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	<title>Sarvapitri Amavasya &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<title>Sarvapitri Amavasya &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<item>
		<title>गायत्री शक्तिपीठ में श्रद्धा और उल्लास से मनाया सर्वपितृ अमावस्या महोत्सव — दैनिक स्वराज वाणी</title>
		<link>https://swarajvani.com/collective-tarpan-held-at-gayatri-shaktipeeth-on-sarvapitri/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 Oct 2026 12:42:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhinmal]]></category>
		<category><![CDATA[Ancestors]]></category>
		<category><![CDATA[Collective Tarpan]]></category>
		<category><![CDATA[Mukesh Solanki]]></category>
		<category><![CDATA[Pitru Paksha]]></category>
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		<category><![CDATA[Religious Event]]></category>
		<category><![CDATA[Sarvapitri Amavasya]]></category>
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					<description><![CDATA[गायत्री शक्तिपीठ में श्रद्धा और उल्लास से मनाया सर्वपितृ अमावस्या महोत्सव — दैनिक स्वराज वाणी रिपोर्टर: मुकेश सोलंकी भीनमाल   सर्वपितृ अमावस्या के पावन अवसर पर गायत्री शक्तिपीठ भीनमाल में सामूहिक ... <a title="गायत्री शक्तिपीठ में श्रद्धा और उल्लास से मनाया सर्वपितृ अमावस्या महोत्सव — दैनिक स्वराज वाणी" class="read-more" href="https://swarajvani.com/collective-tarpan-held-at-gayatri-shaktipeeth-on-sarvapitri/" aria-label="Read more about गायत्री शक्तिपीठ में श्रद्धा और उल्लास से मनाया सर्वपितृ अमावस्या महोत्सव — दैनिक स्वराज वाणी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>गायत्री शक्तिपीठ में श्रद्धा और उल्लास से मनाया सर्वपितृ अमावस्या महोत्सव — दैनिक स्वराज वाणी</strong></h1>
<p><strong>रिपोर्टर: मुकेश सोलंकी</p>
<p>भीनमाल  </strong> सर्वपितृ अमावस्या के पावन अवसर पर गायत्री शक्तिपीठ भीनमाल में सामूहिक तर्पण कार्यक्रम आयोजित किया गया। गायत्री परिजनों ने श्रद्धा और कृतज्ञता के साथ अपने पूर्वजों का स्मरण किया और उन्हें जल अर्पित कर तर्पण किया। कार्यक्रम में पितरों के प्रति सम्मान, पारिवारिक संस्कारों और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने पर जोर दिया गया।</p>
<p>कार्यक्रम के मुख्य वक्ता महेश व्यास ने अपने उद्बोधन में कहा कि पितर परिवार के अदृश्य सहायक होते हैं। पूर्वजों के त्याग, संस्कार और जीवन मूल्यों से परिवार तथा समाज की नींव मजबूत होती है। उनका स्मरण करना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने और परिवार के संस्कारों को जीवित रखने का माध्यम है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और मूल से जोड़ना जरूरी है। पूर्वजों के जीवन, उनके संघर्ष और उनके द्वारा दिए गए संस्कारों की जानकारी बच्चों तक पहुंचनी चाहिए। ऐसे आयोजन परिवार और समाज को अपनी परंपराओं से परिचित कराने का अवसर देते हैं। सामूहिक तर्पण में सहभागिता से श्रद्धालु पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और उनकी स्मृति को बनाए रखते हैं।</p>
<h2><strong>सर्वपितृ अमावस्या का धार्मिक महत्व बताया</strong></h2>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="wp-image-366122 alignright" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/gbedtsxdyyyrtrsxe-300x210.gif" alt="gbedtsxdyyyrtrsxe" width="364" height="255" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/gbedtsxdyyyrtrsxe-300x210.gif 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/gbedtsxdyyyrtrsxe-1024x717.gif 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/gbedtsxdyyyrtrsxe-768x538.gif 