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	<title>Madhya Pradesh tourism &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<title>Madhya Pradesh tourism &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>देवास की माता टेकरी: रक्तपीठ की मान्यता, करीब 300 फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजती हैं बड़ी और छोटी माता</title>
		<link>https://swarajvani.com/dewas-mata-tekri-a-sacred-hilltop-shrine-of-maa-tulja-bhawani-and-maa/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 16 Oct 2026 10:37:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Dewas]]></category>
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					<description><![CDATA[देवास की माता टेकरी: रक्तपीठ की मान्यता, करीब 300 फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजती हैं बड़ी और छोटी माता देवास। मालवा क्षेत्र में इंदौर और उज्जैन के बीच स्थित देवास ... <a title="देवास की माता टेकरी: रक्तपीठ की मान्यता, करीब 300 फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजती हैं बड़ी और छोटी माता" class="read-more" href="https://swarajvani.com/dewas-mata-tekri-a-sacred-hilltop-shrine-of-maa-tulja-bhawani-and-maa/" aria-label="Read more about देवास की माता टेकरी: रक्तपीठ की मान्यता, करीब 300 फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजती हैं बड़ी और छोटी माता">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>देवास की माता टेकरी: रक्तपीठ की मान्यता, करीब 300 फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजती हैं बड़ी और छोटी माता</strong></h1>
<p><strong>देवास।</strong> मालवा क्षेत्र में इंदौर और उज्जैन के बीच स्थित देवास अपनी माता टेकरी के लिए विशेष पहचान रखता है। करीब 300 फीट ऊंची पहाड़ी पर मां तुलजा भवानी और मां चामुंडा के मंदिर हैं। श्रद्धालु मां तुलजा भवानी को बड़ी माता और मां चामुंडा को छोटी माता कहते हैं। नवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।</p>
<h2><strong>रक्त की बूंदें गिरने की लोकमान्यता</strong></h2>
<p>माता टेकरी को लेकर प्रचलित मान्यता है कि यहां माता सती के रक्त की बूंदें गिरी थीं, इसलिए इस स्थान को रक्तपीठ कहा जाता है। यह धार्मिक लोककथा है, जिसे श्रद्धालु पीढ़ियों से सुनते और मानते आए हैं। पहाड़ी पर दोनों देवियों के मंदिर होने के कारण इसे देवी-वास भी कहा जाता है। देवास नाम की उत्पत्ति को लेकर भी अलग-अलग मत प्रचलित हैं। एक मान्यता इसे ‘देव’ और ‘वास’ यानी देवताओं का निवास मानती है, जबकि एक अन्य मत के अनुसार शहर का नाम संस्थापक व्यापारी देवासा से जुड़ा हो सकता है।</p>
<h2><strong>दो रियासतों और कुलदेवियों से जुड़ा इतिहास</strong></h2>
<p>देवास की ऐतिहासिक पहचान भी विशिष्ट है। ब्रिटिश काल में यहां देवास सीनियर और देवास जूनियर नाम की दो रियासतें थीं, जिन पर पवार राजवंश की अलग-अलग शाखाओं का शासन था। स्थानीय परंपरा में तुलजा भवानी को होलकर वंश की कुलदेवी और चामुंडा माता को पवार वंश की कुलदेवी बताया जाता है। एक ही पहाड़ी पर दोनों देवियों के मंदिर होना इस धार्मिक स्थल को खास बनाता है।</p>
<p>माता टेकरी के मंदिरों की स्थापना का सटीक वर्ष उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों में स्पष्ट नहीं है। इसलिए मंदिर को ढाई हजार साल पुराना बताने का दावा प्रमाणित तिथि के रूप में नहीं, बल्कि प्रचलित मान्यता या लोककथा के रूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए। चामुंडा टेकरी और देवास की धार्मिक परंपरा का उल्लेख पुराने स्थानीय लेखन और पुस्तकों में मिलता है।</p>
<h2><strong>पहाड़ी पर मंदिर और दर्शन के रास्ते</strong></h2>
<p>टेकरी पर पहुंचने के लिए सीढ़ियों और सड़क मार्ग का उपयोग किया जा सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर तक जाने के लिए 300 से अधिक सीढ़ियां हैं। पहाड़ी के चारों ओर परिक्रमा का रास्ता भी श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध है। देवास जिला प्रशासन की पर्यटन जानकारी में माता टेकरी के साथ रोपवे का भी उल्लेख है। चढ़ाई करने में असुविधा हो तो श्रद्धालु यात्रा से पहले स्थानीय स्तर पर रोपवे की उपलब्धता और संचालन की जानकारी ले सकते हैं।</p>
<p>पहाड़ी से देवास शहर का दृश्य दिखाई देता है। मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र नवरात्रि में विशेष रूप से सक्रिय रहता है। त्योहार के दिनों में भीड़ बढ़ने के कारण श्रद्धालु समय लेकर पहुंचें और प्रशासन की ओर से जारी व्यवस्था व निर्देशों का पालन करें।</p>
<h2><strong>इंदौर और उज्जैन से सड़क संपर्क</strong></h2>
<p>देवास सड़क और रेल मार्ग से जुड़ा है। जिला प्रशासन के अनुसार, इंदौर से देवास की दूरी लगभग 35 किलोमीटर और उज्जैन से करीब 33 किलोमीटर है। निकटतम हवाई अड्डा इंदौर में है, जो देवास से लगभग 40 किलोमीटर दूर बताया गया है। शहर आगरा-मुंबई मार्ग से भी जुड़ा है। श्रद्धालु इंदौर या उज्जैन से सड़क मार्ग द्वारा देवास पहुंचकर माता टेकरी के दर्शन कर सकते हैं।</p>
<p>माता टेकरी देवास का प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल है। यहां की लोकमान्यताएं, दोनों देवियों के मंदिर और शहर का इतिहास इसे मालवा के श्रद्धालुओं के लिए खास बनाते हैं। मंदिर की प्राचीनता संबंधी दावों को लेकर प्रमाणित ऐतिहासिक जानकारी सीमित है, लेकिन पीढ़ियों से चली आ रही आस्था के कारण टेकरी आज भी भक्तों के लिए श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बनी हुई है।</p>
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		<title>मध्य प्रदेश में घूमने की बेस्ट जगहें: परिवार के साथ ट्रिप का प्लान और पहुंचने के आसान तरीके — दैनिक स्वराज वाणी</title>
		<link>https://swarajvani.com/best-tourist-places-in-madhya-pradesh-family-trip-ideas-and-how-to/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 16 Oct 2026 06:33:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[MADHAY PRADESH NEWS]]></category>
		<category><![CDATA[Bhopal]]></category>
		<category><![CDATA[Khajuraho]]></category>
		<category><![CDATA[Madhya Pradesh tourism]]></category>
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		<category><![CDATA[Ujjain]]></category>
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					<description><![CDATA[मध्य प्रदेश में घूमने की बेस्ट जगहें: परिवार के साथ ट्रिप का प्लान और पहुंचने के आसान तरीके — दैनिक स्वराज वाणी भोपाल। मध्य प्रदेश में धार्मिक स्थलों से लेकर ... <a title="मध्य प्रदेश में घूमने की बेस्ट जगहें: परिवार के साथ ट्रिप का प्लान और पहुंचने के आसान तरीके — दैनिक स्वराज वाणी" class="read-more" href="https://swarajvani.com/best-tourist-places-in-madhya-pradesh-family-trip-ideas-and-how-to/" aria-label="Read more about मध्य प्रदेश में घूमने की बेस्ट जगहें: परिवार के साथ ट्रिप का प्लान और पहुंचने के आसान तरीके — दैनिक स्वराज वाणी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>मध्य प्रदेश में घूमने की बेस्ट जगहें: परिवार के साथ ट्रिप का प्लान और पहुंचने के आसान तरीके — दैनिक स्वराज वाणी</strong></h1>
<p><strong>भोपाल।</strong> मध्य प्रदेश में धार्मिक स्थलों से लेकर ऐतिहासिक धरोहरों, पहाड़ी इलाकों और झीलों तक घूमने के कई विकल्प हैं। परिवार के साथ यात्रा की योजना बनाते समय सबसे पहले यह तय करें कि आपकी रुचि किस तरह के पर्यटन में है। मंदिरों और धार्मिक स्थलों के लिए उज्जैन, इतिहास और वास्तुकला के लिए सांची व खजुराहो, जबकि प्रकृति और ठंडे मौसम का आनंद लेने के लिए पचमढ़ी अच्छा विकल्प हो सकता है। भोपाल और मांडू को भी अपनी यात्रा में शामिल किया जा सकता है। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग भी राज्य के पर्यटन स्थलों को प्रकृति, विरासत, वन्यजीव और आध्यात्मिक अनुभवों के रूप में प्रस्तुत करता है।</p>
<h2><strong>धार्मिक यात्रा के लिए उज्जैन</strong></h2>
<p>उज्जैन परिवार के साथ धार्मिक यात्रा के लिए लोकप्रिय जगहों में शामिल है। यहां महाकालेश्वर मंदिर के दर्शन के साथ शहर के अन्य प्रमुख मंदिरों और घाटों को भी देखा जा सकता है। यदि आपके पास एक से अधिक दिन हैं, तो उज्जैन के आसपास के धार्मिक स्थलों को जोड़कर यात्रा का कार्यक्रम बनाया जा सकता है।</p>
<p>उज्जैन जाने के लिए ट्रेन, बस और सड़क मार्ग का विकल्प लिया जा सकता है। इंदौर से उज्जैन के लिए सड़क मार्ग से भी यात्रा की जा सकती है। यात्रा से पहले मंदिरों के दर्शन, आरती और स्थानीय यातायात से जुड़ी ताजा जानकारी जांचना उपयोगी रहेगा, खासकर त्योहारों या छुट्टियों के दिनों में।</p>
<h2><strong>भोपाल और सांची में इतिहास व संस्कृति</strong></h2>
<p>भोपाल की पहचान झीलों और सांस्कृतिक स्थलों के लिए है। परिवार यहां शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों के साथ संग्रहालयों और झीलों के आसपास समय बिता सकते हैं। भोपाल को यात्रा का आधार बनाकर आसपास के स्थानों को भी देखा जा सकता है।</p>
<p>भोपाल से सांची की यात्रा सड़क मार्ग से की जा सकती है। मध्य प्रदेश पर्यटन के अनुसार सांची का निकटतम हवाई अड्डा भोपाल में है, जबकि विदिशा और भोपाल इसके सुविधाजनक रेल संपर्क केंद्र हैं। सांची में बौद्ध स्तूप और प्राचीन स्मारक देखने के लिए पर्याप्त समय रखें। एक दिन में भोपाल से सांची जाकर लौटने का कार्यक्रम बनाया जा सकता है, लेकिन बच्चों और बुजुर्गों के साथ यात्रा हो तो बीच में आराम का समय भी रखें।</p>
