<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Dashlakshan Mahaparva &#8211; Swaraj Vani</title>
	<atom:link href="https://swarajvani.com/tag/dashlakshan-mahaparva/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://swarajvani.com</link>
	<description>From politics and jobs to culture and community stories, we deliver timely, unbiased updates that matter.</description>
	<lastBuildDate>Fri, 18 Sep 2026 12:43:25 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=7.1.4</generator>

<image>
	<url>https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2025/07/cropped-स्वराज-वाणी-1-32x32.png</url>
	<title>Dashlakshan Mahaparva &#8211; Swaraj Vani</title>
	<link>https://swarajvani.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>Uttam Arjav Dharma: कपट छोड़कर सरलता का भाव लाने का नाम है आर्जव धर्म—आचार्य चैत्य सागरजी</title>
		<link>https://swarajvani.com/uttam-arjav-dharma-worship-held-at-champabagh-jain-temple-in/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Sep 2026 12:43:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[MADHAY PRADESH NEWS]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Chaitya Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Champabagh Jain Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Dashlakshan Mahaparva]]></category>
		<category><![CDATA[Dharma]]></category>
		<category><![CDATA[Gwalior Jain Samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Religious News]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Anuman Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Paryushan Parv 2026]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Ji Ab]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=358856</guid>

					<description><![CDATA[Uttam Arjav Dharma: कपट छोड़कर सरलता का भाव लाने का नाम है आर्जव धर्म—आचार्य चैत्य सागरजी ग्वालियर के चंपाबाग जैन मंदिर में पर्युषण पर्व के तीसरे दिन हुई उत्तम आर्जव ... <a title="Uttam Arjav Dharma: कपट छोड़कर सरलता का भाव लाने का नाम है आर्जव धर्म—आचार्य चैत्य सागरजी" class="read-more" href="https://swarajvani.com/uttam-arjav-dharma-worship-held-at-champabagh-jain-temple-in/" aria-label="Read more about Uttam Arjav Dharma: कपट छोड़कर सरलता का भाव लाने का नाम है आर्जव धर्म—आचार्य चैत्य सागरजी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>Uttam Arjav Dharma: कपट छोड़कर सरलता का भाव लाने का नाम है आर्जव धर्म—आचार्य चैत्य सागरजी</strong></h1>
<h2><strong>ग्वालियर के चंपाबाग जैन मंदिर में पर्युषण पर्व के तीसरे दिन हुई उत्तम आर्जव धर्म की पूजा, अभिषेक और वृहद शांतिधारा में उमड़े श्रद्धालु</strong></h2>
<p><strong>ग्वालियर।</strong> आत्म साधना पावन वर्षायोग एवं सकल जैन समाज की ओर से पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन दाना ओली स्थित चंपाबाग जैन मंदिर में उत्तम आर्जव धर्म की श्रद्धा एवं भक्तिपूर्वक आराधना की गई। आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज एवं मुनिश्री अनुमान सागर महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा और बच्चों ने भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया। इस दौरान भगवान के अभिषेक, पंचामृत अभिषेक, वृहद शांतिधारा और दशलक्षण पूजन के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा।</p>
<h2><strong>छल-कपट से नष्ट होता है धर्म</strong></h2>
<p>धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज ने कहा कि मनुष्य के जीवन में आने वाला छल, कपट और मायाचारी का भाव उसके धर्म को नष्ट कर देता है। जहां सहजता, सरलता और मृदुता के भाव दिखाई देते हैं, वहीं सच्चे अर्थों में आर्जव धर्म होता है। मायाचारी के सहारे कोई भी व्यक्ति वास्तविक ऊंचाइयों तक नहीं पहुंच सकता।</p>
