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	<title>consumer rights &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<title>consumer rights &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>Dewas : चामुंडा गैस एजेंसी पर दूसरे दिन भी उपभोक्ता परेशान, गैस बुकिंग नंबर स्वतः निरस्त होने का आरोप</title>
		<link>https://swarajvani.com/dewas-chamunda-gas-agency-lpg-booking-auto-cancel/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 14 Jul 2026 07:40:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Dewas]]></category>
		<category><![CDATA[Consumer Grievance]]></category>
		<category><![CDATA[consumer rights]]></category>
		<category><![CDATA[Gas Booking Cancelled]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Oil LPG]]></category>
		<category><![CDATA[LPG Consumer Complaint]]></category>
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					<description><![CDATA[देवास: चामुंडा गैस एजेंसी पर दूसरे दिन भी उपभोक्ता परेशान, गैस बुकिंग नंबर स्वतः निरस्त होने का आरोप संवाददाता: अकदस शेख एलपीजी सिलेंडर बुकिंग को लेकर उपभोक्ताओं ने जताई नाराजगी ... <a title="Dewas : चामुंडा गैस एजेंसी पर दूसरे दिन भी उपभोक्ता परेशान, गैस बुकिंग नंबर स्वतः निरस्त होने का आरोप" class="read-more" href="https://swarajvani.com/dewas-chamunda-gas-agency-lpg-booking-auto-cancel/" aria-label="Read more about Dewas : चामुंडा गैस एजेंसी पर दूसरे दिन भी उपभोक्ता परेशान, गैस बुकिंग नंबर स्वतः निरस्त होने का आरोप">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>देवास: चामुंडा गैस एजेंसी पर दूसरे दिन भी उपभोक्ता परेशान, गैस बुकिंग नंबर स्वतः निरस्त होने का आरोप</strong></h1>
<p><em><strong>संवाददाता: अकदस शेख</strong></em></p>
<h2>एलपीजी सिलेंडर बुकिंग को लेकर उपभोक्ताओं ने जताई नाराजगी</h2>
<p><strong>Dewas ।</strong> शहर की चामुंडा गैस एजेंसी पर गुरुवार को लगातार दूसरे दिन भी उपभोक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई ग्राहकों ने आरोप लगाया कि उनके द्वारा गैस सिलेंडर के लिए कराई गई बुकिंग के नंबर स्वतः (ऑटोमैटिक) तरीके से निरस्त हो रहे हैं, जिससे उन्हें समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है।</p>
<p>उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्होंने नियमानुसार गैस सिलेंडर की बुकिंग कराई थी, लेकिन बाद में जानकारी मिली कि उनकी बुकिंग स्वतः कैंसल हो गई है। इस कारण उन्हें बार-बार एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।</p>
<h2><strong>गोदाम से कार्यालय भेजे जा रहे उपभोक्ता</strong></h2>
<p>ग्राहकों के अनुसार, जब वे इस संबंध में जानकारी लेने एजेंसी के गोदाम पहुंचे तो वहां से उन्हें कार्यालय जाने के लिए कहा गया। वहीं कार्यालय पहुंचने पर भी उन्हें बुकिंग नंबर निरस्त होने का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया।</p>
<p>उपभोक्ताओं का कहना है कि समस्या का समाधान करने के बजाय उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान भेजा जा रहा है, जिससे उनका समय और श्रम दोनों व्यर्थ हो रहे हैं।</p>
<div style="width: 848px;" class="wp-video"><video class="wp-video-shortcode" id="video-335035-1" width="848" height="478" preload="metadata" controls="controls"><source type="video/mp4" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Video-2026-07-14-at-1.01.48-PM-1.mp4?_=1" /><a href="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Video-2026-07-14-at-1.01.48-PM-1.mp4">https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Video-2026-07-14-at-1.01.48-PM-1.mp4</a></video></div>
<h2><strong>स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने से बढ़ी नाराजगी</strong></h2>
<p>ग्राहकों का आरोप है कि यदि गैस सिलेंडर की बुकिंग किसी तकनीकी खराबी, सर्वर संबंधी समस्या या अन्य प्रशासनिक कारणों से स्वतः निरस्त की जा रही है, तो इसकी स्पष्ट जानकारी एजेंसी द्वारा उपभोक्ताओं को समय पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना के बुकिंग रद्द होने से उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति बन रही है और उन्हें अपनी बुकिंग की स्थिति जानने के लिए बार-बार एजेंसी का रुख करना पड़ रहा है।</p>
<p>उपभोक्ताओं के अनुसार, स्पष्ट सूचना और उचित मार्गदर्शन के अभाव में उन्हें गोदाम और कार्यालय के बीच चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन समस्या का संतोषजनक समाधान नहीं मिल पा रहा है। इससे विशेष रूप से बुजुर्ग, महिलाएं, दिव्यांगजन तथा दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले उपभोक्ताओं को अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ग्राहकों का कहना है कि यदि एजेंसी समय पर एसएमएस, फोन कॉल या नोटिस के माध्यम से आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराए, तो लोगों को अनावश्यक रूप से बार-बार आने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उनकी परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है।</p>
