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	<title>Kshamapana &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<title>Kshamapana &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>संयम वंदन यात्रा पहुंची दिल्ली, विवेक विहार में संतों के दर्शन और क्षमायाचना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Swaraj Vani Editor]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 Oct 2026 13:33:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[संयम वंदन यात्रा का दिल्ली के विवेक विहार श्रीसंघ में मिलन हुआ। यात्रा दल ने साध्वीश्री सुपार्श्वनिधीजी म.सा. के दर्शन-वंदन एवं क्षमायाचना कर धर्मलाभ लिया। संयम वंदन यात्रा का दिल्ली ... <a title="संयम वंदन यात्रा पहुंची दिल्ली, विवेक विहार में संतों के दर्शन और क्षमायाचना" class="read-more" href="https://swarajvani.com/sanyam-vandan-yatra-delhi-vivek-vihar-jain-sangh/" aria-label="Read more about संयम वंदन यात्रा पहुंची दिल्ली, विवेक विहार में संतों के दर्शन और क्षमायाचना">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>संयम वंदन यात्रा का दिल्ली के विवेक विहार श्रीसंघ में मिलन हुआ। यात्रा दल ने साध्वीश्री सुपार्श्वनिधीजी म.सा. के दर्शन-वंदन एवं क्षमायाचना कर धर्मलाभ लिया।</p>
<h1 data-pm-slice="1 1 []"><strong>संयम वंदन यात्रा का दिल्ली में मिलन, संतों के दर्शन और क्षमायाचना से भक्तिमय हुआ विवेक विहार</strong></h1>
<h3><strong>श्रद्धा, संयम और क्षमायाचना का संदेश लेकर पहुंचा यात्रा दल, विवेक विहार श्रीसंघ ने किया स्वागत</strong></h3>
<p><strong>नई दिल्ली। ब्रजेश बोहरा।</strong> युगप्रभावक गुरुदेव पुण्यसम्राट श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी महाराजा की परंपरा के समुदायवर्ती श्रमण-श्रमणी भगवंतों के दर्शन, वंदन और क्षमायाचना के उद्देश्य से निकली <strong>संयम वंदन यात्रा</strong> का 1 अक्टूबर को दिल्ली के विवेक विहार श्रीसंघ में मिलन हुआ। यात्रा दल के आगमन पर श्रीसंघ के सदस्यों ने आत्मीय स्वागत किया और पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा एवं भक्ति का वातावरण बना रहा।</p>
<p>यात्रा दल ने सुबह सेवा-पूजन के बाद प्रवचन का लाभ लिया। इसके पश्चात <strong>साध्वीश्री सुपार्श्वनिधीजी म.सा. आदि ठाणा</strong> के दर्शन-वंदन एवं क्षमायाचना कर धार्मिक चर्चा की। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी धर्मलाभ प्राप्त किया।</p>
<p>संयम वंदन यात्रा 21 सितंबर को आनंद शहर से प्रारंभ हुई है और 17 अक्टूबर को सूरत में पूर्ण होगी। यात्रा का मुख्य उद्देश्य पुण्यसम्राट गुरुदेव की परंपरा के समुदायवर्ती श्रमण-श्रमणी भगवंतों के दर्शन-वंदन और क्षमायाचना के माध्यम से श्रद्धा एवं आध्यात्मिक समर्पण व्यक्त करना है।</p>
<p><a href="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-01-at-6.17.11-pm-1.jpeg"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-362630" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-01-at-6.17.11-pm-1.jpeg" alt="whatsapp image 2026 10 01 at 6.17.11 pm 1" width="1428" height="1037" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-01-at-6.17.11-pm-1.jpeg 1428w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-01-at-6.17.11-pm-1-300x218.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-01-at-6.17.11-pm-1-1024x744.jpeg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/10/whatsapp-image-2026-10-01-at-6.17.11-pm-1-768x558.jpeg 768w" sizes="(max-width: 1428px) 100vw, 1428px" /></a></p>
