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	<title>Paryushan 2026 &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<title>Paryushan 2026 &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>चंपाबाग जैन मंदिर में उत्तम त्याग धर्म की आराधना, पंचामृत अभिषेक और शांतिधारा हुई</title>
		<link>https://swarajvani.com/uttam-tyag-observed-at-champabagh-jain-temple-in-gwalior-during/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Sep 2026 12:51:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चंपाबाग जैन मंदिर में उत्तम त्याग धर्म की आराधना, पंचामृत अभिषेक और शांतिधारा हुई पर्युषण महापर्व के आठवें दिन श्रद्धालुओं ने पूजन कर अर्घ्य समर्पित किए; गुरुवार को होगी उत्तम ... <a title="चंपाबाग जैन मंदिर में उत्तम त्याग धर्म की आराधना, पंचामृत अभिषेक और शांतिधारा हुई" class="read-more" href="https://swarajvani.com/uttam-tyag-observed-at-champabagh-jain-temple-in-gwalior-during/" aria-label="Read more about चंपाबाग जैन मंदिर में उत्तम त्याग धर्म की आराधना, पंचामृत अभिषेक और शांतिधारा हुई">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>चंपाबाग जैन मंदिर में उत्तम त्याग धर्म की आराधना, पंचामृत अभिषेक और शांतिधारा हुई</strong></h1>
<p><strong>पर्युषण महापर्व के आठवें दिन श्रद्धालुओं ने पूजन कर अर्घ्य समर्पित किए; गुरुवार को होगी उत्तम आकिंचन धर्म की आराधना</strong></p>
<p><strong>ग्वालियर।</strong> पर्युषण महापर्व के आठवें दिन बुधवार को दाना ओली स्थित दिगंबर बीसपंथी चंपाबाग जैन मंदिर में उत्तम त्याग धर्म की आराधना की गई। आत्म साधना वर्षायोग समिति और सकल जैन समाज के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज एवं मुनिश्री अनुमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में संपन्न हुआ। जैन समाज के महिला, पुरुष, बालिकाओं और त्यागी-व्रती श्रद्धालुओं ने भगवान जिनेंद्र का अभिषेक कर पूजन में भाग लिया। गुरुवार, 24 सितंबर को पर्युषण के नौवें दिन उत्तम आकिंचन धर्म की आराधना की जाएगी।</p>
<h3><strong>108 मंत्रों के साथ हुआ पंचामृत अभिषेक</strong></h3>
<p>जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि प्रतिष्ठाचार्य पंडित डॉ. आनंद प्रकाश शास्त्री के निर्देशन में श्रद्धालुओं ने 108 मंत्रों के उच्चारण के साथ भगवान जिनेंद्र का पंचामृत अभिषेक किया। मंदिर परिसर में जयकारों के बीच कलशों से अभिषेक किया गया। इसके बाद आचार्य श्री के सानिध्य में मंत्रोच्चार के साथ श्रीजी की बृहद शांतिधारा हुई।</p>
<p>अभिषेक और शांतिधारा के बाद दशलक्षण पूजन आरंभ हुई। श्रद्धालुओं ने पंचमेरू पूजा, नवदेवता पूजा और सोलह कारण पूजा के साथ उत्तम त्याग धर्म की आराधना की। अष्ट द्रव्य से पूजन करते हुए भगवान जिनेंद्र के समक्ष महाअर्घ्य समर्पित किए गए। संगीतमय भक्ति और नृत्य के साथ श्रद्धालुओं ने आयोजन में सहभागिता की। दस दिनों तक व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को आचार्य श्री ने जाप भी कराया।</p>
<h3><strong>त्याग के बाद अभिमान और आसक्ति न रखें: आचार्य चैत्य सागर</strong></h3>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="wp-image-360140 alignright" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/ytrgerftgsdfsd-300x192.jpg" alt="ytrgerftgsdfsd" width="388" height="248" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/ytrgerftgsdfsd-300x192.jpg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/ytrgerftgsdfsd-768x491.jpg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/ytrgerftgsdfsd.jpg 908w" sizes="(max-width: 388px) 100vw, 388px" /><span style="font-size: inherit;">धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज ने कहा कि त्याग का संस्कार प्रकृति से भी मिलता है। लौकिक जीवन हो या धार्मिक जीवन, त्याग के बिना कुछ प्राप्त नहीं होता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बाजार से कोई वस्तु लेने के लिए भी धन, समय और श्रम लगाना पड़ता है। इसी तरह आत्मिक निर्मलता के लिए त्याग आवश्यक है।</span></p>
<p>आचार्य श्री ने कहा कि त्याग करने से पहले मान का त्याग करना चाहिए। किसी वस्तु को छोड़ देने के बाद उसके प्रति अभिमान या आसक्ति बनी रहे, तो त्याग का उद्देश्य पूरा नहीं होता। उन्होंने श्रद्धालुओं को त्याग धर्म सुनकर अपने जीवन में कुछ न कुछ छोड़ने का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया। आचार्य श्री ने कहा, “त्याग में सुख है, राग में दुःख है।” उनके अनुसार त्याग आत्मा को निर्मल बनाता है और जीवन में सुख का मार्ग खोलता है।</p>
<p>धर्मसभा के दौरान समिति के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र गंगवाल, सचिव निर्मल पाटनी, विकास गंगवाल, विनय कासलीवाल, पंकज छाबड़ा और संजय गोधा सहित अन्य सदस्यों ने आचार्य श्री के चरणों में श्रीफल समर्पित किया।</p>
<h3><strong>कषायों को छोड़ना भी उत्तम त्याग: मुनिश्री अनुमान सागर</strong></h3>
