<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Mahaparva &#8211; Swaraj Vani</title>
	<atom:link href="https://swarajvani.com/tag/mahaparva/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://swarajvani.com</link>
	<description>From politics and jobs to culture and community stories, we deliver timely, unbiased updates that matter.</description>
	<lastBuildDate>Sat, 19 Sep 2026 12:47:08 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=7.1.3</generator>

<image>
	<url>https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/07/cropped-स्वराज-वाणी-1-32x32.png</url>
	<title>Mahaparva &#8211; Swaraj Vani</title>
	<link>https://swarajvani.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>उत्तम शौच धर्म की आराधना के साथ भगवान पुष्पदंत को चढ़ाया निर्वाण लड्डू</title>
		<link>https://swarajvani.com/nirvan-laddu-offered-to-lord-pushpadant-during-uttam-shauch-dharma-worship-in/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 19 Sep 2026 12:46:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[JAINS]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Chaitanya Sagar]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Community]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Pushpadant]]></category>
		<category><![CDATA[Mahaparva]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Anuman Sagar]]></category>
		<category><![CDATA[Nirvan Laddu]]></category>
		<category><![CDATA[Uttam Shauch Dharma]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=359207</guid>

					<description><![CDATA[उत्तम शौच धर्म की आराधना के साथ भगवान पुष्पदंत को चढ़ाया निर्वाण लड्डू दाना ओली के चंपाबाग जैन मंदिर में दशलक्षण पूजन, आचार्य चैत्य सागर महाराज ने बताया संतोष और ... <a title="उत्तम शौच धर्म की आराधना के साथ भगवान पुष्पदंत को चढ़ाया निर्वाण लड्डू" class="read-more" href="https://swarajvani.com/nirvan-laddu-offered-to-lord-pushpadant-during-uttam-shauch-dharma-worship-in/" aria-label="Read more about उत्तम शौच धर्म की आराधना के साथ भगवान पुष्पदंत को चढ़ाया निर्वाण लड्डू">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>उत्तम शौच धर्म की आराधना के साथ भगवान पुष्पदंत को चढ़ाया निर्वाण लड्डू</strong></h1>
<h2><strong>दाना ओली के चंपाबाग जैन मंदिर में दशलक्षण पूजन, आचार्य चैत्य सागर महाराज ने बताया संतोष और शुचिता का महत्व</strong></h2>
<p><strong>ग्वालियर।</strong> पर्युषण महापर्व के चौथे दिन शनिवार को जैन धर्मावलंबियों ने उत्तम शौच धर्म की श्रद्धा और भक्तिभाव से आराधना की। आचार्य श्री 108 चैत्य सागर महाराज एवं मुनिश्री 108 अनुमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में दाना ओली स्थित दिगंबर बीसपंथी चंपाबाग जैन मंदिर में दशलक्षण महामंडल पूजन का आयोजन किया गया। इस दौरान जैन धर्म के नौवें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंत के मोक्ष कल्याणक पर श्रद्धालुओं ने निर्वाण लड्डू समर्पित किया।</p>
<p>आत्म साधना वर्षायोग समिति और सकल जैन समाज के तत्वावधान में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष एवं बच्चे शामिल हुए। मंदिर परिसर भगवान जिनेंद्र और आचार्यश्री के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भक्ति नृत्य करते हुए महाअर्घ्य समर्पित किए।</p>
<h2><strong>पंचामृत अभिषेक और शांतिधारा</strong></h2>