<h3><strong>विवेक विहार श्रीसंघ ने किया आत्मीय स्वागत</strong></h3>
<p>यात्रा के अंतर्गत <strong>अखिल भारतीय श्री राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुंबई-थराद त्रिस्तुतिक जैन श्रीसंघ अध्यक्ष रमेशभाई धरू, अहमदाबाद से परिषद के राष्ट्रीय वेरावच्चमंत्री भरतभाई लाडू तथा राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी ब्रजेश बोहरा नागदा</strong> विवेक विहार श्रीसंघ पहुंचे।</p>
<p>विवेक विहार संघ की ओर से <strong>महावीरजी सकलेचा, छगनराजजी खंडप, सेसमलजी वोहरा, जुगराजजी, दिनेशजी और ललितजी</strong> सहित सदस्यों ने अतिथियों का तिलक लगाकर स्वागत किया। भोजनशाला में जगराजजी, भरतजी, श्रीपालजी सहित संघ सदस्यों ने सेवा प्रदान की।</p>
<p>इसके बाद भरतपुर कीर्ति मंदिर ट्रस्ट से जुड़े <strong>सेसमलजी क्षत्रिय वोहरा</strong> के दिल्ली स्थित निवास पर धार्मिक चर्चा हुई, जहां यात्रा दल के सदस्यों का स्वागत किया गया।</p>
<h3><strong>कानपुर, जयपुर के बाद इंदौर पहुंचेगा यात्रा दल</strong></h3>
<p>दिल्ली प्रवास के बाद यात्रा दल 2 अक्टूबर को कानपुर पहुंचेगा, जहां चातुर्मास के लिए विराजमान <strong>मुनिराज डॉ. श्री संयमरत्न विजयजी म.सा. आदि ठाणा</strong> के दर्शन और क्षमायाचना की जाएगी। इसके बाद 3 अक्टूबर को जयपुर में साध्वीश्रीजी आदि ठाणा के दर्शन-क्षमायाचना कर यात्रा दल इंदौर पहुंचेगा। यहां गच्छाधिपति श्री की निश्रा में आयोजित <strong>अखिल भारतीय श्री राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन</strong> में सहभागिता करेगा।</p>
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		<title>संवत्सरी प्रतिक्रमण के बाद झकनावदा श्रीसंघ ने इंदौर पहुंचकर गच्छाधिपति से की क्षमायाचना</title>
		<link>https://swarajvani.com/jhakanawada-jain-sangh-visits-indore-after/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Sep 2026 05:54:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[#Samvatsari]]></category>
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					<description><![CDATA[संवत्सरी प्रतिक्रमण के बाद झकनावदा श्रीसंघ ने इंदौर पहुंचकर गच्छाधिपति से की क्षमायाचना गच्छाधिपति श्री नित्यसेन सूरीजी महाराज साहेब ने कहा—मन में किसी के प्रति वैर न रखें, सभी जीवों ... <a title="संवत्सरी प्रतिक्रमण के बाद झकनावदा श्रीसंघ ने इंदौर पहुंचकर गच्छाधिपति से की क्षमायाचना" class="read-more" href="https://swarajvani.com/jhakanawada-jain-sangh-visits-indore-after/" aria-label="Read more about संवत्सरी प्रतिक्रमण के बाद झकनावदा श्रीसंघ ने इंदौर पहुंचकर गच्छाधिपति से की क्षमायाचना">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>संवत्सरी प्रतिक्रमण के बाद झकनावदा श्रीसंघ ने इंदौर पहुंचकर गच्छाधिपति से की क्षमायाचना</strong></h1>
<h3>गच्छाधिपति श्री नित्यसेन सूरीजी महाराज साहेब ने कहा—मन में किसी के प्रति वैर न रखें, सभी जीवों से मैत्री भाव रखें</h3>
<p><strong>झकनावदा।</strong> जैन समाज के प्रमुख आध्यात्मिक पर्व पर्युषण महापर्व के अंतिम दिवस संवत्सरी पर झकनावदा नगर में धर्माराधना, प्रतिक्रमण और क्षमायाचना का विशेष वातावरण रहा। समाजजनों ने विधि-विधानपूर्वक संवत्सरी प्रतिक्रमण करते हुए वर्षभर में जाने-अनजाने में हुई भूलों के लिए एक-दूसरे से क्षमा मांगी। इस दौरान सभी ने <strong>‘मिच्छामि दुक्कडम्’</strong> कहकर मन में किसी के प्रति द्वेष और वैर न रखने का संकल्प लिया।</p>