768w" sizes="(max-width: 364px) 100vw, 364px" /><span style="font-size: inherit;">कार्यक्रम में हरिकृष्ण द्विवेदी ने सर्वपितृ अमावस्या के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जिन लोगों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका श्राद्ध किसी कारण से छूट गया है, उनके निमित्त भी इस दिन तर्पण और दान-पुण्य करना फलदायी माना जाता है। सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है। इस अवसर पर पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करने की परंपरा है। पीपल पूजन का भी विशेष महत्व बताया गया।</span></p>
<p>उन्होंने कहा कि इस दिन श्रद्धालु अपने पूर्वजों का स्मरण कर उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करते हैं। जिन परिवारों में पितरों की मृत्यु तिथि का पता नहीं होता, वे भी सर्वपितृ अमावस्या पर उनके निमित्त धार्मिक कर्म कर सकते हैं। इसी कारण इस दिन सामूहिक रूप से तर्पण करने की परंपरा कई स्थानों पर निभाई जाती है।</p>
<h2><strong>सामूहिक तर्पण में गायत्री परिजनों की सहभागिता</strong></h2>
<p>गायत्री शक्तिपीठ में आयोजित कार्यक्रम में गायत्री परिजनों ने विधि-विधान के साथ जलार्पण और तर्पण किया। श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों को याद करते हुए परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। पूरे आयोजन में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण रहा। सामूहिक रूप से हुए तर्पण में बड़ी संख्या में परिजनों ने भाग लेकर अपनी परंपरा का निर्वहन किया।</p>
<p>कार्यक्रम में पहाड़सिंह राव, डॉ. दिनेश परमार, डॉ. अवनी पटेल, केशरसिंह, मदनसिंह राव, राजेन्द्रसिंह राव, नागसिंह राव, ईश्वरसिंह सेवड़ी, राणमल शर्मा, चतुर्भुज राठी, बंशीधर राठी, हीरालाल सोलंकी, मोतीलाल सोलंकी, जसराज सुथार, कोलचंद सोनी, पूर्णा सोनी और नैनाराम चौहान सहित बड़ी संख्या में गायत्री परिजन उपस्थित रहे।</p>
<p>सर्वपितृ अमावस्या पर आयोजित यह कार्यक्रम पितरों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर बना। वक्ताओं ने परंपराओं को समझने और उन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया। सामूहिक तर्पण के माध्यम से उपस्थित श्रद्धालुओं ने पूर्वजों की स्मृति को नमन किया।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मोराड़ में सामूहिक गायत्री साधना के बाद पितरों के निमित्त हुआ श्राद्ध-तर्पण, जीवित माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा को बताया सबसे बड़ा श्राद्ध</title>
		<link>https://swarajvani.com/shraddh-tarpan-held-for-ancestors-after-mass/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 Oct 2026 12:28:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Manawar]]></category>
		<category><![CDATA[Dhar News]]></category>
		<category><![CDATA[Gayatri Pariwar]]></category>
		<category><![CDATA[Manawar News]]></category>
		<category><![CDATA[Morad]]></category>
		<category><![CDATA[Sarvapitri Amavasya]]></category>
		<category><![CDATA[Shantikunj Haridwar]]></category>
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					<description><![CDATA[मोराड़ में सामूहिक गायत्री साधना के बाद पितरों के निमित्त हुआ श्राद्ध-तर्पण, जीवित माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा को बताया सबसे बड़ा श्राद्ध विश्व कल्याण की कामना से हुआ गायत्री ... <a title="मोराड़ में सामूहिक गायत्री साधना के बाद पितरों के निमित्त हुआ श्राद्ध-तर्पण, जीवित माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा को बताया सबसे बड़ा श्राद्ध" class="read-more" href="https://swarajvani.com/shraddh-tarpan-held-for-ancestors-after-mass/" aria-label="Read more about मोराड़ में सामूहिक गायत्री साधना के बाद पितरों के निमित्त हुआ श्राद्ध-तर्पण, जीवित माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा को बताया सबसे बड़ा श्राद्ध">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h2 dir="ltr"><strong>मोराड़ में सामूहिक गायत्री साधना के बाद पितरों के निमित्त हुआ श्राद्ध-तर्पण, जीवित माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा को बताया सबसे बड़ा श्राद्ध</strong></h2>