<p>जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि प्रतिष्ठाचार्य पंडित डॉ. आनंद प्रकाश शास्त्री के निर्देशन में श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चार के बीच भगवान जिनेंद्र को पांडुशिला पर विराजमान किया। इसके बाद रजत कलशों से श्रीजी का जलाभिषेक और पंचामृत अभिषेक किया गया। आचार्यश्री के मुखारविंद से उच्चारित मंत्रों के बीच संजीव जैन, संभव जैन एवं विकास जैन परिवार ने वृहद शांतिधारा करने का सौभाग्य प्राप्त किया।</p>
<p>दशलक्षण महामंडल विधान में नित्य पूजन, नवदेवता पूजन, पंचमेरु पूजन, दशलक्षण पूजन, निर्वाण पूजन और उत्तम शौच धर्म की विशेष पूजा की गई। श्रद्धालुओं ने संगीत की मधुर धुनों पर भक्ति नृत्य करते हुए भगवान जिनेंद्र के चरणों में अर्घ्य चढ़ाए।</p>
<h2><strong>पुष्पदंत भगवान को निर्वाण लड्डू समर्पित</strong></h2>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="wp-image-359209 alignright" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/gdfgdfg-300x240.jpg" alt="gdfgdfg" width="365" height="292" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/gdfgdfg-300x240.jpg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/gdfgdfg-768x616.jpg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/gdfgdfg.jpg 816w" sizes="(max-width: 365px) 100vw, 365px" /><span style="font-size: inherit;">भगवान पुष्पदंत के मोक्ष कल्याणक अवसर पर आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज और मुनिश्री अनुमान सागर महाराज के सानिध्य में निर्वाण पाठ का वाचन किया गया। प्रथम निर्वाण लड्डू चढ़ाने का सौभाग्य राजू जैन, पंकज जैन और अनामिका जैन परिवार को प्राप्त हुआ। इसके बाद अन्य श्रावक-श्राविकाओं ने भी भक्तिभाव से निर्वाण लड्डू समर्पित किए।</span></p>
<p>शाम को मंदिर में दीपकों से श्रीजी की महाआरती की गई। समाज के प्रवक्ता ने बताया कि पर्युषण पर्व के पांचवें दिन 20 सितंबर को उत्तम सत्य धर्म की पूजा और आराधना की जाएगी।</p>
<h2><strong>लोभ की निवृत्ति ही उत्तम शौच धर्म</strong></h2>
<p>धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज ने कहा कि क्रोध, मान, माया और लोभ चार प्रमुख कषाय हैं। इनमें लोभ अनेक पापों और दुखों का कारण बनता है। लोभी व्यक्ति आवश्यकता से अधिक धन एवं चल-अचल संपत्ति एकत्र करने की इच्छा में अनुचित कार्यों की ओर बढ़ सकता है।</p>
<p>आचार्यश्री ने कहा कि लोभ की निवृत्ति ही उत्तम शौच धर्म है। जहां निर्लोभता होगी, वहीं वास्तविक शौच धर्म प्रकट होगा। अपने भीतर संतोष का भाव, निर्लोभ वृत्ति और आचरण में शुचिता लाना ही इस धर्म का मूल संदेश है। इच्छाओं और आवश्यकता से अधिक संग्रह करने की प्रवृत्ति पर नियंत्रण रखते हुए जो उपलब्ध है, उसमें संतोष और प्रसन्नता अनुभव करनी चाहिए।</p>
<p>इस अवसर पर समिति अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र गंगवाल, महामंत्री निर्मल पाटनी, विनय कासलीवाल, विकास जैन, पंकज छाबड़ा और संजय गोधा ने आचार्यश्री के चरणों में श्रीफल अर्पित किया।</p>
<h2><strong>मन की निर्मलता ही शौच धर्म: मुनिश्री</strong></h2>
<p>मुनिश्री अनुमान सागर महाराज ने कहा कि मन की पवित्रता, निर्मलता और स्वच्छता ही शौच धर्म है। आत्मिक पवित्रता के लिए यह धर्म संजीवनी के समान है। जैन शास्त्रों में पवित्रता को शौच कहा गया है और निर्मलता आत्मा का स्वाभाविक गुण है। जो व्यक्ति लालसा, लालच, तृष्णा और अनावश्यक अभिलाषाओं का त्याग करता है, उसकी आत्मा पवित्रता की ओर अग्रसर होती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पर्यूषण के सप्तम दिवस साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा—धर्म आराधना का श्रेष्ठ अवसर है महापर्व</title>