<p>आचार्य श्री ने कहा कि यदि व्यक्ति के अंदर ऋजुता, सरलता और सहजता का अभाव है तो उसके आगे बढ़ने के रास्ते स्वतः बंद होने लगते हैं। आज छल-कपट मनुष्य की आत्मा को छलनी कर रहा है। उत्तम आर्जव धर्म कपट को छोड़कर जीवन में सरलता का भाव लाने की प्रेरणा देता है। इसे धारण करने से व्यक्ति छल-कपट और मायाचारी के बंधनों से मुक्त हो सकता है।</p>
<h2><strong>दूसरों को नीचा दिखाने से शुरू होता है पतन</strong></h2>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="wp-image-358860 alignright" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/67868797oo-300x192.jpg" alt="67868797oo" width="384" height="246" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/67868797oo-300x192.jpg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/67868797oo-768x490.jpg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/67868797oo.jpg 971w" sizes="(max-width: 384px) 100vw, 384px" /><span style="font-size: inherit;">आचार्य श्री ने कहा कि आगे बढ़ने की होड़ में मनुष्य एक-दूसरे को नीचा दिखाने का प्रयास कर रहा है। यहीं से उसके पतन की शुरुआत होती है। मनुष्य जीवन तभी सार्थक हो सकता है, जब व्यक्ति अपने विचारों, वाणी और व्यवहार में सरलता लाए। मन में कुछ और, वचन में कुछ और तथा आचरण में कुछ और होना कुटिलता का प्रतीक है।</span></p>
<p>उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि दशलक्षण महापर्व के दौरान उत्तम आर्जव धर्म के सिद्धांत को केवल सुनें नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन और व्यवहार में भी उतारें। धर्मसभा के दौरान समिति अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र गंगवाल, महामंत्री निर्मल पाटनी, प्रशांत गंगवाल, विनय कासलीवाल, पंकज छाबड़ा, संजय गोधा और विकास जैन सहित समाजजनों ने आचार्य श्री के चरणों में श्रीफल समर्पित कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<h2><strong>दगा किसी का सगा नहीं होता—मुनिश्री अनुमान सागर</strong></h2>
<p><img decoding="async" class="wp-image-358859 alignright" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/oipo-300x132.jpg" alt="oipo" width="386" height="170" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/oipo-300x132.jpg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/oipo-1024x451.jpg 1024w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/oipo-768x338.jpg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/oipo.jpg 1112w" sizes="(max-width: 386px) 100vw, 386px" /><span style="font-size: inherit;">मुनिश्री अनुमान सागर महाराज ने उत्तम आर्जव धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि व्यक्ति को कुटिलता छोड़कर निर्मल भावों के साथ प्रत्येक कार्य करना चाहिए। आर्जव धर्म का अर्थ ही सरलता और निष्कपटता है। संसार में जो व्यक्ति किसी दूसरे के साथ धोखा करता है, उसे स्वयं भी कभी न कभी धोखे का सामना करना पड़ता है। इसलिए कहा गया है कि दगा किसी का सगा नहीं होता।</span></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि उत्तम आर्जव धर्म हमें सिखाता है कि किसी भी व्यक्ति के साथ छल-कपट नहीं करना चाहिए। मन में जो भाव हो, वही वचन में व्यक्त होना चाहिए और उसी के अनुरूप हमारा आचरण होना चाहिए। छल-कपट करने वाला व्यक्ति न केवल अपने वर्तमान जीवन को बिगाड़ता है, बल्कि कर्मों का बंध कर अपने अगले भव को भी प्रभावित करता है।</p>
<h2><strong>कलशों से किया श्रीजी का अभिषेक</strong></h2>
<p>जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि पर्युषण पर्व के तीसरे दिन आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज एवं प्रतिष्ठाचार्य पंडित डॉ. आनंद प्रकाश शास्त्री के मार्गदर्शन में समाजजनों ने श्रीजी का कलशों से जलाभिषेक और पंचामृत अभिषेक किया। भगवान के जयकारों के बीच संपन्न हुए अभिषेक में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।</p>
<p>इसके बाद आचार्य श्री ने रिद्धि मंत्रों का उच्चारण करते हुए वृहद शांतिधारा कराई। शांतिधारा करने का सौभाग्य कमलेश बिलाला परिवार को प्राप्त हुआ। श्रद्धालुओं ने भगवान के समक्ष विश्व शांति, परिवार की सुख-समृद्धि और समस्त जीवों के कल्याण की मंगल भावना व्यक्त की। धार्मिक अनुष्ठान के बाद दीपकों से श्रीजी की आरती उतारी गई।</p>
<h2><strong>अष्ट द्रव्य से हुई दशलक्षण धर्म की पूजा</strong></h2>
<p>आचार्य श्री चैत्य सागर महाराज एवं मुनिश्री अनुमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य पंडित डॉ. आनंद प्रकाश शास्त्री के निर्देशन में सोलहकारण पूजा, पंचमेरु पूजन और उत्तम आर्जव धर्म की विशेष पूजा की गई। महिला, पुरुष और युवाओं ने अष्ट द्रव्य से भगवान की पूजा-अर्चना करते हुए महाअर्घ्य समर्पित किया।</p>
<p>प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि शनिवार, 19 सितंबर को पर्युषण पर्व के चौथे दिन उत्तम शौच धर्म की पूजा की जाएगी। इसके साथ ही नौवें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंत के मोक्ष कल्याणक के अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा निर्वाण लड्डू समर्पित किया जाएगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Uttam Arjav Dharma: मन, वचन और कर्म की सरलता से होती है आत्मा की शुद्धि—आर्यिका सुदृढ़मति माताजी</title>
		<link>https://swarajvani.com/uttam-arjav-dharma-worship-held-at-digambar-jain-samavsharan-temple-in/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Sep 2026 12:10:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Sunil Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Aryika Sudridmati Mataji]]></category>
		<category><![CDATA[Aryika Sulekhmati Mataji]]></category>
		<category><![CDATA[Dashlakshan Mahaparva]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain Samavsharan Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Kanchan Bagh Indore]]></category>
		<category><![CDATA[Paryushan Parv]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=358848</guid>

					<description><![CDATA[Uttam Arjav Dharma: मन, वचन और कर्म की सरलता से होती है आत्मा की शुद्धि—आर्यिका सुदृढ़मति माताजी कंचन बाग स्थित दिगम्बर जैन समवशरण मंदिर में अभिषेक, शांतिधारा और विशेष पूजन; ... <a title="Uttam Arjav Dharma: मन, वचन और कर्म की सरलता से होती है आत्मा की शुद्धि—आर्यिका सुदृढ़मति माताजी" class="read-more" href="https://swarajvani.com/uttam-arjav-dharma-worship-held-at-digambar-jain-samavsharan-temple-in/" aria-label="Read more about Uttam Arjav Dharma: मन, वचन और कर्म की सरलता से होती है आत्मा की शुद्धि—आर्यिका सुदृढ़मति माताजी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>Uttam Arjav Dharma: मन, वचन और कर्म की सरलता से होती है आत्मा की शुद्धि—आर्यिका सुदृढ़मति माताजी</strong></h1>
<h2><strong>कंचन बाग स्थित दिगम्बर जैन समवशरण मंदिर में अभिषेक, शांतिधारा और विशेष पूजन; दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने की उत्तम आर्जव धर्म की आराधना</strong></h2>
<p><strong>इंदौर।</strong> दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन कंचन बाग स्थित दिगम्बर जैन समवशरण मंदिर में उत्तम आर्जव धर्म की श्रद्धा एवं भक्तिपूर्वक आराधना की गई। आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका श्री सुदृढ़मति माताजी एवं आर्यिका श्री सुलेखमति माताजी के पावन सानिध्य में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में समाजजनों ने शामिल होकर धर्मलाभ प्राप्त किया। मंदिर परिसर सुबह से ही भगवान के जयकारों, मंत्रोच्चार और भक्ति संगीत से गुंजायमान रहा।</p>
<h2><strong>अभिषेक और शांतिधारा के साथ हुई शुरुआत</strong></h2>
<p>धार्मिक कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल मूलनायक भगवान श्री 1008 शांतिनाथ भगवान के अभिषेक एवं शांतिधारा से हुई। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ भगवान का अभिषेक किया और विश्व शांति, समाज की सुख-समृद्धि तथा सभी जीवों के कल्याण की मंगल कामना की। शांतिधारा के दौरान विधिवत मंत्रोच्चार किया गया, जिससे पूरे मंदिर परिसर में आध्यात्मिक और शांतिमय वातावरण बन गया।</p>
