उज्जैन में नहीं हिली ‘खड़े हनुमान’ की प्रतिमा, शिफ्टिंग को लेकर बढ़ा विवाद; संतों और हिंदू संगठनों ने जताया विरोध
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत हो रहा सड़क चौड़ीकरण, कई प्रयासों के बाद भी मूल स्थान पर अडिग रही प्राचीन प्रतिमा
उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को स्थानांतरित करने का मामला लगातार चर्चा और विवाद का विषय बना हुआ है। सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों के अंतर्गत शहर में किए जा रहे सड़क चौड़ीकरण के लिए मंदिर की प्रतिमा को दूसरे स्थान पर सुरक्षित रूप से स्थापित करने की योजना बनाई गई थी। प्रशासन और नगर निगम की टीम ने आधुनिक मशीनों तथा तकनीकी संसाधनों की सहायता से प्रतिमा को हटाने के कई प्रयास किए, लेकिन प्रतिमा अपने मूल स्थान से नहीं हिली।
प्रतिमा को स्थानांतरित करने के प्रयासों की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर स्थल पर पहुंचने लगे। संतों, पुजारियों और हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने प्रतिमा की जबरन शिफ्टिंग का विरोध करते हुए प्रशासन से धार्मिक भावनाओं और प्राचीन विरासत का सम्मान करने की मांग की है।
सड़क चौड़ीकरण की जद में आया प्राचीन मंदिर
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 और भगवान महाकाल की सवारी के मार्ग को ध्यान में रखते हुए कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण का काम प्रस्तावित है। इसी मार्ग के सती गेट और बड़ा सराफा क्षेत्र में स्थित खड़े हनुमान मंदिर भी परियोजना की जद में आया है।
बताया जा रहा है कि प्रशासन ने यातायात व्यवस्था सुधारने और सड़क को अधिक चौड़ा करने के उद्देश्य से मंदिर तथा प्रतिमा को टंकी चौक के पास एक नए स्थान पर स्थापित करने की योजना बनाई थी। मंदिर के आसपास का निर्माण हटाए जाने के बाद प्रतिमा को सुरक्षित रूप से निकालने का प्रयास किया गया।
हालांकि, भारी मशीनों और तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता लेने के बावजूद प्रतिमा को मूल स्थान से अलग नहीं किया जा सका। प्रतिमा करीब आठ फीट ऊंची और लगभग 170 वर्ष पुरानी बताई जा रही है।
कई प्रयासों के बाद भी नहीं मिली सफलता
नगर निगम की टीम ने प्रतिमा को किसी प्रकार का नुकसान पहुंचाए बिना हटाने का प्रयास किया। इसके लिए प्रतिमा के आसपास की जमीन और आधार को सावधानीपूर्वक खोदा गया। भारी मशीनों तथा उठाने वाले उपकरणों की मदद भी ली गई, लेकिन प्रयास सफल नहीं हुआ।
लगातार कई दिनों तक प्रतिमा को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया चलने के बावजूद वह अपने स्थान से नहीं हिली। इसके बाद तकनीकी अधिकारियों और विशेषज्ञों से सलाह लेने की बात सामने आई। प्रतिमा के आधार और उसकी प्राचीन स्थापना तकनीक को समझने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रतिमा की धार्मिक गरिमा को बनाए रखते हुए सड़क चौड़ीकरण परियोजना को आगे बढ़ाना है। किसी प्रकार की क्षति होने से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो सकती हैं, इसलिए पूरी प्रक्रिया में अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता बताई जा रही है।
श्रद्धालु मान रहे दैवीय संकेत
बार-बार किए गए प्रयासों के बावजूद प्रतिमा के नहीं हिलने की घटना को कई श्रद्धालु दैवीय संकेत और हनुमान जी का चमत्कार मान रहे हैं। इसकी जानकारी सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद बड़ी संख्या में लोग खड़े हनुमान जी के दर्शन करने पहुंच रहे हैं।
श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर का बाहरी ढांचा हटाए जाने के बावजूद प्रतिमा का अडिग रहना आस्था का विषय है। भक्तों ने मंदिर स्थल पर पूजा-अर्चना, हनुमान चालीसा और भजन-कीर्तन भी किया। हालांकि, प्रतिमा के नहीं हिलने के पीछे तकनीकी कारणों की आधिकारिक जांच अभी पूरी नहीं हुई है।
