आदिवासी युवती से बेटे के प्रेम विवाह पर परिवार के सामाजिक बहिष्कार का आरोप, जनसुनवाई में लगाई गुहार
कोमल अहिरवार, जिला ब्यूरो चीफ
समाज में वापस शामिल करने के नाम पर 50 हजार रुपये लेने का दावा, चार साल से कार्रवाई नहीं होने की शिकायत
दमोह। हिंडोरिया थाना क्षेत्र की बांदकपुर चौकी अंतर्गत ग्राम आनू निवासी रामचरण पटेल ने बेटे के अंतरजातीय प्रेम विवाह के बाद अपने परिवार का सामाजिक बहिष्कार किए जाने का आरोप लगाया है। जनसुनवाई में पहुंचे रामचरण ने बताया कि उनके बेटे गजराज ने वर्ष 2022 में आदिवासी समाज की युवती से प्रेम विवाह किया था। उनका आरोप है कि इस विवाह से नाराज कुछ लोगों ने उन्हें और उनके पांच भाइयों के परिवारों को समाज से अलग कर दिया। उन्होंने पुलिस और प्रशासन से मामले की जांच तथा कार्रवाई की मांग की है।
वर्ष 2022 के विवाह के बाद विवाद का दावा
रामचरण पटेल के अनुसार, बेटे गजराज के विवाह के बाद परिवार को सामाजिक विरोध का सामना करना पड़ा। उन्होंने शिकायत में किलो उर्फ त्रिलोक पटेल, गोविन्द पटेल और प्रभु पटेल सहित गांव के कुछ लोगों पर बहिष्कार कराने का आरोप लगाया है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि विवाद केवल बेटे के विवाह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके पांच भाइयों के परिवारों को भी प्रभावित किया गया। रामचरण ने जनसुनवाई में अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि वे चार वर्षों से मामले में न्याय की उम्मीद लेकर अधिकारियों तक पहुंच रहे हैं। ये बातें शिकायतकर्ता के आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं है।
समाज में शामिल करने के लिए रुपये लेने का आरोप
रामचरण ने आरोप लगाया कि परिवार को समाज में दोबारा शामिल करने के लिए गांव में एक पंचायत बुलाई गई थी। उनके अनुसार, इस दौरान उनसे 50 हजार रुपये नकद लिए गए। इसके अलावा पंचों को एक-एक हजार रुपये देकर टीका करने की रस्म भी कराई गई।
शिकायतकर्ता का दावा है कि उन्होंने पंचायत में तय बातों के अनुसार समाज के लोगों के लिए भोजन तैयार करवाया। उन्हें उम्मीद थी कि इसके बाद परिवार को फिर से सामाजिक आयोजनों में स्वीकार किया जाएगा। हालांकि, उनके अनुसार ऐसा नहीं हुआ और परिवार का बहिष्कार समाप्त नहीं किया गया।
भोजन बनवाया, लेकिन लोग नहीं आए
रामचरण ने बताया कि समाज के लिए तैयार किए गए भोजन में लोग शामिल नहीं हुए। उनका कहना है कि भोजन व्यर्थ चला गया और उसे फेंकना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित लोग परिवार को वापस शामिल करने के अपने वादे से मुकर गए।
शिकायत में रुपये लेने और भोजन करवाने की बात उठाई गई है। इन आरोपों की जांच के लिए भुगतान से संबंधित प्रमाण, पंचायत में उपस्थित लोगों के बयान और अन्य उपलब्ध जानकारी महत्वपूर्ण होगी। संबंधित व्यक्तियों का पक्ष मिलने से घटनाक्रम की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
शिकायत के बाद परिवार पर हमले का आरोप
रामचरण ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन से शिकायत करने के बाद उनके परिवार पर हमला किया गया। उनके अनुसार, उनकी बुजुर्ग मां सहित परिवार के सदस्य इस घटना से प्रभावित हुए। उन्होंने इसे जानलेवा हमला बताते हुए कार्रवाई की मांग की है।
हालांकि, उपलब्ध विवरण में हमले की तारीख, चोटों की स्थिति, चिकित्सा दस्तावेज या दर्ज प्रकरण की जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए हमले की प्रकृति और उसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के संबंध में निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
चार वर्षों से अधिकारियों तक पहुंचने की बात
शिकायतकर्ता का कहना है कि वे दमोह पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर को आवेदन दे चुके हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने बांदकपुर पुलिस पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप भी लगाया है।
जनसुनवाई में रामचरण ने परिवार के साथ हो रहे कथित सामाजिक बहिष्कार और प्रताड़ना का मुद्दा दोबारा उठाया। उपलब्ध समाचार विवरण में पुलिस, प्रशासन और आरोपित व्यक्तियों की प्रतिक्रिया शामिल नहीं है। शिकायतों पर अब तक हुई कार्रवाई की स्थिति भी संबंधित रिकॉर्ड से स्पष्ट होगी।
अपनी पसंद से विवाह करने का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णयों में स्पष्ट किया है कि दो वयस्कों के आपसी सहमति से विवाह करने के लिए परिवार, समुदाय या जाति समूह की सहमति आवश्यक नहीं है। अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का अधिकार व्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा से जुड़ा है।
इस मामले में किन कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई बनती है, यह आरोपों, साक्ष्यों और जांच पर निर्भर करेगा। फिलहाल रामचरण की शिकायत ने अंतरजातीय विवाह के बाद परिवार की सामाजिक स्वीकार्यता, सुरक्षा और शिकायतों पर कार्रवाई से जुड़े सवाल सामने रखे हैं।