<p dir="ltr"><strong>विश्व कल्याण की कामना से हुआ गायत्री मंत्र जाप, सर्वपितृ अमावस्या पर गायत्री परिवार शाखा मोराड़ का आयोजन</strong></p>
<p dir="ltr"><strong>मनावर, जिला धार।</strong> अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन में गायत्री परिवार शाखा मोराड़ ने ग्राम के हनुमान मंदिर में विश्व कल्याण की कामना से सामूहिक गायत्री मंत्र साधना की। इसके बाद सर्वपितृ अमावस्या के उपलक्ष्य में दिवंगत पूर्वजों की स्मृति में सामूहिक श्राद्ध-तर्पण कार्यक्रम संपन्न हुआ।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>देव पूजन और कर्मकांड</strong></h3>
<p dir="ltr">कार्यक्रम में ग्राम के राधेश्याम मुवेल ने देव पूजन किया और गोपाल मौर्य ने यमदेव का पूजन किया। कार्यक्रम का संचालन और कर्मकांड बादल भालके ने संपन्न कराया।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>श्राद्ध का मूल आधार श्रद्धा</strong></h3>
<p dir="ltr">गायत्री परिवार के कार्यकर्ता गिरधारी लाल मालवीया ने श्राद्ध-तर्पण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में पितरों की स्मृति में श्राद्ध, तर्पण, दान-पुण्य और ब्राह्मण भोजन की परंपरा रही है। श्राद्ध का मूल आधार श्रद्धा है। इसके जरिए संतान अपने माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करती है, जिन्होंने जीवन के साथ संस्कार भी दिए।</p>
<p dir="ltr"><img decoding="async" class="size-medium wp-image-366111 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.47.30-am-1-225x300.jpeg" alt="whatsapp image 2026 10 10 at 4.47.30 am 1" width="225" height="300" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.47.30-am-1-225x300.jpeg 225w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.47.30-am-1-768x1024.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.47.30-am-1-1152x1536.jpeg 1152w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.47.30-am-1.jpeg 1200w" sizes="(max-width: 225px) 100vw, 225px" /></p>
<h3 dir="ltr"><strong>&#8220;जीवित माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा श्राद्ध&#8221;</strong></h3>
<p dir="ltr">उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध-तर्पण से पितरों की शांति और सद्गति की कामना की जाती है। गायत्री परिवार इस बात पर भी विशेष जोर देता है कि जीवित माता-पिता, गुरुजनों और बुजुर्गों की सेवा-सत्कार किया जाए। उनके जीवनकाल में उनकी जरूरतों का ध्यान रखना और सम्मान करना ही सबसे बड़ा श्राद्ध है।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>दान-पुण्य, वृक्षारोपण और ज्ञानदान का महत्व</strong></h3>
<p dir="ltr">उन्होंने कहा कि पितरों की स्मृति में दान-पुण्य, वृक्षारोपण और ज्ञानदान जैसे सत्कर्म भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे कार्य समाज में सेवा, सद्भाव और संस्कारों की भावना को मजबूत करते हैं।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>ये रहे उपस्थित</strong></h3>
<p dir="ltr">कार्यक्रम में चंदर मुवेल, मांगीलाल मुवेल, मनोहर जर्मन, भारत वास्केल, रामा मुवेल सहित देवरा, सीतापुरी, सनमोड़ और लुंहेरा क्षेत्र के गायत्री परिवार के परिजन शामिल हुए।</p>
<p dir="ltr">
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Nagda : पवित्र चर्मण्वती के तट पर विसर्जित हुए आस्था के पिंड, नागदा में 71 पीढ़ियों की मोक्ष कामना से हुआ सामूहिक तर्पण</title>