धार्मिक मान्यता और तकनीकी पहलू दोनों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन अब विशेषज्ञों की सहायता से आगे का रास्ता तलाश रहा है। प्रतिमा किस प्रकार स्थापित की गई थी और उसका आधार जमीन में कितनी गहराई तक है, यह जांच का विषय है।
संतों ने जबरन स्थानांतरण का किया विरोध
प्रतिमा की शिफ्टिंग को लेकर संत समाज और हिंदू संगठनों ने विरोध दर्ज कराया है। उनका कहना है कि प्राचीन धार्मिक स्थलों से जुड़ा कोई भी फैसला संतों, मंदिर प्रबंधन और स्थानीय श्रद्धालुओं की सहमति के बिना नहीं लिया जाना चाहिए।
विरोध कर रहे लोगों ने मांग की कि प्रतिमा को मूल स्थान पर ही सुरक्षित रखते हुए सड़क चौड़ीकरण की योजना में बदलाव किया जाए। उनका कहना है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन इसके लिए लोगों की धार्मिक आस्था और प्राचीन मंदिरों की पहचान की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
हिंदू संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों ने प्रशासन से प्रतिमा को हटाने की प्रक्रिया तत्काल रोकने और सभी संबंधित पक्षों के साथ बैठक कर सर्वमान्य समाधान निकालने की मांग की। इससे पहले भी मंदिर स्थानांतरण के फैसले को लेकर विरोध दर्ज कराया गया था, जिसके बाद प्रशासन को अपनी योजना पर पुनर्विचार करना पड़ा था।
जूना अखाड़े से जुड़े संत भी पहुंचे
मामले की जानकारी मिलने के बाद जूना अखाड़े सहित विभिन्न धार्मिक संस्थाओं से जुड़े संत भी मंदिर स्थल पर पहुंचे। संतों ने प्रतिमा के दर्शन करने के साथ प्रशासन की प्रस्तावित कार्रवाई पर नाराजगी व्यक्त की।
संतों का कहना है कि उज्जैन की पहचान केवल आधुनिक विकास परियोजनाओं से नहीं, बल्कि यहां स्थित प्राचीन मंदिरों और धार्मिक परंपराओं से भी है। उन्होंने मांग की कि प्रतिमा के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का अध्ययन कराया जाए तथा किसी भी तरह की कार्रवाई से पहले विशेषज्ञों और धर्माचार्यों से परामर्श लिया जाए।
ऐतिहासिक महत्व की जांच की मांग
खड़े हनुमान मंदिर और प्रतिमा की प्राचीनता को देखते हुए इसके ऐतिहासिक तथा पुरातात्विक महत्व की जांच कराने की मांग भी उठ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रतिमा वास्तव में लगभग 170 वर्ष पुरानी है, तो उसके संरक्षण के लिए विशेष योजना बननी चाहिए।
विशेषज्ञों की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि प्रतिमा की स्थापना किस तकनीक से की गई, उसका आधार किस सामग्री से बना है और उसे बिना क्षति पहुंचाए स्थानांतरित करना संभव है या नहीं। प्रतिमा को हटाने के प्रयासों के कारण अब यह मामला केवल सड़क चौड़ीकरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आस्था और विरासत के संरक्षण से भी जुड़ गया है।
प्रशासन के सामने विकास और आस्था में संतुलन की चुनौती
सिंहस्थ 2028 के दौरान उज्जैन में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए शहर की सड़कों, यातायात व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य प्रमुख मार्गों को चौड़ा कर भीड़ और यातायात के दबाव को कम करना है।
दूसरी ओर खड़े हनुमान की प्रतिमा स्थानीय श्रद्धालुओं की गहरी आस्था से जुड़ी है। ऐसे में प्रशासन को विकास परियोजना और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन बनाना होगा। प्रतिमा को जबरन हटाने के बजाय तकनीकी, धार्मिक और सामाजिक पक्षों से सहमति बनाकर समाधान निकालने की मांग तेज हो गई है।
फिलहाल प्रतिमा अपने मूल स्थान पर स्थित है और सड़क चौड़ीकरण का संबंधित हिस्सा प्रभावित बताया जा रहा है। प्रशासन के अगले निर्णय पर संत समाज, हिंदू संगठनों और स्थानीय श्रद्धालुओं की नजर बनी हुई है।
