<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Snatra Puja &#8211; Swaraj Vani</title>
	<atom:link href="https://swarajvani.com/tag/snatra-puja/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://swarajvani.com</link>
	<description>From politics and jobs to culture and community stories, we deliver timely, unbiased updates that matter.</description>
	<lastBuildDate>Mon, 14 Sep 2026 12:31:34 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=7.1.3</generator>

<image>
	<url>https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/07/cropped-स्वराज-वाणी-1-32x32.png</url>
	<title>Snatra Puja &#8211; Swaraj Vani</title>
	<link>https://swarajvani.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>पर्यूषण के सप्तम दिवस साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा—धर्म आराधना का श्रेष्ठ अवसर है महापर्व</title>
		<link>https://swarajvani.com/paryushan-day-7-in-mahidpur-road-sadhvi-dr-amritrasa-shriji-calls-the-festival-an-ideal-time-for-spiritual/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 14 Sep 2026 12:31:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Jai]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Dharma Sabha]]></category>
		<category><![CDATA[Mahaparva]]></category>
		<category><![CDATA[Mahidpur Road News]]></category>
		<category><![CDATA[Sadhvi Dr Amritrasa Shriji]]></category>
		<category><![CDATA[Snatra Puja]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=357533</guid>

					<description><![CDATA[पर्यूषण के सप्तम दिवस साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा—धर्म आराधना का श्रेष्ठ अवसर है महापर्व दैनिक स्वराज वाणी। महिदपुर रोड। पर्यूषण महापर्व के सप्तम दिवस रविवार को नगर में ... <a title="पर्यूषण के सप्तम दिवस साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा—धर्म आराधना का श्रेष्ठ अवसर है महापर्व" class="read-more" href="https://swarajvani.com/paryushan-day-7-in-mahidpur-road-sadhvi-dr-amritrasa-shriji-calls-the-festival-an-ideal-time-for-spiritual/" aria-label="Read more about पर्यूषण के सप्तम दिवस साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा—धर्म आराधना का श्रेष्ठ अवसर है महापर्व">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>पर्यूषण के सप्तम दिवस साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा—धर्म आराधना का श्रेष्ठ अवसर है महापर्व</strong></h1>
<p><strong>दैनिक स्वराज वाणी। महिदपुर रोड।</strong> पर्यूषण महापर्व के सप्तम दिवस रविवार को नगर में चातुर्मास हेतु विराजित पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा के सान्निध्य में धर्मसभा आयोजित हुई। साध्वीश्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए महापर्व के दिनों का सदुपयोग करने और धर्म आराधना के लिए तत्पर रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि पर्यूषण के आठ दिन तथा पर्व तिथियां मानव मात्र के लिए आराधना का श्रेष्ठ अवसर हैं।</p>
<p>धर्मसभा में साध्वीश्री ने बताया कि महापर्व के दौरान की गई थोड़ी-सी धर्म आराधना भी अत्यंत फलदायी होती है। इसलिए इन दिनों को श्रद्धा और साधना के साथ बिताना चाहिए। आयोजन में सकल जैन श्रीसंघ के सदस्यों ने उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया।</p>
<h2><strong>महापर्व के आठ दिनों का करें सदुपयोग</strong></h2>