<h2><strong>पारदर्शिता और त्वरित समाधान की मांग</strong></h2>
<p>उपभोक्ताओं ने चामुंडा गैस एजेंसी से मांग की है कि गैस सिलेंडर बुकिंग से जुड़ी इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाए। उनका कहना है कि यदि बुकिंग नंबर किसी तकनीकी खराबी, सर्वर संबंधी समस्या या अन्य प्रशासनिक कारणों से स्वतः निरस्त हो रहे हैं, तो इसकी स्पष्ट और आधिकारिक जानकारी उपभोक्ताओं को समय रहते उपलब्ध कराई जानी चाहिए। ग्राहकों का कहना है कि बिना किसी सूचना के बुकिंग रद्द हो जाने से उन्हें बार-बार एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे समय और आर्थिक दोनों तरह का नुकसान हो रहा है।</p>
<p>उपभोक्ताओं का यह भी कहना है कि एजेंसी परिसर में एक प्रभावी हेल्प डेस्क या शिकायत निवारण काउंटर स्थापित किया जाए, जहां बुकिंग, वितरण और अन्य समस्याओं का तुरंत समाधान मिल सके। इसके अलावा एजेंसी को नोटिस बोर्ड, एसएमएस, व्हाट्सएप या अन्य डिजिटल माध्यमों से भी उपभोक्ताओं को आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध करानी चाहिए। उनका मानना है कि पारदर्शी सूचना व्यवस्था और बेहतर संवाद से भ्रम की स्थिति समाप्त होगी, अनावश्यक भीड़ कम होगी और उपभोक्ताओं को बिना परेशानी के समय पर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जा सकेगा।</p>
<div style="width: 478px;" class="wp-video"><video class="wp-video-shortcode" id="video-335035-2" width="478" height="850" preload="metadata" controls="controls"><source type="video/mp4" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Video-2026-07-14-at-1.01.48-PM.mp4?_=2" /><a href="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Video-2026-07-14-at-1.01.48-PM.mp4">https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Video-2026-07-14-at-1.01.48-PM.mp4</a></video></div>
<h2><strong>प्रशासन और संबंधित कंपनी से कार्रवाई की अपेक्षा</strong></h2>
<p>उपभोक्ताओं ने संबंधित गैस कंपनी और प्रशासन से मामले का संज्ञान लेकर जांच कराने तथा समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि घरेलू गैस एक आवश्यक सेवा है और इसकी बुकिंग एवं वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता आम नागरिकों के दैनिक जीवन को प्रभावित करती है।</p>
<p>अब उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी इस मामले की जांच कर जल्द उचित कदम उठाएंगे, जिससे गैस वितरण व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके।</p>
<p><strong>अस्वीकरण (Disclaimer):</strong> यह समाचार उपभोक्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके बयानों पर आधारित है। गैस एजेंसी अथवा संबंधित कंपनी का पक्ष समाचार प्रकाशित किए जाने तक प्राप्त नहीं हो सका था। उनका पक्ष प्राप्त होने पर समाचार को अद्यतन किया जाएगा।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>E20 पेट्रोल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में PIL, उपभोक्ताओं के लिए पारदर्शिता और सुरक्षा की मांग</title>
		<link>https://swarajvani.com/e20-fuel-policy-under-supreme-court-review/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Jul 2026 08:24:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[National]]></category>
		<category><![CDATA[consumer rights]]></category>
		<category><![CDATA[E20 Petrol]]></category>
		<category><![CDATA[Ethanol Blended Fuel]]></category>
		<category><![CDATA[Ethanol Mixing Policy]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Court PIL]]></category>
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					<description><![CDATA[E20 पेट्रोल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में PIL, उपभोक्ताओं के लिए पारदर्शिता और सुरक्षा की मांग नई दिल्ली। देशभर में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ... <a title="E20 पेट्रोल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में PIL, उपभोक्ताओं के लिए पारदर्शिता और सुरक्षा की मांग" class="read-more" href="https://swarajvani.com/e20-fuel-policy-under-supreme-court-review/" aria-label="Read more about E20 पेट्रोल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में PIL, उपभोक्ताओं के लिए पारदर्शिता और सुरक्षा की मांग">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>E20 पेट्रोल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में PIL, उपभोक्ताओं के लिए पारदर्शिता और सुरक्षा की मांग</strong></h1>
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> देशभर में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। इस याचिका में केंद्र सरकार की इथेनॉल मिश्रण नीति को चुनौती नहीं दी गई है, बल्कि इसके लागू होने के दौरान उपभोक्ताओं के अधिकारों, पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है।</p>