<p><img decoding="async" class="wp-image-360138 alignright" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/dwsdsad-300x201.jpg" alt="dwsdsad" width="393" height="263" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/dwsdsad-300x201.jpg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/dwsdsad-768x514.jpg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/dwsdsad.jpg 953w" sizes="(max-width: 393px) 100vw, 393px" /><span style="font-size: inherit;">मुनिश्री अनुमान सागर महाराज ने कहा कि त्याग केवल वस्तुओं को छोड़ने तक सीमित नहीं है। सांसारिक सुख-सुविधाओं को भोगने की अनावश्यक इच्छा से बचना और आवश्यकता से अधिक वस्तुओं तथा धन का संग्रह न करना भी त्याग धर्म का हिस्सा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपनी आवश्यकताओं पर विचार करने और अनावश्यक संग्रह से दूर रहने का आह्वान किया।</span></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि क्रोध आदि कषायों का त्याग करना भी उत्तम त्याग धर्म है। अच्छे कर्म और संयम व्यक्ति के चरित्र निर्माण में सहायक होते हैं। धर्मसभा में मौजूद श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री और मुनिश्री के प्रवचन सुने तथा पूजन-अर्चना के माध्यम से उत्तम त्याग धर्म की आराधना की।</p>
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		<title>नवकार मंत्र ने बदली जापानियों की जिंदगी! 34 जापानी पहुंचे भारत, 25 वर्षों से कर रहे आराधना</title>
		<link>https://swarajvani.com/navkar-mahamantra-japanese-devotees/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 19 Sep 2026 15:42:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[JAINS]]></category>
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					<description><![CDATA[नवकार महामंत्र से प्रभावित 34 जापानी नागरिक भारत में पर्यूषण पर्व की आराधना कर रहे हैं। मनोचिकित्सक चूरूसी मियाजावा ने बताया कि कैसे नवकार जाप ने उनके जीवन में सकारात्मक ... <a title="नवकार मंत्र ने बदली जापानियों की जिंदगी! 34 जापानी पहुंचे भारत, 25 वर्षों से कर रहे आराधना" class="read-more" href="https://swarajvani.com/navkar-mahamantra-japanese-devotees/" aria-label="Read more about नवकार मंत्र ने बदली जापानियों की जिंदगी! 34 जापानी पहुंचे भारत, 25 वर्षों से कर रहे आराधना">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नवकार महामंत्र से प्रभावित 34 जापानी नागरिक भारत में पर्यूषण पर्व की आराधना कर रहे हैं। मनोचिकित्सक चूरूसी मियाजावा ने बताया कि कैसे नवकार जाप ने उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया।</p>
<h1>जापानियों के जीवन में नवकार मंत्र जाप ने लाया सकारात्मक परिवर्तन, 25 वर्षों से जापान में हो रही नवकार आराधना</h1>
<p class="isSelectedEnd"><strong>दीपक जैन</strong></p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>मुंबई।</strong> <strong>नवकार महामंत्र</strong> की आराधना ने जापान के कई नागरिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है। जापान की मनोचिकित्सक <strong>चूरूसी मियाजावा</strong> के अनुसार नवकार महामंत्र के नियमित जाप से उन्हें असीम शांति और मानसिक स्थिरता का अनुभव हुआ। पिछले करीब 25 वर्षों से जापान में नवकार आराधना की जा रही है और अब जापान से आए 34 नागरिक भारत में जैन धर्म के पर्यूषण पर्व की आराधना में लीन हैं।</p>
<h2>10 वर्ष की उम्र में जैन धर्म से प्रभावित हुईं चूरूसी मियाजावा</h2>
<p class="isSelectedEnd">धाराप्रवाह हिंदी बोलने वाली जापान की मनोचिकित्सक <strong>चूरूसी मियाजावा</strong> बताती हैं कि वर्ष 2004 में महज 10 वर्ष की उम्र में भारत यात्रा के दौरान जैसलमेर के जैन मंदिरों और जैन धर्म की शिक्षाओं ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">जन्म से बौद्ध मियाजावा का कहना है कि जैन धर्म और <strong>त्रिस्तुतिक संघ नायक, गच्छाधिपति आचार्य जयंतसेन सूरीश्वरजी</strong> से उनका संबंध उन्हें किसी पुराने आध्यात्मिक रिश्ते जैसा महसूस होता है। उनका दावा है कि आचार्य के प्रत्यक्ष दर्शन से पहले ही वे उन्हें स्वप्न में देख चुकी थीं। जब पहली बार आचार्य के साक्षात दर्शन हुए तो वे स्वयं भी इस संयोग से आश्चर्यचकित रह गईं।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसके बाद उनकी आध्यात्मिक यात्रा शुरू हुई, जो आज तक जारी है। गुरुदेव से <strong>नवकार महामंत्र</strong> का अर्थ समझने के बाद उन्होंने जापान में इसके प्रचार-प्रसार का कार्य शुरू किया।</p>
<h2>पर्यूषण पर्व की आराधना में जुटे 34 जापानी नागरिक</h2>
<p class="isSelectedEnd">श्री त्रिस्तुतिक संघ में चातुर्मास हेतु विराजमान पुण्य सम्राट के शिष्य एवं प्रखर प्रवचनकार <strong>मुनिराज श्री निपुणरत्न विजयजी म.सा.</strong> के सानिध्य में 34 जापानी नागरिक जैन धर्म के पर्यूषण पर्व की आराधना में लीन हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">इनमें <strong>9 पुरुष और 25 महिलाएं</strong> शामिल हैं। डॉक्टर, नर्स, बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ इंजीनियर और विद्यार्थी भी इस समूह का हिस्सा हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">जापान से भारत आकर जैन धर्म की साधना कर रहे इन लोगों का कहना है कि <strong>नवकार महामंत्र</strong> ने उनके जीवन की दिशा बदल दी है। पर्यूषण पर्व के दिनों में वे न केवल सभी नियमों का पालन कर रहे हैं, बल्कि स्वयं को मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों से भी दूर रख रहे हैं।</p>
