Indore में धर्म की गंगा: पूज्य मुनिश्री 108 सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में 16 सितंबर से आयोजित होगा 33वां वृहद श्रावक संस्कार शिविर
Indore (मध्य प्रदेश): मालवा की पावन धरा और देश की स्वच्छता राजधानी इंदौर में इस वर्ष पर्युषण पर्व अत्यंत भक्तिमय और ऐतिहासिक वातावरण में मनाया जाएगा। परम पूज्य निर्यापक मुनिश्री 108 सुधासागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में इस वर्ष 16 सितंबर से 26 सितंबर 2026 तक दस दिवसीय “33वें वृहद श्रावक संस्कार शिविर” का भव्य आयोजन होने जा रहा है। जैन धर्म के सबसे पवित्र और महान पर्व ‘लक्षण पर्व/पर्युषण’ के अवसर पर आयोजित होने वाला यह शिविर पूरे चातुर्मास काल का सबसे बड़ा और प्रमुख धार्मिक आयोजन सिद्ध होगा।
इस विशाल आयोजन की व्यवस्थाओं, आवास, आहार और दैनिक चर्या को सुचारू रूप से संचालित करने के उद्देश्य से क्लर्क कॉलोनी स्थित दिगंबर जैन मंदिर में एक विशेष रूपरेखा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में इंदौर के सामाजिक ताने-बाने को जोड़ने वाली संस्था ‘सामाजिक संसद कीर्तिस्तंभ’ के अंतर्गत आने वाले सभी 29 जिनालयों के अध्यक्ष, सचिव और प्रमुख प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
तैयारियों को लेकर क्लर्क कॉलोनी जैन मंदिर में विशेष बैठक
संस्कार शिविर को ऐतिहासिक और अनुशासित बनाने के लिए आयोजित यह बैठक चक्रवर्ती परिवार नवीन-आनंद गोधा, विमल अजमेरा और संयोजक आलोक जैन (कोयला) के कुशल निर्देशन में संपन्न हुई। बैठक में सम्मिलित हुए समाज के गणमान्य नागरिकों और पदाधिकारियों ने एक-दूसरे के साथ विचार-विमर्श कर शिविर के सुचारू संचालन का खाका तैयार किया।
बैठक में मुख्य रूप से प्रयंक जैन, दिलीप बज, संजय जैन, एडवोकेट अरविंद जैन, मनीष जैन, पूनमचंद सतभैया, अनूप गांधी, पवन सिंघई, अनिल इटको सहित इंदौर के सभी 29 जिनालयों के अध्यक्षों एवं प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और आयोजन को सफल बनाने का संकल्प लिया।
5,000 से 8,000 शिविरार्थियों के जुटने की संभावना
प्रचार प्रमुख प्रवीण जैन ने शिविर के पैमाने की जानकारी देते हुए बताया कि इस 33वें श्रावक संस्कार शिविर में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ देश के कोने-कोने से लगभग 5,000 से 8,000 शिविरार्थियों के शामिल होने की प्रबल संभावना है।
इतनी बड़ी संख्या में जुटने वाले श्रावकों के लिए व्यवस्थाएं जुटाना एक बड़ा दायित्व है, जिसे लेकर सकल दिगंबर जैन समाज इंदौर ने कमर कस ली है। मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के कठोर अनुशासन और मार्गदर्शन में यह शिविर श्रावकों के जीवन में आध्यात्मिक क्रांति लाने का कार्य करेगा।

त्याग, तपस्या और आत्म-साधना की उच्च श्रेष्ठ चर्या
पर्युषण पर्व के ये १० दिन केवल बाह्य आडंबर के नहीं, बल्कि अंतरात्मा की शुद्धि के होते हैं। शिविर के दौरान भाग लेने वाले सभी श्रावक-श्राविकाएं जैन धर्म के सिद्धांतों के अनुसार त्याग और तपस्या की अति-श्रेष्ठ चर्या का पालन करेंगे।
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मुनिश्री के आदेशों का पालन: सभी शिविरार्थी मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के पूर्ण दिशानिर्देशों और अनुशासन के तहत अपनी दिनचर्या व्यतीत करेंगे।
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दैनिक क्रियाएं: प्रात:काल सामायिक, जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक, पूजन, मुनिश्री के तत्वचर्चा व प्रवचन, स्वाध्याय और संध्या आरती के साथ-साथ रात्रिकालीन सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रमों का कड़ाई से पालन किया जाएगा।
