—Advertisement—

सारंगपुर में श्वेतांबर जैन समाज का पर्यूषण महापर्व शुरू, प्रथम दिवस गूंजे भगवान महावीर के संदेश

Author Picture
Published On: 12 September 2026
rtyrty

—Advertisement—

सारंगपुर में श्वेतांबर जैन समाज का पर्यूषण महापर्व शुरू, प्रथम दिवस गूंजे भगवान महावीर के संदेश

आत्मशुद्धि, त्याग और तपस्या के साथ हुई धर्म आराधना; पांच प्रमुख कर्तव्यों पर किया गया चिंतन

रिपोर्टर: मनोज कुमार पुष्पद

दैनिक स्वराज वाणी, सारंगपुर। आत्मशुद्धि, त्याग, तपस्या, संयम और साधना के महान पर्व पर्यूषण महापर्व का मंगलवार को श्वेतांबर जैन समाज द्वारा श्रद्धा एवं भक्ति के साथ शुभारंभ किया गया। पर्व के पहले दिन श्रीसंघ में विशेष धार्मिक उत्साह दिखाई दिया। बड़ी संख्या में समाजजन जिनालय पहुंचे और भगवान महावीर के सिद्धांतों का स्मरण करते हुए धर्म आराधना की।

पर्यूषण पर्व जैन समाज के लिए केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मनिरीक्षण और आत्मशुद्धि का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु मन, वचन और कर्म से हुई गलतियों पर चिंतन करते हुए सत्य, अहिंसा, करुणा, क्षमा और संयम को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं। प्रथम दिवस पर प्रभु भक्ति, स्नात्र पूजन, केसर पूजा, दुग्धाभिषेक, महाआरती, प्रभावना, प्रतिक्रमण, स्वाध्याय और जप-तप सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए।

हृदयरत्न महाराज साहब की पावन निश्रा में आयोजन

पर्यूषण महापर्व के अंतर्गत आयोजित होने वाले सभी धार्मिक कार्यक्रम परम पूज्य हृदयरत्न महाराज साहब की पावन निश्रा में संपन्न हो रहे हैं। उनकी उपस्थिति से श्रीसंघ में आध्यात्मिक ऊर्जा और धर्म के प्रति विशेष उत्साह का वातावरण बना हुआ है।

धर्मसभा में श्रद्धालुओं को भगवान महावीर के बताए सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह और आत्मसंयम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई। समाजजनों ने सामूहिक रूप से धार्मिक क्रियाओं में भाग लिया और अपने जीवन में त्याग एवं सदाचार को स्थान देने का संकल्प लिया।

भिवंडी से पहुंचे विशेष आराधक

पर्यूषण महापर्व की विशेष आराधना, जप-तप और विधिवत धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराने के लिए भिवंडी से किनाल जैन, सिद्धार्थ जैन और पारसमल जैन सारंगपुर पहुंचे हैं। आराधकों के श्रीसंघ में आगमन पर समाज के पदाधिकारियों और वरिष्ठजनों ने उनका भावभीना स्वागत किया।

बताया गया कि आगामी तीन दिनों तक श्रीसंघ में विशेष व्याख्यान एवं प्रवचन आयोजित किए जाएंगे। इनमें जैन दर्शन के गूढ़ सिद्धांतों को सरल भाषा में श्रद्धालुओं के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को भी धर्म के मूल सिद्धांतों, परंपराओं और जीवन में संयम के महत्व से परिचित कराया जाएगा।

पांच प्रमुख कर्तव्यों पर हुआ चिंतन

पर्व के प्रथम दिवस आयोजित धर्मसभा में पर्यूषण महापर्व के पांच प्रमुख कर्तव्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि पर्यूषण आत्मा को परमात्मा की दिशा में आगे बढ़ाने वाला आध्यात्मिक अनुष्ठान है। इसके लिए केवल पूजा-पाठ ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यक्ति को अपने व्यवहार और जीवनशैली में भी सकारात्मक परिवर्तन लाना चाहिए।

श्रद्धालुओं को अमारी प्रवर्तन यानी जीवों की रक्षा और अहिंसा के पालन का महत्व समझाया गया। बताया गया कि पर्व के दौरान किसी भी जीव को कष्ट नहीं पहुंचे, इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए। अहिंसा केवल शारीरिक क्रिया तक सीमित नहीं है। मन में किसी के प्रति द्वेष नहीं रखना, वचन से किसी को पीड़ा नहीं पहुंचाना और अपने कार्यों से किसी जीव को नुकसान नहीं पहुंचाना भी अहिंसा का हिस्सा है।

साधार्मिक भक्ति और सहयोग का संदेश

प्रवचन में साधार्मिक भक्ति के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा गया कि अपने धर्मबंधुओं के प्रति प्रेम, सम्मान और सहयोग रखना जैन जीवन पद्धति का महत्वपूर्ण अंग है। समाज के जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना, दुख के समय उसके साथ खड़ा होना और धर्म आराधना में परस्पर सहयोग करना ही सच्ची साधार्मिक भक्ति है।