<p>याचिका में कहा गया है कि उपभोक्ताओं को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि वे जिस पेट्रोल का उपयोग कर रहे हैं, उसमें इथेनॉल की मात्रा कितनी है। बिना स्पष्ट जानकारी के उपभोक्ताओं को E20 जैसे ईंधन का इस्तेमाल करने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।</p>
<p>यह जनहित याचिका अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा द्वारा दायर की गई है। इसमें मांग की गई है कि पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को ईंधन में मौजूद इथेनॉल प्रतिशत की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए।</p>
<h2><strong>पेट्रोल पंपों पर जानकारी प्रदर्शित करने की मांग</strong></h2>
<p>याचिका में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है कि सभी पेट्रोल पंपों पर फ्यूल डिस्पेंसिंग नोजल और बिक्री रसीद (बिल) पर इथेनॉल मिश्रण की मात्रा स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य किया जाए।</p>
<p>याचिकाकर्ता का कहना है कि उपभोक्ताओं को यह जानने का अधिकार है कि उनके वाहन में किस प्रकार का ईंधन डाला जा रहा है। विशेष रूप से पुराने वाहनों को लेकर चिंता जताई गई है, क्योंकि सभी वाहन अधिक मात्रा वाले इथेनॉल मिश्रित ईंधन के लिए अनुकूल नहीं हो सकते हैं।</p>
<h2><strong>पुराने वाहनों की अनुकूलता को लेकर चिंता</strong></h2>
<p>PIL में कहा गया है कि बिना पर्याप्त जानकारी के E20 पेट्रोल की बिक्री से कुछ पुराने वाहनों के प्रदर्शन, माइलेज और इंजन के पुर्जों पर असर पड़ सकता है।</p>
<p>याचिका में मांग की गई है कि सरकार और संबंधित कंपनियां वाहन मालिकों को यह जानकारी उपलब्ध कराएं कि कौन-कौन से वाहन मॉडल अलग-अलग इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के लिए उपयुक्त हैं।</p>
<p>इसके लिए एक आधिकारिक और आसानी से उपलब्ध वाहन कम्पैटिबिलिटी डेटाबेस तैयार करने की मांग भी की गई है, जिसमें वाहन मालिक अपने वाहन की जानकारी के आधार पर ईंधन की अनुकूलता जांच सकें।</p>
<h2><strong>सरकार की नीति का विरोध नहीं: याचिका</strong></h2>
<p>याचिका में स्पष्ट किया गया है कि यह मामला सरकार की पर्यावरण अनुकूल इथेनॉल नीति के विरोध में नहीं है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इथेनॉल मिश्रण से जुड़े नीतिगत उद्देश्यों पर सवाल नहीं उठाया जा रहा, बल्कि इसे लागू करते समय उपभोक्ताओं को पर्याप्त जानकारी और सुरक्षा प्रदान करने की आवश्यकता है।</p>
<p>याचिका में कहा गया है कि किसी भी नई ईंधन व्यवस्था को लागू करते समय उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखना जरूरी है।</p>
<h2><strong>सुप्रीम कोर्ट से मांगी गई प्रमुख राहतें</strong></h2>
<p>PIL में सुप्रीम कोर्ट से कई निर्देश जारी करने की मांग की गई है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—</p>
<ul>
<li>सभी पेट्रोल पंपों पर फ्यूल नोजल के पास इथेनॉल मिश्रण प्रतिशत की जानकारी प्रदर्शित करना।</li>
<li>पेट्रोल की बिक्री रसीद या बिल में इथेनॉल मात्रा का उल्लेख करना।</li>
<li>वाहन मॉडल के अनुसार E20 और अन्य इथेनॉल मिश्रित ईंधनों की अनुकूलता बताने वाला आधिकारिक डेटाबेस तैयार करना।</li>
<li>पुराने और E20 के लिए अनुकूल नहीं वाहनों के लिए स्पष्ट ट्रांजिशन नीति बनाना।</li>
<li>वाहन वारंटी, इंश्योरेंस और सर्विस सुविधाओं से जुड़े उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।</li>
</ul>
<h2><strong>स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग</strong></h2>
<p>याचिका में E20 कार्यक्रम के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की भी मांग की गई है।</p>
<p>इस समिति के जरिए वाहन कम्पैटिबिलिटी, इंजन की उम्र, रखरखाव खर्च, पर्यावरणीय प्रभाव, पानी की खपत, खाद्य सुरक्षा और वाहन वारंटी जैसे मुद्दों का अध्ययन करने की मांग की गई है।</p>
<p>याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार से E20 नीति से जुड़े तकनीकी अध्ययन, नीति दस्तावेज, वाहन अनुकूलता रिपोर्ट और सार्वजनिक परामर्श से जुड़े रिकॉर्ड अदालत के सामने प्रस्तुत करने का अनुरोध भी किया है।</p>
<h2><strong>अंतरिम राहत की मांग</strong></h2>
<p>याचिका में अंतिम फैसला आने तक अंतरिम निर्देश जारी करने की मांग भी की गई है। इसके तहत तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल पंपों पर तुरंत इथेनॉल मिश्रण प्रतिशत प्रदर्शित करने, फ्यूल बिल में जानकारी देने और वाहन अनुकूलता संबंधी प्रारंभिक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है।</p>
<p>इसके अलावा कंपनियों की वेबसाइट और मोबाइल एप पर भी E20 फ्यूल से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।</p>
<h2><strong>E20 नीति पर बढ़ी चर्चा</strong></h2>
<p>भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, पर्यावरणीय प्रभाव घटाना और घरेलू स्तर पर वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना है।</p>