<p>अभिषेक एवं शांतिधारा के पश्चात देव-शास्त्र-गुरु, सोलहकारण, पंचमेरु और दशलक्षण धर्म की पूजा की गई। श्रद्धालुओं ने भगवान शांतिनाथ के समक्ष अर्घ्य समर्पित कर धर्म के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। पूजा के दौरान महिलाओं, पुरुषों, युवाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।</p>
<h2><strong>मन में जो हो, वही व्यवहार में दिखाई दे</strong></h2>
<p>धर्मसभा को संबोधित करते हुए आर्यिका श्री सुदृढ़मति माताजी ने उत्तम आर्जव धर्म का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि मनुष्य के मन में जो भावना हो, वही उसकी वाणी और व्यवहार में भी प्रकट होनी चाहिए। मन में कुछ और रखना तथा बाहर कुछ और बोलना या प्रदर्शित करना कुटिलता की श्रेणी में आता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि उत्तम आर्जव धर्म का आत्मा की शुद्धि से गहरा संबंध है। आर्जव का अर्थ सरलता, सहजता और निष्कपटता है। जब व्यक्ति मन, वचन और काया से एकरूप हो जाता है, तभी वह वास्तविक रूप से आर्जव धर्म का पालन कर सकता है। छल-कपट से मुक्त जीवन ही व्यक्ति को आंतरिक शांति और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ाता है।</p>
<h2><strong>माया, कपट और दिखावे से बचना जरूरी</strong></h2>
<p>आर्यिका श्री ने कहा कि मनुष्य अनेक प्रकार की माया, कपट, छल और दिखावे में फंस जाता है। अपने वास्तविक दोषों को छिपाना, अपने गुणों को बढ़ा-चढ़ाकर बताना और दूसरों को प्रभावित करने के लिए झूठा रूप धारण करना कपट के ही अलग-अलग रूप हैं। मन में कुछ और रखकर बाहर कुछ और कहना भी आत्मा की सरलता को समाप्त करता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि केवल दूसरों के सामने धार्मिकता का प्रदर्शन करना वास्तविक धर्म नहीं है। प्रतिष्ठा प्राप्त करने के लिए स्वयं को वास्तविकता से अधिक श्रेष्ठ दिखाने का प्रयास भी व्यक्ति को धर्म के मूल उद्देश्य से दूर कर देता है। धर्म का संबंध बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर होने वाले सकारात्मक परिवर्तन से है।</p>
<h2><strong>कपट छोड़ने से जीवन में आती है सरलता</strong></h2>
<p>आर्यिका सुदृढ़मति माताजी ने कहा कि कपट व्यक्ति के मन को अशांत बनाता है और उसके संबंधों को भी प्रभावित करता है। जो व्यक्ति अपने जीवन में सच्चाई, सरलता और निष्कपटता अपनाता है, उसके विचार और व्यवहार में स्वाभाविक पवित्रता दिखाई देती है। आर्जव धर्म मनुष्य को अपने दोष स्वीकार करने और उन्हें दूर करने की प्रेरणा देता है।</p>
<p>उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि दशलक्षण महापर्व के दौरान केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रहें, बल्कि धर्म के सिद्धांतों को दैनिक जीवन में उतारने का प्रयास करें। मन, वचन और कर्म में समानता रखते हुए छल, दिखावा और कुटिलता का त्याग करना ही उत्तम आर्जव धर्म की सच्ची साधना है।</p>
<h2><strong>समाजजनों ने उत्साहपूर्वक लिया धर्मलाभ</strong></h2>
<p><img decoding="async" class="wp-image-358853 alignright" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/yuyrty-201x300.jpg" alt="yuyrty" width="277" height="413" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/yuyrty-201x300.jpg 201w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/09/yuyrty.jpg 296w" sizes="(max-width: 277px) 100vw, 277px" /><span style="font-size: inherit;">मंदिर के प्रचार प्रमुख प्रवीण जैन ने बताया कि दशलक्षण महापर्व के अवसर पर मंदिर में प्रतिदिन अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, स्वाध्याय एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में मंदिर समिति के अध्यक्ष सुमत लुहाड़िया, कार्याध्यक्ष अजीत जैन और हसमुख गांधी सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।</span></p>
<p>सभी श्रद्धालुओं ने आर्यिका संघ से मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। आयोजन के दौरान समाजजनों ने आत्मशुद्धि, सत्य, सरलता और निष्कपटता को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पर्युषण पर्व पर जैन धर्मावलंबी कर्मचारियों को दो घंटे की छूट, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश</title>