श्रद्धालुओं से कहा गया कि पर्यूषण के दिनों में आपसी मतभेद और मनमुटाव को समाप्त कर समाज में प्रेम, एकता एवं भाईचारे की भावना मजबूत करें। धर्म का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देता है, जब व्यक्ति के व्यवहार में विनम्रता, संवेदना और सहयोग का भाव प्रकट हो।

क्षमापना जैन दर्शन का मूल आधार

धर्मसभा में क्षमापना को जैन दर्शन का मूल स्तंभ बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि मनुष्य से जाने-अनजाने में कई गलतियां हो जाती हैं। इन गलतियों को स्वीकार कर निर्मल हृदय से क्षमा मांगना और दूसरों को क्षमा करना आत्मशुद्धि की दिशा में बड़ा कदम है।

समाजजनों से कड़वाहट, क्रोध, अहंकार और पुराने विवादों को त्यागने का आह्वान किया गया। बताया गया कि क्षमा मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि आत्मबल और विनम्रता का प्रतीक है। जो व्यक्ति दूसरों को क्षमा करता है, वह स्वयं भी मानसिक बोझ से मुक्त होकर आध्यात्मिक उन्नति की ओर आगे बढ़ता है।

उपवास और अट्ठम तप का बताया महत्व

पर्यूषण काल में शरीर और इंद्रियों पर संयम रखने के लिए उपवास, एकासन, आयंबिल तथा अन्य तप-साधनाओं का विशेष महत्व है। धर्मसभा में श्रद्धालुओं को अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार तपस्या करने की प्रेरणा दी गई।

लगातार तीन दिनों तक किए जाने वाले अट्ठम तप का महत्व बताते हुए कहा गया कि तपस्या का उद्देश्य केवल भोजन का त्याग करना नहीं है। इसके माध्यम से मन की इच्छाओं पर नियंत्रण, आत्मचिंतन और विकारों से मुक्ति पाने का प्रयास किया जाता है। तप तभी सार्थक माना जाता है, जब उसके साथ विनम्रता, करुणा और सकारात्मक विचार जुड़े हों।

जिनालय दर्शन से मन होता है एकाग्र

श्रद्धालुओं को प्रतिदिन जिनालय जाकर भगवान के दर्शन और पूजा करने की प्रेरणा दी गई। बताया गया कि जिन प्रतिमा के दर्शन से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति को अपने भीतर मौजूद बुराइयों पर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा मिलती है।

प्रभु दर्शन, स्नात्र पूजन और आत्मसमर्पण के माध्यम से श्रद्धालु अपने मन को एकाग्र करते हैं। जिनालय में बिताया गया समय व्यक्ति को सांसारिक चिंताओं से कुछ समय के लिए दूर कर आत्मचिंतन का अवसर प्रदान करता है।

दूसरे दिन 11 वार्षिक कर्तव्यों पर होगा व्याख्यान

श्रीसंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि पर्यूषण पर्व के दूसरे दिन आयोजित विशेष व्याख्यान में जैन धर्म के 11 वार्षिक कर्तव्यों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। समाज के सभी श्रद्धालुओं से निर्धारित समय पर उपस्थित होकर धर्मलाभ लेने की अपील की गई है।

प्रथम दिवस का कार्यक्रम सामूहिक जप, प्रभु भक्ति, पूजन, स्वाध्याय और प्रवचन के साथ संपन्न हुआ। दिनभर जिनालय एवं धर्मसभा परिसर में धार्मिक उल्लास बना रहा।

ये परिवार रहे धार्मिक आयोजनों के लाभार्थी

आराधना कराने के लिए पहुंचे श्रावक भाइयों के सम्मान में साधार्मिक भक्ति का आयोजन किया गया। प्रथम दिवस साधार्मिक भक्ति के लाभार्थी प्रेमचंद जैन कानड़ वाला परिवार रहा। वहीं स्नात्र पूजन के कायमी लाभार्थी के रूप में सज्जन सिंह-अनिल कुमार श्रीमाल परिवार ने धर्मलाभ प्राप्त किया।

कार्यक्रम में श्रीसंघ अध्यक्ष प्रदीप बरड़िया, विजय जैन, श्रेयांश पारख, अशोक श्रीमाल, संजय बरड़िया, गौरव श्रीमाल, सुभाष बावेल, संतोष बरड़िया, पारस पारख, विजय बरड़िया, मोहनलाल ललवानी, श्वेता-अंशुल श्रीमाल, तृप्ति लोढ़ा, अनुराधा बरड़िया, दीप्ति बरड़िया और दशा श्रीमाल सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

 

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp