गायत्री शक्तिपीठ में श्रद्धा और उल्लास से मनाया सर्वपितृ अमावस्या महोत्सव — दैनिक स्वराज वाणी
रिपोर्टर: मुकेश सोलंकी
भीनमाल सर्वपितृ अमावस्या के पावन अवसर पर गायत्री शक्तिपीठ भीनमाल में सामूहिक तर्पण कार्यक्रम आयोजित किया गया। गायत्री परिजनों ने श्रद्धा और कृतज्ञता के साथ अपने पूर्वजों का स्मरण किया और उन्हें जल अर्पित कर तर्पण किया। कार्यक्रम में पितरों के प्रति सम्मान, पारिवारिक संस्कारों और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता महेश व्यास ने अपने उद्बोधन में कहा कि पितर परिवार के अदृश्य सहायक होते हैं। पूर्वजों के त्याग, संस्कार और जीवन मूल्यों से परिवार तथा समाज की नींव मजबूत होती है। उनका स्मरण करना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने और परिवार के संस्कारों को जीवित रखने का माध्यम है।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और मूल से जोड़ना जरूरी है। पूर्वजों के जीवन, उनके संघर्ष और उनके द्वारा दिए गए संस्कारों की जानकारी बच्चों तक पहुंचनी चाहिए। ऐसे आयोजन परिवार और समाज को अपनी परंपराओं से परिचित कराने का अवसर देते हैं। सामूहिक तर्पण में सहभागिता से श्रद्धालु पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और उनकी स्मृति को बनाए रखते हैं।
सर्वपितृ अमावस्या का धार्मिक महत्व बताया
कार्यक्रम में हरिकृष्ण द्विवेदी ने सर्वपितृ अमावस्या के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जिन लोगों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका श्राद्ध किसी कारण से छूट गया है, उनके निमित्त भी इस दिन तर्पण और दान-पुण्य करना फलदायी माना जाता है। सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है। इस अवसर पर पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करने की परंपरा है। पीपल पूजन का भी विशेष महत्व बताया गया।
उन्होंने कहा कि इस दिन श्रद्धालु अपने पूर्वजों का स्मरण कर उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करते हैं। जिन परिवारों में पितरों की मृत्यु तिथि का पता नहीं होता, वे भी सर्वपितृ अमावस्या पर उनके निमित्त धार्मिक कर्म कर सकते हैं। इसी कारण इस दिन सामूहिक रूप से तर्पण करने की परंपरा कई स्थानों पर निभाई जाती है।
सामूहिक तर्पण में गायत्री परिजनों की सहभागिता
गायत्री शक्तिपीठ में आयोजित कार्यक्रम में गायत्री परिजनों ने विधि-विधान के साथ जलार्पण और तर्पण किया। श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों को याद करते हुए परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। पूरे आयोजन में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण रहा। सामूहिक रूप से हुए तर्पण में बड़ी संख्या में परिजनों ने भाग लेकर अपनी परंपरा का निर्वहन किया।
कार्यक्रम में पहाड़सिंह राव, डॉ. दिनेश परमार, डॉ. अवनी पटेल, केशरसिंह, मदनसिंह राव, राजेन्द्रसिंह राव, नागसिंह राव, ईश्वरसिंह सेवड़ी, राणमल शर्मा, चतुर्भुज राठी, बंशीधर राठी, हीरालाल सोलंकी, मोतीलाल सोलंकी, जसराज सुथार, कोलचंद सोनी, पूर्णा सोनी और नैनाराम चौहान सहित बड़ी संख्या में गायत्री परिजन उपस्थित रहे।
सर्वपितृ अमावस्या पर आयोजित यह कार्यक्रम पितरों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर बना। वक्ताओं ने परंपराओं को समझने और उन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया। सामूहिक तर्पण के माध्यम से उपस्थित श्रद्धालुओं ने पूर्वजों की स्मृति को नमन किया।
