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Ujjain महाकाल मंदिर में ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी पर विशेष भस्म आरती, वैष्णव तिलक और भांग श्रृंगार ने मोहा भक्तों का मन

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Published On: 9 May 2026
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— उज्जैन महाकाल मंदिर में ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी पर विशेष भस्म आरती, वैष्णव तिलक और भांग श्रृंगार के दिव्य दर्शन से भक्त हुए भाव-विभोर

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Ujjain महाकाल मंदिर में ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी पर विशेष भस्म आरती, वैष्णव तिलक और भांग श्रृंगार ने मोहा भक्तों का मन

धार्मिक नगरी Ujjain स्थित विश्व प्रसिद्ध Shri Mahakaleshwar Temple में शनिवार को ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के अवसर पर विशेष भस्म आरती का आयोजन किया गया। सुबह तड़के हुए इस दिव्य आयोजन में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए और बाबा महाकाल के अलौकिक स्वरूप के दर्शन किए। मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा और पूरी धार्मिक नगरी शिवभक्ति में डूबी नजर आई।

देर रात से लगी श्रद्धालुओं की कतार

Ujjain शनिवार की भस्म आरती को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला। देर रात से ही भक्त मंदिर के बाहर कतारों में खड़े हो गए थे। देश के अलग-अलग राज्यों से आए श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन और भस्म आरती में शामिल होने के लिए घंटों इंतजार करते दिखाई दिए।

सुबह करीब 4 बजे मंदिर के पट खोले गए और इसके साथ ही गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना शुरू हुई। मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं ने “हर हर महादेव” और “जय श्री महाकाल” के जयकारों के साथ बाबा का स्वागत किया।

वीरभद्र से अनुमति के बाद शुरू हुई पूजा

परंपरा के अनुसार भस्म आरती से पहले मंदिर के पुजारियों और पंडे-पुजारियों ने वीरभद्र भगवान से अनुमति ली। इसके बाद गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार महाकाल मंदिर में किसी भी विशेष पूजा या आरती से पहले वीरभद्र से आज्ञा लेना आवश्यक माना जाता है।

इसके बाद भगवान महाकाल का विधि-विधान से अभिषेक किया गया। बाबा महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और विभिन्न फलों के रस से किया गया। मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि के बीच यह अनुष्ठान संपन्न हुआ।

भांग श्रृंगार और वैष्णव तिलक बना आकर्षण

इस विशेष भस्म आरती का मुख्य आकर्षण बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार रहा। भगवान महाकाल को विशेष रूप से भांग से सजाया गया, जिसे “भांग श्रृंगार” कहा जाता है। इसके साथ ही शिवलिंग पर वैष्णव तिलक लगाया गया, जिसने श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया।

श्रृंगार के दौरान शिवलिंग पर अन्य शिवलिंगों की आकृतियां भी उभरती दिखाई दीं, जिसे देखकर भक्त भाव-विभोर हो गए। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु इस दिव्य दृश्य को अपने कैमरों और मोबाइल फोन में कैद करते नजर आए।

ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच हुई भस्म आरती

विशेष श्रृंगार के बाद बाबा महाकाल की कपूर आरती की गई और उन्हें नवीन मुकुट धारण कराया गया। इसके पश्चात महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को चिता भस्म अर्पित की गई।

भस्म अर्पण के समय मंदिर परिसर ढोल-नगाड़ों, झांझ-मंजीरों और शंखनाद से गूंज उठा। पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया गया। श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर बाबा महाकाल से सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।

पुजारी ने बताया भस्म आरती का महत्व

Ujjain मंदिर के पुजारी Mahesh Sharma ने बताया कि ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर होने वाली भस्म आरती का विशेष महत्व होता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित करने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।

उन्होंने बताया कि भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि शिवभक्ति और वैराग्य का प्रतीक भी है। यही कारण है कि देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु इस आरती के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।

महाकाल मंदिर की प्रमुख आरतियां

Ujjain मंदिर प्रशासन के अनुसार महाकाल मंदिर में प्रतिदिन कई आरतियां आयोजित की जाती हैं। इनमें सबसे प्रमुख भस्म आरती मानी जाती है।

  • भस्म आरती – सुबह 4 बजे से 6 बजे तक
  • दद्योदक आरती – सुबह 7 बजे से 7:45 बजे तक
  • भोग आरती – सुबह 10 बजे से 10:45 बजे तक
  • संध्या पूजन – शाम 5 बजे से 5:45 बजे तक
  • संध्या आरती – शाम 7 बजे से 7:45 बजे तक
  • शयन आरती – रात 10:30 बजे से 11 बजे तक

मंदिर प्रशासन ने बताया कि आरतियों के समय में किया गया बदलाव शरद पूर्णिमा तक लागू रहेगा।

क्या होती है भस्म आरती?

Ujjain भस्म आरती Shri Mahakaleshwar Temple की सबसे अनोखी और प्रसिद्ध परंपराओं में से एक है। यह आरती प्रतिदिन तड़के सुबह की जाती है, जिसमें भगवान महाकाल को चिता की भस्म अर्पित की जाती है।

मान्यता है कि भगवान शिव श्मशानवासी हैं और भस्म उन्हें अत्यंत प्रिय है। इसी कारण महाकाल मंदिर में यह विशेष परंपरा सदियों से निभाई जा रही है। इस आरती के दर्शन को अत्यंत शुभ माना जाता है और भक्त इसे आध्यात्मिक अनुभव के रूप में देखते हैं।

श्रद्धालुओं में दिखा विशेष उत्साह

शनिवार की विशेष भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम किए गए थे। प्रशासन की ओर से दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की गई थी।

भक्तों का कहना था कि बाबा महाकाल के दर्शन और भस्म आरती का अनुभव उन्हें मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है।

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