		<link>https://swarajvani.com/paryushan-day-7-in-mahidpur-road-sadhvi-dr-amritrasa-shriji-calls-the-festival-an-ideal-time-for-spiritual/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 14 Sep 2026 12:31:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Jai]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Dharma Sabha]]></category>
		<category><![CDATA[Mahaparva]]></category>
		<category><![CDATA[Mahidpur Road News]]></category>
		<category><![CDATA[Sadhvi Dr Amritrasa Shriji]]></category>
		<category><![CDATA[Snatra Puja]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=357533</guid>

					<description><![CDATA[पर्यूषण के सप्तम दिवस साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा—धर्म आराधना का श्रेष्ठ अवसर है महापर्व दैनिक स्वराज वाणी। महिदपुर रोड। पर्यूषण महापर्व के सप्तम दिवस रविवार को नगर में ... <a title="पर्यूषण के सप्तम दिवस साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा—धर्म आराधना का श्रेष्ठ अवसर है महापर्व" class="read-more" href="https://swarajvani.com/paryushan-day-7-in-mahidpur-road-sadhvi-dr-amritrasa-shriji-calls-the-festival-an-ideal-time-for-spiritual/" aria-label="Read more about पर्यूषण के सप्तम दिवस साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा—धर्म आराधना का श्रेष्ठ अवसर है महापर्व">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>पर्यूषण के सप्तम दिवस साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने कहा—धर्म आराधना का श्रेष्ठ अवसर है महापर्व</strong></h1>
<p><strong>दैनिक स्वराज वाणी। महिदपुर रोड।</strong> पर्यूषण महापर्व के सप्तम दिवस रविवार को नगर में चातुर्मास हेतु विराजित पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा के सान्निध्य में धर्मसभा आयोजित हुई। साध्वीश्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए महापर्व के दिनों का सदुपयोग करने और धर्म आराधना के लिए तत्पर रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि पर्यूषण के आठ दिन तथा पर्व तिथियां मानव मात्र के लिए आराधना का श्रेष्ठ अवसर हैं।</p>
<p>धर्मसभा में साध्वीश्री ने बताया कि महापर्व के दौरान की गई थोड़ी-सी धर्म आराधना भी अत्यंत फलदायी होती है। इसलिए इन दिनों को श्रद्धा और साधना के साथ बिताना चाहिए। आयोजन में सकल जैन श्रीसंघ के सदस्यों ने उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया।</p>
<h2><strong>महापर्व के आठ दिनों का करें सदुपयोग</strong></h2>
<p>साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने अपने संबोधन में पर्यूषण के आठ दिनों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह समय धर्म आराधना के लिए विशेष अवसर प्रदान करता है। श्रद्धालुओं को महापर्व के दिनों में धर्म से जुड़ने और आराधना करने के लिए तत्पर रहना चाहिए।</p>
<p>उनके संदेश का केंद्र समय का सदुपयोग और धार्मिक साधना के प्रति सक्रियता रहा। उन्होंने महापर्व के दिनों तथा पर्व तिथियों को मानव मात्र के लिए महत्वपूर्ण बताया। धर्मसभा में उपस्थित लोगों को इन अवसरों का लाभ लेने और अपनी क्षमता के अनुसार आराधना में भाग लेने की प्रेरणा मिली।</p>
<h2><strong>थोड़ी-सी आराधना भी होती है फलदायी</strong></h2>