<p>हालांकि, E20 के विस्तार के साथ वाहन अनुकूलता, उपभोक्ता जागरूकता और तकनीकी बदलाव जैसे मुद्दों पर भी चर्चा बढ़ी है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और आगे के निर्देशों पर नजर रहेगी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Petrol Pump Scam Alert: पेट्रोल-डीजल भरवाते समय ठगी का हुआ शक? जानिए अपने अधिकार और शिकायत करने का पूरा तरीका</title>
		<link>https://swarajvani.com/petrol-pump-scam-alert-know-your-right-while-refuel/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 11:16:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[National]]></category>
		<category><![CDATA[consumer rights]]></category>
		<category><![CDATA[Fuel Adulteration]]></category>
		<category><![CDATA[Fuel Fraud]]></category>
		<category><![CDATA[India News]]></category>
		<category><![CDATA[Petrol Diesel News]]></category>
		<category><![CDATA[Petrol Pump Complaint]]></category>
		<category><![CDATA[Petrol Pump Scam]]></category>
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					<description><![CDATA[Petrol Pump Scam Alert: पेट्रोल-डीजल भरवाते समय ठगी का हुआ शक?  Petrol Pump Scam : देशभर में लाखों लोग रोजाना अपनी गाड़ियों में पेट्रोल और डीजल भरवाते हैं, लेकिन कई ... <a title="Petrol Pump Scam Alert: पेट्रोल-डीजल भरवाते समय ठगी का हुआ शक? जानिए अपने अधिकार और शिकायत करने का पूरा तरीका" class="read-more" href="https://swarajvani.com/petrol-pump-scam-alert-know-your-right-while-refuel/" aria-label="Read more about Petrol Pump Scam Alert: पेट्रोल-डीजल भरवाते समय ठगी का हुआ शक? जानिए अपने अधिकार और शिकायत करने का पूरा तरीका">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div class="relative basis-auto flex-col -mb-(--composer-overlap-px) pb-(--composer-overlap-px) [--composer-overlap-px:28px] grow flex" data-voice-floating-orb-focus-background="">
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<h1 data-section-id="10y0azt" data-start="0" data-end="111"><strong>Petrol Pump Scam Alert: पेट्रोल-डीजल भरवाते समय ठगी का हुआ शक? </strong></h1>
<p data-start="113" data-end="541">Petrol Pump Scam : देशभर में लाखों लोग रोजाना अपनी गाड़ियों में पेट्रोल और डीजल भरवाते हैं, लेकिन कई बार ग्राहकों को यह शिकायत रहती है कि उन्होंने जितने पैसे दिए, उतना ईंधन नहीं मिला या फिर ईंधन की गुणवत्ता खराब थी। पेट्रोल पंपों पर होने वाली ऐसी अनियमितताएं न केवल उपभोक्ताओं की जेब पर असर डालती हैं, बल्कि वाहन के इंजन को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं। ऐसे में जरूरी है कि हर ग्राहक अपने अधिकारों और शिकायत की प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी रखे।</p>
<h2 data-section-id="atxctu" data-start="543" data-end="586"><strong>Petrol Pump Scam किस तरह होती है ?</strong></h2>
<p data-start="588" data-end="928">पेट्रोल पंप पर धोखाधड़ी के कई तरीके सामने आते रहे हैं। कुछ मामलों में ईंधन डिस्पेंसिंग मशीनों के साथ तकनीकी छेड़छाड़ की जाती है, जिससे मीटर पर पूरी मात्रा दिखाई देती है लेकिन वाहन में वास्तविक ईंधन कम पहुंचता है। इसके अलावा ईंधन की गुणवत्ता से जुड़े मामले भी सामने आते हैं, जहां पेट्रोल या डीजल में अन्य पदार्थों की मिलावट की आशंका रहती है।</p>
<p data-start="930" data-end="1162">विशेषज्ञों के अनुसार यदि ईंधन भरवाने के बाद वाहन का माइलेज अचानक कम हो जाए, इंजन की आवाज बदल जाए या वाहन से असामान्य धुआं निकलने लगे, तो यह खराब गुणवत्ता वाले ईंधन का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत सतर्क होने की आवश्यकता है।</p>
<h2 data-section-id="lc9avt" data-start="1164" data-end="1213"><strong>ईंधन भरवाते समय किन बातों का रखें विशेष ध्यान?</strong></h2>
<p data-start="1215" data-end="1303">पेट्रोल या डीजल भरवाते समय कुछ सावधानियां अपनाकर ग्राहक संभावित धोखाधड़ी से बच सकते हैं।</p>
<ul data-start="1305" data-end="1716">
<li data-section-id="8z0gyd" data-start="1305" data-end="1368">ईंधन भरवाने से पहले मशीन का मीटर शून्य (Zero) पर जरूर जांचें।</li>
<li data-section-id="15sg9om" data-start="1369" data-end="1435">कर्मचारी द्वारा बताई गई राशि और मशीन पर दर्ज राशि का मिलान करें।</li>
<li data-section-id="ashkd" data-start="1436" data-end="1486">ईंधन भरने के बाद रसीद या बिल अवश्य प्राप्त करें।</li>
<li data-section-id="1ww5zsm" data-start="1487" data-end="1564">यदि मात्रा को लेकर संदेह हो तो 5 लीटर कैलिब्रेशन टेस्ट की मांग कर सकते हैं।</li>
<li data-section-id="jfq62r" data-start="1565" data-end="1640">गुणवत्ता पर शक होने पर फिल्टर पेपर टेस्ट कराने का अधिकार भी ग्राहक को है।</li>
<li data-section-id="1qfkxfl" data-start="1641" data-end="1716">हमेशा अधिकृत और प्रतिष्ठित पेट्रोल पंपों से ही ईंधन भरवाने की कोशिश करें।</li>
</ul>
<h2 data-section-id="1f9ze88" data-start="1718" data-end="1758"><strong>5 लीटर कैलिब्रेशन टेस्ट क्या होता है?</strong></h2>