		<link>https://swarajvani.com/offerings-immersed-on-banks-of-sacred-in-nagda/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 Oct 2026 11:56:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[nagda]]></category>
		<category><![CDATA[Bal Hanuman Mandir]]></category>
		<category><![CDATA[Brahmin Samaj Nagda]]></category>
		<category><![CDATA[Chambal River]]></category>
		<category><![CDATA[Charmanvati]]></category>
		<category><![CDATA[Pind Daan]]></category>
		<category><![CDATA[Pitru Tarpan]]></category>
		<category><![CDATA[Sarvapitri Amavasya]]></category>
		<category><![CDATA[Ujjain News]]></category>
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					<description><![CDATA[पवित्र चर्मण्वती के तट पर विसर्जित हुए आस्था के पिंड, नागदा में 71 पीढ़ियों की मोक्ष कामना से हुआ सामूहिक तर्पण, चंबल तट पर घाट निर्माण की मांग उठी सर्वपितृ ... <a title="Nagda : पवित्र चर्मण्वती के तट पर विसर्जित हुए आस्था के पिंड, नागदा में 71 पीढ़ियों की मोक्ष कामना से हुआ सामूहिक तर्पण" class="read-more" href="https://swarajvani.com/offerings-immersed-on-banks-of-sacred-in-nagda/" aria-label="Read more about Nagda : पवित्र चर्मण्वती के तट पर विसर्जित हुए आस्था के पिंड, नागदा में 71 पीढ़ियों की मोक्ष कामना से हुआ सामूहिक तर्पण">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h2 dir="ltr"><strong>पवित्र चर्मण्वती के तट पर विसर्जित हुए आस्था के पिंड, नागदा में 71 पीढ़ियों की मोक्ष कामना से हुआ सामूहिक तर्पण, चंबल तट पर घाट निर्माण की मांग उठी</strong></h2>
<p dir="ltr"><strong>सर्वपितृ अमावस्या पर लगातार 12वें वर्ष निःशुल्क सामूहिक तर्पण-पिंडदान, करीब 600 श्रद्धालुओं ने की सहभागिता, वृद्धाश्रम के दिवंगत बुजुर्गों के निमित्त भी हुआ पितृकर्म</strong></p>
<p dir="ltr"><strong>Nagda ।</strong> महाकाल वन की धार्मिक परंपरा से जुड़ी प्राचीन चर्मण्वती नदी (चंबल) के तट पर सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर श्रद्धा और सनातन संस्कारों का अनूठा संगम देखने को मिला। बाल हनुमान मंदिर परिसर में ब्राह्मण समाज नागदा युवा संस्कार परिवार के तत्वावधान में लगातार 12वें वर्ष निःशुल्क सामूहिक पितृ तर्पण और पिंडदान का आयोजन हुआ। नागदा और आसपास के क्षेत्रों से लगभग 600 श्रद्धालुओं ने अपने पितरों के निमित्त तिलांजलि, जलांजलि और पिंडदान किया।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 71 पीढ़ियों के निमित्त पितृकर्म</strong></h3>
<p dir="ltr">आचार्य पं. अजय पंड्या और पं. दीपक पंड्या ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन, तर्पण और पिंडदान की विधियां संपन्न कराईं। धार्मिक मान्यता के अनुसार कुटुंब की 71 पीढ़ियों के पूर्वजों की आत्मशांति और मोक्ष की कामना से श्रद्धालुओं ने पितृकर्म किया। इसके बाद पितृदेव की आरती कर श्रद्धालु चंबल तट पहुंचे, जहां विधि-विधान से पिंडों का विसर्जन किया गया। मंत्रोच्चार और श्रद्धालुओं की उपस्थिति से वातावरण भक्तिमय हो गया।</p>
<p dir="ltr"><img decoding="async" class="size-medium wp-image-366056 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.46.39-am-1-300x169.jpeg" alt="whatsapp image 2026 10 10 at 4.46.39 am 1" width="300" height="169" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.46.39-am-1-300x169.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.46.39-am-1-1024x576.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.46.39-am-1-768x432.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.46.39-am-1.jpeg 1280w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<h3 dir="ltr"><strong>निःशुल्क सुविधा देना है आयोजन का उद्देश्य</strong></h3>
<p dir="ltr">कार्यक्रम संयोजक निलेश मेहता ने बताया कि इस अनुष्ठान का उद्देश्य आर्थिक या अन्य कारणों से तीर्थस्थलों पर जाकर पितृकर्म न कर पाने वाले परिवारों को स्थानीय स्तर पर निःशुल्क धार्मिक सुविधा देना और युवा पीढ़ी को सनातन परंपराओं से जोड़ना है। श्रद्धालुओं को पूजन सामग्री निःशुल्क उपलब्ध कराई गई और समापन पर फलाहार की व्यवस्था भी की गई।</p>
<p dir="ltr"><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-366055 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.46.39-am-2-300x169.jpeg" alt="whatsapp image 2026 10 10 at 4.46.39 am 2" width="300" height="169" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.46.39-am-2-300x169.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.46.39-am-2-1024x576.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.46.39-am-2-768x432.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.46.39-am-2.jpeg 1280w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<h3 dir="ltr"><strong>वृद्धाश्रम के बुजुर्गों के निमित्त भी किया तर्पण</strong></h3>
<p dir="ltr">आयोजन में मानवीय संवेदना का भाव भी दिखा। नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि ओ.पी. गहलोत ने वृद्धाश्रम में रहने वाले दो बुजुर्गों की आत्मशांति और मोक्ष की कामना से पितृ तर्पण किया। बताया गया कि इन बुजुर्गों के निधन पर उन्होंने पुत्रधर्म निभाते हुए अंतिम संस्कार में मुखाग्नि भी दी थी।</p>
<p dir="ltr"><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-366054 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.48.15-am-300x139.jpeg" alt="whatsapp image 2026 10 10 at 4.48.15 am" width="300" height="139" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.48.15-am-300x139.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.48.15-am-1024x473.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.48.15-am-768x355.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.48.15-am.jpeg 1280w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<h3 dir="ltr"><strong>चंबल तट पर व्यवस्थित घाट निर्माण की मांग</strong></h3>
<p dir="ltr">आयोजन के दौरान चंबल तट पर स्थायी और व्यवस्थित घाट के निर्माण की आवश्यकता भी उठाई गई। समाजजनों ने नागदा-खाचरौद विधायक डॉ. तेज बहादुर सिंह चौहान सहित जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए घाट के साथ शेड का भी निर्माण कराया जाए। सर्वपितृ अमावस्या सहित अन्य धार्मिक अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां तर्पण और पिंडदान के लिए आते हैं, लेकिन घाट और शेड के अभाव में उन्हें असुविधा होती है।</p>
<p dir="ltr"><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-366053 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.48.15-am-1-300x139.jpeg" alt="whatsapp image 2026 10 10 at 4.48.15 am 1" width="300" height="139" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.48.15-am-1-300x139.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.48.15-am-1-1024x473.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.48.15-am-1-768x355.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.48.15-am-1-1536x709.jpeg 1536w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.48.15-am-1.jpeg 1600w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<h3 dir="ltr"><strong>ये रहे उपस्थित</strong></h3>