<p>साध्वीश्री ने कहा कि महापर्व के दिनों में थोड़ी-सी धर्म आराधना भी बहुत अधिक फलदायी होती है। इस विचार के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को आराधना के प्रति उत्साहित किया। उनका आग्रह रहा कि पर्व के दौरान मिलने वाले अवसर को व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए।</p>
<p>प्रवचन में व्यक्त यह संदेश आराधना के लिए तत्परता का भाव सामने लाता है। साध्वीश्री ने उपस्थित धर्मसभा को समझाया कि महापर्व का समय धार्मिक गतिविधियों से जुड़ने का श्रेष्ठ अवसर है। श्रद्धालुओं ने उनके विचार सुने और धर्मसभा में सहभागिता की।</p>
<h2><strong>चातुर्मास में साध्वीश्री का सान्निध्य</strong></h2>
<p>महिदपुर रोड में पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी महाराज साहब आदि ठाणा चातुर्मास हेतु विराजित हैं। उनके सान्निध्य में पर्यूषण महापर्व के सप्तम दिवस का आयोजन हुआ। रविवार की धर्मसभा में उन्होंने महापर्व की आराधना के महत्व पर मार्गदर्शन दिया।</p>
<p>नगर के जैन समाज को चातुर्मास के दौरान साध्वीश्री का सान्निध्य प्राप्त हो रहा है। सप्तम दिवस की सभा में भी इसी क्रम में श्रद्धालु एकत्र हुए। प्रवचन के साथ धार्मिक आयोजन में सहभागिता ने समाज के सदस्यों को सामूहिक रूप से धर्मलाभ प्राप्त करने का अवसर दिया।</p>
<h2><strong>भंडारी परिवार ने लिया पूजा आयोजन का लाभ</strong></h2>
<p>जैन समाज के मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने आयोजन की जानकारी देते हुए बताया कि इस दिन की स्नात्र पूजा, अंगरचना और प्रभावना का लाभ पारसमल अनोखीलाल भंडारी परिवार, खारवा वाला ने लिया।</p>
<p>परिवार की सहभागिता का उल्लेख सप्तम दिवस के धार्मिक आयोजन में किया गया। पूजा और उससे जुड़ी गतिविधियों में समाज के सदस्यों ने उपस्थित होकर भाग लिया। इस अवसर पर धर्मसभा तथा पूजा आयोजन के माध्यम से महापर्व की आराधना का क्रम आगे बढ़ा।</p>
<h2><strong>कोचर और मोदी परिवार ने लिया प्रवचन प्रभावना का लाभ</strong></h2>
<p><img decoding="async" class="wp-image-357541 alignright" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/dfds-300x135.jpeg" alt="dfds" width="591" height="266" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/dfds-300x135.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/dfds-1024x461.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/dfds-768x346.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/dfds.jpeg 1152w" sizes="(max-width: 591px) 100vw, 591px" /><span style="font-size: inherit;">सचिन भंडारी के अनुसार, प्रवचन प्रभावना का लाभ अशोक कुमार हिमांशु कोचर परिवार तथा प्रकाशचंद मोदी परिवार, जावरा ने लिया। दोनों परिवारों की सहभागिता के साथ प्रवचन प्रभावना का आयोजन हुआ।</span></p>
<p>सप्तम दिवस पर पूजा और प्रवचन से जुड़े विभिन्न लाभार्थी परिवारों का विवरण समाज की ओर से साझा किया गया। आयोजन में परिवारों की भागीदारी के साथ सकल जैन श्रीसंघ की उपस्थिति रही। श्रद्धालुओं ने साध्वीश्री के प्रवचन सुनकर धर्म आराधना का महत्व समझा।</p>
<h2><strong>सकल जैन श्रीसंघ ने प्राप्त किया धर्मलाभ</strong></h2>
<p>संपूर्ण आयोजन में सकल जैन श्रीसंघ के सदस्यों ने उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त किया। महापर्व के सप्तम दिवस की धर्मसभा में आराधना के प्रति तत्पर रहने का संदेश प्रमुख रहा।</p>
<p>साध्वी डॉ. अमृतरसा श्रीजी ने पर्यूषण के दिनों को श्रेष्ठ अवसर बताते हुए श्रद्धालुओं को धर्म साधना से जुड़ने की प्रेरणा दी। उनके संबोधन ने महापर्व के समय का श्रद्धापूर्वक उपयोग करने और थोड़ी-सी आराधना के महत्व को समझने का संदेश दिया।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