<p>साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने अपने संबोधन में पर्यूषण के आठ दिनों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह समय धर्म आराधना के लिए विशेष अवसर प्रदान करता है। श्रद्धालुओं को महापर्व के दिनों में धर्म से जुड़ने और आराधना करने के लिए तत्पर रहना चाहिए।</p>
<p>उनके संदेश का केंद्र समय का सदुपयोग और धार्मिक साधना के प्रति सक्रियता रहा। उन्होंने महापर्व के दिनों तथा पर्व तिथियों को मानव मात्र के लिए महत्वपूर्ण बताया। धर्मसभा में उपस्थित लोगों को इन अवसरों का लाभ लेने और अपनी क्षमता के अनुसार आराधना में भाग लेने की प्रेरणा मिली।</p>
<h2><strong>थोड़ी-सी आराधना भी होती है फलदायी</strong></h2>
<p>साध्वीश्री ने कहा कि महापर्व के दिनों में थोड़ी-सी धर्म आराधना भी बहुत अधिक फलदायी होती है। इस विचार के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को आराधना के प्रति उत्साहित किया। उनका आग्रह रहा कि पर्व के दौरान मिलने वाले अवसर को व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए।</p>
<p>प्रवचन में व्यक्त यह संदेश आराधना के लिए तत्परता का भाव सामने लाता है। साध्वीश्री ने उपस्थित धर्मसभा को समझाया कि महापर्व का समय धार्मिक गतिविधियों से जुड़ने का श्रेष्ठ अवसर है। श्रद्धालुओं ने उनके विचार सुने और धर्मसभा में सहभागिता की।</p>
<h2><strong>चातुर्मास में साध्वीश्री का सान्निध्य</strong></h2>
<p>महिदपुर रोड में पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा चातुर्मास हेतु विराजित हैं। उनके सान्निध्य में पर्यूषण महापर्व के सप्तम दिवस का आयोजन हुआ। रविवार की धर्मसभा में उन्होंने महापर्व की आराधना के महत्व पर मार्गदर्शन दिया।</p>
<p>नगर के जैन समाज को चातुर्मास के दौरान साध्वीश्री का सान्निध्य प्राप्त हो रहा है। सप्तम दिवस की सभा में भी इसी क्रम में श्रद्धालु एकत्र हुए। प्रवचन के साथ धार्मिक आयोजन में सहभागिता ने समाज के सदस्यों को सामूहिक रूप से धर्मलाभ प्राप्त करने का अवसर दिया।</p>
<h2><strong>भंडारी परिवार ने लिया पूजा आयोजन का लाभ</strong></h2>
<p>जैन समाज के मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने आयोजन की जानकारी देते हुए बताया कि इस दिन की स्नात्र पूजा, अंगरचना और प्रभावना का लाभ पारसमल अनोखीलाल भंडारी परिवार, खारवा वाला ने लिया।</p>
<p>परिवार की सहभागिता का उल्लेख सप्तम दिवस के धार्मिक आयोजन में किया गया। पूजा और उससे जुड़ी गतिविधियों में समाज के सदस्यों ने उपस्थित होकर भाग लिया। इस अवसर पर धर्मसभा तथा पूजा आयोजन के माध्यम से महापर्व की आराधना का क्रम आगे बढ़ा।</p>
<h2><strong>कोचर और मोदी परिवार ने लिया प्रवचन प्रभावना का लाभ</strong></h2>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="wp-image-357541 alignright" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/dfds-300x135.jpeg" alt="dfds" width="591" height="266" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/dfds-300x135.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/dfds-1024x461.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/dfds-768x346.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/dfds.jpeg 1152w" sizes="(max-width: 591px) 100vw, 591px" /><span style="font-size: inherit;">सचिन भंडारी के अनुसार, प्रवचन प्रभावना का लाभ अशोक कुमार हिमांशु कोचर परिवार तथा प्रकाशचंद मोदी परिवार, जावरा ने लिया। दोनों परिवारों की सहभागिता के साथ प्रवचन प्रभावना का आयोजन हुआ।</span></p>