<h2>नवकार महामंत्र में व्यक्ति नहीं, गुणों की स्तुति</h2>
<p class="isSelectedEnd">मियाजावा के अनुसार गुरुदेव से मिलने और नवकार महामंत्र को समझने के बाद उन्हें आभास हुआ कि यह जैन धर्म का सबसे पवित्र, सारगर्भित और अनादि मंत्र है। इसे नमस्कार मंत्र, पंच-नमस्कार मंत्र और मूल मंत्र भी कहा जाता है। यह किसी व्यक्ति की स्तुति नहीं, बल्कि गुणों की स्तुति है।</p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>नवकार मंत्र का स्वरूप—</strong></p>
<p class="isSelectedEnd">णमो अरिहंताणं,<br />
णमो सिद्धाणं,<br />
णमो आयरियाणं,<br />
णमो उवज्झायाणं,<br />
णमो लोए सव्वसाहूणं।<br />
एसो पंच णमोक्कारो,<br />
सव्वपावप्पणासणो।<br />
मंगलाणं च सव्वेसिं,<br />
पढमं हवइ मंगलं।</p>
<p class="isSelectedEnd">मियाजावा कहती हैं कि इसका अर्थ पांच पदों को नमस्कार करना है। उनके अनुसार <strong>नवकार महामंत्र का जाप</strong> करने से उन्हें असीम शांति मिलती है।</p>
<h2>पांच पदों का बताया महत्व</h2>
<p class="isSelectedEnd">मियाजावा के अनुसार अरिहंत पद उन अरिहंतों को समर्पित है जिन्होंने क्रोध, मान, माया और लोभ रूपी चार घाती कर्मों का नाश किया और जो मार्ग दिखाते हैं। सिद्ध वे हैं जिन्होंने सभी आठ कर्म नष्ट कर मोक्ष प्राप्त किया और सिद्धशिला पर विराजमान हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">आचार्य पद उन आचार्यों के लिए है जो पंचाचार का स्वयं पालन करते हैं और साधु-साध्वियों को पालन कराते हैं। उपाध्याय जैन शास्त्रों का ज्ञान देते हैं और 11 अंग व 14 पूर्व के ज्ञाता माने जाते हैं। साधु संसार से विरक्त होकर आत्म-कल्याण के मार्ग पर चलते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">मियाजावा के अनुसार इसकी विशेषता यह है कि इसमें किसी व्यक्ति के नाम के बजाय पद और गुणों को वंदन किया जाता है। उनका कहना है कि किसी भी धर्म या जाति का व्यक्ति इन पांच पवित्र पदों को वंदन कर सकता है।</p>
<p><a href="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/whatsapp-image-2026-09-19-at-6.52.17-pm-1-1.jpeg"><img decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-359254" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/whatsapp-image-2026-09-19-at-6.52.17-pm-1-1.jpeg" alt="whatsapp image 2026 09 19 at 6.52.17 pm 1 1" width="718" height="1004" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/whatsapp-image-2026-09-19-at-6.52.17-pm-1-1.jpeg 718w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/whatsapp-image-2026-09-19-at-6.52.17-pm-1-1-215x300.jpeg 215w" sizes="(max-width: 718px) 100vw, 718px" /></a></p>
<h2>108 गुणों का प्रतीक है नवकार महामंत्र</h2>
<p class="isSelectedEnd">मियाजावा बताती हैं कि <strong>नवकार महामंत्र</strong> में पांच पदों के कुल 108 गुणों को नमस्कार किया गया है। इनमें अरिहंत के 12, सिद्ध के 8, आचार्य के 36, उपाध्याय के 25 और साधु के 27 गुण बताए गए हैं। माला के 108 मनकों को भी इन्हीं गुणों का प्रतीक माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उनका कहना है कि नियमित नवकार जाप से मन में चल रहे विचार शांत होते हैं और यह उनके लिए ध्यान का माध्यम भी बना है। जैन धार्मिक मान्यता के अनुसार मंत्र को कर्म निर्जरा, राग-द्वेष में कमी और आध्यात्मिक कल्याण से भी जोड़ा जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मियाजावा बताती हैं कि गुरुजी से नवकार महामंत्र का अर्थ समझने के बाद उन्होंने जापान में इसके प्रचार-प्रसार का संकल्प लिया। उन्होंने <strong>‘नवकार महिमा’ का जापानी भाषा में अनुवाद</strong> भी किया है।</p>
<h2>गुरु की सीख को जारी रखा : निपुणरत्न विजयजी</h2>
<p class="isSelectedEnd"><strong>जयंतसेन सूरीश्वरजी के शिष्य मुनिराज श्री निपुणरत्न विजयजी</strong> कहते हैं कि गुरु के न होने पर भी इन जापानी नागरिकों का समर्पण भाव देखकर बहुत अच्छा लगता है कि वे उनके बताए मार्ग का अनुसरण कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि जीवन में गुरु का होना सौभाग्य है, लेकिन गुरु के शारीरिक रूप से न होने पर भी उनके प्रति समर्पण बनाए रखना ही सच्चे शिष्य की पहचान है। समर्पण शरीर से नहीं, आत्मा से होता है।</p>
<p>मुनिराज ने कहा कि खुशी है कि ये श्रद्धालु गुरु के बताए नियमों का पालन कर रहे हैं, उनके दिए मंत्र और शिक्षा को नहीं भूले हैं और उनके दिखाए मार्ग से भटक नहीं रहे। यही सच्चा समर्पण है। जैसे सूर्य बादलों के पीछे छिप जाने पर भी प्रकाश देना बंद नहीं करता, वैसे ही सच्चा शिष्य गुरु के दिखाई न देने पर भी उनकी सीख को नहीं छोड़ता।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>नागदा पर्युषण पर्व अंगरचना: 8 दिनों तक नन्हे-मुन्नों और युवाओं ने दिखाई अद्भुत प्रतिभा</title>
		<link>https://swarajvani.com/nagda-paryushan-parv-angrachna/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 16 Sep 2026 14:54:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नागदा पर्युषण पर्व अंगरचना में नन्हे-मुन्नों और युवाओं ने आठ दिनों तक अद्भुत प्रतिभा दिखाई। जन्मवाचन के दिन दोनों जिनालयों की टीमें तड़के 3 बजे से प्रभु सेवा में जुटीं। ... <a title="नागदा पर्युषण पर्व अंगरचना: 8 दिनों तक नन्हे-मुन्नों और युवाओं ने दिखाई अद्भुत प्रतिभा" class="read-more" href="https://swarajvani.com/nagda-paryushan-parv-angrachna/" aria-label="Read more about नागदा पर्युषण पर्व अंगरचना: 8 दिनों तक नन्हे-मुन्नों और युवाओं ने दिखाई अद्भुत प्रतिभा">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नागदा पर्युषण पर्व अंगरचना में नन्हे-मुन्नों और युवाओं ने आठ दिनों तक अद्भुत प्रतिभा दिखाई। जन्मवाचन के दिन दोनों जिनालयों की टीमें तड़के 3 बजे से प्रभु सेवा में जुटीं।</p>