<h2><strong>खजुराहो में देखें ऐतिहासिक मंदिर</strong></h2>
<p>खजुराहो अपनी ऐतिहासिक मंदिर वास्तुकला के लिए जाना जाता है। यहां आने वाले पर्यटक मंदिर परिसर और आसपास के दर्शनीय स्थलों को देखने के लिए अलग से समय रख सकते हैं। परिवार के साथ यात्रा में बच्चों को स्मारकों के इतिहास और स्थापत्य के बारे में बताना अनुभव को अधिक रोचक बना सकता है।</p>
<p>खजुराहो जाने से पहले अपने शहर से उपलब्ध ट्रेन, उड़ान या सड़क मार्ग की जानकारी जांचें। यात्रा के दिनों में स्थानीय आवागमन और ठहरने की व्यवस्था पहले से तय करना बेहतर रहता है। यदि परिवार में वरिष्ठ नागरिक हैं, तो दर्शनीय स्थलों के बीच चलने की दूरी और आराम की सुविधा को ध्यान में रखकर दिन का कार्यक्रम बनाएं।</p>
<h2><strong>प्रकृति के करीब पमच<span style="font-family: inherit; font-style: inherit;">ढ़ी</span></strong></h2>
<p>पहाड़, हरियाली और प्राकृतिक दृश्यों के लिए पचमढ़ी परिवार के साथ घूमने का अच्छा विकल्प हो सकता है। यहां यात्रा की योजना बनाते समय मौसम, स्थानीय परिवहन और दर्शनीय स्थलों तक पहुंचने के साधनों की जानकारी पहले लें। बच्चों के साथ जा रहे हों तो पानी, जरूरी दवाइयां और मौसम के अनुसार कपड़े साथ रखें।</p>
<p>पचमढ़ी के लिए ट्रेन या हवाई यात्रा के बाद सड़क मार्ग से आगे जाना पड़ सकता है। इसलिए टिकट लेते समय अंतिम गंतव्य तक पहुंचने की पूरी योजना बनाएं और केवल शहर तक पहुंचने के साधन पर निर्भर न रहें। बरसात या छुट्टियों के दौरान यात्रा से पहले मौसम और स्थानीय व्यवस्थाओं की जानकारी जांचना खास तौर पर उपयोगी है।</p>
<h2><strong>मांडू और भोपाल को साथ जोड़ने का विकल्प</strong></h2>
<p>इतिहास और स्थापत्य में रुचि रखने वाले परिवार मांडू को अपनी यात्रा सूची में शामिल कर सकते हैं। मध्य प्रदेश पर्यटन की यात्रा योजनाओं में इंदौर, उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर और मांडू को पश्चिमी मध्य प्रदेश के एक यात्रा सर्किट के रूप में जोड़ा गया है। इंदौर से मांडू और आसपास के शहरों तक सड़क मार्ग से पहुंचने के विकल्प उपलब्ध हैं।</p>
<h2><strong>परिवार के लिए ऐसे बनाएं यात्रा कार्यक्रम</strong></h2>
<p>एक ही यात्रा में उज्जैन, सांची, खजुराहो और पचमढ़ी सभी जगहें देखने की कोशिश करने के बजाय पास-पास के स्थलों का समूह चुनें। उदाहरण के लिए, भोपाल के साथ सांची की यात्रा रखी जा सकती है। इंदौर से उज्जैन और मांडू की ओर यात्रा का अलग कार्यक्रम बनाया जा सकता है। खजुराहो या पचमढ़ी के लिए पर्याप्त दिन अलग रखें, ताकि सफर की थकान कम हो और परिवार को हर जगह आराम से घूमने का समय मिले।</p>
<p>अक्टूबर से मार्च का समय घूमने के लिए सुविधाजनक माना जाता है, लेकिन मौसम स्थान के अनुसार बदल सकता है। टिकट, होटल, स्थानीय परिवहन और पर्यटन स्थलों के खुलने के समय की जानकारी यात्रा से पहले जांच लें। परिवार के सदस्यों की उम्र, स्वास्थ्य और रुचि के अनुसार रोजाना कम या ज्यादा स्थल शामिल करें। एक संतुलित कार्यक्रम में घूमने, भोजन और आराम—तीनों के लिए पर्याप्त समय होना चाहिए।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>इंदौर पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव बोले—मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित हो रहा मालवा</title>
		<link>https://swarajvani.com/cm-mohan-yadav-says-malwa-is-developing-into-a-metropolitan-region-hotel-facilities-needed-for-simhastha/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 13 Oct 2026 11:06:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[indore]]></category>
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					<description><![CDATA[इंदौर पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव बोले—मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित हो रहा मालवा सिंहस्थ 2028 को देखते हुए इंदौर-उज्जैन में होटल सुविधाओं का विस्तार जरूरी, पर्यटन और रोजगार को ... <a title="इंदौर पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव बोले—मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित हो रहा मालवा" class="read-more" href="https://swarajvani.com/cm-mohan-yadav-says-malwa-is-developing-into-a-metropolitan-region-hotel-facilities-needed-for-simhastha/" aria-label="Read more about इंदौर पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव बोले—मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित हो रहा मालवा">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>इंदौर पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव बोले—मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित हो रहा मालवा</strong></h1>
<h2><strong>सिंहस्थ 2028 को देखते हुए इंदौर-उज्जैन में होटल सुविधाओं का विस्तार जरूरी, पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा</strong></h2>
<p>मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मालवा क्षेत्र तेजी से मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित हो रहा है। पर्यटन, व्यापार और निवेश की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए यहां आधुनिक सुविधाओं का विस्तार आवश्यक है। इससे प्रदेश में आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।</p>
<p>मुख्यमंत्री मंगलवार को इंदौर में एक निजी होटल के उद्घाटन समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि मालवा क्षेत्र में विकास की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इंदौर और उज्जैन जैसे शहरों की पहचान केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है। इन शहरों में देशभर से लोग आते हैं। ऐसे में पर्यटन और व्यापार से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाने की जरूरत है।</p>
<h3><strong>सिंहस्थ 2028 के लिए तैयारियों पर जोर</strong></h3>
<p>डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2028 में उज्जैन में सिंहस्थ का आयोजन होना है। इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की संभावना है। इसलिए उज्जैन के साथ-साथ इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में ठहरने की सुविधाओं का विस्तार महत्वपूर्ण है।</p>
<p>इंदौर और उज्जैन की नजदीकी के कारण दोनों शहरों के बीच लोगों का आवागमन बना रहेगा। श्रद्धालु उज्जैन में धार्मिक आयोजन में शामिल होने के साथ इंदौर भी आ सकते हैं। ऐसे में होटल और अन्य आतिथ्य सुविधाएं यात्रियों के लिए उपयोगी होंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए समय रहते आवश्यक व्यवस्थाओं पर काम करना चाहिए।</p>
<h3><strong>पर्यटन और व्यापार को मिल सकता है लाभ</strong></h3>
<p>मुख्यमंत्री के मुताबिक, बेहतर होटल सुविधाएं पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद कर सकती हैं। जब शहरों में ठहरने और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी, तो बाहर से आने वाले लोगों की यात्रा अधिक सुविधाजनक होगी। इससे स्थानीय व्यापार और सेवा क्षेत्र को भी लाभ मिलने की संभावना है।</p>
<p>पर्यटकों और श्रद्धालुओं के आने से होटल, परिवहन, खानपान और अन्य सेवाओं से जुड़े कारोबारों में गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इन क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बन सकते हैं। मुख्यमंत्री ने आधुनिक सुविधाओं के विस्तार को क्षेत्र के विकास और रोजगार से जोड़कर देखा।</p>
<h3><strong>निवेश और आधुनिक सुविधाओं पर ध्यान</strong></h3>
<p>मालवा क्षेत्र में व्यापार और निवेश की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए डॉ. यादव ने कहा कि बदलते समय के साथ शहरों में सुविधाओं का विकास जरूरी है। पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करने से यात्रियों को सुविधा मिलेगी और क्षेत्र की क्षमता का बेहतर उपयोग हो सकेगा।</p>
<p>इंदौर और उज्जैन के बीच धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यावसायिक आवागमन को देखते हुए होटल सुविधाओं का विस्तार दोनों शहरों के लिए अहम माना जा रहा है। सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन के दौरान ठहरने की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मालवा के विकास के साथ-साथ पर्यटकों और श्रद्धालुओं की जरूरतों को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।</p>
<p>निजी होटल के उद्घाटन समारोह में शामिल होने के दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं और आधुनिक सुविधाओं की जरूरत पर बात रखी। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के संदर्भ में इंदौर और उज्जैन में होटल सुविधाओं का विस्तार आने वाले समय की अहम जरूरत के रूप में सामने आया है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>कान्हा नेशनल पार्क: कब जाएं, कैसे बुक करें सफारी और कितना लगेगा खर्च? पहली बार जाने वालों के लिए पूरी गाइड</title>
		<link>https://swarajvani.com/national-park-travel-guide-best-time-to-visit-safari-booking-and-estimated-costs/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 13 Oct 2026 06:55:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[MADHAY PRADESH NEWS]]></category>