<p>सप्तम दिवस पर पूजा और प्रवचन से जुड़े विभिन्न लाभार्थी परिवारों का विवरण समाज की ओर से साझा किया गया। आयोजन में परिवारों की भागीदारी के साथ सकल जैन श्रीसंघ की उपस्थिति रही। श्रद्धालुओं ने साध्वीश्री के प्रवचन सुनकर धर्म आराधना का महत्व समझा।</p>
<h2><strong>सकल जैन श्रीसंघ ने प्राप्त किया धर्मलाभ</strong></h2>
<p>संपूर्ण आयोजन में सकल जैन श्रीसंघ के सदस्यों ने उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया। महापर्व के सप्तम दिवस की धर्मसभा में आराधना के प्रति तत्पर रहने का संदेश प्रमुख रहा।</p>
<p>साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने पर्यूषण के दिनों को श्रेष्ठ अवसर बताते हुए श्रद्धालुओं को धर्म साधना से जुड़ने की प्रेरणा दी। उनके संबोधन ने महापर्व के समय का श्रद्धापूर्वक उपयोग करने और थोड़ी-सी आराधना के महत्व को समझने का संदेश दिया।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सारंगपुर में श्वेतांबर जैन समाज का पर्यूषण महापर्व शुरू, प्रथम दिवस गूंजे भगवान महावीर के संदेश</title>
		<link>https://swarajvani.com/shwetambar-jain-community-begins-paryushan-mahaparv-in-sarangpur-with-devotion-and-spiritual/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Sep 2026 11:19:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Sarangpur]]></category>
		<category><![CDATA[Ahimsa]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Festival]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Pravachan]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Puja]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Religion]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Tapasya]]></category>
		<category><![CDATA[Kshamapana]]></category>
		<category><![CDATA[Madhya Pradesh News]]></category>
		<category><![CDATA[ommunity]]></category>
		<category><![CDATA[Paryushan Celebration]]></category>
		<category><![CDATA[Religio]]></category>
		<category><![CDATA[Sarangpur News]]></category>
		<category><![CDATA[Snatra Puja]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=356860</guid>

					<description><![CDATA[सारंगपुर में श्वेतांबर जैन समाज का पर्यूषण महापर्व शुरू, प्रथम दिवस गूंजे भगवान महावीर के संदेश आत्मशुद्धि, त्याग और तपस्या के साथ हुई धर्म आराधना; पांच प्रमुख कर्तव्यों पर किया ... <a title="सारंगपुर में श्वेतांबर जैन समाज का पर्यूषण महापर्व शुरू, प्रथम दिवस गूंजे भगवान महावीर के संदेश" class="read-more" href="https://swarajvani.com/shwetambar-jain-community-begins-paryushan-mahaparv-in-sarangpur-with-devotion-and-spiritual/" aria-label="Read more about सारंगपुर में श्वेतांबर जैन समाज का पर्यूषण महापर्व शुरू, प्रथम दिवस गूंजे भगवान महावीर के संदेश">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>सारंगपुर में श्वेतांबर जैन समाज का पर्यूषण महापर्व शुरू, प्रथम दिवस गूंजे भगवान महावीर के संदेश</strong></h1>
<h2><strong>आत्मशुद्धि, त्याग और तपस्या के साथ हुई धर्म आराधना; पांच प्रमुख कर्तव्यों पर किया गया चिंतन</strong></h2>
<p data-start="53" data-end="84"><strong data-start="53" data-end="84">रिपोर्टर: मनोज कुमार पुष्पद</strong></p>
<p><strong>दैनिक स्वराज वाणी, सारंगपुर।</strong> आत्मशुद्धि, त्याग, तपस्या, संयम और साधना के महान पर्व पर्यूषण महापर्व का मंगलवार को श्वेतांबर जैन समाज द्वारा श्रद्धा एवं भक्ति के साथ शुभारंभ किया गया। पर्व के पहले दिन श्रीसंघ में विशेष धार्मिक उत्साह दिखाई दिया। बड़ी संख्या में समाजजन जिनालय पहुंचे और भगवान महावीर के सिद्धांतों का स्मरण करते हुए धर्म आराधना की।</p>