<h1>नागदा पर्युषण पर्व अंगरचना: 8 दिनों तक नन्हे-मुन्नों और युवाओं ने दिखाई अद्भुत प्रतिभा</h1>
<h2>भक्ति, कला और समर्पण का अद्भुत संगम, जन्मवाचन के दिन तड़के 3 बजे से प्रभु सेवा में जुटे कलाकार</h2>
<p class="isSelectedEnd"><strong>नागदा (ब्रजेश बोहरा)।</strong> <strong>नागदा पर्युषण पर्व अंगरचना</strong> के दौरान राजा जन्मेजय की धर्मनगरी नागदा में श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन श्रीसंघ के जिनालयों में धर्म, भक्ति, कला और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। जिनेन्द्र प्रभु की भक्ति में डूबे नन्हे-मुन्ने एवं युवा कलाकारों ने पर्युषण पर्व के सभी आठ दिनों में आकर्षक एवं मनमोहक अंगरचनाएं कर अपनी रचनात्मक प्रतिभा को प्रभु चरणों में समर्पित किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">इन अंगरचनाओं के पीछे केवल कला नहीं, बल्कि घंटों की मेहनत, लगन और गहरी आस्था भी रही। विशेष रूप से भगवान महावीर स्वामी के जन्मवाचन के दिन दोनों जिनालयों की अंगरचना टीमों के कलाकार तड़के करीब 3 बजे से ही जिनालय पहुंचकर तैयारियों में जुट गए।</p>
<p class="isSelectedEnd">जब अधिकांश लोग नींद में थे, तब इन नन्हे एवं युवा कलाकारों के हाथ प्रभु की अंगरचना को भव्य स्वरूप देने में जुटे थे। आंखों में नींद थी, लेकिन मन में प्रभु भक्ति का उजास और चेहरे पर उत्साह था।</p>
<p class="isSelectedEnd">कई घंटों की मेहनत के बाद जब अंगरचना पूर्ण हुई और श्रद्धालुओं ने प्रभु के मनोहारी स्वरूप के दर्शन किए, तो जिनालयों का वातावरण भक्तिभाव से भर उठा। श्रद्धालुओं ने कलाकारों की इस निस्वार्थ सेवा और अद्भुत कला की सराहना की।</p>
<h2>नागदा पर्युषण पर्व अंगरचना: चन्द्रप्रभु जिनालय में भक्ति से सजी प्रभु की अंगरचना</h2>
<p class="isSelectedEnd">पर्युषण पर्व के पंचम दिवस श्री चन्द्रप्रभु जिनालय एवं पार्श्व प्रधान पाठशाला भवन में दोनों ट्रस्ट मंडलों एवं चातुर्मास समिति के संयुक्त तत्वावधान में भगवान महावीर स्वामी के जन्मवाचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">जन्मवाचन के इस विशेष अवसर को यादगार बनाने के लिए अंगरचना कलाकारों ने तड़के करीब 3 बजे से ही तैयारियां प्रारंभ कर दी थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रभु के प्रति अपार श्रद्धा और सेवा भाव से तैयार की गई भव्य अंगरचना ने जिनालय की शोभा में चार चांद लगा दिए। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो कलाकारों ने फूलों, रंगों और सजावटी सामग्री के साथ अपनी भावनाएं भी प्रभु चरणों में अर्पित कर दी हों।</p>
<h2>शांतिनाथ जिनालय में भी गूंजा भक्ति और उल्लास</h2>
<p class="isSelectedEnd">पर्युषण पर्व के छठे दिवस रविवार को जैन कॉलोनी स्थित श्री शांतिनाथ जिनालय में श्री राजेन्द्र सूरि जैन ज्ञान मंदिर ट्रस्ट द्वारा भगवान महावीर स्वामी का जन्मवाचन कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ आयोजित किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">चातुर्मास के लिए विराजित पूज्य साध्वीश्री अहर्मव्रता श्रीजी म.सा. एवं साध्वीश्री की पावन निश्रा में आयोजित वीर जन्मवाचन समारोह में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की। जन्मवाचन के दौरान जिनालय का वातावरण भक्ति और उत्साह से भर उठा।</p>
<h2>तड़के 3 बजे से प्रभु सेवा में जुटे युवा और नन्हे कलाकार</h2>
<p class="isSelectedEnd">श्री शांतिनाथ जिनालय में पर्युषण पर्व के दौरान आठों दिन अंगरचना करने वाले युवा एवं नन्हे प्रभुभक्त कलाकारों तथा श्री महावीर संगीत मंडल के संगीतकारों ने पूरे उत्साह एवं निस्वार्थ भाव से अपनी सेवाएं दीं। विशेष रूप से जन्मवाचन के दिन कलाकार सुबह करीब 3 बजे से ही अंगरचना की तैयारियों में जुट गए।</p>
<p class="isSelectedEnd">टीम का कुशल संचालन <strong>राजेश गेलड़ा एवं यश गेलड़ा</strong> ने किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">टीम में <strong>हिमांशु गादिया, आदित्य मेहता, आयुष बोहरा, ऋषभ वागरेचा, तन्वी लोढ़ा, कार्तिक वागरेचा, पीयूष बोहरा, निशित ओरा, विपुल कोठारी, पार्श्व गेलड़ा, अर्हम गेलड़ा, आदिश कोठारी, तनिष कोठारी, मनन गेलड़ा, नक्ष गादिया एवं सिद्धार्थ बोहरा</strong> शामिल रहे।</p>
<h2>‘शृंगार ए जिनेन्द्र ग्रुप’ ने दिखाई कलात्मक प्रतिभा</h2>
<p class="isSelectedEnd">श्री चन्द्रप्रभु जिनालय में पर्युषण पर्व के दौरान प्रतिदिन आकर्षक अंगरचना करने वाली <strong>‘शृंगार ए जिनेन्द्र ग्रुप’</strong> की टीम ने भी अपनी कलात्मक प्रतिभा एवं जिनेन्द्र भक्ति का सुंदर परिचय दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">जन्मवाचन के विशेष दिन टीम के सदस्य भी तड़के करीब 3 बजे से ही प्रभु की अंगरचना को भव्य स्वरूप देने में जुट गए।</p>