		<link>https://swarajvani.com/madhya-pradesh-high-court-grants-two-hour-relaxation-to-jain-employees-during-paryushan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Sep 2026 08:05:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[JAINS]]></category>
		<category><![CDATA[Dashlakshan Mahaparva]]></category>
		<category><![CDATA[Gwalior Bench]]></category>
		<category><![CDATA[igh Court]]></category>
		<category><![CDATA[Indore Bench]]></category>
		<category><![CDATA[Jabalpur High Court]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Employees]]></category>
		<category><![CDATA[MP High Court Order]]></category>
		<category><![CDATA[National Jinshasan Ekta Sangh]]></category>
		<category><![CDATA[Paryushan Parva]]></category>
		<category><![CDATA[Religious Accommodation]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=357650</guid>

					<description><![CDATA[पर्युषण पर्व पर जैन धर्मावलंबी कर्मचारियों को दो घंटे की छूट, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश 15 से 26 सितंबर तक सुबह 10 के स्थान पर दोपहर 12 बजे ... <a title="पर्युषण पर्व पर जैन धर्मावलंबी कर्मचारियों को दो घंटे की छूट, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश" class="read-more" href="https://swarajvani.com/madhya-pradesh-high-court-grants-two-hour-relaxation-to-jain-employees-during-paryushan/" aria-label="Read more about पर्युषण पर्व पर जैन धर्मावलंबी कर्मचारियों को दो घंटे की छूट, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>पर्युषण पर्व पर जैन धर्मावलंबी कर्मचारियों को दो घंटे की छूट, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जारी किया आदेश</strong></h1>
<h2><strong>15 से 26 सितंबर तक सुबह 10 के स्थान पर दोपहर 12 बजे कार्यालय आने की अनुमति, नियमित कामकाज प्रभावित नहीं होने की रखी गई शर्त</strong></h2>
<p><strong>प्रस्तुति: राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ, भारत</strong><br />
<strong>रिपोर्ट: राजेश जैन दद्दू, इंदौर</strong></p>
<p>जैन समाज के प्रमुख धार्मिक पर्व पर्युषण एवं दशलक्षण महापर्व को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जैन धर्मावलंबी कर्मचारियों को कार्यालय आने के समय में दो घंटे की विशेष छूट प्रदान की है। हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से 14 सितंबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार यह सुविधा 15 सितंबर से 26 सितंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी।</p>
<p>इस अवधि में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में कार्यरत जैन धर्म के अनुयायी कर्मचारी सुबह 10 बजे के निर्धारित समय के स्थान पर दोपहर 12 बजे तक कार्यालय में उपस्थित हो सकेंगे। हालांकि इस विशेष अनुमति के साथ यह स्पष्ट शर्त रखी गई है कि कर्मचारियों के देर से कार्यालय आने के कारण न्यायालय के नियमित कामकाज पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।</p>
<p>आदेश को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर मुख्यपीठ के साथ इंदौर और ग्वालियर खंडपीठों के संबंधित अधिकारियों को भी भेजे जाने की जानकारी दी गई है।</p>
<h2><strong>मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर जारी हुआ निर्देश</strong></h2>
<p>राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के प्रचारक राजेश जैन दद्दू और मयंक जैन ने बताया कि जैन धर्मावलंबी कर्मचारियों को दी गई यह विशेष अनुमति मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर प्रदान की गई है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल धर्मेन्द्र सिंह के हस्ताक्षर से आदेश जारी किया गया है।</p>
<p>संघ के प्रमुख राकेश गोहिल ने आदेश की प्रति का उल्लेख करते हुए बताया कि इसका क्रमांक <strong>A/3339/जबलपुर</strong> और जारी होने की तारीख 14 सितंबर 2026 है। आदेश में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में पदस्थ जैन धर्म के अनुयायी कर्मचारियों को पर्युषण पर्व के दौरान दो घंटे विलंब से कार्यालय आने की अनुमति दी गई है।</p>
