गुरु पूर्णिमा पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश, शासकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय परिसर में हुआ वृक्षारोपण
शिक्षकों ने पौधारोपण कर लोगों को पर्यावरण बचाने के लिए किया प्रेरित
मनोज कुमार पुष्पद की रिपोर्ट
पड़ाना। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर शासकीय एकीकृत कन्या माध्यमिक विद्यालय पड़ाना परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षकों ने पौधारोपण कर समाज में पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने की अपील की।
कार्यक्रम का उद्देश्य नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित करना रहा। शिक्षकों ने कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण को संतुलित रखने में ही सहायक नहीं होते, बल्कि मानव जीवन के लिए आवश्यक शुद्ध वायु, जल संरक्षण और जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विद्यालय परिसरों में किया गया पौधारोपण
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शासकीय एकीकृत कन्या माध्यमिक विद्यालय पड़ाना के साथ-साथ शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पड़ाना एवं अन्य विद्यालय परिसरों में भी वृक्षारोपण किया गया।
इस दौरान फलदार पौधों के साथ-साथ पर्यावरण के लिए उपयोगी बरगद, नीम, पीपल, जामुन सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए।
विद्यालय परिसर में लगाए गए पौधों के संरक्षण और नियमित देखभाल का संकल्प भी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों द्वारा लिया गया।
पर्यावरण प्रेमी शिक्षक का सराहनीय प्रयास
शासकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय पड़ाना के पर्यावरण प्रेमी शिक्षक मोहम्मद तारीक अंसारी द्वारा लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में अब तक सैकड़ों पौधों का रोपण किया है और लोगों को पौधारोपण के लिए लगातार प्रेरित कर रहे हैं।
उनका कहना है कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी सुरक्षा और नियमित देखभाल करना भी प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
शिक्षकों ने लिया हरियाली बढ़ाने का संकल्प
वृक्षारोपण कार्यक्रम के दौरान शिक्षक रामकरण राठौर, मोहम्मद तारीक अंसारी और राजाराम भारतीय ने मिलकर विभिन्न स्थानों पर पौधारोपण किया।
इस अवसर पर शिक्षकों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज पूरे विश्व की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। बढ़ता प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों का असंतुलित उपयोग मानव जीवन के लिए गंभीर चुनौती बन रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता नहीं बढ़ाई गई तो आने वाली पीढ़ियों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक होने की जरूरत
शिक्षक रामकरण राठौर और मोहम्मद तारीक अंसारी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में विश्व जलवायु परिवर्तन की समस्या से गुजर रहा है। इसका प्रभाव धीरे-धीरे जनजीवन पर दिखाई देने लगा है।
उन्होंने कहा कि तापमान में वृद्धि, मौसम में बदलाव और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाएं पर्यावरण असंतुलन का परिणाम हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए प्रकृति संरक्षण के लिए आगे आना होगा।
उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे प्रयासों से भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बना ले, तो धरती को फिर से हरा-भरा बनाया जा सकता है।
प्रत्येक व्यक्ति लगाए कम से कम पांच पौधे
शिक्षकों ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिवर्ष कम से कम पांच वृक्ष लगाने और उनकी सुरक्षा का संकल्प लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पौधारोपण के लिए विशेष अवसरों जैसे—
- जन्मदिन
- विवाह की वर्षगांठ
- धार्मिक पर्व
- सामाजिक कार्यक्रम
को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा जा सकता है।
ऐसे अवसरों पर पौधे लगाकर उनका संरक्षण करना आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर भविष्य तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
पौधों का संरक्षण भी है जरूरी
कार्यक्रम में शिक्षकों ने कहा कि अक्सर लोग पौधे लगाने के बाद उनकी देखभाल नहीं करते, जिसके कारण कई पौधे नष्ट हो जाते हैं। इसलिए पौधारोपण के साथ-साथ पौधों को सुरक्षित रखना और उन्हें बड़ा करना भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने विद्यार्थियों से भी अपील की कि वे अपने घर, स्कूल और आसपास के क्षेत्रों में पौधों की देखभाल करें तथा अपने परिवार एवं मित्रों को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करें।
पर्यावरण संरक्षण में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण
शिक्षकों ने कहा कि युवा और विद्यार्थी पर्यावरण संरक्षण के सबसे बड़े दूत बन सकते हैं। यदि विद्यार्थी बचपन से ही प्रकृति के प्रति संवेदनशील होंगे तो भविष्य में पर्यावरण संरक्षण का मजबूत आधार तैयार होगा।
विद्यालयों में ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं।
हरित भविष्य के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित यह वृक्षारोपण कार्यक्रम केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज को पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश देने वाला प्रयास साबित हुआ।
शिक्षकों ने कहा कि धरती को सुरक्षित और हरा-भरा बनाए रखने के लिए सरकार, संस्थाओं और आम नागरिकों को मिलकर प्रयास करने होंगे।
उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं और अधिक से अधिक पौधे लगाकर उनके संरक्षण का संकल्प लें।
प्रकृति की रक्षा ही मानव जीवन की रक्षा है।