<p><a href="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/whatsapp-image-2026-09-16-at-6.44.07-pm.jpeg"><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-358195" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/whatsapp-image-2026-09-16-at-6.44.07-pm.jpeg" alt="whatsapp image 2026 09 16 at 6.44.07 pm" width="614" height="1280" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/whatsapp-image-2026-09-16-at-6.44.07-pm.jpeg 614w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/whatsapp-image-2026-09-16-at-6.44.07-pm-144x300.jpeg 144w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/whatsapp-image-2026-09-16-at-6.44.07-pm-491x1024.jpeg 491w" sizes="auto, (max-width: 614px) 100vw, 614px" /></a></p>
<p class="isSelectedEnd">टीम का कुशल संचालन <strong>सुजय कांकरीया एवं अमन छोरिया</strong> ने किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">टीम में <strong>पर्व नागदा, भव्य चौधरी, मयंक कांकरीया, सुमित बाबेल, भावेश शेखावत, मोहित शेखावत, दिव्यांश छोरिया, वर्धन बोहरा, जेमिश कोचर, मीत कोचर, महिमा छाजेड़, विधि संचेती, प्रियांशी भंसाली, लिचिका गूगलिया, मोक्षा गूगलिया, चहेती कोठारी एवं आशी छोरिया</strong> शामिल रहे।</p>
<h2>कला नहीं, प्रभु के प्रति समर्पण था हर रचना में</h2>
<p class="isSelectedEnd">पर्युषण पर्व के दौरान दोनों जिनालयों में सजी अंगरचनाएं श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। इन रचनाओं में फूलों और सजावटी सामग्री की खूबसूरती के साथ बच्चों और युवाओं की श्रद्धा, मेहनत और समर्पण भी स्पष्ट दिखाई दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुबह 3 बजे से प्रभु सेवा में जुटना इस बात का भावपूर्ण उदाहरण रहा कि जहां भक्ति सच्ची हो, वहां समय और थकान का कोई महत्व नहीं रह जाता। नन्हे हाथों और युवा ऊर्जा से सजी इन अंगरचनाओं ने न केवल जिनालयों की शोभा बढ़ाई, बल्कि समाज में धार्मिक संस्कार, सेवा, रचनात्मकता, एकता और जिनेन्द्र भक्ति की भावना को भी मजबूत किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">इन कलाकारों ने यह संदेश दिया कि धर्म केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं, बल्कि अपनी प्रतिभा, समय और श्रम को प्रभु चरणों में समर्पित करना भी भक्ति का सुंदर स्वरूप है।</p>
<h2>युवा प्रतिभाओं की सेवा प्रेरणादायी : ब्रजेश बोहरा</h2>
<p class="isSelectedEnd">अखिल भारतीय श्री राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद परिवार की ओर से राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी <strong>ब्रजेश बोहरा</strong> ने सभी आयोजकों, अंगरचना करने वाले नन्हे एवं युवा कलाकारों तथा संगीतकारों की अनुमोदना करते हुए कहा कि जैन समाज के बच्चों और युवाओं का धर्म के प्रति यह समर्पण, सेवा भावना और रचनात्मक सहभागिता समाज के लिए प्रेरणादायी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उन्होंने कहा कि ऐसी धार्मिक गतिविधियां नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने के साथ-साथ उनमें सेवा, समर्पण और एकता की भावना को भी मजबूत करती हैं।</p>
<p><strong>रिपोर्ट : जीवनलाल जैन, नागदा</strong><br />
<strong>दैनिक स्वराज वाणी</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>इंदौर में 9 सितंबर को सजेगा प्रभु भक्ति का अद्भुत दरबार, नरीमन सिटी में विराट महापूजा</title>
		<link>https://swarajvani.com/indore-nariman-city-virat-mahapuja/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Sep 2026 15:43:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Indore News]]></category>
		<category><![CDATA[Indore Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Dharm]]></category>
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		<category><![CDATA[Jain Samaj Indore]]></category>
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		<category><![CDATA[प्रभु भक्ति]]></category>
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					<description><![CDATA[पर्युषण महापर्व पर इंदौर नरीमन सिटी में भगवान श्री नागेश्वर पार्श्वनाथ की विराट महापूजा होगी। पुष्पों से दिव्य महापूजा, दीप सज्जा, मनमोहक अंगरचना और संगीतात्मक आरती श्रद्धालुओं के लिए विशेष ... <a title="इंदौर में 9 सितंबर को सजेगा प्रभु भक्ति का अद्भुत दरबार, नरीमन सिटी में विराट महापूजा" class="read-more" href="https://swarajvani.com/indore-nariman-city-virat-mahapuja/" aria-label="Read more about इंदौर में 9 सितंबर को सजेगा प्रभु भक्ति का अद्भुत दरबार, नरीमन सिटी में विराट महापूजा">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>पर्युषण महापर्व पर इंदौर नरीमन सिटी में भगवान श्री नागेश्वर पार्श्वनाथ की विराट महापूजा होगी। पुष्पों से दिव्य महापूजा, दीप सज्जा, मनमोहक अंगरचना और संगीतात्मक आरती श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहेंगी।</p>
<h1>पर्युषण का आज नरीमन नागेश्वर के नाम: 9 सितंबर को होगी भव्य विराट महापूजा, प्रभु भक्ति का सजेगा अद्भुत दरबार</h1>
<p class="isSelectedEnd"><strong>मनमोहक अंगरचना, पुष्प-दीप सज्जा और संगीतात्मक आरती रहेंगी विशेष आकर्षण</strong></p>