		<category><![CDATA[Kanha Safari Booking]]></category>
		<category><![CDATA[l Park]]></category>
		<category><![CDATA[Madhya Pradesh tourism]]></category>
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		<category><![CDATA[Wildlife Safari]]></category>
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					<description><![CDATA[कान्हा नेशनल पार्क: कब जाएं, कैसे बुक करें सफारी और कितना लगेगा खर्च? पहली बार जाने वालों के लिए पूरी गाइड मध्य प्रदेश के मंडला और बालाघाट जिलों में फैला ... <a title="कान्हा नेशनल पार्क: कब जाएं, कैसे बुक करें सफारी और कितना लगेगा खर्च? पहली बार जाने वालों के लिए पूरी गाइड" class="read-more" href="https://swarajvani.com/national-park-travel-guide-best-time-to-visit-safari-booking-and-estimated-costs/" aria-label="Read more about कान्हा नेशनल पार्क: कब जाएं, कैसे बुक करें सफारी और कितना लगेगा खर्च? पहली बार जाने वालों के लिए पूरी गाइड">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>कान्हा नेशनल पार्क: कब जाएं, कैसे बुक करें सफारी और कितना लगेगा खर्च? पहली बार जाने वालों के लिए पूरी गाइड</strong></h1>
<p>मध्य प्रदेश के मंडला और बालाघाट जिलों में फैला कान्हा टाइगर रिजर्व बाघ, बारहसिंगा और मध्य भारत के जंगलों के लिए जाना जाता है। यहां घूमने का प्लान बनाते समय सफारी का परमिट, प्रवेश गेट, ठहरने की जगह और मौसम पहले तय करना जरूरी है। सफारी में वन्यजीव दिखने की संभावना रहती है, लेकिन बाघ या किसी खास जानवर का दिखना तय नहीं होता।</p>
<h2><strong>घूमने का सही समय</strong></h2>
<p>कान्हा टाइगर रिजर्व की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, पार्क आम तौर पर 15 अक्टूबर से 30 जून तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है और मानसून के दौरान बंद रहता है। अक्टूबर से मार्च तक मौसम अपेक्षाकृत ठंडा और आरामदायक रहता है। अप्रैल से जून में गर्मी अधिक होती है, लेकिन जंगल में पानी के स्रोत घटने पर जानवरों के आसपास दिखने की संभावना बढ़ सकती है। इसी वजह से गर्मियों में भी कई पर्यटक सफारी के लिए पहुंचते हैं। सफारी की ऑनलाइन बुकिंग पहले से खुलती है और लोकप्रिय तारीखों के परमिट जल्दी भर सकते हैं, इसलिए यात्रा की योजना पहले बनाना बेहतर है।</p>
<h2><strong>सफारी के जोन और प्रवेश गेट</strong></h2>
<p>कान्हा के कोर क्षेत्र में कान्हा, किसली, मुक्की और सरही जोन हैं। बफर क्षेत्र में खटिया, खापा और सिजोरा जोन में भी सफारी की सुविधा है। हर जोन का अपना प्रवेश गेट है, इसलिए परमिट बुक करने के बाद उसी गेट के पास ठहरने की व्यवस्था करना सुविधाजनक होगा। रिजर्व की वेबसाइट के अनुसार, खटिया, मुक्की और सरही प्रमुख प्रवेश बिंदु हैं।</p>
<h2><strong>ऑनलाइन सफारी बुकिंग कैसे करें</strong></h2>
<p>सफारी परमिट मध्य प्रदेश वन विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर बुक किया जा सकता है। पोर्टल पर कान्हा चुनें, फिर सफारी की तारीख, जोन और परमिट का प्रकार—पूरी गाड़ी या सिंगल सीट—चुनकर उपलब्धता देखें। पूरी गाड़ी के परमिट में एक वाहन के लिए बुकिंग होती है, जबकि सिंगल सीट बुकिंग अकेले या कम लोगों में जाने वालों के लिए विकल्प हो सकती है। बुकिंग के समय यात्रियों के नाम और पहचान-पत्र की जानकारी सही भरें।</p>
<p>वन विभाग के पोर्टल पर सामान्य सफारी की बुकिंग 120 दिन पहले रोजाना सुबह 11 बजे खुलने की जानकारी दी गई है। सामान्य बुकिंग सफारी से एक दिन पहले शाम 5 बजे बंद हो जाती है। कुछ उपलब्ध सीटों के लिए सिंगल सीट बुकिंग एक दिन पहले दोपहर 2 बजे और प्रीमियम तत्काल बुकिंग सात दिन पहले सुबह 11 बजे खुलती है। ये विकल्प सीट उपलब्ध होने पर ही मिलते हैं।</p>
<h2><strong>सफारी का समय और अनुमानित खर्च</strong></h2>
<p>अक्टूबर और नवंबर के लिए वन विभाग के पोर्टल पर सुबह की सफारी का प्रवेश समय सुबह 6 बजे से और वापसी समय 11:30 बजे तक दिया गया है। शाम की सफारी का प्रवेश समय दोपहर 3 बजे और वापसी समय शाम 6 बजे तक है। दिसंबर से महीने के अनुसार समय बदलता है, इसलिए अपनी तारीख के लिए परमिट पोर्टल पर समय जरूर जांचें।</p>
<p>खर्च में केवल ऑनलाइन परमिट शामिल मानकर बजट न बनाएं। वन विभाग का पोर्टल बताता है कि वाहन और गाइड का शुल्क परमिट राशि से अलग लिया जाता है। एक ऑनलाइन सफारी बुकिंग सेवा के अनुसार, भारतीय पर्यटकों के लिए कोर जोन की एक जीप सफारी का कुल अनुमान लगभग ₹7,500 से ₹8,000 प्रति जीप हो सकता है; इसमें तारीख के अनुसार परमिट और वाहन-गाइड शुल्क शामिल होते हैं। यह एक अनुमान है, सरकारी तय पैकेज नहीं। तारीख, जोन और शुल्क में बदलाव से कुल रकम बदल सकती है, इसलिए भुगतान से पहले आधिकारिक पोर्टल पर दिखाई गई राशि और गेट पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क की पुष्टि करें। ठहरने, भोजन और आने-जाने का खर्च इसमें शामिल नहीं है।</p>
<h2><strong>कान्हा कैसे पहुंचें और कहां ठहरें</strong></h2>
<p>रिजर्व की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, जबलपुर से खटिया गेट की दूरी सड़क मार्ग से लगभग 160 किलोमीटर है। मुक्की गेट जबलपुर से करीब 200 किलोमीटर और सरही गेट लगभग 150 किलोमीटर दूर है। निकट के रेलवे स्टेशनों में जबलपुर, गोंदिया, रायपुर, बिलासपुर और बालाघाट शामिल हैं। हवाई यात्रा के लिए जबलपुर, रायपुर और नागपुर के हवाई अड्डों का विकल्प है। सफारी के प्रवेश गेट के अनुसार आगे की सड़क यात्रा तय करनी होगी।</p>
<p>खटिया, मुक्की और सरही के आसपास मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम और निजी संचालकों के ठहरने तथा भोजन के विकल्प हैं। पार्क प्रबंधन के अनुसार, खटिया प्रवेश के पास वन विभाग का कान्हा जंगल कैंप भी उपलब्ध है। छुट्टियों और व्यस्त सीजन में कमरा पहले से बुक कराना ठीक रहेगा। सफारी का गेट दूर होने पर सुबह समय से पहुंचने के लिए उसी तरफ ठहरने की व्यवस्था करें।</p>
<h2><strong>पहली बार जा रहे हैं तो ध्यान रखें</strong></h2>
<p>सफारी परमिट, पहचान-पत्र और प्रवेश गेट की जानकारी यात्रा से पहले दोबारा जांच लें। निर्धारित समय से पहले गेट पर पहुंचें और गाइड के निर्देशों का पालन करें। जंगल में शोर न करें, वन्यजीवों को खाना न दें और वाहन से उतरने की कोशिश न करें। मौसम के अनुसार गर्म कपड़े, पानी और जरूरी दवाएं साथ रखें। बाघ दिखना सफारी की गारंटी नहीं है—कान्हा का अनुभव जंगल, बारहसिंगा, पक्षियों और प्राकृतिक वातावरण को देखने में भी है।</p>
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		<title>Tikamgarh का ऐतिहासिक पचेर किला बनेगा हेरिटेज टूरिज्म का केंद्र, पर्यटन बोर्ड को भेजा जाएगा प्रस्ताव</title>
		<link>https://swarajvani.com/tikamgarh-historic-pacher-fort-become-a-heritage/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Oct 2026 10:21:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Tikamgarh]]></category>
		<category><![CDATA[Heritage Tourism]]></category>
		<category><![CDATA[Historic Pacher Fort]]></category>
		<category><![CDATA[Madhya Pradesh tourism]]></category>
		<category><![CDATA[Pacher Fort]]></category>
		<category><![CDATA[Tikamgarh news]]></category>
		<category><![CDATA[Tikamgarh Tourism]]></category>
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					<description><![CDATA[Tikamgarh का ऐतिहासिक पचेर किला बनेगा हेरिटेज टूरिज्म का केंद्र, पर्यटन बोर्ड को भेजा जाएगा प्रस्ताव खूब चन्द्र लोधी संवाददाता दैनिक स्वराज वाणी धसान नदी के किनारे स्थित 4-5 एकड़ ... <a title="Tikamgarh का ऐतिहासिक पचेर किला बनेगा हेरिटेज टूरिज्म का केंद्र, पर्यटन बोर्ड को भेजा जाएगा प्रस्ताव" class="read-more" href="https://swarajvani.com/tikamgarh-historic-pacher-fort-become-a-heritage/" aria-label="Read more about Tikamgarh का ऐतिहासिक पचेर किला बनेगा हेरिटेज टूरिज्म का केंद्र, पर्यटन बोर्ड को भेजा जाएगा प्रस्ताव">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>Tikamgarh का ऐतिहासिक पचेर किला बनेगा हेरिटेज टूरिज्म का केंद्र, पर्यटन बोर्ड को भेजा जाएगा प्रस्ताव</strong></h1>
<p><em><strong>खूब चन्द्र लोधी </strong></em><br />
<em><strong>संवाददाता </strong></em><br />
<em><strong>दैनिक स्वराज वाणी </strong></em></p>
<p><strong>धसान नदी के किनारे स्थित 4-5 एकड़ में फैले किले को पर्यटन से जोड़ने की पहल, निजी निवेश से रोजगार और स्थानीय कारोबार को मिल सकता है बढ़ावा</strong></p>
<p><strong>Tikamgarh ।</strong> मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले की ऐतिहासिक धरोहरों को पर्यटन के नक्शे पर नई पहचान दिलाने की दिशा में प्रशासन ने पहल की है। कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने बल्देवगढ़ से लगभग 25 किलोमीटर दूर धसान नदी के किनारे स्थित ऐतिहासिक पचेर किले को हेरिटेज टूरिज्म के रूप में विकसित करने की संभावनाएं तलाशने की बात कही है। इसके लिए मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड को प्रस्ताव भेजा जा रहा है, ताकि पर्यटन नीति के अंतर्गत निजी निवेश के माध्यम से किले के विकास की संभावनाओं पर विचार किया जा सके।</p>
<p>कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने हाल ही में पचेर किले का भ्रमण किया था। इस दौरान उन्होंने किले की ऐतिहासिक महत्ता, स्थापत्य और आसपास के प्राकृतिक परिवेश का जायजा लिया। लगभग 4 से 5 एकड़ क्षेत्र में फैला यह किला कभी महत्वपूर्ण सुरक्षा चौकी के रूप में उपयोग किया जाता था। इसकी प्राचीन दीवारें, बुर्ज और परकोटे आज भी इसके गौरवशाली अतीत की झलक प्रस्तुत करते हैं। किले का संबंध वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से भी बताया जाता है।</p>
<h2><strong>धसान नदी का प्राकृतिक सौंदर्य बढ़ाएगा पर्यटन की संभावनाएं</strong></h2>
<p>पचेर किले की खासियत इसका ऐतिहासिक महत्व और प्राकृतिक परिवेश है। धसान नदी के किनारे स्थित होने के कारण यहां का वातावरण पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखता है। इसके अलावा, विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो से क्षेत्र की निकटता को भी पर्यटन विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p>यदि किले को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाता है, तो इसे बुंदेलखंड की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को समझने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए संरक्षण, आधारभूत सुविधाओं, निवेश और पर्यटन गतिविधियों से संबंधित पहलुओं पर विस्तृत योजना तैयार करना आवश्यक होगा।</p>
<h2><strong>राजस्थान की तर्ज पर हेरिटेज टूरिज्म विकसित करने की योजना</strong></h2>
<p>कलेक्टर श्रोत्रिय ने बताया कि राजस्थान में कई पुराने किलों और महलों को हेरिटेज होटल, विवाह समारोह स्थलों और पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित किया गया है। इससे वहां पर्यटन आधारित कारोबार को बढ़ावा मिला है और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी बने हैं।</p>
<p>इसी तर्ज पर बुंदेलखंड की ऐतिहासिक धरोहरों को भी पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। पचेर किले को विकसित करने का प्रस्ताव इसी दिशा में एक पहल है। पर्यटन बोर्ड के माध्यम से किले के विकास के लिए उपयुक्त मॉडल और निजी निवेश की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="size-medium wp-image-365585 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-09-at-3.15.11-am-300x186.jpeg" alt="whatsapp image 2026 10 09 at 3.15.11 am" width="300" height="186" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-09-at-3.15.11-am-300x186.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-09-at-3.15.11-am.jpeg 720w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<h2><strong>स्थानीय युवाओं को मिल सकते हैं रोजगार के अवसर</strong></h2>
<p>ऐतिहासिक स्थलों के आसपास पर्यटन गतिविधियां बढ़ने से केवल पर्यटकों की आवाजाही ही नहीं बढ़ती, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिल सकता है। यदि पचेर किले को हेरिटेज टूरिज्म के रूप में विकसित किया जाता है, तो होटल संचालन, हाउसकीपिंग, सुरक्षा, पर्यटक गाइड और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।</p>
<p>इसके अलावा, स्थानीय किसानों को फल, सब्जियां, दूध और फूलों की आपूर्ति के लिए नया बाजार मिल सकता है। टेंट, कैटरिंग, सजावट, फोटोग्राफी, परिवहन, हस्तशिल्प और छोटे दुकानदारों को भी पर्यटन से जुड़े कारोबार का लाभ मिलने की संभावना है।</p>
<h2><strong>सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाओं को मिल सकती है गति</strong></h2>
<p>कलेक्टर के अनुसार, जब किसी ऐतिहासिक भवन को निजी निवेश के माध्यम से हेरिटेज होटल या पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाता है, तो उसका प्रभाव आसपास के क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। पर्यटकों की सुविधा के लिए सड़क, बिजली, पानी और अन्य आधारभूत सुविधाओं में सुधार की जरूरत होती है। इससे स्थानीय क्षेत्र के विकास को भी गति मिल सकती है।</p>
<p>हालांकि, पचेर किले के विकास की वास्तविक दिशा और स्वरूप पर्यटन बोर्ड के प्रस्ताव पर विचार, आवश्यक अनुमतियों, संरक्षण संबंधी जरूरतों और निवेश की संभावनाओं के आधार पर तय होगा।</p>
<h2><strong>पर्यटन बोर्ड को भेजा जा रहा प्रस्ताव</strong></h2>
<p>पचेर किले को पर्यटन विकास से जोड़ने के लिए मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड को प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया प्रस्तावित है। इसके माध्यम से प्रचलित पर्यटन नीति के अंतर्गत निजी निवेशकों की भागीदारी की संभावनाएं तलाशने का प्रयास किया जाएगा।</p>
<p>यदि योजना आगे बढ़ती है, तो पचेर किला टीकमगढ़ और बुंदेलखंड की ऐतिहासिक विरासत को नई पहचान दिलाने में भूमिका निभा सकता है। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के साथ स्थानीय रोजगार और छोटे व्यवसायों को बढ़ावा मिलने की संभावनाएं भी बन सकती हैं। फिलहाल, किले को हेरिटेज टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना प्रस्ताव और संभावनाओं के चरण में है।</p>
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		<item>
		<title>MP Travel Mart 2026: भोपाल में जुटेंगे 34 देशों के प्रतिनिधि, 1,100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों पर होगा काम</title>
		<link>https://swarajvani.com/mp-travel-mart-2026-in-bhopal-over-100-foreign-guests-from-34-countries-investment-proposals-exceed-1100-crore/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 07 Oct 2026 06:57:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhopal]]></category>
		<category><![CDATA[CM Mohan Yadav]]></category>
		<category><![CDATA[Madhya Pradesh tourism]]></category>
		<category><![CDATA[Mart 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Tour Operators]]></category>
		<category><![CDATA[Tourism Investment]]></category>
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					<description><![CDATA[MP Travel Mart 2026: भोपाल में जुटेंगे 34 देशों के प्रतिनिधि, 1,100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों पर होगा काम भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 7 अक्टूबर ... <a title="MP Travel Mart 2026: भोपाल में जुटेंगे 34 देशों के प्रतिनिधि, 1,100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों पर होगा काम" class="read-more" href="https://swarajvani.com/mp-travel-mart-2026-in-bhopal-over-100-foreign-guests-from-34-countries-investment-proposals-exceed-1100-crore/" aria-label="Read more about MP Travel Mart 2026: भोपाल में जुटेंगे 34 देशों के प्रतिनिधि, 1,100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों पर होगा काम">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>MP Travel Mart 2026: भोपाल में जुटेंगे 34 देशों के प्रतिनिधि, 1,100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों पर होगा काम</strong></h1>
<p><strong>भोपाल।</strong> मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 7 अक्टूबर से मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026 का आयोजन शुरू होगा। चार दिवसीय यह कार्यक्रम 10 अक्टूबर तक चलेगा। इसका शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। आयोजन में अमेरिका, फ्रांस, जापान और इटली सहित 34 देशों के 100 से अधिक विदेशी मेहमान शामिल होंगे। इसके साथ ही भारत के 15 राज्यों से 180 से अधिक टूर ऑपरेटर्स की भागीदारी रहेगी।</p>
<p>उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आयोजन के दौरान 1,100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों पर काम होगा। विदेशी प्रतिनिधियों और देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले पर्यटन व्यवसायियों की भागीदारी के कारण यह कार्यक्रम मध्यप्रदेश के पर्यटन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मंच बन सकता है।</p>
<h2><strong>7 से 10 अक्टूबर तक चलेगा आयोजन</strong></h2>
<p>मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट का आयोजन भोपाल में चार दिनों तक किया जाएगा। 7 अक्टूबर को शुरू होने वाला यह कार्यक्रम 10 अक्टूबर तक चलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इसका शुभारंभ करेंगे। आयोजन में पर्यटन व्यवसाय से जुड़े देशी और विदेशी प्रतिभागियों को एक स्थान पर आने का अवसर मिलेगा।</p>
<p>ट्रैवल मार्ट जैसे आयोजन पर्यटन स्थलों, यात्रा सेवाओं और कारोबारी संभावनाओं को समझने का माध्यम होते हैं। इनमें विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के बीच संपर्क बढ़ सकता है। भोपाल में होने वाले इस कार्यक्रम में भी अंतरराष्ट्रीय और घरेलू भागीदारी इसके प्रमुख आकर्षणों में शामिल है।</p>
<h2><strong>34 देशों से आएंगे 100 से अधिक विदेशी मेहमान</strong></h2>
<p>आयोजन में 34 देशों के 100 से अधिक विदेशी मेहमान शामिल होंगे। इनमें अमेरिका, फ्रांस, जापान और इटली के प्रतिनिधियों का उल्लेख किया गया है। अलग-अलग देशों से आने वाले प्रतिभागियों की मौजूदगी मध्यप्रदेश के पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर दे सकती है।</p>
<p>विदेशी पर्यटन बाजार में किसी क्षेत्र की पहचान बढ़ाने के लिए वहां की यात्रा सुविधाओं, उपलब्ध सेवाओं और पर्यटन अनुभवों की जानकारी महत्वपूर्ण होती है। इस प्रकार के आयोजन संबंधित व्यवसायियों को एक-दूसरे की जरूरतें समझने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध विवरण में सभी देशों और प्रतिनिधियों की पूरी सूची नहीं दी गई है।</p>
<h2><strong>15 राज्यों के 180 से अधिक टूर ऑपरेटर्स होंगे शामिल</strong></h2>
<p>विदेशी मेहमानों के साथ देश के 15 राज्यों से 180 से अधिक टूर ऑपरेटर्स भी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। घरेलू पर्यटन कारोबार से जुड़े इन प्रतिभागियों की मौजूदगी आयोजन का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष है। टूर ऑपरेटर्स यात्रियों और पर्यटन सेवाएं उपलब्ध कराने वाले व्यवसायों के बीच संपर्क स्थापित करने में भूमिका निभाते हैं।</p>
<p>उनकी भागीदारी से मध्यप्रदेश की यात्रा संबंधी संभावनाओं पर संवाद आगे बढ़ सकता है। विभिन्न राज्यों के पर्यटन व्यवसायियों के बीच संपर्क बनने से भविष्य में साझेदारी और यात्रा कार्यक्रम तैयार करने के अवसर मिल सकते हैं। ऐसी संभावनाओं का वास्तविक परिणाम आयोजन के बाद होने वाले कारोबारी निर्णयों पर निर्भर करेगा।</p>
<h2><strong>1,100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव</strong></h2>
<p>ट्रैवल मार्ट में 1,100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों पर काम होने की जानकारी दी गई है। पर्यटन क्षेत्र के संदर्भ में प्रस्तावित निवेश का यह आंकड़ा आयोजन को आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाता है। हालांकि, निवेश प्रस्ताव और वास्तविक निवेश अलग-अलग चरण हैं।</p>
<p>किसी प्रस्ताव का परियोजना में बदलना संबंधित निर्णयों, आवश्यक स्वीकृतियों और क्रियान्वयन पर निर्भर करता है। इसलिए इस राशि को अभी पूरा हो चुका निवेश नहीं माना जा सकता। उपलब्ध सामग्री में प्रस्तावों से जुड़ी कंपनियों, परियोजनाओं, स्थानों और समयसीमा का विस्तृत विवरण शामिल नहीं है।</p>
<h2><strong>पर्यटन कारोबार के लिए संपर्क बढ़ाने का अवसर</strong></h2>
<p>देशी और विदेशी प्रतिभागियों को एक मंच पर लाने से पर्यटन कारोबार में नए संपर्क बनने की संभावना रहती है। यात्रा की मांग, पर्यटकों की पसंद और सेवाओं की उपलब्धता जैसे विषय व्यवसायियों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इन पर संवाद भविष्य की कारोबारी योजनाओं को दिशा दे सकता है।</p>
<p>मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट में अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और घरेलू टूर ऑपरेटर्स की संयुक्त भागीदारी इसी दृष्टि से उल्लेखनीय है। आयोजन के माध्यम से बनने वाले संपर्क आगे चलकर पर्यटन सेवाओं और व्यावसायिक सहयोग में उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, किसी निश्चित समझौते की पुष्टि संबंधित घोषणा के बाद ही होगी।</p>
<h2><strong>भोपाल में पर्यटन और निवेश पर रहेगी नजर</strong></h2>
<p>चार दिवसीय आयोजन के दौरान विदेशी भागीदारी, घरेलू पर्यटन कारोबार और निवेश प्रस्ताव प्रमुख विषय रहेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा शुभारंभ के साथ कार्यक्रम की शुरुआत होगी। इसके बाद आयोजन से सामने आने वाली घोषणाओं और कारोबारी प्रगति पर नजर रहेगी।</p>
<p>34 देशों के 100 से अधिक विदेशी मेहमान और 15 राज्यों के 180 से अधिक टूर ऑपरेटर्स इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। वहीं, 1,100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों पर होने वाला काम इसके आर्थिक पक्ष को रेखांकित करता है। आयोजन का प्रभाव आगे बनने वाली साझेदारियों और प्रस्तावों के क्रियान्वयन से स्पष्ट होगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Sagar : 900 साल पुराने गढ़पहरा किले में 400 वर्ष प्राचीन हनुमान मंदिर, आषाढ़ के मंगलवार का लगता है भव्य मेला</title>
		<link>https://swarajvani.com/sagar-garhpahra-forts-400-year-old-hanuman-temple/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Jul 2026 10:12:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[MADHAY PRADESH NEWS]]></category>
		<category><![CDATA[Bundelkhand]]></category>
		<category><![CDATA[Garhpahra Fort]]></category>
		<category><![CDATA[Hanuman Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Madhya Pradesh tourism]]></category>
		<category><![CDATA[Sagar News]]></category>
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					<description><![CDATA[*जहां प्रकट हुए थे हनुमान आषाढ़ माह का मंगलवार है खास* *दूर दूर से आते है श्रद्धालु भक्त* *प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का साक्षी गढ़पहरा किला, यहां स्थित बजरंग बली का ... <a title="Sagar : 900 साल पुराने गढ़पहरा किले में 400 वर्ष प्राचीन हनुमान मंदिर, आषाढ़ के मंगलवार का लगता है भव्य मेला" class="read-more" href="https://swarajvani.com/sagar-garhpahra-forts-400-year-old-hanuman-temple/" aria-label="Read more about Sagar : 900 साल पुराने गढ़पहरा किले में 400 वर्ष प्राचीन हनुमान मंदिर, आषाढ़ के मंगलवार का लगता है भव्य मेला">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>*जहां प्रकट हुए थे हनुमान आषाढ़ माह का मंगलवार है खास*</p>
<p>*दूर दूर से आते है श्रद्धालु भक्त*</p>
<h1><strong>*प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का साक्षी गढ़पहरा किला, यहां स्थित बजरंग बली का मंदिर 400 वर्ष पूर्व मंदिर का निर्माण कराया गया था*</strong></h1>
<p><strong>संवाददाता : महेंद्र राज</strong></p>
<p>Sagar / बुंदेलखंड के संभागीय मुख्यालय सागर में स्थित गढ़पहरा किले की बात करें तो इसे राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा प्राप्त है। इस किले में लगभग 900 वर्षों का इतिहास समाहित है। विशेष रूप से यह स्वतंत्रता सेनानियों की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। किले का अधिकांश भाग जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है, लेकिन किले में स्थित 400 वर्ष पुराना हनुमान मंदिर आज भी सुस्थापित है, जो न केवल बुंदेलखंड बल्कि पड़ोसी राज्यों के लोगों के लिए भी आस्था का केंद्र है। इस हनुमान मंदिर में आषाढ़ के प्रत्येक मंगलवार को विशेष मेला लगता है और हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।</p>
<p>गढ़पहरा किला कहाँ स्थित है: गढ़पहरा किला सागर शहर से लगभग 11 किलोमीटर की दूरी पर सागर-झांसी मार्ग पर स्थित है। भारत के पुरातत्व विभाग द्वारा इसे राष्ट्रीय महत्व के स्मारक के रूप में संरक्षित किया गया है, वहीं भारत सरकार का पर्यटन मंत्रालय भी इसकी देखरेख करता है। सागर से झांसी जाते समय सड़क के बाईं ओर स्थित यह किला एक विशाल पहाड़ी पर बना है। कहा जाता है कि किले के दो द्वार थे, पहला समुद्र की ओर था जहाँ से मंदिर और किले में प्रवेश किया जा सकता था। दूसरा द्वार झांसी की ओर था जो अब लगभग खंडहर हो चुका है। खास बात यह है कि किला जर्जर अवस्था में होने के बावजूद, प्रवेश द्वार के दाईं ओर अभी भी हनुमान जी का मंदिर है। कहा जाता है कि यहाँ हनुमान जी की स्वयंभू प्रतिमा है, जिसके लिए डांगी राजाओं ने 400 वर्ष पूर्व मंदिर का निर्माण कराया था।</p>
<p><img decoding="async" class="size-medium wp-image-335493 aligncenter" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/07/Capture-310-251x300.jpg" alt="Capture 310" width="251" height="300" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/07/Capture-310-251x300.jpg 251w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/07/Capture-310.jpg 619w" sizes="(max-width: 251px) 100vw, 251px" /></p>
<p>किले का ऐतिहासिक महत्व: किले के निर्माण के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन ऐतिहासिक प्रमाणों के अनुसार, यह किला गौर राजा संग्राम सिंह के शासन के अधीन था और गौर राजाओं के 52 किलों में गढ़फरा का एक महत्वपूर्ण स्थान था। इसके अधीन 360 मौंज थे। बाद में इस किले पर डांगी राजाओं का कब्जा हो गया। इतिहासकार डॉ. भरत शुक्ला बताते हैं कि &#8220;शीशमहल किला और हनुमान जी का मंदिर लगभग 1620 ईस्वी में यहाँ निर्मित हुए थे, जो लगभग 400 वर्ष पुराने हैं। आषाढ़ के मंगलवार को यहाँ प्रतिवर्ष एक विशाल मेला लगता है। ऐसा माना जाता है कि यह एक बहुत ही पवित्र स्थान है और यहाँ आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। 1689 में यह किला मुगल शासन के अधीन आ गया और फिर मराठों ने इस पर कब्जा कर लिया।&#8221;</p>
<p>प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित किले का महत्व: डॉ. भरत शुक्ला बताते हैं कि “1857 की क्रांति में, गढ़पहरा किले के तत्कालीन राजा मर्दन सिंह थे, जिन्होंने इसी किले से विद्रोह का नेतृत्व किया था। उन्होंने शाहगढ़ के राजा बख्तबली शाह के साथ मिलकर झांसी पर आक्रमण किया था। उन्होंने रानी की बहुत मदद की और अंग्रेजों के खिलाफ जमकर लड़ाई लड़ी। हालांकि इन दोनों राजाओं को ब्रिटिश सेना ने पराजित कर आत्मसमर्पण करना पड़ा, लेकिन दोनों राजाओं ने अंग्रेजों के खिलाफ जमकर संघर्ष किया।”</p>
<p>आषाढ़ के मंगलवार का विशेष महत्व: बुंदेलखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक गढ़पहरा हनुमान मंदिर में आषाढ़ के मंगलवार को एक विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। मध्य प्रदेश और बुंदेलखंड के अलावा, किले के पास स्थित सैन्य छावनी के कारण यह मंदिर दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। ऐसा कहा जाता है कि यह भगवान हनुमान का सिद्ध क्षेत्र है और आषाढ़ के मंगलवार को विशेष पूजा करके सच्चे मन से की गई कोई भी मनोकामना अवश्य पूरी होती है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>MP Hill Stations पर उमड़ा पर्यटकों का सैलाब, गर्मियों में पर्यटन कारोबार को मिला नया बूस्ट</title>
		<link>https://swarajvani.com/mp-hill-stations-witness-record-summer-rush/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 11:40:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[MADHAY PRADESH NEWS]]></category>
		<category><![CDATA[Amarkantak]]></category>
		<category><![CDATA[Hill Stations]]></category>
		<category><![CDATA[Madhya Pradesh tourism]]></category>
		<category><![CDATA[MP Tourism]]></category>
		<category><![CDATA[Pachmarhi]]></category>
		<category><![CDATA[Summer Tourism]]></category>
		<category><![CDATA[Tamia]]></category>
		<category><![CDATA[Tourism Growth]]></category>
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					<description><![CDATA[MP Hill Stations पर उमड़ा पर्यटकों का सैलाब, गर्मियों में पर्यटन कारोबार को मिला नया बूस्ट गर्मी के मौसम में बदला पर्यटन का ट्रेंड MP Hill Stations : आमतौर पर ... <a title="MP Hill Stations पर उमड़ा पर्यटकों का सैलाब, गर्मियों में पर्यटन कारोबार को मिला नया बूस्ट" class="read-more" href="https://swarajvani.com/mp-hill-stations-witness-record-summer-rush/" aria-label="Read more about MP Hill Stations पर उमड़ा पर्यटकों का सैलाब, गर्मियों में पर्यटन कारोबार को मिला नया बूस्ट">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong><span style="font-family: inherit; font-size: 35px; font-style: inherit;">MP Hill Stations पर उमड़ा पर्यटकों का सैलाब, गर्मियों में पर्यटन कारोबार को मिला नया बूस्ट</span></strong></h1>
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<h3 data-section-id="cjac6j" data-start="105" data-end="148">गर्मी के मौसम में बदला पर्यटन का ट्रेंड</h3>
<p data-start="150" data-end="597">MP Hill Stations : आमतौर पर गर्मियों का मौसम मध्यप्रदेश के पर्यटन क्षेत्र के लिए ऑफ-सीजन माना जाता रहा है, लेकिन वर्ष 2026 में यह धारणा पूरी तरह बदलती नजर आ रही है। देश के विभिन्न राज्यों में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच मध्यप्रदेश के प्रमुख हिल स्टेशन पचमढ़ी, तामिया और अमरकंटक पर्यटकों की पहली पसंद बनकर उभरे हैं। इन पर्यटन स्थलों पर लगातार बढ़ रही पर्यटकों की संख्या ने राज्य के पर्यटन उद्योग, होटल व्यवसाय, परिवहन सेवाओं और स्थानीय व्यापार को नई ऊर्जा प्रदान की है।</p>
<p data-start="599" data-end="885">पर्यटन विशेषज्ञों के अनुसार मई और जून के दौरान इन क्षेत्रों में होटल बुकिंग में पिछले वर्ष की तुलना में 35 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। सप्ताहांत पर स्थिति ऐसी बन रही है कि कई प्रमुख होटल और रिसॉर्ट्स में कमरे उपलब्ध नहीं हैं और पर्यटकों को पहले से बुकिंग करानी पड़ रही है।</p>
<h2 data-section-id="wp0xxn" data-start="887" data-end="937"><strong>पचमढ़ी, तामिया और अमरकंटक बने आकर्षण का केंद्र</strong></h2>
<p data-start="939" data-end="1237">सतपुड़ा की वादियों में बसे पचमढ़ी, तामिया की प्राकृतिक सुंदरता और अमरकंटक का धार्मिक व प्राकृतिक महत्व इस समय पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित कर रहा है। ठंडा मौसम, हरियाली, शांत वातावरण और प्राकृतिक नजारों के कारण लोग महानगरों की भीड़भाड़ और गर्मी से राहत पाने के लिए इन स्थानों का रुख कर रहे हैं।</p>
<p data-start="1239" data-end="1486">परिवारों के साथ-साथ युवा पर्यटक, एडवेंचर प्रेमी और प्रकृति के बीच समय बिताने वाले यात्रियों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। सोशल मीडिया पर इन स्थानों की बढ़ती लोकप्रियता ने भी पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।</p>
<h2 data-section-id="sgt2sr" data-start="1488" data-end="1529"><strong>होटल और रिसॉर्ट व्यवसाय को मिला फायदा</strong></h2>
<p data-start="1531" data-end="1729">पर्यटकों की बढ़ती संख्या का सबसे बड़ा लाभ होटल और रिसॉर्ट उद्योग को मिल रहा है। मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम (एमपीटी) के होटल और निजी रिसॉर्ट्स इस सीजन में लगभग फुल क्षमता के साथ संचालित हो रहे हैं।</p>
<p data-start="1731" data-end="2062">पचमढ़ी के प्रमुख पर्यटन आवासों और तामिया के लक्जरी रिसॉर्ट्स में कमरों की मांग लगातार बढ़ रही है। पर्यटन कारोबारियों के अनुसार पर्यटक अब हिमालयी राज्यों की लंबी और महंगी यात्राओं के बजाय मध्यप्रदेश के अपेक्षाकृत नजदीकी और बजट-अनुकूल पर्यटन स्थलों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे होटल उद्योग की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।</p>
<p data-start="2064" data-end="2237">विशेषज्ञों का मानना है कि “वेकेशन विद पूल”, “नेचर स्टे” और “इको-फ्रेंडली रिसॉर्ट” जैसे नए ट्रेंड्स के कारण होटलों की औसत रूम दरों में भी 15 से 20 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है।</p>
<h3 data-section-id="l33rhr" data-start="2239" data-end="2280"><strong>परिवहन क्षेत्र में भी बढ़ी गतिविधियां</strong></h3>
<p data-start="2282" data-end="2530">पर्यटन सीजन का सकारात्मक प्रभाव परिवहन क्षेत्र पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। पिपरिया, छिंदवाड़ा, जबलपुर और आसपास के रेलवे स्टेशनों तथा एयरपोर्ट्स से हिल स्टेशनों तक जाने वाली टैक्सी सेवाओं की मांग में लगभग 50 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।</p>
<p data-start="2532" data-end="2771">स्थानीय टैक्सी संचालकों, टूर ऑपरेटरों और ट्रैवल एजेंसियों के कारोबार में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। कई ट्रैवल कंपनियों ने पर्यटकों की सुविधा के लिए विशेष पैकेज भी शुरू किए हैं, जिनमें होटल, स्थानीय भ्रमण और परिवहन सेवाएं शामिल हैं।</p>
<h3 data-section-id="sux4od" data-start="2773" data-end="2815"><strong>स्थानीय व्यापार और बाजारों को मिला लाभ</strong></h3>
<p data-start="2817" data-end="3061">पर्यटकों की बढ़ती संख्या का लाभ स्थानीय दुकानदारों, हस्तशिल्प विक्रेताओं, रेस्टोरेंट संचालकों और छोटे व्यापारियों को भी मिल रहा है। अमरकंटक, पचमढ़ी और तामिया के स्थानीय बाजारों में खरीदारी बढ़ी है, जिससे छोटे व्यवसायों को आर्थिक मजबूती मिली है।</p>
<p data-start="3063" data-end="3324">हर्बल उत्पाद, स्थानीय हस्तशिल्प, जनजातीय कला सामग्री और पारंपरिक खाद्य पदार्थों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि इस वर्ष पर्यटकों की संख्या उम्मीद से कहीं अधिक रही है, जिससे कारोबार में बड़ा सुधार देखने को मिला है।</p>
<h3 data-section-id="sl3m7p" data-start="3326" data-end="3347"><strong>रोजगार के नए अवसर</strong></h3>
<p data-start="3349" data-end="3530">पर्यटन क्षेत्र में बढ़ती मांग ने रोजगार के अवसर भी पैदा किए हैं। होटल, रिसॉर्ट्स, ट्रैवल एजेंसियों और एडवेंचर गतिविधियों से जुड़ी कंपनियों ने अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति की है।</p>
<p data-start="3532" data-end="3714">जानकारों के अनुसार सीजनल मांग को देखते हुए 20 से 25 प्रतिशत तक अतिरिक्त स्टाफ को रोजगार मिला है। इससे स्थानीय युवाओं को अस्थायी और स्थायी दोनों प्रकार के रोजगार अवसर प्राप्त हुए हैं।</p>
<h3 data-section-id="1ih8j68" data-start="3716" data-end="3762"><strong>इको-टूरिज्म और सस्टेनेबल मॉडल पर बढ़ा फोकस</strong></h3>
<p data-start="3764" data-end="3971">पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यप्रदेश में इको-टूरिज्म की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। तामिया और पातालकोट जैसे अपेक्षाकृत कम प्रसिद्ध लेकिन प्राकृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्रों में निजी निवेश बढ़ रहा है।</p>
<p data-start="3973" data-end="4194">कई बड़े होटल समूह और पर्यटन कंपनियां इन क्षेत्रों में नए प्रोजेक्ट विकसित करने की योजना बना रही हैं। प्रकृति आधारित पर्यटन, वर्क फ्रॉम माउंटेन, वीकेंड गेटवे और वेलनेस टूरिज्म जैसे कॉन्सेप्ट निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं।</p>
<p data-start="4196" data-end="4382">विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बुनियादी सुविधाओं और पर्यटन अवसंरचना को और मजबूत किया जाए तो मध्यप्रदेश आने वाले वर्षों में देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।</p>
<h3 data-section-id="10qxtp0" data-start="4384" data-end="4396"><strong>निष्कर्ष</strong></h3>
<p data-start="4398" data-end="4872" data-is-last-node="" data-is-only-node="">गर्मी के मौसम में मध्यप्रदेश के हिल स्टेशनों पर बढ़ती पर्यटकों की संख्या ने यह साबित कर दिया है कि राज्य का पर्यटन उद्योग तेजी से नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। पचमढ़ी, तामिया और अमरकंटक जैसे पर्यटन स्थल न केवल पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार, होटल उद्योग और परिवहन क्षेत्र को भी मजबूती प्रदान कर रहे हैं। यदि यही रुझान जारी रहता है तो मध्यप्रदेश का पर्यटन क्षेत्र आने वाले वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।</p>
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		<title>Malwa-Nimar पर्यटन विकास मॉडल: सिंहस्थ 2028 से पहले इंदौर, उज्जैन, ओंकारेश्वर और महेश्वर की बदलेगी तस्वीर</title>
		<link>https://swarajvani.com/malwa-nimar-tourism-circuit-to-get-a-major/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 May 2026 13:17:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[MADHAY PRADESH NEWS]]></category>
		<category><![CDATA[Indore News]]></category>
		<category><![CDATA[Madhya Pradesh tourism]]></category>
		<category><![CDATA[Maheshwar]]></category>
		<category><![CDATA[Malwa Nimad Tourism]]></category>
		<category><![CDATA[Omkareshwar]]></category>
		<category><![CDATA[Ujjain Development]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रस्तावना: सिंहस्थ 2028 के लिए व्यापक तैयारी मध्य प्रदेश सरकार सिंहस्थ-2028 को केवल एक धार्मिक आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि एक वैश्विक स्तर के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव के ... <a title="Malwa-Nimar पर्यटन विकास मॉडल: सिंहस्थ 2028 से पहले इंदौर, उज्जैन, ओंकारेश्वर और महेश्वर की बदलेगी तस्वीर" class="read-more" href="https://swarajvani.com/malwa-nimar-tourism-circuit-to-get-a-major/" aria-label="Read more about Malwa-Nimar पर्यटन विकास मॉडल: सिंहस्थ 2028 से पहले इंदौर, उज्जैन, ओंकारेश्वर और महेश्वर की बदलेगी तस्वीर">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong><span style="font-family: inherit; font-size: 35px; font-style: inherit;">प्रस्तावना: सिंहस्थ 2028 के लिए व्यापक तैयारी</span></strong></h1>
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<p data-start="165" data-end="552">मध्य प्रदेश सरकार सिंहस्थ-2028 को केवल एक धार्मिक आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि एक वैश्विक स्तर के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है। इसके लिए राज्य ने Malwa-Nimar क्षेत्र को एक एकीकृत धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर के रूप में तैयार करने की योजना बनाई है। इस कॉरिडोर में इंदौर, उज्जैन, ओंकारेश्वर और महेश्वर जैसे प्रमुख शहरों को शामिल किया गया है।</p>
<p data-start="554" data-end="815">इस योजना का उद्देश्य श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं, सुगम यात्रा व्यवस्था, आधुनिक तकनीक आधारित सेवाएं और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। सरकार का मानना है कि सिंहस्थ के दौरान आने वाली भारी भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए यह एकीकृत मॉडल बेहद जरूरी है।</p>
<h2 data-section-id="184o0st" data-start="822" data-end="860"><strong>चार शहरों का एकीकृत धार्मिक कॉरिडोर</strong></h2>
<p data-start="862" data-end="984">नई योजना के तहत चार प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक शहरों को एक साथ जोड़कर एक सुव्यवस्थित पर्यटन सर्किट तैयार किया जा रहा है।</p>
<p data-start="986" data-end="1387">इंदौर को इस कॉरिडोर का प्रवेश द्वार बनाया जा रहा है, जहां से श्रद्धालु अपनी यात्रा की शुरुआत करेंगे। उज्जैन को इस पूरे आयोजन का केंद्र बिंदु माना गया है, क्योंकि सिंहस्थ का मुख्य आयोजन यहीं होगा। ओंकारेश्वर को ज्योतिर्लिंग और प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है, जबकि महेश्वर को उसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के आधार पर एक हेरिटेज टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में तैयार किया जा रहा है।</p>
<p data-start="1389" data-end="1530">इस एकीकृत दृष्टिकोण से श्रद्धालुओं को एक ही क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों का अनुभव मिलेगा और यात्रा अधिक संगठित और सुविधाजनक होगी।</p>
<h2 data-section-id="ycl1og" data-start="1537" data-end="1569"><strong>70 करोड़ रुपये की विकास योजना</strong></h2>
<p data-start="1571" data-end="1749">राज्य सरकार ने इस पूरे ओंकार सर्किट के विकास के लिए लगभग 70 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। इस बजट का उपयोग बुनियादी ढांचे, पर्यटन सुविधाओं और तकनीकी सुधारों पर किया जाएगा।</p>
<p data-start="1751" data-end="2030">इस राशि से पर्यटक सुविधा केंद्र, सड़क कनेक्टिविटी, डिजिटल सिस्टम, विश्राम स्थल, पार्किंग व्यवस्था और धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण जैसे कार्य किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सिंहस्थ-2028 के दौरान आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।</p>
<h2 data-section-id="1tmi1pr" data-start="2037" data-end="2078"><strong>आधुनिक पर्यटक सुविधा केंद्रों का विकास</strong></h2>
<p data-start="2080" data-end="2208">चारों शहरों में आधुनिक पर्यटक सुविधा केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहां यात्रियों को सभी आवश्यक सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी।</p>
<p data-start="2210" data-end="2434">इन केंद्रों में डिजिटल सूचना प्रणाली, फूड कोर्ट, किचन यूनिट, प्रतीक्षालय, डॉर्मेट्री, पार्किंग सुविधा और स्वच्छता व्यवस्था शामिल होगी। इसके साथ ही फैमिली वेटिंग रूम, रिसेप्शन काउंटर और आपातकालीन सहायता केंद्र भी बनाए जाएंगे।</p>
<p data-start="2436" data-end="2569">इन सुविधा केंद्रों का उद्देश्य यह है कि यात्रियों को अलग-अलग स्थानों पर भटकना न पड़े और उन्हें एक संगठित सेवा प्रणाली का लाभ मिल सके।</p>
<h2 data-section-id="16vmz3y" data-start="2576" data-end="2617"><strong>डिजिटल और तकनीकी आधारित पर्यटन प्रणाली</strong></h2>
<p data-start="2619" data-end="2746">इस परियोजना की एक प्रमुख विशेषता इसका डिजिटल स्वरूप है। सरकार पूरे कॉरिडोर को स्मार्ट टूरिज्म मॉडल के रूप में विकसित कर रही है।</p>
<p data-start="2748" data-end="2964">इसके तहत AR और VR तकनीक आधारित अनुभव केंद्र बनाए जाएंगे, जहां श्रद्धालु मंदिरों और धार्मिक स्थलों का डिजिटल अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। इसके अलावा एक डिजिटल गाइड सिस्टम और स्मार्ट रूट मैपिंग सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।</p>
<p data-start="2966" data-end="3098">इस तकनीकी व्यवस्था का उद्देश्य यात्रा को न केवल सुविधाजनक बनाना है, बल्कि उसे अधिक जानकारीपूर्ण और इंटरैक्टिव अनुभव में बदलना भी है।</p>
<h2 data-section-id="i96xaz" data-start="3105" data-end="3149"><strong>यात्रा मार्ग और वे-साइड सुविधाओं का विकास</strong></h2>
<p data-start="3151" data-end="3250">श्रद्धालुओं की यात्रा को सुगम बनाने के लिए प्रमुख मार्गों पर वे-साइड सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।</p>
<p data-start="3252" data-end="3448">इनमें विश्राम स्थल, भोजन क्षेत्र, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, शौचालय, पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था शामिल होगी। यह सुविधाएं लंबी दूरी की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी होंगी।</p>
<p data-start="3450" data-end="3556">इन व्यवस्थाओं से यात्रा के दौरान होने वाली कठिनाइयों को कम किया जाएगा और समग्र अनुभव को बेहतर बनाया जाएगा।</p>
<h2 data-section-id="1flx3v9" data-start="3563" data-end="3590"><strong>विशेष मोबाइल एप की योजना</strong></h2>
<p data-start="3592" data-end="3709">पूरे धार्मिक कॉरिडोर के लिए एक विशेष मोबाइल एप विकसित किया जा रहा है, जो श्रद्धालुओं के लिए डिजिटल गाइड का काम करेगा।</p>
<p data-start="3711" data-end="3860">इस एप में रूट मैप, होटल और ठहरने की जानकारी, धार्मिक स्थलों का विवरण, ट्रैफिक अपडेट, इमरजेंसी सेवाएं और यात्रा मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।</p>
<p data-start="3862" data-end="3984">यह एप यात्रियों को एक ही प्लेटफॉर्म पर सभी आवश्यक जानकारी प्रदान करेगा, जिससे उनकी यात्रा अधिक आसान और व्यवस्थित हो सकेगी।</p>
<h2 data-section-id="wyo6t" data-start="3991" data-end="4018"><strong>इंदौर की भूमिका और महत्व</strong></h2>
<p data-start="4020" data-end="4162">इंदौर को इस पूरे धार्मिक कॉरिडोर का मुख्य प्रवेश द्वार बनाया जा रहा है। यहां से श्रद्धालु उज्जैन, ओंकारेश्वर और महेश्वर की यात्रा शुरू करेंगे।</p>
<p data-start="4164" data-end="4339">इंदौर में ट्रांसपोर्ट हब, होटल सुविधा, यात्री सूचना केंद्र और प्रबंधन व्यवस्था विकसित की जाएगी। शहर को एक लॉजिस्टिक और सेवाओं के प्रमुख केंद्र के रूप में तैयार किया जा रहा है।</p>
<h2 data-section-id="zxox34" data-start="4346" data-end="4382"><strong>उज्जैन में सिंहस्थ का मुख्य आयोजन</strong></h2>
<p data-start="4384" data-end="4475">उज्जैन इस पूरे कॉरिडोर का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है, जहां सिंहस्थ-2028 का मुख्य आयोजन होगा।</p>
<p data-start="4477" data-end="4702">यहां स्नान घाटों का विस्तार, भीड़ प्रबंधन व्यवस्था, सुरक्षा प्रणाली, मेडिकल सुविधाएं और यात्री केंद्र विकसित किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित अनुभव प्राप्त हो।</p>
<h2 data-section-id="1pv7thq" data-start="4709" data-end="4742"><strong>ओंकारेश्वर और महेश्वर का विकास</strong></h2>
<p data-start="4744" data-end="4892">ओंकारेश्वर को एक प्रमुख ज्योतिर्लिंग तीर्थ के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां रोपवे, कनेक्टिविटी सुधार और पर्यटक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।</p>
<p data-start="4894" data-end="5051">महेश्वर को हेरिटेज टूरिज्म के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां घाटों का सौंदर्यीकरण, सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।</p>
<h2 data-section-id="o3xq36" data-start="5058" data-end="5092"><strong>धार्मिक पर्यटन को वैश्विक पहचान</strong></h2>
<p data-start="5094" data-end="5207">इस योजना का उद्देश्य केवल घरेलू श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्थापित करना है।</p>
<p data-start="5209" data-end="5353">इसके लिए बहुभाषी प्रणाली, विदेशी पर्यटकों के लिए विशेष सुविधाएं, डिजिटल टूर पैकेज और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सेवाएं विकसित की जा रही हैं।</p>
<h2 data-section-id="pvh1es" data-start="5360" data-end="5387"><strong>आर्थिक और सामाजिक प्रभाव</strong></h2>
<p data-start="5389" data-end="5473">इस परियोजना से क्षेत्र में व्यापक आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन की उम्मीद की जा रही है।</p>
<p data-start="5475" data-end="5602">इससे पर्यटन उद्योग, होटल व्यवसाय, परिवहन क्षेत्र और स्थानीय व्यापार को बड़ा लाभ मिलेगा। साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।</p>
<p data-start="5604" data-end="5745">बुनियादी ढांचे के विकास से पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और मालवा-निमाड़ क्षेत्र एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में उभरेगा।</p>
<h3 data-section-id="1j8d2pj" data-start="5752" data-end="5763"><strong>निष्कर्ष</strong></h3>
<p data-start="5765" data-end="6051">मालवा-निमाड़ क्षेत्र का यह एकीकृत पर्यटन विकास मॉडल सिंहस्थ-2028 को एक ऐतिहासिक और भव्य आयोजन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इंदौर से महेश्वर तक विकसित हो रहा यह कॉरिडोर न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि मध्य प्रदेश को वैश्विक आध्यात्मिक मानचित्र पर एक नई पहचान भी देगा।</p>
<p data-start="6053" data-end="6178" data-is-last-node="" data-is-only-node="">यह परियोजना आने वाले वर्षों में क्षेत्र के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।</p>
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		<title>MP के पर्यटन स्थलों पर उमड़ी भारी भीड़, होटलों में 100% बुकिंग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 31 Dec 2025 06:52:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[MadhyaPradeshTourism]]></category>
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		<category><![CDATA[Madhya Pradesh tourism]]></category>
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					<description><![CDATA[पचमढ़ी, उज्जैन और ओंकारेश्वर में नववर्ष 2026 के स्वागत की धूम MP ने नववर्ष 2026 का स्वागत शानदार तरीके से किया है। राज्य के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थल इस ... <a title="MP के पर्यटन स्थलों पर उमड़ी भारी भीड़, होटलों में 100% बुकिंग" class="read-more" href="https://swarajvani.com/heavy-crowd-at-mp-tourist-spots/" aria-label="Read more about MP के पर्यटन स्थलों पर उमड़ी भारी भीड़, होटलों में 100% बुकिंग">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1 data-start="157" data-end="224"><strong data-start="157" data-end="222">पचमढ़ी, उज्जैन और ओंकारेश्वर में नववर्ष 2026 के स्वागत की धूम</strong></h1>
<p>MP ने नववर्ष 2026 का स्वागत शानदार तरीके से किया है। राज्य के प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थल इस अवसर के लिए पूरी तरह तैयार हैं। पचमढ़ी, उज्जैन और ओंकारेश्वर जैसे लोकप्रिय स्थलों पर इस बार पर्यटकों की भीड़ पहले से कहीं अधिक दिखाई दे रही है। न केवल होटलों में पूरा बोथ हो चुका है, बल्कि कमरे और रिजॉर्ट्स के किराए में भी भारी बढ़ोतरी हुई है।</p>
<h3><strong>पर्यटकों की भीड़ ने बढ़ाई महंगाई</strong></h3>
<p>भोपाल और अन्य शहरों से पचमढ़ी, उज्जैन और ओंकारेश्वर आने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस वजह से राज्य के पर्यटन स्थल हर साल की तुलना में इस बार और भी व्यस्त दिखाई दे रहे हैं। खासकर पचमढ़ी जैसे हिल स्टेशन पर कमरों की उपलब्धता कम होने के कारण होटल और निजी रिजॉर्ट्स ने किराए बढ़ा दिए हैं।</p>
<p>पचमढ़ी में सामान्य कमरे का किराया <strong>5000 रुपये से बढ़कर 7000 रुपये</strong> तक पहुंच गया है। उज्जैन और ओंकारेश्वर में भी महाकाल मंदिर और ओंकारेश्वर के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है। निजी होटलों ने भी इस अवसर पर अपने दामों में लगभग <strong>30 प्रतिशत तक की वृद्धि</strong> की है।</p>
<h3><strong>होटल और रिजॉर्ट्स की स्थिति</strong></h3>
<p>मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (MPTDC) के अनुसार, राज्य के सभी सरकारी होटल और निजी रिजॉर्ट्स इस समय <strong>100 प्रतिशत बुक</strong> हो चुके हैं। विशेष रूप से पचमढ़ी और उज्जैन में पर्यटकों का दबाव सबसे ज्यादा है। नववर्ष के अवसर पर पर्यटक परिवार, दोस्तों और समूहों के रूप में इन स्थलों पर आ रहे हैं।</p>
<p>ओंकारेश्वर और उज्जैन में धार्मिक स्थल भी इस समय पर्यटकों और श्रद्धालुओं से पूरी तरह भरे हुए हैं। मंदिरों में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी हैं। इस कारण आसपास के होटल और गेस्ट हाउस भी पूरी तरह से बुक हो चुके हैं।</p>
<h3><strong>धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़</strong></h3>
<p>उज्जैन का महाकाल मंदिर और ओंकारेश्वर के प्राचीन शिव मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है। लोग नववर्ष की शुरुआत धार्मिक आस्था के साथ करना चाहते हैं। इसके चलते मंदिरों के पास आसपास के सभी होटल और पेंट हाउस भी व्यस्त हो चुके हैं।</p>
<p>धार्मिक पर्यटन के कारण स्थानीय व्यापारियों और दुकानदारों की आमदनी में भी वृद्धि हुई है। भोजनालय, स्ट्रीट फूड, मंदिरों के पास की दुकानों और यातायात सेवा प्रदाताओं को इस मौसम में अच्छा लाभ मिल रहा है।</p>
<h3><strong>ट्रैवल और यातायात का दबाव</strong></h3>
<p>पर्यटकों की भारी भीड़ के कारण पचमढ़ी, उज्जैन और ओंकारेश्वर में यातायात पर भी दबाव बढ़ गया है। सड़कों पर वाहनों की संख्या बहुत अधिक हो गई है। राज्य परिवहन और निजी बस सेवाएं भी इस अवसर पर अतिरिक्त बसें चलाने के लिए तैयार हैं।</p>
<p>पर्यटन विभाग ने यात्रियों से अपील की है कि वे <strong>अग्रिम बुकिंग</strong> करके ही यात्रा करें और भीड़भाड़ वाले समय में सतर्क रहें। इसके साथ ही पर्यटक स्थलों पर स्वच्छता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस और पर्यटन कर्मियों को तैनात किया गया है।</p>
<h3><strong>पर्यटन विभाग की तैयारी</strong></h3>
<p>मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम ने नववर्ष के मौके पर यात्रियों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई कदम उठाए हैं। पर्यटन स्थलों पर <strong>इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग, गाइड सेवा, चिकित्सा सुविधा और यातायात व्यवस्था</strong> को दुरुस्त किया गया है।</p>
<p>पचमढ़ी जैसे हिल स्टेशन पर पर्यटकों की सुविधा के लिए अस्थायी कैम्प और अतिरिक्त गाइड भी उपलब्ध कराए गए हैं। उज्जैन और ओंकारेश्वर में भी मंदिर प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं ताकि श्रद्धालु आराम से दर्शन कर सकें।</p>
<h3><strong>पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ</strong></h3>
<p>पर्यटन स्थलों पर इस भारी भीड़ से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। होटल, गेस्ट हाउस, परिवहन सेवा, स्ट्रीट फूड और स्मृति चिन्ह की दुकानों को उच्च आमदनी मिली है। स्थानीय लोगों के लिए यह अवधि विशेष रूप से लाभकारी साबित हो रही है।</p>
<p>विशेषज्ञों का कहना है कि नववर्ष के अवसर पर धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर भारी भीड़ आना अब मध्य प्रदेश के पर्यटन की एक नई पहचान बन गया है। यह न केवल राज्य की पर्यटन संभावनाओं को उजागर करता है, बल्कि स्थानीय व्यापार और रोजगार के लिए भी अवसर पैदा करता है।</p>
<h3><strong>निष्कर्ष</strong></h3>
<p>मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल इस बार नववर्ष 2026 के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार हैं। पचमढ़ी, उज्जैन और ओंकारेश्वर जैसे स्थलों पर पर्यटकों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी जा रही है। होटलों और रिजॉर्ट्स में <strong>100 प्रतिशत बुकिंग</strong> हो चुकी है और किराए में भी बढ़ोतरी हुई है।</p>
<p>धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ और पर्यटन स्थलों पर होटलों की भरमार यह दर्शाती है कि मध्य प्रदेश <strong>धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन</strong> के क्षेत्र में देश के प्रमुख राज्यों में शामिल हो चुका है। भविष्य में इन स्थलों की और बेहतर सुविधा और पर्यटन विकास के लिए राज्य सरकार कई नए प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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