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संस्कार और शुद्धि: शिविरार्थियों को दस लक्षण धर्मों (उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य) को अपने व्यक्तिगत जीवन में उतारने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
घर-घर होगी आहार व्यवस्था: सार्वजनिक स्थलों पर भोजन पर पूर्ण प्रतिबंध
शिविर की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए आनंद-नवीन गोधा एवं हर्ष जैन ने बताया कि मुनिश्री के मार्गदर्शन में शिविरार्थियों के भोजन (आहार) को लेकर विशेष आध्यात्मिक नियम बनाए गए हैं:
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एक समय का आहार: शिविर में भाग लेने वाले सभी श्रावक दिन में केवल एक बार ही आहार (भोजन) ग्रहण करेंगे।
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गृहस्थों के घर आहार व्यवस्था: शिविरार्थियों के एक समय के आहार की व्यवस्था समाजजनों के घर-घर में की जाएगी।
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सार्वजनिक स्थान पर भोजन निषेध: किसी भी सार्वजनिक पंडाल, हॉल या कैटरिंग प्रणाली के माध्यम से भोजन वितरित नहीं किया जाएगा। इसके पीछे का मुख्य उद्देश्य भोजन की विशुद्धि, भक्ष्य-अभक्ष्य का ध्यान और श्रावकों के भीतर आतिथ्य व दान की भावना को जीवित रखना है। प्रत्येक जैन परिवार अपने घर पर शुद्ध-सात्विक रीती से निर्मित आहार शिविरार्थियों को पूरे भक्ति भाव से कराएगा।
आवास एवं मुख्य आयोजन स्थल की व्यवस्था
हजारों की संख्या में बाहर और स्थानीय स्तर से आने वाले शिविरार्थियों के ठहरने और मुख्य कार्यक्रमों के आयोजन के लिए इंदौर के प्रमुख स्थलों का चयन किया गया है:
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आवास स्थल (निर्वाणा गार्डन): शिविरार्थियों के रात्रि विश्राम, सामायिक और व्यक्तिगत चर्या के लिए ‘निर्वाणा गार्डन’ में सर्वसुविधायुक्त व्यवस्थाएं की जा रही हैं। यहाँ सुरक्षा, स्वच्छता और जल आदि की समुचित व्यवस्था समाज की ओर से की जाएगी।
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मुख्य कार्यक्रम स्थल (दलाल बाग, छत्रपति नगर): 33वें संस्कार शिविर का मुख्य मंच, मुनिश्री का भव्य प्रवचन मंडप और धार्मिक अनुष्ठान ‘दलाल बाग, छत्रपति नगर’ में आयोजित होंगे। यहाँ एक विशाल पंडाल का निर्माण किया जा रहा है, जहाँ एक साथ हजारों श्रद्धालु बैठकर धर्मलाभ ले सकेंगे।
चातुर्मास काल का सबसे बड़ा और प्रमुख आयोजन
जैन परंपरा में चातुर्मास (वर्षाकाल के 4 महीने) का विशेष महत्व होता है। इस दौरान साधु-संत एक ही स्थान पर स्थिर होकर धर्म की गंगा बहाते हैं। इंदौर में मुनिश्री सुधासागर जी महाराज का यह चातुर्मास पहले से ही अपार जनसैलाब और भक्ति के लिए चर्चा में है।
ऐसे में पर्युषण पर्व के दौरान आयोजित होने वाला यह 10 दिवसीय संस्कार शिविर पूरे चातुर्मास काल का सबसे शिखर आयोजन माना जा रहा है। जैन समाज के वरिष्ठजनों का कहना है कि पूज्य मुनिश्री के सानिध्य में संस्कार शिविर में भाग लेने मात्र से जीवन की दिशा बदल जाती है और व्यक्ति आत्म-कल्याण के मार्ग पर अग्रसर होता है।

समाज में उत्साह और सहयोग की लहर
बैठक के अंत में संयोजकों और प्रचार समिति ने इंदौर के सकल जैन समाज और युवा मंडलों से इस आयोजन में बढ़-चढ़कर सहयोग करने की अपील की। 29 जिनालयों के प्रतिनिधियों ने विश्वास दिलाया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों से अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को शिविर में पंजीकृत कराएंगे और आहार व्यवस्था से लेकर पंडाल व्यवस्था तक में पूर्ण निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं देंगे।
16 से 26 सितंबर तक इंदौर शहर पूरी तरह से भक्ति, संयम, नियम और संस्कार के रंगों में रंगा नजर आएगा।