<p class="isSelectedEnd"><strong>इंदौर (प्रदीप जैन)।</strong> <strong>नरीमन सिटी विराट महापूजा</strong> का भव्य आयोजन पर्युषण महापर्व के पावन अवसर पर आज 9 सितंबर को नरीमन सिटी में भगवान श्री नागेश्वर पार्श्वनाथ की आराधना के लिए किया जाएगा। ‘विराट महापूजा एवं प्रभु भक्ति’ के इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु सपरिवार शामिल होकर प्रभु आराधना का लाभ लेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">श्री नरीमन नवकार जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक श्रीसंघ ट्रस्ट के अध्यक्ष <strong>निलेश जैन</strong> ने बताया कि पर्युषण महापर्व के अवसर पर आयोजित होने वाली इस विराट महापूजा को लेकर समाजजनों में उत्साह है। श्रद्धालु सपरिवार शामिल होकर भगवान श्री नागेश्वर पार्श्वनाथ की आराधना करेंगे।</p>
<h2>नरीमन सिटी विराट महापूजा में मनमोहक अंगरचना और पुष्प सज्जा</h2>
<p class="isSelectedEnd"><strong>प्रवीण गुरूजी</strong> के अनुसार भगवान की मनमोहक अंगरचना, पुष्पों से दिव्य महापूजा, दीपों की भव्य सज्जा एवं संगीतात्मक आरती आयोजन के प्रमुख आकर्षण रहेंगे। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को पर्युषण की धर्माराधना, आत्मचिंतन एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से जोड़ना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पर्युषण महापर्व के बीच होने वाला यह धार्मिक आयोजन भगवान श्री नागेश्वर पार्श्वनाथ की आराधना और प्रभु भक्ति को समर्पित रहेगा। विशेष रूप से पुष्पों और दीपों से होने वाली सज्जा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेगी।</p>
<h2>डॉ. विपिन वागरेचा और आयुष बोहरा देंगे भावपूर्ण प्रस्तुति</h2>
<p class="isSelectedEnd"><strong>विजय जैन गोटावाला</strong> ने बताया कि <strong>डॉ. विपिन वागरेचा</strong> भावपूर्ण प्रस्तुति देंगे, वहीं <strong>आयुष बोहरा</strong> के सुर भक्ति वातावरण को और भावपूर्ण बनाएंगे। संगीतात्मक आरती के साथ पूरा वातावरण प्रभु भक्ति से सराबोर रहेगा।</p>
<h2>ये परिवार रहेंगे आयोजन के लाभार्थी</h2>
<p class="isSelectedEnd">आयोजन के लाभार्थी <strong>राजेन्द्र-विभा, भरत-तृप्ति, अमित-गुंजन, शुभ, शौर्य, सना व अमायरा पारेख (मेट्रो) परिवार एवं संगम ग्रुप</strong> हैं।</p>
<h2>समाजजनों से सपरिवार शामिल होने का आह्वान</h2>
<p class="isSelectedEnd">ट्रस्टी <strong>आर.सी. जैन एवं मनीष शाह</strong> सहित <strong>नाना सेठ, बाबूलाल भंडारी, शरद जैन, महेंद्र कटारिया, अजय चौधरी, अजय अम्बोर, शान्तिलाल जैन, प्रवीण सकलेचा, प्रदीप आँचलिया, प्रकाशचंद जैन, दिलीप जैन, संदीप जैन, रितेश जैन, ऋषभ शाह, अल्केश गाँधी, अनिल कुमार जैन, अजीत जैन, अमित मेहता, अंकुश सिंह सिसोदिया, स्वप्निल नानावटी, सिद्धांत जैन एवं हितेश काकरिया</strong> ने समाजजनों से सपरिवार आयोजन में शामिल होकर प्रभु भक्ति का लाभ लेने का आह्वान किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पर्युषण महापर्व के अवसर पर आयोजित <strong>नरीमन सिटी विराट महापूजा</strong> में भगवान श्री नागेश्वर पार्श्वनाथ की आराधना के साथ धर्माराधना, आत्मचिंतन और प्रभु भक्ति का विशेष संगम देखने को मिलेगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>Indore : परम पूज्य मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में 16 सितंबर से शुरू होगा 33वां श्रावक संस्कार शिविर; तैयारियों को लेकर क्लर्क कॉलोनी में बैठक संपन्न</title>
		<link>https://swarajvani.com/33rd-shravak-sanskar-shivir-to-begin-in-indore/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 04 Sep 2026 11:51:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Indore News]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain Samaj Indore]]></category>
		<category><![CDATA[Paryushan 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Spiritual Retreat]]></category>
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					<description><![CDATA[Indore में धर्म की गंगा: पूज्य मुनिश्री 108 सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में 16 सितंबर से आयोजित होगा 33वां वृहद श्रावक संस्कार शिविर Indore (मध्य प्रदेश): मालवा की पावन ... <a title="Indore : परम पूज्य मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में 16 सितंबर से शुरू होगा 33वां श्रावक संस्कार शिविर; तैयारियों को लेकर क्लर्क कॉलोनी में बैठक संपन्न" class="read-more" href="https://swarajvani.com/33rd-shravak-sanskar-shivir-to-begin-in-indore/" aria-label="Read more about Indore : परम पूज्य मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में 16 सितंबर से शुरू होगा 33वां श्रावक संस्कार शिविर; तैयारियों को लेकर क्लर्क कॉलोनी में बैठक संपन्न">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1 data-path-to-node="0"><b data-path-to-node="0" data-index-in-node="0">Indore में धर्म की गंगा: पूज्य मुनिश्री 108 सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में 16 सितंबर से आयोजित होगा 33वां वृहद श्रावक संस्कार शिविर</b></h1>
