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Ujjain : भांग के श्रृंगार और त्रिपुंड से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में गूंजे जयकारे

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Published On: 6 April 2026
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— भांग, त्रिपुंड और चंद्रमा से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में गूंजा ‘जय श्री महाकाल’

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Ujjain : भांग के श्रृंगार और त्रिपुंड से सजे बाबा महाकाल, भस्म आरती में गूंजे जयकारे

भक्तिमय माहौल में हुई भस्म आरती

मध्य प्रदेश के पवित्र शहर Ujjain स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में वैशाख कृष्ण चतुर्थी के अवसर पर सोमवार तड़के भस्म आरती का भव्य आयोजन किया गया। इस दौरान मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। हर ओर “जय श्री महाकाल” के जयघोष सुनाई दे रहे थे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

सुबह 4 बजे खुले मंदिर के पट

Ujjain भस्म आरती के लिए श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर के बाहर कतार में लग गए थे। सुबह करीब 4 बजे जैसे ही मंदिर के पट खुले, श्रद्धालुओं में उत्साह चरम पर पहुंच गया। सभी भक्त बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन के लिए आतुर नजर आए।

भांग, त्रिपुंड और चंद्रमा से हुआ विशेष श्रृंगार

इस विशेष दिन भगवान महाकाल का अनोखा श्रृंगार किया गया। उन्हें भांग से सजाया गया और मस्तक पर त्रिपुंड लगाया गया। साथ ही चंद्रमा और बेलपत्र से भी अलंकृत किया गया। बाबा का यह दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा और दर्शन मात्र से भक्त भाव-विभोर हो उठे।

विधि-विधान से हुआ अभिषेक और पूजन

Ujjain भस्म आरती से पहले मंदिर के पुजारियों द्वारा विधिपूर्वक पूजन किया गया। परंपरा के अनुसार सबसे पहले वीरभद्र जी से अनुमति ली गई। इसके बाद गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया गया।
भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस से किया गया। वैदिक मंत्रों और घंटानाद के बीच “हरि ओम” का उच्चारण करते हुए पूजा संपन्न हुई।

भव्य आरती और भस्म अर्पण की परंपरा

अभिषेक के बाद बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार किया गया और कपूर आरती की गई। इसके पश्चात उन्हें नया मुकुट धारण कराया गया।
महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई, जो इस आरती का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ढोल-नगाड़ों, शंख और झांझ-मंजीरों की ध्वनि के बीच भस्म आरती संपन्न हुई और भक्तों ने जोरदार जयकारे लगाए।

Ujjain भस्म आरती का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती का विशेष महत्व है और इसमें शामिल होने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़, विशेष व्यवस्था

इस अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। भक्त देर रात से कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे।
मंदिर प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे दर्शन प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती रही।

मंदिर की आरतियों का समय

श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन विभिन्न आरतियां निर्धारित समय पर की जाती हैं:

  • भस्म आरती: सुबह 4:00 से 6:00 बजे तक
  • दद्योदक आरती: सुबह 7:00 से 7:45 बजे तक
  • भोग आरती: सुबह 10:00 से 10:45 बजे तक
  • संध्या पूजन: शाम 5:00 से 5:45 बजे तक
  • संध्या आरती: शाम 7:00 से 7:45 बजे तक
  • शयन आरती: रात 10:30 से 11:00 बजे तक

ये समय फिलहाल शरद पूर्णिमा तक लागू रहेंगे।

प्रमुख हस्तियों ने किए दर्शन

इस दिन मंदिर में कई प्रमुख हस्तियां भी बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचीं। प्रसिद्ध गणितज्ञ आनंद कुमार ने पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद लिया।
वहीं अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया भी मंदिर पहुंचे और भगवान महाकाल के दर्शन किए। मंदिर प्रबंधन समिति ने दोनों का स्वागत किया।

आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम

Ujjain वैशाख कृष्ण चतुर्थी के इस पावन अवसर पर बाबा महाकाल के भांग, त्रिपुंड और चंद्रमा से सजे दिव्य स्वरूप ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। भस्म आरती के दौरान गूंजते जयकारों और भक्तों की आस्था ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। यह दिन श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक परंपराओं का अद्भुत संगम बनकर सामने आया।

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