<p dir="ltr">कार्यक्रम में विधायक डॉ. तेज बहादुर सिंह चौहान, सांसद प्रतिनिधि एवं नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि ओ.पी. गहलोत, भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष विजय पटेल, कमलेश प्रजापत, मोती सिंह शेखावत, डॉ. प्रदीप रावल, डॉ. अनिल दुबे, प्रेस क्लब अध्यक्ष दीपक चौहान, संजय शर्मा, नंदकिशोर शर्मा, सुरेश उपाध्याय, देवेंद्र पांडे, चंदन सिंह व्यास, गोपाल सुनहरे, नरेंद्र शर्मा सहित कई गणमान्य नागरिक और पदाधिकारी उपस्थित रहे। अतिथियों का दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया गया।</p>
<p dir="ltr"><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-366052 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.51.43-am-300x169.jpeg" alt="whatsapp image 2026 10 10 at 4.51.43 am" width="300" height="169" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.51.43-am-300x169.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.51.43-am-1024x576.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.51.43-am-768x432.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-10-at-4.51.43-am.jpeg 1280w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<h3 dir="ltr"><strong>इनका रहा सहयोग</strong></h3>
<p dir="ltr">व्यवस्थाओं में शेखर जोशी, पंडित अशोक मृदुल शर्मा, पंडित कमलेश शर्मा, पं. दिव्यांश पंड्या, दिलीप पोरवाल, सत्तू पोरवाल, अनिल मोहनभोग, वर्षा मेहता, मुकुंद मेहता और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहयोग दिया। संयोजक निलेश मेहता ने वैदिक आचार्यों, श्रद्धालुओं, अतिथियों, जनप्रतिनिधियों, मीडिया और सहयोगियों का आभार जताया।</p>
<p dir="ltr">
<p dir="ltr">
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>कृष्णासिंधु तट पर गूंजे वेदमंत्र, सामूहिक तर्पण से अभिसिंचित हुई श्रद्धा</title>
		<link>https://swarajvani.com/english-heading-collective-pind-daan-and-tarpan-held-at-kapileshwar-tirth-on-sarvapitri/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 Oct 2026 11:33:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Sarangpur]]></category>
		<category><![CDATA[angpur News]]></category>
		<category><![CDATA[Gautam Tetwal]]></category>
		<category><![CDATA[Kapileshwar Tirth]]></category>
		<category><![CDATA[Krishna Sindhu River]]></category>
		<category><![CDATA[Mahadev Mitra Mandal]]></category>
		<category><![CDATA[Pind Daan]]></category>
		<category><![CDATA[Sanatan Tradition]]></category>
		<category><![CDATA[Sarvapitri Amavasya]]></category>
		<category><![CDATA[Tarpan Ceremony]]></category>
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					<description><![CDATA[कृष्णासिंधु तट पर गूंजे वेदमंत्र, सामूहिक तर्पण से अभिसिंचित हुई श्रद्धा सारंगपुर। सर्वपितृ अमावस्या के पुण्य अवसर पर कृष्णासिंधु नदी के पावन तट स्थित कपिलेश्वर तीर्थ धाम में सामूहिक पिंडदान ... <a title="कृष्णासिंधु तट पर गूंजे वेदमंत्र, सामूहिक तर्पण से अभिसिंचित हुई श्रद्धा" class="read-more" href="https://swarajvani.com/english-heading-collective-pind-daan-and-tarpan-held-at-kapileshwar-tirth-on-sarvapitri/" aria-label="Read more about कृष्णासिंधु तट पर गूंजे वेदमंत्र, सामूहिक तर्पण से अभिसिंचित हुई श्रद्धा">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>कृष्णासिंधु तट पर गूंजे वेदमंत्र, सामूहिक तर्पण से अभिसिंचित हुई श्रद्धा</strong></h1>
<p><strong>सारंगपुर।</strong> सर्वपितृ अमावस्या के पुण्य अवसर पर कृष्णासिंधु नदी के पावन तट स्थित कपिलेश्वर तीर्थ धाम में सामूहिक पिंडदान एवं तर्पण कर्म श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। प्रातःकालीन बेला में वेदमंत्रों की मंगलध्वनि के बीच श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों का स्मरण कर जलांजलि अर्पित की। नगर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग इस धार्मिक आयोजन में शामिल हुए।</p>