<p data-start="1760" data-end="1981">यदि किसी ग्राहक को लगता है कि उसे कम ईंधन दिया गया है, तो वह पेट्रोल पंप प्रबंधन से 5 लीटर कैलिब्रेशन टेस्ट की मांग कर सकता है। इस प्रक्रिया में एक प्रमाणित माप पात्र में ईंधन भरकर उसकी वास्तविक मात्रा की जांच की जाती है।</p>
<p data-start="1983" data-end="2202">यह सुविधा उपभोक्ता अधिकारों का हिस्सा है और पेट्रोल पंप संचालकों को आवश्यकता पड़ने पर यह परीक्षण उपलब्ध कराना होता है। यदि निर्धारित मानकों से कम ईंधन पाया जाता है तो संबंधित पेट्रोल पंप के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।</p>
<h2 data-section-id="fnurcu" data-start="2204" data-end="2240"><strong>ईंधन की गुणवत्ता जांचने का अधिकार</strong></h2>
<p data-start="2242" data-end="2474">मात्रा के अलावा गुणवत्ता की जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। ग्राहक फिल्टर पेपर टेस्ट के जरिए ईंधन में मिलावट की प्राथमिक जांच कर सकते हैं। यदि परीक्षण में कोई गड़बड़ी दिखाई देती है, तो मामला आगे जांच एजेंसियों तक पहुंचाया जा सकता है।</p>
<p data-start="2476" data-end="2606">तेल कंपनियां समय-समय पर गुणवत्ता नियंत्रण के लिए निरीक्षण भी करती हैं, लेकिन उपभोक्ता की सतर्कता सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।</p>
<h2 data-section-id="1kvpoj" data-start="2608" data-end="2647"><strong>धोखाधड़ी का संदेह होने पर क्या करें?</strong></h2>
<p data-start="2649" data-end="2813">यदि आपको लगता है कि पेट्रोल पंप पर आपके साथ किसी प्रकार की धोखाधड़ी हुई है, तो तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए। शिकायत करने में देरी होने पर जांच प्रभावित हो सकती है।</p>
<p data-start="2815" data-end="2967">सबसे पहले संबंधित पेट्रोल पंप की शिकायत पुस्तिका (Complaint Book) में अपनी शिकायत दर्ज कराएं। प्रत्येक पेट्रोल पंप पर यह सुविधा उपलब्ध होना अनिवार्य है।</p>
<p data-start="2969" data-end="3073">इसके अलावा संबंधित तेल कंपनी के ग्राहक सेवा केंद्र या आधिकारिक शिकायत पोर्टल पर भी शिकायत की जा सकती है।</p>
<h2 data-section-id="dy43tv" data-start="3075" data-end="3118"><strong>किन माध्यमों से दर्ज कर सकते हैं शिकायत?</strong></h2>
<p data-start="3120" data-end="3179">उपभोक्ताओं के लिए कई आधिकारिक शिकायत प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं।</p>
<ul data-start="3181" data-end="3328">
<li data-section-id="19jz5ln" data-start="3181" data-end="3214">नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (1915)</li>
<li data-section-id="uhybv9" data-start="3215" data-end="3230">NCH मोबाइल ऐप</li>
<li data-section-id="12c0j2a" data-start="3231" data-end="3241">UMANG ऐप</li>
<li data-section-id="1ys2z5s" data-start="3242" data-end="3258">CPGRAMS पोर्टल</li>
<li data-section-id="1gwm1c6" data-start="3259" data-end="3284">MOPNG e-Seva प्लेटफॉर्म</li>
<li data-section-id="va7tct" data-start="3285" data-end="3328">संबंधित तेल कंपनी की हेल्पलाइन और वेबसाइट</li>
</ul>
<p data-start="3330" data-end="3416">इन माध्यमों के जरिए शिकायत दर्ज कर उपभोक्ता अपने मामले की स्थिति भी ट्रैक कर सकते हैं।</p>
<h2 data-section-id="190mhd1" data-start="3418" data-end="3468"><strong>शिकायत दर्ज करते समय कौन-सी जानकारी जरूरी होगी?</strong></h2>
<p data-start="3470" data-end="3548">शिकायत प्रभावी बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां अपने पास रखना आवश्यक है।</p>
<ul data-start="3550" data-end="3722">
<li data-section-id="wfatyn" data-start="3550" data-end="3570">पेट्रोल पंप का नाम</li>
<li data-section-id="1ma3qu6" data-start="3571" data-end="3581">पूरा पता</li>
<li data-section-id="1qf4i6l" data-start="3582" data-end="3604">घटना की तारीख और समय</li>
<li data-section-id="1lw5hoy" data-start="3605" data-end="3631">वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर</li>
<li data-section-id="bpaz6a" data-start="3632" data-end="3656">बिल या रसीद की जानकारी</li>
<li data-section-id="e9h1qm" data-start="3657" data-end="3682">भरवाए गए ईंधन की मात्रा</li>
<li data-section-id="1n8ddr4" data-start="3683" data-end="3722">यदि संभव हो तो फोटो या वीडियो साक्ष्य</li>
</ul>
<p data-start="3724" data-end="3805">जितनी अधिक सटीक जानकारी उपलब्ध होगी, जांच प्रक्रिया उतनी ही आसान और प्रभावी होगी।</p>
<h2 data-section-id="es7xaa" data-start="3807" data-end="3840"><strong>उपभोक्ताओं के क्या हैं अधिकार?</strong></h2>
<p>भारतीय कानून के अंतर्गत हर उपभोक्ता को यह अधिकार प्राप्त है कि उसे पेट्रोल पंप से सही मात्रा में और मानक गुणवत्ता का ईंधन मिले। यदि किसी भी पेट्रोल पंप संचालक द्वारा जानबूझकर कम मात्रा में ईंधन दिया जाता है या उसमें किसी प्रकार की मिलावट की जाती है, तो यह उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन माना जाता है और ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।</p>