<h2><strong>केसरियानाथ जिनालय में हुई महाआरती</strong></h2>
<p>संवत्सरी पर्व के समापन के पश्चात झकनावदा स्थित श्री केसरियानाथ जिनालय में समाजजनों द्वारा भक्तिभाव के साथ महाआरती का आयोजन किया गया। महाआरती के विभिन्न चढ़ावे समाजजनों ने उत्साहपूर्वक लिए और लाभार्थियों द्वारा भगवान की महाआरती उतारी गई। इस दौरान जिनालय परिसर में भक्ति, श्रद्धा और धार्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा।</p>
<h2><strong>इंदौर पहुंचकर गच्छाधिपति के किए दर्शन</strong></h2>
<p>संवत्सरी पर्व के अगले दिन बुधवार सुबह झकनावदा श्रीसंघ का प्रतिनिधिमंडल इंदौर पहुंचा। यहां चातुर्मास में विराजमान पुण्य सम्राट के पट्टधर गच्छाधिपति <strong>श्री नित्यसेन सूरीजी महाराज साहेब</strong> आदि ठाणा के दर्शन-वंदन कर श्रीसंघ के सदस्यों ने उनकी सुखसाता पूछी।</p>
<p>प्रतिनिधिमंडल में श्रीसंघ के शैतानमल कुमट, अखिल भारतीय श्री राजेंद्र जैन नवयुवक परिषद के प्रांतीय सह मीडिया प्रभारी मनीष कुमट, राजेंद्र कुमार सेठिया, हर्ष मांडोत और तेजस कुमट सहित अन्य समाजजन शामिल रहे। इस अवसर पर धार जिले के राजगढ़ श्रीसंघ के प्रतिनिधियों ने भी महाराज साहेब के दर्शन-वंदन किए।</p>
<p>श्रीसंघ के सदस्यों ने <strong>‘मिच्छामि दुक्कडम्’</strong> कहते हुए गुरुदेव से क्षमायाचना की तथा पर्युषण महापर्व के दौरान हुई धार्मिक आराधना और संवत्सरी पर्व के आयोजन की जानकारी भी उनके समक्ष रखी।</p>
<h3><strong>गुरुदेव ने बताया क्षमापना पर्व का वास्तविक महत्व</strong></h3>
<p>गच्छाधिपति श्री नित्यसेन सूरीजी महाराज साहेब ने समाजजनों को संबोधित करते हुए कहा कि संवत्सरी केवल औपचारिक रूप से एक-दूसरे से क्षमा मांगने का दिन नहीं है, बल्कि यह अपने अंतर्मन में झांकने और आत्मचिंतन करने का अवसर है। व्यक्ति को अपनी भूलों को स्वीकार कर उन्हें दोबारा न दोहराने का संकल्प लेना चाहिए।</p>
<p>उन्होंने कहा कि दूसरों से क्षमा मांगने के साथ उन्हें क्षमा करना भी उतना ही आवश्यक है। यदि मन में किसी व्यक्ति के प्रति राग, द्वेष या वैर का भाव बना हुआ है तो क्षमापना की भावना पूर्ण नहीं हो सकती।</p>
<h3><strong>सभी जीवों के प्रति मैत्री भाव रखने का संदेश</strong></h3>
<p>गुरुदेव ने कहा कि जैन धर्म सभी जीवों के प्रति मैत्री, करुणा और अहिंसा का भाव रखने की प्रेरणा देता है। <strong>‘मिच्छामि दुक्कडम्’</strong> की भावना को केवल संवत्सरी पर्व तक सीमित न रखते हुए दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।</p>
<p>परिवार, समाज और व्यवसाय में आपसी प्रेम, सद्भाव और विश्वास बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पर्युषण पर्व की सार्थकता तभी है, जब पर्व के दौरान किए गए आत्मचिंतन, तप, त्याग, स्वाध्याय और क्षमापना की भावना हमारे व्यवहार में भी दिखाई दे।</p>
<h3><strong>दिगंबर जैनाचार्य श्री सुधा सागर जी के भी किए दर्शन</strong></h3>
<p>गुरुदेव के मंगल संदेश को सुनकर झकनावदा श्रीसंघ के सदस्यों ने आशीर्वाद प्राप्त किया और धर्म, संयम एवं क्षमाभाव को जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया। इस दौरान संघ के सदस्यों ने इंदौर में चातुर्मास में विराजमान <strong>दिगंबर जैनाचार्य श्री सुधा सागर जी</strong> के भी दर्शन-वंदन किए, उनकी सुखसाता पूछी और ‘मिच्छामि दुक्कडम्’ कहते हुए क्षमायाचना की।</p>