<p>आदेश में कहा गया है कि जैन धर्म का पालन करने वाले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के कर्मचारी 15 सितंबर से 26 सितंबर 2026 तक पर्युषण पर्व के दौरान सुबह 10 बजे के बजाय दोपहर 12 बजे तक कार्यालय में उपस्थित हो सकते हैं। यह अनुमति इस शर्त के अधीन रहेगी कि उनके देर से आने के कारण कार्यालय का नियमित कार्य प्रभावित नहीं हो।</p>
<h2><strong>जबलपुर के साथ इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ को भेजा आदेश</strong></h2>
<p>प्राप्त जानकारी के अनुसार हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा जारी आदेश को जबलपुर स्थित मुख्यपीठ के अतिरिक्त इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ के संबंधित अधिकारियों को भी भेजा गया है। इससे तीनों पीठों में पदस्थ पात्र जैन धर्मावलंबी कर्मचारी निर्धारित अवधि में इस सुविधा का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।</p>
<p>यह आदेश मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के कर्मचारियों के लिए जारी किया गया है। इसे प्रदेश सरकार के सभी विभागों अथवा समस्त सरकारी कर्मचारियों पर स्वतः लागू आदेश नहीं माना जाएगा। राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने मांग की है कि इसी व्यवस्था को मध्यप्रदेश शासन के अन्य विभागों, कलेक्टर कार्यालयों और केंद्र सरकार के कार्यालयों में कार्यरत जैन कर्मचारियों के लिए भी लागू किया जाए।</p>
<h2><strong>पर्युषण में धार्मिक आराधना के लिए मिलेगा समय</strong></h2>
<p>पर्युषण और दशलक्षण महापर्व जैन धर्म के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में शामिल हैं। इस पर्व के दौरान जैन धर्मावलंबी आत्मशुद्धि, संयम, त्याग, तप, क्षमा और धार्मिक साधना को विशेष महत्व देते हैं। श्रद्धालु प्रातःकाल मंदिरों एवं जिनालयों में पहुंचकर अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, प्रवचन, सामायिक और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं।</p>
<p>सुबह आयोजित होने वाली इन धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने के कारण नौकरीपेशा श्रद्धालुओं को समय संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा प्रदान की गई दो घंटे की छूट से जैन धर्मावलंबी कर्मचारी धार्मिक आराधना पूरी करने के बाद कार्यालय पहुंच सकेंगे।</p>
<p>हालांकि कर्मचारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इस सुविधा के कारण न्यायालय अथवा कार्यालय की नियमित कार्यप्रणाली प्रभावित न हो। इस प्रकार आदेश में धार्मिक भावनाओं के सम्मान के साथ प्रशासनिक कार्यों की निरंतरता का भी ध्यान रखा गया है।</p>
<h2><strong>जैन समाज ने निर्णय का किया स्वागत</strong></h2>
<p>वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेन्द्र जैन ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि पर्युषण और दशलक्षण महापर्व जैन धर्म में आत्मशुद्धि, क्षमा, तप तथा साधना का पर्व है। इन पवित्र दिनों में जैन धर्मावलंबी प्रातःकाल मंदिर जाकर अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, प्रवचन और सामायिक जैसे धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट प्रशासन का यह निर्णय कर्मचारियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने वाला है। इससे नौकरी के साथ धार्मिक परंपराओं का पालन करने वाले कर्मचारियों को सुविधा मिलेगी। आदेश की जानकारी सामने आने के बाद जैन समाज के लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त की है।</p>
<h2><strong>राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने जताया आभार</strong></h2>
<p>राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने मुख्य न्यायाधीश और हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल धर्मेन्द्र सिंह के प्रति आभार व्यक्त किया है। संघ के प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि यह निर्णय धार्मिक आस्था के सम्मान और सर्वधर्म समभाव की भावना का उदाहरण है।</p>
<p>संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि जैन धर्मावलंबी कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के साथ पर्युषण पर्व की धार्मिक आराधना में भी शामिल हो सकेंगे। कार्यालय का नियमित कामकाज प्रभावित न होने की शर्त इस व्यवस्था को संतुलित बनाती है।</p>