<p>यदि जांच के दौरान किसी पेट्रोल पंप पर अनियमितता या धोखाधड़ी साबित होती है, तो संबंधित विभाग द्वारा उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा गंभीर मामलों में लाइसेंस निलंबित या रद्द भी किया जा सकता है, जिससे उस पेट्रोल पंप का संचालन प्रभावित होता है। कुछ परिस्थितियों में आपराधिक मामला दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई जाती है।</p>
<p>इसी कारण हर ग्राहक के लिए जरूरी है कि वह अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह जागरूक रहे और किसी भी तरह की गड़बड़ी या संदेह को अनदेखा न करे, बल्कि तुरंत शिकायत दर्ज कर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करे।</p>
<h2 data-section-id="1pf72ob" data-start="4284" data-end="4312"><strong>सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव</strong></h2>
<p data-start="4314" data-end="4571">पेट्रोल-डीजल भरवाते समय कुछ मिनट की सावधानी आपको आर्थिक नुकसान और वाहन संबंधी समस्याओं से बचा सकती है। मीटर जांचना, बिल लेना और संदेह होने पर परीक्षण की मांग करना हर ग्राहक का अधिकार है। यदि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी महसूस हो, तो बिना झिझक शिकायत दर्ज करें।</p>
<p data-start="4573" data-end="4729" data-is-last-node="" data-is-only-node="">जागरूक उपभोक्ता न केवल अपने हितों की रक्षा कर सकते हैं, बल्कि ईंधन वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।</p>
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		<item>
		<title>Maharajganj दुकानदार ने स्मार्ट मीटर गड़बड़ी पर बिजली विभाग को 1.69 लाख का नोटिस भेजा</title>
		<link>https://swarajvani.com/heavy-loss-maharajganj-shop-demands-compensation/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Apr 2026 07:11:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uttar Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[Billing Dispute]]></category>
		<category><![CDATA[consumer rights]]></category>
		<category><![CDATA[Electricity Department]]></category>
		<category><![CDATA[Maharajganj]]></category>
		<category><![CDATA[Power Outage]]></category>
		<category><![CDATA[Smart Meter]]></category>
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					<description><![CDATA[Maharajganj के दुकानदार ने बिजली विभाग को भेजा 1.69 लाख का नोटिस, स्मार्ट मीटर की गड़बड़ी से हुआ भारी नुकसान उत्तर प्रदेश के Maharajganj जिले में बिजली विभाग और एक ... <a title="Maharajganj दुकानदार ने स्मार्ट मीटर गड़बड़ी पर बिजली विभाग को 1.69 लाख का नोटिस भेजा" class="read-more" href="https://swarajvani.com/heavy-loss-maharajganj-shop-demands-compensation/" aria-label="Read more about Maharajganj दुकानदार ने स्मार्ट मीटर गड़बड़ी पर बिजली विभाग को 1.69 लाख का नोटिस भेजा">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1 data-section-id="1u7t7ke" data-start="112" data-end="222"><strong>Maharajganj के दुकानदार ने बिजली विभाग को भेजा 1.69 लाख का नोटिस, स्मार्ट मीटर की गड़बड़ी से हुआ भारी नुकसान</strong></h1>
<p data-start="224" data-end="578">उत्तर प्रदेश के Maharajganj जिले में बिजली विभाग और एक दुकानदार के बीच विवाद ने नया रूप ले लिया है। जिले के धनेवा-धनेई चौराहे पर स्थित दुकानदार <strong data-start="366" data-end="380">अजय गुप्ता</strong> ने बिजली विभाग को कुल <strong data-start="403" data-end="430">1.69 लाख रुपये का नोटिस</strong> भेजा है। इस विवाद की जड़ स्मार्ट मीटर की गड़बड़ी और विभागीय तकनीकी खामी में छिपी है, जिसने दुकानदार को भारी आर्थिक नुकसान उठाने पर मजबूर कर दिया।</p>
<h2 data-start="580" data-end="605"><strong>मामला कैसे शुरू हुआ?</strong></h2>
<p data-start="607" data-end="987">अजय गुप्ता के अनुसार, उनकी दुकान पर <strong data-start="643" data-end="659">स्मार्ट मीटर</strong> लगा हुआ है, जो बिजली की खपत को ऑनलाइन रजिस्टर करता है और बिलिंग के लिए विभागीय सर्वर से जुड़ा रहता है। 23 मार्च 2026 को वह अपने दुकान के बिजली बिल का भुगतान करने गए, लेकिन सर्वर खराब होने की वजह से उनका भुगतान नहीं हो सका। तकनीकी खामी के बावजूद, अगले दिन 24 मार्च को उन्होंने वेबसाइट पर दिख रहे <strong data-start="955" data-end="969">8618 रुपये</strong> का भुगतान किया।</p>
<p data-start="989" data-end="1197">इसके बावजूद, 26 मार्च को अचानक उनकी दुकान पर बिजली आपूर्ति बंद हो गई। दुकानदार ने बिजली विभाग से संपर्क किया, तो उन्हें बताया गया कि उनके खाते में <strong data-start="1136" data-end="1156">5444 रुपये बकाया</strong> है। इसे उन्होंने 29 मार्च को जमा किया।</p>