<p><strong>फोटो कैप्शन:</strong> गच्छाधिपति श्री नित्यसेन सूरीजी महाराज साहेब से क्षमायाचना करता झकनावदा श्रीसंघ।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सारंगपुर में श्वेतांबर जैन समाज का पर्यूषण महापर्व शुरू, प्रथम दिवस गूंजे भगवान महावीर के संदेश</title>
		<link>https://swarajvani.com/shwetambar-jain-community-begins-paryushan-mahaparv-in-sarangpur-with-devotion-and-spiritual/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Sep 2026 11:19:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Sarangpur]]></category>
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					<description><![CDATA[सारंगपुर में श्वेतांबर जैन समाज का पर्यूषण महापर्व शुरू, प्रथम दिवस गूंजे भगवान महावीर के संदेश आत्मशुद्धि, त्याग और तपस्या के साथ हुई धर्म आराधना; पांच प्रमुख कर्तव्यों पर किया ... <a title="सारंगपुर में श्वेतांबर जैन समाज का पर्यूषण महापर्व शुरू, प्रथम दिवस गूंजे भगवान महावीर के संदेश" class="read-more" href="https://swarajvani.com/shwetambar-jain-community-begins-paryushan-mahaparv-in-sarangpur-with-devotion-and-spiritual/" aria-label="Read more about सारंगपुर में श्वेतांबर जैन समाज का पर्यूषण महापर्व शुरू, प्रथम दिवस गूंजे भगवान महावीर के संदेश">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>सारंगपुर में श्वेतांबर जैन समाज का पर्यूषण महापर्व शुरू, प्रथम दिवस गूंजे भगवान महावीर के संदेश</strong></h1>
<h2><strong>आत्मशुद्धि, त्याग और तपस्या के साथ हुई धर्म आराधना; पांच प्रमुख कर्तव्यों पर किया गया चिंतन</strong></h2>
<p data-start="53" data-end="84"><strong data-start="53" data-end="84">रिपोर्टर: मनोज कुमार पुष्पद</strong></p>
<p><strong>दैनिक स्वराज वाणी, सारंगपुर।</strong> आत्मशुद्धि, त्याग, तपस्या, संयम और साधना के महान पर्व पर्यूषण महापर्व का मंगलवार को श्वेतांबर जैन समाज द्वारा श्रद्धा एवं भक्ति के साथ शुभारंभ किया गया। पर्व के पहले दिन श्रीसंघ में विशेष धार्मिक उत्साह दिखाई दिया। बड़ी संख्या में समाजजन जिनालय पहुंचे और भगवान महावीर के सिद्धांतों का स्मरण करते हुए धर्म आराधना की।</p>
<p>पर्यूषण पर्व जैन समाज के लिए केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मनिरीक्षण और आत्मशुद्धि का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु मन, वचन और कर्म से हुई गलतियों पर चिंतन करते हुए सत्य, अहिंसा, करुणा, क्षमा और संयम को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं। प्रथम दिवस पर प्रभु भक्ति, स्नात्र पूजन, केसर पूजा, दुग्धाभिषेक, महाआरती, प्रभावना, प्रतिक्रमण, स्वाध्याय और जप-तप सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए।</p>
<h2><strong>हृदयरत्न महाराज साहब की पावन निश्रा में आयोजन</strong></h2>
<p>पर्यूषण महापर्व के अंतर्गत आयोजित होने वाले सभी धार्मिक कार्यक्रम परम पूज्य हृदयरत्न महाराज साहब की पावन निश्रा में संपन्न हो रहे हैं। उनकी उपस्थिति से श्रीसंघ में आध्यात्मिक ऊर्जा और धर्म के प्रति विशेष उत्साह का वातावरण बना हुआ है।</p>
<p>धर्मसभा में श्रद्धालुओं को भगवान महावीर के बताए सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह और आत्मसंयम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई। समाजजनों ने सामूहिक रूप से धार्मिक क्रियाओं में भाग लिया और अपने जीवन में त्याग एवं सदाचार को स्थान देने का संकल्प लिया।</p>
<h2><strong>भिवंडी से पहुंचे विशेष आराधक</strong></h2>