<p>भारतीय संस्कृति में पितरों का स्मरण कृतज्ञता और संस्कारों की परंपरा से जुड़ा है। इसी भाव के साथ श्रद्धालुओं ने अंजलि में जल लेकर अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। आयोजन ने धार्मिक अनुष्ठान के साथ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का संदेश भी दिया। परिवारों और समाज के लोगों ने सामूहिक रूप से पूजा-विधि में भाग लेकर परंपरा का निर्वहन किया।</p>
<h2><strong>शास्त्रोक्त विधि से हुआ तर्पण</strong></h2>
<p>पं. पवन पारीक, पं. भूपेंद्र जोशी और पं. बालकृष्ण शर्मा के मार्गदर्शन में कर्मकांड शास्त्रोक्त विधि-विधान से संपन्न कराया गया। अनुष्ठान में देव-तर्पण, ऋषि-तर्पण, दिव्य एवं मनुष्य पितृ-तर्पण, द्वितीय गोत्र-तर्पण, पत्नी-आदि तर्पण तथा भीष्म-तर्पण की विधियां शामिल रहीं। इसके बाद सूर्य को अर्घ्य देने, सूर्योपस्थान, मुखमार्जन, विसर्जन और समर्पण की प्रक्रियाएं पूरी की गईं।</p>
<p>वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच श्रद्धालुओं ने ज्ञात-अज्ञात पितरों का स्मरण किया। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने अपने परिवार के दिवंगत सदस्यों के साथ उन सभी आत्माओं के लिए भी प्रार्थना की, जिनका स्मरण सामूहिक रूप से किया गया।</p>
<h2><strong>वीर सपूतों और असमय दिवंगतों को किया याद</strong></h2>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="wp-image-366015 alignright" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/hgggggggggggggggggggg-300x246.gif" alt="hgggggggggggggggggggg" width="393" height="322" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/hgggggggggggggggggggg-300x246.gif 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/hgggggggggggggggggggg-768x631.gif 768w" sizes="auto, (max-width: 393px) 100vw, 393px" /><span style="font-size: inherit;">इस आयोजन में पारिवारिक पूर्वजों के साथ मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरगति प्राप्त करने वाले वीर सपूतों को भी श्रद्धापूर्वक याद किया गया। दुर्घटनाओं में असमय दिवंगत हुए लोगों के लिए भी प्रार्थना की गई। इस पहल ने पितरों के प्रति पारिवारिक श्रद्धा को व्यापक सामाजिक संवेदना से जोड़ा। श्रद्धालुओं ने दिवंगत आत्माओं की शांति और सद्गति की कामना की।</span></p>
<h2><strong>आचार्यों का अंगवस्त्र भेंट कर अभिनंदन</strong></h2>
<p>आयोजन की धार्मिक गरिमा और सामाजिक महत्ता की सराहना करते हुए महादेव मित्र मंडल और सकल ब्राह्मण समाज सारंगपुर ने पं. पवन पारीक, पं. भूपेंद्र जोशी तथा पं. बालकृष्ण शर्मा का अंगवस्त्र भेंट कर अभिनंदन किया। इस दौरान सामूहिक धार्मिक आयोजन को सनातन परंपराओं के संरक्षण, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक जागरण की दिशा में प्रेरणादायी पहल बताया गया।</p>
<h2><strong>राज्यमंत्री गौतम टेटवाल ने भी किया तर्पण</strong></h2>
<p>मध्य प्रदेश शासन के राज्यमंत्री गौतम टेटवाल ने कपिलेश्वर तीर्थ में कृष्णासिंधु नदी में स्नान कर कपिलेश्वर भगवान का पूजन किया। इसके बाद उन्होंने सामूहिक पिंडदान और तर्पण कर्म में भाग लेकर पितरों को जलांजलि अर्पित की। उन्होंने आयोजन को सामाजिक और आध्यात्मिक बंधुत्व का प्रतीक बताया। उनके अनुसार, प्रतिवर्ष सामूहिक रूप से होने वाला यह अनुष्ठान लोगों को एक सूत्र में जोड़ता है और धार्मिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में योगदान देता है।</p>