<p>पर्यूषण पर्व जैन समाज के लिए केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मनिरीक्षण और आत्मशुद्धि का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु मन, वचन और कर्म से हुई गलतियों पर चिंतन करते हुए सत्य, अहिंसा, करुणा, क्षमा और संयम को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं। प्रथम दिवस पर प्रभु भक्ति, स्नात्र पूजन, केसर पूजा, दुग्धाभिषेक, महाआरती, प्रभावना, प्रतिक्रमण, स्वाध्याय और जप-तप सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए।</p>
<h2><strong>हृदयरत्न महाराज साहब की पावन निश्रा में आयोजन</strong></h2>
<p>पर्यूषण महापर्व के अंतर्गत आयोजित होने वाले सभी धार्मिक कार्यक्रम परम पूज्य हृदयरत्न महाराज साहब की पावन निश्रा में संपन्न हो रहे हैं। उनकी उपस्थिति से श्रीसंघ में आध्यात्मिक ऊर्जा और धर्म के प्रति विशेष उत्साह का वातावरण बना हुआ है।</p>
<p>धर्मसभा में श्रद्धालुओं को भगवान महावीर के बताए सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह और आत्मसंयम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई। समाजजनों ने सामूहिक रूप से धार्मिक क्रियाओं में भाग लिया और अपने जीवन में त्याग एवं सदाचार को स्थान देने का संकल्प लिया।</p>
<h2><strong>भिवंडी से पहुंचे विशेष आराधक</strong></h2>
<p>पर्यूषण महापर्व की विशेष आराधना, जप-तप और विधिवत धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराने के लिए भिवंडी से किनाल जैन, सिद्धार्थ जैन और पारसमल जैन सारंगपुर पहुंचे हैं। आराधकों के श्रीसंघ में आगमन पर समाज के पदाधिकारियों और वरिष्ठजनों ने उनका भावभीना स्वागत किया।</p>
<p>बताया गया कि आगामी तीन दिनों तक श्रीसंघ में विशेष व्याख्यान एवं प्रवचन आयोजित किए जाएंगे। इनमें जैन दर्शन के गूढ़ सिद्धांतों को सरल भाषा में श्रद्धालुओं के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को भी धर्म के मूल सिद्धांतों, परंपराओं और जीवन में संयम के महत्व से परिचित कराया जाएगा।</p>
<h2><strong>पांच प्रमुख कर्तव्यों पर हुआ चिंतन</strong></h2>
<p>पर्व के प्रथम दिवस आयोजित धर्मसभा में पर्यूषण महापर्व के पांच प्रमुख कर्तव्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि पर्यूषण आत्मा को परमात्मा की दिशा में आगे बढ़ाने वाला आध्यात्मिक अनुष्ठान है। इसके लिए केवल पूजा-पाठ ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यक्ति को अपने व्यवहार और जीवनशैली में भी सकारात्मक परिवर्तन लाना चाहिए।</p>
<p>श्रद्धालुओं को अमारी प्रवर्तन यानी जीवों की रक्षा और अहिंसा के पालन का महत्व समझाया गया। बताया गया कि पर्व के दौरान किसी भी जीव को कष्ट नहीं पहुंचे, इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए। अहिंसा केवल शारीरिक क्रिया तक सीमित नहीं है। मन में किसी के प्रति द्वेष नहीं रखना, वचन से किसी को पीड़ा नहीं पहुंचाना और अपने कार्यों से किसी जीव को नुकसान नहीं पहुंचाना भी अहिंसा का हिस्सा है।</p>
<h2><strong>साधार्मिक भक्ति और सहयोग का संदेश</strong></h2>
<p>प्रवचन में साधार्मिक भक्ति के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा गया कि अपने धर्मबंधुओं के प्रति प्रेम, सम्मान और सहयोग रखना जैन जीवन पद्धति का महत्वपूर्ण अंग है। समाज के जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना, दुख के समय उसके साथ खड़ा होना और धर्म आराधना में परस्पर सहयोग करना ही सच्ची साधार्मिक भक्ति है।</p>