<p>पर्यूषण महापर्व की विशेष आराधना, जप-तप और विधिवत धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराने के लिए भिवंडी से किनाल जैन, सिद्धार्थ जैन और पारसमल जैन सारंगपुर पहुंचे हैं। आराधकों के श्रीसंघ में आगमन पर समाज के पदाधिकारियों और वरिष्ठजनों ने उनका भावभीना स्वागत किया।</p>
<p>बताया गया कि आगामी तीन दिनों तक श्रीसंघ में विशेष व्याख्यान एवं प्रवचन आयोजित किए जाएंगे। इनमें जैन दर्शन के गूढ़ सिद्धांतों को सरल भाषा में श्रद्धालुओं के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को भी धर्म के मूल सिद्धांतों, परंपराओं और जीवन में संयम के महत्व से परिचित कराया जाएगा।</p>
<h2><strong>पांच प्रमुख कर्तव्यों पर हुआ चिंतन</strong></h2>
<p>पर्व के प्रथम दिवस आयोजित धर्मसभा में पर्यूषण महापर्व के पांच प्रमुख कर्तव्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि पर्यूषण आत्मा को परमात्मा की दिशा में आगे बढ़ाने वाला आध्यात्मिक अनुष्ठान है। इसके लिए केवल पूजा-पाठ ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यक्ति को अपने व्यवहार और जीवनशैली में भी सकारात्मक परिवर्तन लाना चाहिए।</p>
<p>श्रद्धालुओं को अमारी प्रवर्तन यानी जीवों की रक्षा और अहिंसा के पालन का महत्व समझाया गया। बताया गया कि पर्व के दौरान किसी भी जीव को कष्ट नहीं पहुंचे, इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए। अहिंसा केवल शारीरिक क्रिया तक सीमित नहीं है। मन में किसी के प्रति द्वेष नहीं रखना, वचन से किसी को पीड़ा नहीं पहुंचाना और अपने कार्यों से किसी जीव को नुकसान नहीं पहुंचाना भी अहिंसा का हिस्सा है।</p>
<h2><strong>साधार्मिक भक्ति और सहयोग का संदेश</strong></h2>
<p>प्रवचन में साधार्मिक भक्ति के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा गया कि अपने धर्मबंधुओं के प्रति प्रेम, सम्मान और सहयोग रखना जैन जीवन पद्धति का महत्वपूर्ण अंग है। समाज के जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना, दुख के समय उसके साथ खड़ा होना और धर्म आराधना में परस्पर सहयोग करना ही सच्ची साधार्मिक भक्ति है।</p>
<p>श्रद्धालुओं से कहा गया कि पर्यूषण के दिनों में आपसी मतभेद और मनमुटाव को समाप्त कर समाज में प्रेम, एकता एवं भाईचारे की भावना मजबूत करें। धर्म का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देता है, जब व्यक्ति के व्यवहार में विनम्रता, संवेदना और सहयोग का भाव प्रकट हो।</p>
<h2><strong>क्षमापना जैन दर्शन का मूल आधार</strong></h2>
<p>धर्मसभा में क्षमापना को जैन दर्शन का मूल स्तंभ बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि मनुष्य से जाने-अनजाने में कई गलतियां हो जाती हैं। इन गलतियों को स्वीकार कर निर्मल हृदय से क्षमा मांगना और दूसरों को क्षमा करना आत्मशुद्धि की दिशा में बड़ा कदम है।</p>
<p>समाजजनों से कड़वाहट, क्रोध, अहंकार और पुराने विवादों को त्यागने का आह्वान किया गया। बताया गया कि क्षमा मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि आत्मबल और विनम्रता का प्रतीक है। जो व्यक्ति दूसरों को क्षमा करता है, वह स्वयं भी मानसिक बोझ से मुक्त होकर आध्यात्मिक उन्नति की ओर आगे बढ़ता है।</p>
<h2><strong>उपवास और अट्ठम तप का बताया महत्व</strong></h2>
<p>पर्यूषण काल में शरीर और इंद्रियों पर संयम रखने के लिए उपवास, एकासन, आयंबिल तथा अन्य तप-साधनाओं का विशेष महत्व है। धर्मसभा में श्रद्धालुओं को अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार तपस्या करने की प्रेरणा दी गई।</p>