<h2><strong>अन्य सरकारी विभागों में भी सुविधा देने की मांग</strong></h2>
<p>राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने मध्यप्रदेश सरकार से मांग की है कि हाईकोर्ट की इस व्यवस्था की तर्ज पर प्रदेश के सभी सरकारी विभागों और कलेक्टर कार्यालयों में कार्यरत जैन धर्मावलंबी कर्मचारियों को भी पर्युषण पर्व के दौरान दो घंटे की छूट प्रदान की जाए।</p>
<p>इसके साथ ही केंद्र सरकार के अधीन कार्यालयों में कार्यरत जैन कर्मचारियों के लिए भी ऐसी व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। संघ का कहना है कि इससे कर्मचारी अपनी धार्मिक परंपराओं और कार्यालयीन दायित्वों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सकेंगे।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>झुमरीतिलैया में 16 से 25 सितंबर तक लगेगा दस दिवसीय विरागोदय संस्कार शिविर</title>
		<link>https://swarajvani.com/ten-day-viragoday-sanskar-camp-to-be-held-in-jhumri-telaiya-from-september-16-to-25/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 15 Sep 2026 06:40:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[JAINS]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Vishuddhasagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Dashlakshan Mahaparva]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Culture]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Religion]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand N]]></category>
		<category><![CDATA[Koderma Jain Samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Suyash Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Religious Camp]]></category>
		<category><![CDATA[skar Camp]]></category>
		<category><![CDATA[Spirituality]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=357608</guid>

					<description><![CDATA[झुमरीतिलैया में 16 से 25 सितंबर तक लगेगा दस दिवसीय विरागोदय संस्कार शिविर मुनि श्री 108 सुयश सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में दसलक्षण महापर्व के साथ होंगे धार्मिक ... <a title="झुमरीतिलैया में 16 से 25 सितंबर तक लगेगा दस दिवसीय विरागोदय संस्कार शिविर" class="read-more" href="https://swarajvani.com/ten-day-viragoday-sanskar-camp-to-be-held-in-jhumri-telaiya-from-september-16-to-25/" aria-label="Read more about झुमरीतिलैया में 16 से 25 सितंबर तक लगेगा दस दिवसीय विरागोदय संस्कार शिविर">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>झुमरीतिलैया में 16 से 25 सितंबर तक लगेगा दस दिवसीय विरागोदय संस्कार शिविर</strong></h1>
<h2><strong>मुनि श्री 108 सुयश सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में दसलक्षण महापर्व के साथ होंगे धार्मिक आयोजन</strong></h2>
<p><strong>झुमरीतिलैया।</strong> चर्या शिरोमणि आचार्य गुरुदेव श्री विशुद्धसागर जी महामुनिराज के मंगल आशीर्वाद तथा जैन संत मुनि श्री 108 सुयश सागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में झुमरीतिलैया में दस दिवसीय विरागोदय संस्कार शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर दसलक्षण महापर्व के अवसर पर 16 से 25 सितंबर तक जैन मंदिर के बगल स्थित प्रांगण में आयोजित होगा।</p>
<p>दस दिनों तक चलने वाले इस आध्यात्मिक एवं संस्कारमय शिविर में धर्मलाभ लेने के लिए स्थानीय जैन समाज के साथ झारखंड के विभिन्न शहरों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। आयोजन को लेकर विरागोदय वर्षायोग कमेटी और कोडरमा जैन समाज के श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह बना हुआ है। शिविर की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और प्रतिभागियों की सुविधाओं तथा धार्मिक कार्यक्रमों के व्यवस्थित संचालन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।</p>
<h2><strong>मन की तैयारी भी आवश्यक: मुनि श्री</strong></h2>