<p>श्रद्धालुओं से कहा गया कि पर्यूषण के दिनों में आपसी मतभेद और मनमुटाव को समाप्त कर समाज में प्रेम, एकता एवं भाईचारे की भावना मजबूत करें। धर्म का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देता है, जब व्यक्ति के व्यवहार में विनम्रता, संवेदना और सहयोग का भाव प्रकट हो।</p>
<h2><strong>क्षमापना जैन दर्शन का मूल आधार</strong></h2>
<p>धर्मसभा में क्षमापना को जैन दर्शन का मूल स्तंभ बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि मनुष्य से जाने-अनजाने में कई गलतियां हो जाती हैं। इन गलतियों को स्वीकार कर निर्मल हृदय से क्षमा मांगना और दूसरों को क्षमा करना आत्मशुद्धि की दिशा में बड़ा कदम है।</p>
<p>समाजजनों से कड़वाहट, क्रोध, अहंकार और पुराने विवादों को त्यागने का आह्वान किया गया। बताया गया कि क्षमा मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि आत्मबल और विनम्रता का प्रतीक है। जो व्यक्ति दूसरों को क्षमा करता है, वह स्वयं भी मानसिक बोझ से मुक्त होकर आध्यात्मिक उन्नति की ओर आगे बढ़ता है।</p>
<h2><strong>उपवास और अट्ठम तप का बताया महत्व</strong></h2>
<p>पर्यूषण काल में शरीर और इंद्रियों पर संयम रखने के लिए उपवास, एकासन, आयंबिल तथा अन्य तप-साधनाओं का विशेष महत्व है। धर्मसभा में श्रद्धालुओं को अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार तपस्या करने की प्रेरणा दी गई।</p>
<p>लगातार तीन दिनों तक किए जाने वाले अट्ठम तप का महत्व बताते हुए कहा गया कि तपस्या का उद्देश्य केवल भोजन का त्याग करना नहीं है। इसके माध्यम से मन की इच्छाओं पर नियंत्रण, आत्मचिंतन और विकारों से मुक्ति पाने का प्रयास किया जाता है। तप तभी सार्थक माना जाता है, जब उसके साथ विनम्रता, करुणा और सकारात्मक विचार जुड़े हों।</p>
<h2><strong>जिनालय दर्शन से मन होता है एकाग्र</strong></h2>
<p>श्रद्धालुओं को प्रतिदिन जिनालय जाकर भगवान के दर्शन और पूजा करने की प्रेरणा दी गई। बताया गया कि जिन प्रतिमा के दर्शन से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति को अपने भीतर मौजूद बुराइयों पर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा मिलती है।</p>
<p>प्रभु दर्शन, स्नात्र पूजन और आत्मसमर्पण के माध्यम से श्रद्धालु अपने मन को एकाग्र करते हैं। जिनालय में बिताया गया समय व्यक्ति को सांसारिक चिंताओं से कुछ समय के लिए दूर कर आत्मचिंतन का अवसर प्रदान करता है।</p>
<h2><strong>दूसरे दिन 11 वार्षिक कर्तव्यों पर होगा व्याख्यान</strong></h2>
<p>श्रीसंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि पर्यूषण पर्व के दूसरे दिन आयोजित विशेष व्याख्यान में जैन धर्म के 11 वार्षिक कर्तव्यों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। समाज के सभी श्रद्धालुओं से निर्धारित समय पर उपस्थित होकर धर्मलाभ लेने की अपील की गई है।</p>
<p>प्रथम दिवस का कार्यक्रम सामूहिक जप, प्रभु भक्ति, पूजन, स्वाध्याय और प्रवचन के साथ संपन्न हुआ। दिनभर जिनालय एवं धर्मसभा परिसर में धार्मिक उल्लास बना रहा।</p>
<h2><strong>ये परिवार रहे धार्मिक आयोजनों के लाभार्थी</strong></h2>
<p>आराधना कराने के लिए पहुंचे श्रावक भाइयों के सम्मान में साधार्मिक भक्ति का आयोजन किया गया। प्रथम दिवस साधार्मिक भक्ति के लाभार्थी प्रेमचंद जैन कानड़ वाला परिवार रहा। वहीं स्नात्र पूजन के कायमी लाभार्थी के रूप में सज्जन सिंह-अनिल कुमार श्रीमाल परिवार ने धर्मलाभ प्राप्त किया।</p>
<p>कार्यक्रम में श्रीसंघ अध्यक्ष प्रदीप बरड़िया, विजय जैन, श्रेयांश पारख, अशोक श्रीमाल, संजय बरड़िया, गौरव श्रीमाल, सुभाष बावेल, संतोष बरड़िया, पारस पारख, विजय बरड़िया, मोहनलाल ललवानी, श्वेता-अंशुल श्रीमाल, तृप्ति लोढ़ा, अनुराधा बरड़िया, दीप्ति बरड़िया और दशा श्रीमाल सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