<p>लगातार तीन दिनों तक किए जाने वाले अट्ठम तप का महत्व बताते हुए कहा गया कि तपस्या का उद्देश्य केवल भोजन का त्याग करना नहीं है। इसके माध्यम से मन की इच्छाओं पर नियंत्रण, आत्मचिंतन और विकारों से मुक्ति पाने का प्रयास किया जाता है। तप तभी सार्थक माना जाता है, जब उसके साथ विनम्रता, करुणा और सकारात्मक विचार जुड़े हों।</p>
<h2><strong>जिनालय दर्शन से मन होता है एकाग्र</strong></h2>
<p>श्रद्धालुओं को प्रतिदिन जिनालय जाकर भगवान के दर्शन और पूजा करने की प्रेरणा दी गई। बताया गया कि जिन प्रतिमा के दर्शन से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति को अपने भीतर मौजूद बुराइयों पर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा मिलती है।</p>
<p>प्रभु दर्शन, स्नात्र पूजन और आत्मसमर्पण के माध्यम से श्रद्धालु अपने मन को एकाग्र करते हैं। जिनालय में बिताया गया समय व्यक्ति को सांसारिक चिंताओं से कुछ समय के लिए दूर कर आत्मचिंतन का अवसर प्रदान करता है।</p>
<h2><strong>दूसरे दिन 11 वार्षिक कर्तव्यों पर होगा व्याख्यान</strong></h2>
<p>श्रीसंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि पर्यूषण पर्व के दूसरे दिन आयोजित विशेष व्याख्यान में जैन धर्म के 11 वार्षिक कर्तव्यों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। समाज के सभी श्रद्धालुओं से निर्धारित समय पर उपस्थित होकर धर्मलाभ लेने की अपील की गई है।</p>
<p>प्रथम दिवस का कार्यक्रम सामूहिक जप, प्रभु भक्ति, पूजन, स्वाध्याय और प्रवचन के साथ संपन्न हुआ। दिनभर जिनालय एवं धर्मसभा परिसर में धार्मिक उल्लास बना रहा।</p>
<h2><strong>ये परिवार रहे धार्मिक आयोजनों के लाभार्थी</strong></h2>
<p>आराधना कराने के लिए पहुंचे श्रावक भाइयों के सम्मान में साधार्मिक भक्ति का आयोजन किया गया। प्रथम दिवस साधार्मिक भक्ति के लाभार्थी प्रेमचंद जैन कानड़ वाला परिवार रहा। वहीं स्नात्र पूजन के कायमी लाभार्थी के रूप में सज्जन सिंह-अनिल कुमार श्रीमाल परिवार ने धर्मलाभ प्राप्त किया।</p>
<p>कार्यक्रम में श्रीसंघ अध्यक्ष प्रदीप बरड़िया, विजय जैन, श्रेयांश पारख, अशोक श्रीमाल, संजय बरड़िया, गौरव श्रीमाल, सुभाष बावेल, संतोष बरड़िया, पारस पारख, विजय बरड़िया, मोहनलाल ललवानी, श्वेता-अंशुल श्रीमाल, तृप्ति लोढ़ा, अनुराधा बरड़िया, दीप्ति बरड़िया और दशा श्रीमाल सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>श्वेतांबर जैन समाज का पर्यूषण महापर्व शुरू, प्रथम दिन गूंजे भगवान महावीर के संदेश</title>
		<link>https://swarajvani.com/shwetambar-jain-community-begins-paryushan-mahaparva-in-sarangpur-with-devotion-penance-and-spiritual-practices/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Sep 2026 10:42:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्वेतांबर जैन समाज का पर्यूषण महापर्व शुरू, प्रथम दिन गूंजे भगवान महावीर के संदेश भक्ति, तप और साधना के साथ हुई धर्म आराधना, पांच मौलिक कर्तव्यों पर किया गया चिंतन ... <a title="श्वेतांबर जैन समाज का पर्यूषण महापर्व शुरू, प्रथम दिन गूंजे भगवान महावीर के संदेश" class="read-more" href="https://swarajvani.com/shwetambar-jain-community-begins-paryushan-mahaparva-in-sarangpur-with-devotion-penance-and-spiritual-practices/" aria-label="Read more about श्वेतांबर जैन समाज का पर्यूषण महापर्व शुरू, प्रथम दिन गूंजे भगवान महावीर के संदेश">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>श्वेतांबर जैन समाज का पर्यूषण महापर्व शुरू, प्रथम दिन गूंजे भगवान महावीर के संदेश</strong></h1>