<p>शिविरार्थियों को संदेश देते हुए मुनि श्री 108 सुयश सागर जी महाराज ने कहा कि विरागोदय संस्कार शिविर के माध्यम से श्रावकों को आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। धर्म और संस्कारों के साथ व्यक्ति जितना तपेगा, उसका जीवन उतना ही निखरेगा।</p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि शिविर में शामिल होने के लिए जितनी तैयारी आवश्यक सामग्री की होती है, उतनी ही तैयारी मन की भी होनी चाहिए। व्यक्ति को अपने मन में धर्म, साधना, संयम और आत्मचिंतन का भाव लेकर शिविर में प्रवेश करना चाहिए। दस दिनों के इस आध्यात्मिक अवसर को केवल एक धार्मिक कार्यक्रम मानकर पूरा नहीं किया जाए, बल्कि इससे प्राप्त शिक्षा और संस्कारों को जीवन में आत्मसात करने की भावना से सहभागिता की जाए। ऐसा करने पर ही विरागोदय संस्कार शिविर का वास्तविक उद्देश्य सार्थक होगा।</p>
<h2><strong>नई पीढ़ी को धर्म और संस्कारों से जोड़ने की पहल</strong></h2>
<p>आज के बदलते सामाजिक परिवेश में बच्चों और युवाओं को अपनी संस्कृति, धर्म और संस्कारों से जोड़ना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए शिविर में नई पीढ़ी के लिए विशेष धार्मिक एवं संस्कारपूर्ण गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।</p>
<p>शिविर के दौरान जैन धर्म के मूल सिद्धांतों, भगवान महावीर के संदेश, अहिंसा, सत्य, संयम, त्याग, तप, करुणा और सदाचार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन दिया जाएगा। बच्चों एवं युवाओं को सरल और प्रेरक माध्यमों से जैन संस्कृति, धार्मिक परंपराओं तथा जीवन मूल्यों से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा।</p>
<p>मुनि श्री सुयश सागर जी महाराज के मंगल प्रवचनों और पावन सानिध्य में श्रद्धालुओं को धर्म के साथ अपने जीवन को अनुशासित, संस्कारवान और संयमित बनाने की प्रेरणा प्राप्त होगी। आयोजन समिति का मानना है कि ऐसे शिविरों के माध्यम से नई पीढ़ी में धार्मिक चेतना जागृत करने के साथ उन्हें जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनने की प्रेरणा भी दी जा सकती है।</p>
<h2><strong>सामायिक, स्वाध्याय और प्रतिक्रमण सहित होंगे कार्यक्रम</strong></h2>
<p>दस दिवसीय शिविर में सामायिक, स्वाध्याय, पूजा-अर्चना, धार्मिक चर्चा, प्रतिक्रमण, मंगल प्रवचन तथा विभिन्न संस्कारमय गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। प्रत्येक कार्यक्रम का उद्देश्य शिविरार्थियों को आत्मचिंतन, धर्म साधना और संयम की दिशा में प्रेरित करना होगा।</p>
<p>शिविर में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं को 24 घंटे गुरुदेव द्वारा निर्धारित कार्यक्रम और अनुशासन के अनुसार रहना होगा। प्रतिदिन सुबह 5 बजे से रात 8 बजे तक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस अवधि में शिविरार्थी सांसारिक गतिविधियों से दूर रहकर पूजा, साधना, स्वाध्याय, प्रवचन और आत्मकल्याण से जुड़ी गतिविधियों में सहभागिता करेंगे।</p>
<p>आयोजन समिति के अनुसार, शिविर का वातावरण पूरी तरह धर्ममय रहेगा। शिविरार्थियों को निर्धारित दिनचर्या का पालन करते हुए तप, त्याग, संयम और साधना के माध्यम से आत्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त होगा।</p>
<h2><strong>विरागोदय वर्षायोग कमेटी के नेतृत्व में होगा आयोजन</strong></h2>
<p>विरागोदय संस्कार शिविर का संपूर्ण आयोजन जैन समाज के अंतर्गत विरागोदय वर्षायोग कमेटी के नेतृत्व में किया जाएगा। कार्यक्रम स्थानीय पंडित अभिषेक शास्त्री के निर्देशन में संपन्न होगा। आयोजन को व्यवस्थित और सफल बनाने के लिए कमेटी के पदाधिकारियों तथा समाज के श्रद्धालुओं को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।</p>
<p>शिविर संयोजक सिद्धार्थ जैन सेठी और कुणाल जैन ठोल्या ने मीडिया प्रभारी राजकुमार जैन अजमेरा एवं नवीन जैन को बताया कि आयोजन की सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने समाज के श्रद्धालुओं, विशेषकर बच्चों और युवाओं से शिविर में सहभागी बनकर धर्म, संस्कार और आत्मकल्याण का लाभ लेने का आग्रह किया है।</p>
<p>दसलक्षण महापर्व के साथ आयोजित यह विरागोदय संस्कार शिविर श्रद्धालुओं के लिए धर्म साधना, आत्मचिंतन और संस्कार निर्माण का महत्वपूर्ण अवसर बनेगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