<p data-path-to-node="1"><b data-path-to-node="1" data-index-in-node="0">Indore (मध्य प्रदेश):</b> मालवा की पावन धरा और देश की स्वच्छता राजधानी इंदौर में इस वर्ष पर्युषण पर्व अत्यंत भक्तिमय और ऐतिहासिक वातावरण में मनाया जाएगा। परम पूज्य निर्यापक मुनिश्री 108 सुधासागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में इस वर्ष <b data-path-to-node="1" data-index-in-node="233">16 सितंबर से 26 सितंबर 2026</b> तक दस दिवसीय <b data-path-to-node="1" data-index-in-node="274">&#8220;33वें वृहद श्रावक संस्कार शिविर&#8221;</b> का भव्य आयोजन होने जा रहा है। जैन धर्म के सबसे पवित्र और महान पर्व ‘लक्षण पर्व/पर्युषण’ के अवसर पर आयोजित होने वाला यह शिविर पूरे चातुर्मास काल का सबसे बड़ा और प्रमुख धार्मिक आयोजन सिद्ध होगा।</p>
<p data-path-to-node="2">इस विशाल आयोजन की व्यवस्थाओं, आवास, आहार और दैनिक चर्या को सुचारू रूप से संचालित करने के उद्देश्य से क्लर्क कॉलोनी स्थित दिगंबर जैन मंदिर में एक विशेष रूपरेखा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में इंदौर के सामाजिक ताने-बाने को जोड़ने वाली संस्था &#8216;सामाजिक संसद कीर्तिस्तंभ&#8217; के अंतर्गत आने वाले सभी 29 जिनालयों के अध्यक्ष, सचिव और प्रमुख प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।</p>
<h2 data-path-to-node="4"><b data-path-to-node="4" data-index-in-node="0">तैयारियों को लेकर क्लर्क कॉलोनी जैन मंदिर में विशेष बैठक</b></h2>
<p data-path-to-node="5">संस्कार शिविर को ऐतिहासिक और अनुशासित बनाने के लिए आयोजित यह बैठक चक्रवर्ती परिवार नवीन-आनंद गोधा, विमल अजमेरा और संयोजक आलोक जैन (कोयला) के कुशल निर्देशन में संपन्न हुई। बैठक में सम्मिलित हुए समाज के गणमान्य नागरिकों और पदाधिकारियों ने एक-दूसरे के साथ विचार-विमर्श कर शिविर के सुचारू संचालन का खाका तैयार किया।</p>
<p data-path-to-node="6">बैठक में मुख्य रूप से प्रयंक जैन, दिलीप बज, संजय जैन, एडवोकेट अरविंद जैन, मनीष जैन, पूनमचंद सतभैया, अनूप गांधी, पवन सिंघई, अनिल इटको सहित इंदौर के सभी 29 जिनालयों के अध्यक्षों एवं प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और आयोजन को सफल बनाने का संकल्प लिया।</p>
<h2 data-path-to-node="8"><b data-path-to-node="8" data-index-in-node="0">5,000 से 8,000 शिविरार्थियों के जुटने की संभावना</b></h2>
<p data-path-to-node="9">प्रचार प्रमुख प्रवीण जैन ने शिविर के पैमाने की जानकारी देते हुए बताया कि इस 33वें श्रावक संस्कार शिविर में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ देश के कोने-कोने से लगभग <b data-path-to-node="9" data-index-in-node="163">5,000 से 8,000 शिविरार्थियों</b> के शामिल होने की प्रबल संभावना है।</p>
<p data-path-to-node="10">इतनी बड़ी संख्या में जुटने वाले श्रावकों के लिए व्यवस्थाएं जुटाना एक बड़ा दायित्व है, जिसे लेकर सकल दिगंबर जैन समाज इंदौर ने कमर कस ली है। मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के कठोर अनुशासन और मार्गदर्शन में यह शिविर श्रावकों के जीवन में आध्यात्मिक क्रांति लाने का कार्य करेगा।</p>
<p data-path-to-node="10"> <img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-353618 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-04-at-4.38.21-AM-1-300x169.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026 09 04 at 4.38.21 AM 1" width="300" height="169" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-04-at-4.38.21-AM-1-300x169.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-04-at-4.38.21-AM-1-1024x576.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-04-at-4.38.21-AM-1-768x432.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-04-at-4.38.21-AM-1.jpeg 1280w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<h3 data-path-to-node="12"><b data-path-to-node="12" data-index-in-node="0">त्याग, तपस्या और आत्म-साधना की उच्च श्रेष्ठ चर्या</b></h3>
<p data-path-to-node="13">पर्युषण पर्व के ये १० दिन केवल बाह्य आडंबर के नहीं, बल्कि अंतरात्मा की शुद्धि के होते हैं। शिविर के दौरान भाग लेने वाले सभी श्रावक-श्राविकाएं जैन धर्म के सिद्धांतों के अनुसार त्याग और तपस्या की अति-श्रेष्ठ चर्या का पालन करेंगे।</p>
<ul data-path-to-node="14">
<li>
<p data-path-to-node="14,0,0"><b data-path-to-node="14,0,0" data-index-in-node="0">मुनिश्री के आदेशों का पालन:</b> सभी शिविरार्थी मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के पूर्ण दिशानिर्देशों और अनुशासन के तहत अपनी दिनचर्या व्यतीत करेंगे।</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="14,1,0"><b data-path-to-node="14,1,0" data-index-in-node="0">दैनिक क्रियाएं:</b> प्रात:काल सामायिक, जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक, पूजन, मुनिश्री के तत्वचर्चा व प्रवचन, स्वाध्याय और संध्या आरती के साथ-साथ रात्रिकालीन सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रमों का कड़ाई से पालन किया जाएगा।</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="14,2,0"><b data-path-to-node="14,2,0" data-index-in-node="0">संस्कार और शुद्धि:</b> शिविरार्थियों को दस लक्षण धर्मों (उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य) को अपने व्यक्तिगत जीवन में उतारने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।</p>
</li>
</ul>