<h2><strong>भक्ति, तप और साधना के साथ हुई धर्म आराधना, पांच मौलिक कर्तव्यों पर किया गया चिंतन</strong></h2>
<p><strong>सचित्र एसआरपी-2: पूजा-अर्चना करते समाजजन।</strong><br />
<strong>सचित्र एसआरपी-3: प्रवचन देते श्रावक।</strong></p>
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<div><strong style="font-size: inherit;">सारंगपुर।</strong><span style="font-size: inherit;"> आत्मशुद्धि, त्याग, तपस्या और साधना के महान पर्व पर्यूषण महापर्व का मंगलवार को हर्षोल्लास एवं भक्तिमय वातावरण में शुभारंभ हुआ। श्वेतांबर जैन समाज के बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने जिनालय पहुंचकर पूजा-अर्चना, जप-तप और धर्म आराधना की। प्रथम दिन श्रीसंघ में धर्म और आध्यात्मिकता का विशेष उत्साह दिखाई दिया।</span></div>
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<p>पर्यूषण महापर्व को जैन समाज में आत्मनिरीक्षण, संयम, क्षमा और साधना का विशेष अवसर माना जाता है। पर्व के दौरान श्रद्धालु मन, वचन और काया से शुद्ध आचरण करने तथा भगवान महावीर के सत्य, अहिंसा और अपरिग्रह के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं।</p>
<h2><strong>हृदयरत्न महाराज साहब की पावन निश्रा</strong></h2>
<p>पर्यूषण महापर्व के अंतर्गत आयोजित होने वाले समस्त धार्मिक कार्यक्रम परम पूज्य हृदयरत्न महाराज साहब की पावन निश्रा में संपन्न हो रहे हैं। उनकी मंगल उपस्थिति से धर्मसभा में आध्यात्मिक ऊर्जा और उत्साह का संचार हो रहा है।</p>
<p>श्रीसंघ में विशेष आराधना, जप-तप और विधिवत धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराने के लिए भिवंडी से किनाल जैन, सिद्धार्थ जैन एवं पारसमल जैन का आगमन हुआ। श्रीसंघ के पदाधिकारियों और समाज के प्रबुद्धजनों ने सभी आराधकों का भावभीना स्वागत किया।</p>
<p>मंगलवार से आगामी तीन दिनों तक श्रीसंघ में अष्टाह्निका व्याख्यान और प्रवचन आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान जैन दर्शन के गूढ़ सिद्धांतों को सरल भाषा में श्रद्धालुओं के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।</p>
<h2><strong>पांच मौलिक कर्तव्यों पर हुआ चिंतन</strong></h2>
<p>पर्यूषण महापर्व के प्रथम दिन आयोजित धर्मसभा में पांच प्रमुख कर्तव्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। आराधकों ने बताया कि पर्यूषण केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मा को शुद्ध करते हुए परमात्मा की ओर अग्रसर करने वाला अनुष्ठान है।</p>
<p>श्रद्धालुओं से पर्व के दौरान अहिंसा, साधार्मिक भक्ति, क्षमापना, तप और चैत्य परिपाटी जैसे कर्तव्यों को अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया गया।</p>
<h2><strong>मन, वचन और काया से अहिंसा का पालन</strong></h2>
<p>व्याख्यान में बताया गया कि पर्यूषण के दिनों में किसी भी जीव की हिंसा न हो, इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए। अहिंसा का पालन केवल शारीरिक स्तर पर नहीं, बल्कि मन, वचन और काया से होना चाहिए।</p>
<p>मन में किसी के प्रति द्वेष नहीं रखना, वाणी से किसी को दुःख नहीं पहुंचाना और प्रत्येक जीव के प्रति दया एवं करुणा का भाव रखना अहिंसा की वास्तविक साधना है। जीवदया को भगवान महावीर के संदेशों का महत्वपूर्ण आधार बताया गया।</p>
<h2><strong>साधार्मिक भाइयों के प्रति रखें सहयोग का भाव</strong></h2>
