब रबी फसलों पर तीन दिन की लगातार बारिश का असर पड़ा है। यहाँ खेतों में खड़ी धान, बाजरा, मटर, तिल, ज्वार और सरसों की फसलें गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं। ग्वालियर, दतिया और श्योपुर जिलों में धान की फसल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। ग्वालियर जिले में लगभग 1.1 लाख हेक्टेयर में धान की फसल थी, जिसमें अब तक केवल 15 प्रतिशत ही कट सकी है।
बारिश और तेज हवा के कारण धान की खड़ी फसल जमीन पर गिर रही है। इससे बालियों के दाने काले पड़ने और अंकुरण की संभावना बढ़ रही है। बाजरे की फसल में भी नुकसान की आशंका है। मुरैना जिले में बाजरे की फसल का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा प्रभावित हो चुका है। दतिया जिले के करीब 500 गांवों में धान की फसल खेतों में बिछ गई है, जबकि श्योपुर में यह नुकसान 30 से 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
रबी फसलों पर अतिरिक्त खतरा
सरसों की फसल इस बारिश से पूरी तरह नष्ट हो गई है। हाल ही में बोई गई सरसों खेतों में पानी भरने से खराब हो गई है। आलू, मटर, चना और मसूर जैसी रबी फसलों की गुणवत्ता भी बारिश और जलभराव से प्रभावित हुई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस बारिश से मटर के फूल और फलियों दोनों पर नकारात्मक असर पड़ेगा। इससे उपज और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होंगी।
चक्रवात मोंथा का प्रभाव
मध्य प्रदेश में बेमौसम बारिश का एक बड़ा कारण चक्रवाती तूफान मोंथा भी है। रतलाम जिले में पांचवें दिन भी मावठे का असर बना हुआ है, जिससे मटर और अन्य फसलों को नुकसान हो रहा है। जलजमाव और अत्यधिक नमी के कारण कई किसान रबी की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। बुरहानपुर जिले की खकनार तहसील में 20 से ज्यादा गांवों में मक्का, सोयाबीन और कपास की फसल भी भीग चुकी है। किसानों को फसल सुखाने का मौका नहीं मिल रहा है, जिससे नुकसान की स्थिति और गंभीर होती जा रही है।
अन्य प्रभावित जिले
आलीराजपुर में मक्का, सोयाबीन और उड़द की फसल को नुकसान होने की संभावना जताई गई है। उज्जैन जिले के नागदा, बड़नगर और खाचरौद में खेतों में पानी भर गया है। धार जिले के बदनावर क्षेत्र में चार घंटे में 76 मिमी बारिश हुई, जिससे जलभराव की स्थिति बनी। तेज हवा के कारण पपीता के पौधे टूट गए।
कृषि विशेषज्ञों की राय
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र सिंह कुशवाह का कहना है कि बारिश और तेज हवा के साथ-साथ फसल नुकसान और बढ़ सकता है। धान की चमक कम होगी और गिरने की वजह से उत्पादन घट जाएगा। मटर के फूल और फलियां दोनों प्रभावित होंगे। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे खेतों में फंसे पानी को निकालने और फसलों को जल्दी सुखाने का प्रयास करें।
राज्य सरकार और कृषि विभाग की तैयारी
कृषि विभाग ने प्रभावित जिलों में फसल सर्वे शुरू करने की योजना बनाई है। इससे किसानों को वास्तविक नुकसान का आंकड़ा मिलेगा और बीमा तथा राहत योजनाओं के लिए आधार तैयार होगा। विभाग का कहना है कि जिन खेतों में 15 प्रतिशत से कम नुकसान हुआ है, उन्हें नुकसान के दायरे में नहीं रखा जाएगा।
भविष्य की संभावना
मौसम विभाग (IMD) ने मध्य प्रदेश के कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन संभागों में आज झमाझम बारिश की संभावना है। किसान अपनी फसल और खेतों की सुरक्षा के लिए सतर्क रहें।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश में इस बार की बेमौसम बारिश और चक्रवात मोंथा के प्रभाव से किसानों की फसलें गंभीर संकट में हैं। सोयाबीन, धान, मक्का, उड़द, सरसों, गेहूं, मटर और तिल की फसलें अब तक लगभग 50 से 70 प्रतिशत तक प्रभावित हो चुकी हैं। किसानों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है, और राज्य सरकार तथा कृषि विभाग द्वारा फसल सर्वे और राहत योजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह है कि किसान जलभराव से बचाव, फसल सुखाने और खेतों की उचित देखभाल के उपाय अपनाएं ताकि नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।

