आने वाला कल आएगा या काल आएगा, हमें पता नहीं — साध्वी अमृतरसा श्री जी महाराज
समय का सदुपयोग कर जीवन को बनाएं सार्थक : साध्वी श्री
महिदपुर रोड। स्थानीय जैन समाज द्वारा आयोजित धर्मसभा में पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब ने श्रद्धालुओं को जीवन की अनिश्चितता, समय के महत्व और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि मनुष्य को किसी भी अच्छे कार्य को कल के लिए नहीं टालना चाहिए, क्योंकि आने वाला कल आएगा या काल आएगा, इसका किसी को पता नहीं है।
साध्वी श्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जन्म का समय तो ज्ञात होता है, लेकिन इस संसार से विदाई का समय किसी को ज्ञात नहीं होता। इसलिए जीवन में मिलने वाले प्रत्येक क्षण का सदुपयोग करते हुए धर्म, सेवा और आत्मचिंतन के कार्य करने चाहिए। उन्होंने कहा कि समय एक ऐसा धन है, जिसे वापस प्राप्त नहीं किया जा सकता। जो व्यक्ति समय की कीमत समझ लेता है, वह अपने जीवन को सफल और सार्थक बना सकता है।
क्षण मात्र का भी प्रमाद न करें
धर्मसभा में जिनवाणी का रसपान कराते हुए साध्वी श्री ने भगवान महावीर और गौतम स्वामी के प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने गौतम स्वामी से कहा था कि हे गौतम! क्षण मात्र का भी प्रमाद मत कर, क्योंकि जीवन का कोई भरोसा नहीं है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य अक्सर भविष्य की योजनाओं में इतना उलझ जाता है कि वर्तमान के महत्व को भूल जाता है। हमें आज मिले अवसरों का सही उपयोग करना चाहिए और अपने जीवन को सद्कर्मों से सजाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि समय हमारा साथ देता है तो जीवन में बड़ी से बड़ी उपलब्धियां प्राप्त की जा सकती हैं, लेकिन समय निकल जाने के बाद पछतावे के अलावा कुछ हाथ नहीं आता।
समय ही जीवन की वास्तविक पूंजी है
साध्वी श्री ने कहा कि “अगर समय तेरा है तो सब तेरा है, लेकिन समय तेरा नहीं है तो कुछ भी तेरा नहीं है।” समय जिसका साथ देता है, वह जीवन में कठिन परिस्थितियों को भी पार कर सफलता प्राप्त करता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरणा देते हुए कहा कि हमें अपने जीवन में आलस्य, प्रमाद और नकारात्मक विचारों को दूर कर आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए। धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि अच्छे विचार, संयमित व्यवहार और दूसरों के प्रति करुणा रखना भी धर्म का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

सुख-दुख को समझने की आवश्यकता
प्रवचन के दौरान साध्वी श्री ने मानव स्वभाव और जीवन की परिस्थितियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यदि हम इस भव में भी जीवन के वास्तविक उद्देश्य को नहीं समझेंगे तो कब समझेंगे। मनुष्य को अपने कर्मों और व्यवहार का निरंतर मूल्यांकन करते रहना चाहिए।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि खुशी के समय दसों उंगलियां मिलकर ताली बजाती हैं, जबकि दुख के समय केवल दो उंगलियां ही आंसू पोंछने के लिए आगे आती हैं। जब हमारा शरीर भी सुख-दुख में अंतर करता है तो संसार के लोगों के व्यवहार में परिवर्तन होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। इसलिए हमें परिस्थितियों को स्वीकार करते हुए धैर्य और विवेक के साथ जीवन जीना चाहिए।
धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं ने लिया लाभ
जैन समाज प्रभारी सचिन भंडारी ने जानकारी देते हुए बताया कि संपूर्ण दिवस धार्मिक भक्ति, आराधना एवं प्रभावना के विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन धार्मिक आयोजनों का लाभ दिनेश कुमार एवं हर्ष कुमार बोथरा बॉस विधायक परिवार द्वारा लिया गया।
उन्होंने बताया कि सभी सिद्धि तप तपस्वियों के मंगलकारी कलश झेलाने का लाभ पारसमल, निलेश कुमार, रितेश कुमार एवं अक्षत कुमार भंडारी परिवार खरवा वाला को प्राप्त हुआ। वहीं अक्षत कलश एवं विजय तिलक का लाभ गुप्त लाभार्थी तथा समरथमल, शुभम कुमार एवं संकेश कुमार चौरडिया परिवार द्वारा लिया गया।
सकल जैन समाज ने प्राप्त किया धर्म लाभ
धर्मसभा में बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु उपस्थित रहे और साध्वी श्री के आध्यात्मिक एवं प्रेरणादायी प्रवचनों का लाभ प्राप्त किया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने साध्वी श्री के संदेश को आत्मसात करते हुए जीवन में धर्म, संयम और सदाचार को अपनाने का संकल्प लिया।
साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब ने अपने प्रवचन में यह संदेश दिया कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसे केवल सांसारिक सुख-सुविधाओं में व्यर्थ नहीं करना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को समय का सम्मान करते हुए अच्छे कार्यों, सेवा भावना और आत्मशुद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए। यही जीवन की वास्तविक सफलता और आत्मकल्याण का मार्ग है।