<p>साधार्मिक भक्ति के बारे में बताया गया कि जैन समाज के भाइयों और बहनों के प्रति निस्वार्थ प्रेम, सम्मान तथा सहयोग की भावना रखना चाहिए। धर्मबंधुओं की सेवा और कठिन परिस्थितियों में उनकी सहायता करना सच्ची साधार्मिक भक्ति है।</p>
<p>श्रद्धालुओं से समाज में आपसी सद्भाव, एकता और सहयोग को बढ़ाने का आग्रह किया गया। कहा गया कि धर्म की सार्थकता तभी है, जब व्यक्ति अपने व्यवहार में करुणा, विनम्रता और सेवा भावना को स्थान दे।</p>
<h2><strong>क्षमा जैन दर्शन का मूल स्तंभ</strong></h2>
<p>धर्मसभा में क्षमापना के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि क्षमा जैन दर्शन का मूल स्तंभ है। जीवन में जाने-अनजाने हुए अपराधों, मनमुटाव और कटुता को समाप्त कर सभी जीवों से क्षमा मांगनी चाहिए।</p>
<p>दूसरों को हृदय से क्षमा करना भी उतना ही आवश्यक है। मन में क्रोध, अहंकार और द्वेष रखने से आत्मिक शांति प्राप्त नहीं हो सकती। क्षमापना मन की मलीनता दूर कर आपसी संबंधों में प्रेम और सद्भाव बढ़ाती है।</p>
<h2><strong>उपवास और अट्ठम तप की प्रेरणा</strong></h2>
<p>पर्यूषण काल में शरीर और इंद्रियों के संयम के लिए उपवास, एकासन और अट्ठम तप सहित विभिन्न तप-साधनाएं की जाती हैं। धर्मसभा में श्रद्धालुओं को अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार तप करने की प्रेरणा दी गई।</p>
<p>लगातार तीन दिनों तक किए जाने वाले अट्ठम तप का धार्मिक महत्व भी समझाया गया। कहा गया कि तप केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि इच्छाओं, क्रोध और नकारात्मक विचारों पर नियंत्रण करने का अभ्यास है।</p>
<h2><strong>प्रतिदिन जिनालय जाकर करें प्रभु दर्शन</strong></h2>
<p>श्रद्धालुओं को प्रतिदिन जिनालय पहुंचकर भगवान के दर्शन और पूजा करने का संदेश दिया गया। जिन प्रतिमा के समक्ष आत्मसमर्पण, ध्यान एवं प्रार्थना करने से मन को एकाग्रता और शांति मिलती है।</p>
<p>महापर्व के प्रथम दिन प्रभु भक्ति, स्नात्र पूजन, केसर पूजा, दुग्धाभिषेक, महाआरती, प्रभावना, प्रतिक्रमण, स्वाध्याय और सामूहिक जप-तप के कार्यक्रम आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया।</p>
<h2><strong>आज 11 वार्षिक कर्तव्यों पर होगा व्याख्यान</strong></h2>
<p>श्रीसंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि पर्यूषण महापर्व के दूसरे दिन आयोजित विशेष व्याख्यान में जैन धर्म के 11 वार्षिक कर्तव्यों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। समाज के सभी श्रद्धालुओं से निर्धारित समय पर उपस्थित होकर धर्मलाभ लेने का आग्रह किया गया है।</p>
<p>आयोजकों ने कहा कि पर्यूषण महापर्व मनुष्य को संयम, सदाचार और आत्मचिंतन के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। प्रत्येक समाजजन को पर्व की शिक्षाओं को दैनिक जीवन में अपनाने का प्रयास करना चाहिए।</p>
<h2><strong>ये परिवार रहे धार्मिक आयोजन के लाभार्थी</strong></h2>
<p>आराधना कराने पहुंचे श्रावकों के लिए आयोजित साधार्मिक भक्ति में प्रथम दिन प्रेमचंद जैन कानड़ वाले परिवार लाभार्थी रहा। स्नात्र पूजन के कायमी लाभार्थी के रूप में सज्जन सिंह-अनिल कुमार श्रीमाल परिवार ने धर्मलाभ लिया।</p>
<p>इस अवसर पर श्रीसंघ अध्यक्ष प्रदीप बरड़िया, विजय जैन, श्रेयांश पारख, अशोक श्रीमाल, संजय बरड़िया, गौरव श्रीमाल, सुभाष बावेल, संतोष बरड़िया, पारस पारख, विजय बरड़िया, मोहनलाल ललवानी, श्वेता अंशुल श्रीमाल, तृप्ति लोढ़ा, अनुराधा बरड़िया, दीप्ति बरड़िया और दशा श्रीमाल सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।</p>
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