<p>आयोजन की सफलता पर आचार्य पं. पवन पारीक, पं. भूपेंद्र जोशी और पं. बालकृष्ण शर्मा ने नगर एवं क्षेत्र से आए श्रद्धालुओं, समाजजनों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। महादेव मित्र मंडल के अध्यक्ष जितेंद्र सोलंकी और सकल ब्राह्मण समाज सारंगपुर नगर अध्यक्ष आशुतोष वैद्य ने कहा कि कृष्णासिंधु तट पर हुआ यह आयोजन श्रद्धा, संस्कार और संस्कृति का संगम बना। सैकड़ों श्रद्धालुओं की सहभागिता ने आयोजन को व्यापक रूप दिया और पूर्वजों के स्मरण के साथ परंपरा को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>श्राद्ध पक्ष में बनाई संजा बाई को पड़ाना में विसर्जित कर दी गई विदाई, 16 दिन तक कन्याओं ने बनाईं दीवारों पर आकृतियाँ</title>
		<link>https://swarajvani.com/sanja-bai-bid-farewell-with-immersion-in-padana/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 Oct 2026 09:28:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Padana]]></category>
		<category><![CDATA[Padana News]]></category>
		<category><![CDATA[Pitru Moksha]]></category>
		<category><![CDATA[Sanja Bai]]></category>
		<category><![CDATA[Sanjavali]]></category>
		<category><![CDATA[Sarvapitri Amavasya]]></category>
		<category><![CDATA[Shraddh Paksha]]></category>
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					<description><![CDATA[श्राद्ध पक्ष में बनाई संजा बाई को पड़ाना में विसर्जित कर दी गई विदाई, 16 दिन तक कन्याओं ने बनाईं दीवारों पर आकृतियाँ भाद्रपद पूर्णिमा से सर्वपितृ अमावस्या तक चला ... <a title="श्राद्ध पक्ष में बनाई संजा बाई को पड़ाना में विसर्जित कर दी गई विदाई, 16 दिन तक कन्याओं ने बनाईं दीवारों पर आकृतियाँ" class="read-more" href="https://swarajvani.com/sanja-bai-bid-farewell-with-immersion-in-padana/" aria-label="Read more about श्राद्ध पक्ष में बनाई संजा बाई को पड़ाना में विसर्जित कर दी गई विदाई, 16 दिन तक कन्याओं ने बनाईं दीवारों पर आकृतियाँ">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h2 dir="ltr"><strong>श्राद्ध पक्ष में बनाई संजा बाई को पड़ाना में विसर्जित कर दी गई विदाई, 16 दिन तक कन्याओं ने बनाईं दीवारों पर आकृतियाँ</strong></h2>
<p dir="ltr"><strong>भाद्रपद पूर्णिमा से सर्वपितृ अमावस्या तक चला संजा पर्व, गीत-पूजन के बाद नदी में हुआ विसर्जन</strong></p>
<p dir="ltr"><strong>पड़ाना।</strong> श्राद्ध पक्ष में पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है, यह तो सभी जानते हैं, लेकिन इन 16 दिनों में संजा बनाने की परंपरा भी रही है। आज भी शहरों और गाँवों में घरों की दीवारों पर गोबर से संजा बनाई जाती है। ग्राम पड़ाना में संजा माता की विदाई के साथ इस वर्ष का संजा पर्व संपन्न हुआ।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>भाद्रपद पूर्णिमा से पितृ मोक्ष अमावस्या तक चलता है पर्व</strong></h3>
<p dir="ltr">भाद्रपद माह की शुक्ल पूर्णिमा से पितृ मोक्ष अमावस्या तक कन्याओं द्वारा संजा बाई का पर्व मनाया जाता है। यह परंपरा अधिकांशतः मालवा, निमाड़, राजस्थान सहित अन्य क्षेत्रों में प्रचलित है।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>16 दिन तक बनीं अलग-अलग आकृतियाँ</strong></h3>
<p dir="ltr">श्राद्ध पक्ष के 16 दिनों तक रोज लड़कियों ने दीवारों पर अलग-अलग प्रकार की आकृतियाँ बनाईं। शाम को पूजा-अर्चना कर संजा बाई के गीत गाए गए और प्रसाद का भोग लगाया गया।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>सर्वपितृ अमावस्या पर नदी में विसर्जन</strong></h3>
<p dir="ltr">पर्व के अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या पर 16 दिन में बनाई गईं सूखी आकृतियों को नदी में विसर्जित किया गया। पूजा-अर्चना के बाद शनिवार को संजा बाई को विदाई दी गई।</p>
<h3 dir="ltr"><strong>इन बालिकाओं ने बनाईं संजा</strong></h3>
<p dir="ltr">ग्राम पड़ाना में 16 दिनों तक एक से बढ़कर एक संजा बाई की आकृतियाँ संस्कृतिका सेन, पीहू पाटीदार, नेनु सेन, कनक सेन, हर्षिता गुर्जर और करुणा सेन सहित अन्य लड़कियों ने बनाईं।</p>
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