<p data-start="1199" data-end="1458">हालांकि, मीटर बार-बार माइनस बकाया दिखा रहा था। इसके कारण उन्हें <strong data-start="1263" data-end="1294">1500 रुपये और फिर 500 रुपये</strong> अतिरिक्त जमा करने पड़े। कुल मिलाकर चार दिन बिजली आपूर्ति बाधित रहने से उनके दुकान में रखा <strong data-start="1385" data-end="1418">दूध, पनीर और खोया खराब हो गया</strong>, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ।</p>
<h3 data-start="1460" data-end="1481"><strong>उपभोक्ता का आरोप</strong></h3>
<p data-start="1483" data-end="1797">अजय गुप्ता का कहना है कि अगर पहली बार में ही सही बिल प्रदर्शित होता, तो उन्हें बार-बार भुगतान करने की आवश्यकता नहीं पड़ती और उनका यह नुकसान नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि विभागीय तकनीकी खामी और बिल अपडेट में देरी की वजह से उन्हें <strong data-start="1715" data-end="1757">सात दिन में पांच बार बिल जमा करना पड़ा</strong>, बावजूद इसके बिजली आपूर्ति बाधित रही।</p>
<p data-start="1799" data-end="2014">उपभोक्ता ने आरोप लगाया कि विभाग की यह लापरवाही सीधे उनके आर्थिक नुकसान का कारण बनी। उन्होंने कहा, &#8220;मैंने समय पर सभी बिल जमा कर दिए थे, लेकिन तकनीकी खराबी की वजह से बिजली कट गई और मेरे व्यवसाय को गंभीर नुकसान हुआ।&#8221;</p>
<h4 data-start="2016" data-end="2045"><strong>नोटिस और कानूनी कार्रवाई</strong></h4>
<p data-start="2047" data-end="2419">इस मामले में अजय गुप्ता ने <strong data-start="2074" data-end="2104">अधिवक्ता केसरी नंदन तिवारी</strong> के माध्यम से बिजली विभाग के एक्सईएन को नोटिस भेजा है। नोटिस में दुकानदार ने 15 दिनों के भीतर <strong data-start="2198" data-end="2223">1.69 लाख रुपये मुआवजा</strong> देने की मांग की है। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि अगर तय समय में भुगतान नहीं किया गया, तो वह <strong data-start="2317" data-end="2355">उपभोक्ता फोरम में वाद दर्ज कराएंगे</strong>, जिसमें विभाग को नोटिस खर्च और अधिवक्ता फीस भी वहन करनी होगी।</p>
<p data-start="2421" data-end="2646">नोटिस में विशेष रूप से यह उल्लेख किया गया है कि दुकानदार को हुए नुकसान में केवल खराब हुए दूध, पनीर और खोये का ही नहीं, बल्कि समय की बर्बादी और बार-बार बिल जमा करने के कारण हुई मानसिक तनाव और अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी शामिल है।</p>
<h4 data-start="2648" data-end="2684"><strong>स्मार्ट मीटर और विभागीय खामियां</strong></h4>
<p data-start="2686" data-end="2938">स्मार्ट मीटर की व्यवस्था को आधुनिक तकनीक के तौर पर लागू किया गया है, ताकि बिजली का उपभोग और बिलिंग दोनों ऑनलाइन और सही समय पर हो सकें। लेकिन महाराजगंज के इस मामले ने यह स्पष्ट कर दिया कि तकनीकी खामियां कभी-कभी गंभीर आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती हैं।</p>
<p data-start="2940" data-end="3205">स्मार्ट मीटर में तकनीकी खराबी के कारण बकाया राशि बार-बार गलत दिखना और भुगतान प्रक्रिया में देरी ने उपभोक्ता की परेशानी को बढ़ा दिया। अजय गुप्ता का आरोप है कि विभाग का <strong data-start="3107" data-end="3123">ऑनलाइन सर्वर</strong> बार-बार फेल हो रहा था, जिससे वास्तविक बकाया और दिखाए जा रहे बिल में अंतर आ गया।</p>
<h4 data-start="3207" data-end="3243"><strong>दुकानदारों के लिए आर्थिक नुकसान</strong></h4>
<p data-start="3245" data-end="3560">चार दिन बिजली आपूर्ति न होने के कारण दुकानदार का <strong data-start="3294" data-end="3308">व्यवसाय ठप</strong> हो गया। दूध, पनीर और खोये जैसी जमे हुए या ताजगी बनाए रखने वाले उत्पाद खराब हो गए। इससे उनका सीधे तौर पर आर्थिक नुकसान हुआ, जो लाखों में मापा जा सकता है। दुकानदार का कहना है कि अगर विभाग ने समय रहते समस्या का समाधान किया होता, तो यह नुकसान नहीं होता।</p>
<h4 data-start="3562" data-end="3587"><strong>विभाग की प्रतिक्रिया</strong></h4>
<p data-start="3589" data-end="3881">हालांकि अभी तक बिजली विभाग की तरफ से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अधिकारी दंग हैं और नोटिस के बारे में विचार कर रहे हैं। यह मामला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है कि <strong data-start="3806" data-end="3878">तकनीकी खामियों और विलंब के कारण उपभोक्ताओं को नुकसान नहीं होना चाहिए</strong>।</p>
<h4 data-start="3883" data-end="3905"><strong>विशेषज्ञों की राय</strong></h4>
<p data-start="3907" data-end="4271">ऊर्जा और उपभोक्ता अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में उपभोक्ता को <strong data-start="3984" data-end="4001">कानूनी विकल्प</strong> उपलब्ध हैं। स्मार्ट मीटर तकनीक सही ढंग से काम न करने पर उपभोक्ता <strong data-start="4067" data-end="4085">नुकसान का दावा</strong> कर सकता है। अधिवक्ता केसरी नंदन तिवारी ने स्पष्ट किया कि नोटिस भेजना एक कानूनी प्रक्रिया है और अगर विभाग ने समय पर मुआवजा नहीं दिया, तो <strong data-start="4222" data-end="4268">उपभोक्ता फोरम में केस दायर करना उचित रहेगा</strong>।</p>