<h3 data-path-to-node="16"><b data-path-to-node="16" data-index-in-node="0">घर-घर होगी आहार व्यवस्था: सार्वजनिक स्थलों पर भोजन पर पूर्ण प्रतिबंध</b></h3>
<p data-path-to-node="17">शिविर की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए आनंद-नवीन गोधा एवं हर्ष जैन ने बताया कि मुनिश्री के मार्गदर्शन में शिविरार्थियों के भोजन (आहार) को लेकर विशेष आध्यात्मिक नियम बनाए गए हैं:</p>
<ol start="1" data-path-to-node="18">
<li>
<p data-path-to-node="18,0,0"><b data-path-to-node="18,0,0" data-index-in-node="0">एक समय का आहार:</b> शिविर में भाग लेने वाले सभी श्रावक दिन में केवल एक बार ही आहार (भोजन) ग्रहण करेंगे।</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="18,1,0"><b data-path-to-node="18,1,0" data-index-in-node="0">गृहस्थों के घर आहार व्यवस्था:</b> शिविरार्थियों के एक समय के आहार की व्यवस्था समाजजनों के घर-घर में की जाएगी।</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="18,2,0"><b data-path-to-node="18,2,0" data-index-in-node="0">सार्वजनिक स्थान पर भोजन निषेध:</b> किसी भी सार्वजनिक पंडाल, हॉल या कैटरिंग प्रणाली के माध्यम से भोजन वितरित नहीं किया जाएगा। इसके पीछे का मुख्य उद्देश्य भोजन की विशुद्धि, भक्ष्य-अभक्ष्य का ध्यान और श्रावकों के भीतर आतिथ्य व दान की भावना को जीवित रखना है। प्रत्येक जैन परिवार अपने घर पर शुद्ध-सात्विक रीती से निर्मित आहार शिविरार्थियों को पूरे भक्ति भाव से कराएगा।</p>
</li>
</ol>
<h3 data-path-to-node="20"><b data-path-to-node="20" data-index-in-node="0">आवास एवं मुख्य आयोजन स्थल की व्यवस्था</b></h3>
<p data-path-to-node="21">हजारों की संख्या में बाहर और स्थानीय स्तर से आने वाले शिविरार्थियों के ठहरने और मुख्य कार्यक्रमों के आयोजन के लिए इंदौर के प्रमुख स्थलों का चयन किया गया है:</p>
<ul data-path-to-node="22">
<li>
<p data-path-to-node="22,0,0"><b data-path-to-node="22,0,0" data-index-in-node="0">आवास स्थल (निर्वाणा गार्डन):</b> शिविरार्थियों के रात्रि विश्राम, सामायिक और व्यक्तिगत चर्या के लिए &#8216;निर्वाणा गार्डन&#8217; में सर्वसुविधायुक्त व्यवस्थाएं की जा रही हैं। यहाँ सुरक्षा, स्वच्छता और जल आदि की समुचित व्यवस्था समाज की ओर से की जाएगी।</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="22,1,0"><b data-path-to-node="22,1,0" data-index-in-node="0">मुख्य कार्यक्रम स्थल (दलाल बाग, छत्रपति नगर):</b> 33वें संस्कार शिविर का मुख्य मंच, मुनिश्री का भव्य प्रवचन मंडप और धार्मिक अनुष्ठान &#8216;दलाल बाग, छत्रपति नगर&#8217; में आयोजित होंगे। यहाँ एक विशाल पंडाल का निर्माण किया जा रहा है, जहाँ एक साथ हजारों श्रद्धालु बैठकर धर्मलाभ ले सकेंगे।</p>
</li>
</ul>
<h3 data-path-to-node="24"><b data-path-to-node="24" data-index-in-node="0">चातुर्मास काल का सबसे बड़ा और प्रमुख आयोजन</b></h3>
<p data-path-to-node="25">जैन परंपरा में चातुर्मास (वर्षाकाल के 4 महीने) का विशेष महत्व होता है। इस दौरान साधु-संत एक ही स्थान पर स्थिर होकर धर्म की गंगा बहाते हैं। इंदौर में मुनिश्री सुधासागर जी महाराज का यह चातुर्मास पहले से ही अपार जनसैलाब और भक्ति के लिए चर्चा में है।</p>
<p data-path-to-node="26">ऐसे में पर्युषण पर्व के दौरान आयोजित होने वाला यह 10 दिवसीय संस्कार शिविर पूरे चातुर्मास काल का सबसे शिखर आयोजन माना जा रहा है। जैन समाज के वरिष्ठजनों का कहना है कि पूज्य मुनिश्री के सानिध्य में संस्कार शिविर में भाग लेने मात्र से जीवन की दिशा बदल जाती है और व्यक्ति आत्म-कल्याण के मार्ग पर अग्रसर होता है।</p>
<p data-path-to-node="26"><img loading="lazy" decoding="async" class="size-medium wp-image-353619 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-04-at-4.38.21-AM-300x169.jpeg" alt="WhatsApp Image 2026 09 04 at 4.38.21 AM" width="300" height="169" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-04-at-4.38.21-AM-300x169.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-04-at-4.38.21-AM-1024x576.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-04-at-4.38.21-AM-768x432.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/WhatsApp-Image-2026-09-04-at-4.38.21-AM.jpeg 1280w" sizes="auto, (max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<h3 data-path-to-node="28"><b data-path-to-node="28" data-index-in-node="0">समाज में उत्साह और सहयोग की लहर</b></h3>
<p data-path-to-node="29">बैठक के अंत में संयोजकों और प्रचार समिति ने इंदौर के सकल जैन समाज और युवा मंडलों से इस आयोजन में बढ़-चढ़कर सहयोग करने की अपील की। 29 जिनालयों के प्रतिनिधियों ने विश्वास दिलाया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों से अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को शिविर में पंजीकृत कराएंगे और आहार व्यवस्था से लेकर पंडाल व्यवस्था तक में पूर्ण निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं देंगे।</p>
<p data-path-to-node="30">16 से 26 सितंबर तक इंदौर शहर पूरी तरह से भक्ति, संयम, नियम और संस्कार के रंगों में रंगा नजर आएगा।</p>
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