<p data-start="4273" data-end="4425">विशेषज्ञों के अनुसार, बिजली विभाग को चाहिए कि वह <strong data-start="4322" data-end="4357">सर्वर और मीटर की तकनीकी खामियों</strong> को तुरंत ठीक करे, ताकि भविष्य में ऐसे नुकसान की पुनरावृत्ति न हो।</p>
<h4 data-start="4427" data-end="4440"><strong>निष्कर्ष</strong></h4>
<p data-start="4442" data-end="4729">महराजगंज के इस मामले ने यह स्पष्ट कर दिया कि तकनीकी सुधार के बावजूद, विभागीय खामियां और देरी उपभोक्ताओं के लिए भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती हैं। अजय गुप्ता का कदम न केवल अपने नुकसान की भरपाई का है, बल्कि यह अन्य उपभोक्ताओं के लिए भी <strong data-start="4681" data-end="4713">सतर्कता और अधिकारों की लड़ाई</strong> का उदाहरण है।</p>
<p data-start="4731" data-end="4960">यदि बिजली विभाग ने नोटिस के अनुसार समय पर मुआवजा नहीं दिया, तो मामला <strong data-start="4800" data-end="4817">उपभोक्ता फोरम</strong> और उसके बाद <strong data-start="4830" data-end="4846">कानूनी लड़ाई</strong> तक पहुंच सकता है। यह घटना स्मार्ट मीटर प्रणाली और बिजली विभाग के कामकाज में सुधार की आवश्यकता को उजागर करती है।</p>
<p data-start="4962" data-end="5143">यह मामला पूरे जिले और राज्य के अन्य व्यापारियों के लिए भी चेतावनी के रूप में काम करेगा कि तकनीकी खामियों और भुगतान संबंधी त्रुटियों के खिलाफ वे अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>Gwalior उपभोक्ता आयोग ने कार डीलर को दोषी ठहराया, जबरन एक्सेसरीज के लिए वसूले पैसे लौटाने के आदेश</title>
		<link>https://swarajvani.com/gwalior-consumer-commission-orders-car-dealer/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Mar 2026 10:05:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Gwalior]]></category>
		<category><![CDATA[Car Dealer Refund]]></category>
		<category><![CDATA[consumer rights]]></category>
		<category><![CDATA[Forced Accessories]]></category>
		<category><![CDATA[Gwalior Consumer Commission]]></category>
		<category><![CDATA[Unfair Trade Practice]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://swarajvani.com/?p=314689</guid>

					<description><![CDATA[कार में जबरन एक्सेसरीज लगाकर वसूले पैसे: Gwalior उपभोक्ता आयोग ने डीलर को दोषी ठहराया,  Gwalior जिला उपभोक्ता आयोग ने हाल ही में कार खरीद में उपभोक्ता के प्रति अनुचित ... <a title="Gwalior उपभोक्ता आयोग ने कार डीलर को दोषी ठहराया, जबरन एक्सेसरीज के लिए वसूले पैसे लौटाने के आदेश" class="read-more" href="https://swarajvani.com/gwalior-consumer-commission-orders-car-dealer/" aria-label="Read more about Gwalior उपभोक्ता आयोग ने कार डीलर को दोषी ठहराया, जबरन एक्सेसरीज के लिए वसूले पैसे लौटाने के आदेश">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1 data-start="202" data-end="326"><strong data-start="202" data-end="324">कार में जबरन एक्सेसरीज लगाकर वसूले पैसे: Gwalior उपभोक्ता आयोग ने डीलर को दोषी ठहराया, </strong></h1>
<p data-start="328" data-end="716">Gwalior जिला उपभोक्ता आयोग ने हाल ही में कार खरीद में उपभोक्ता के प्रति अनुचित व्यवहार करने वाले कार डीलर को दोषी ठहराते हुए आदेश जारी किया है। आयोग ने कार डीलर को उपभोक्ता संगीता गुप्ता को कुल 15,912 रुपये लौटाने के साथ-साथ 2,000 रुपये प्रकरण व्यय देने का आदेश दिया है। यह निर्णय उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा और अनुचित व्यापार व्यवहार को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<h2 data-start="718" data-end="742"><strong data-start="718" data-end="740">मामले का पृष्ठभूमि</strong></h2>
<p data-start="744" data-end="1073">उपभोक्ता संगीता गुप्ता ने 21 सितंबर 2022 को ग्वालियर में एक कार डीलर से संपर्क किया था। उन्होंने स्पष्ट रूप से यह बताया कि वह अपनी नई कार में किसी भी प्रकार की अतिरिक्त एक्सेसरीज नहीं लगवाना चाहती हैं। उनका मकसद केवल कार खरीदना था और उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि वे किसी भी अनावश्यक अतिरिक्त शुल्क का भुगतान नहीं करेंगी।</p>
<p data-start="1075" data-end="1503">लेकिन, 28 सितंबर 2022 को जब कार की डिलीवरी दी गई, तब कार में पहले से ही एक्सेसरीज लगी हुई थीं। डीलर ने उपभोक्ता से लगभग 23,000 रुपये की अतिरिक्त राशि वसूलने का प्रयास किया। जब उपभोक्ता ने इसका विरोध किया, तब डीलर और उसके कर्मचारियों ने एक्सेसरीज को अनिवार्य बताकर दबाव डालना शुरू किया। उपभोक्ता को मजबूर होकर यह राशि चुकानी पड़ी। इस प्रकार उपभोक्ता के अधिकारों का उल्लंघन हुआ और मामला ग्वालियर जिला उपभोक्ता आयोग तक पहुँच गया।</p>
<h3 data-start="1505" data-end="1531"><strong data-start="1505" data-end="1529">उपभोक्ता की कार्रवाई</strong></h3>
<p data-start="1533" data-end="1956">उपभोक्ता ने 1 अक्टूबर 2022 को अपने अधिवक्ता के माध्यम से डीलर को नोटिस भेजा। नोटिस में उन्होंने स्पष्ट किया कि गाड़ी में अतिरिक्त एक्सेसरीज की मांग और भुगतान अनुचित है। इसके बावजूद, डीलर द्वारा कोई समाधान नहीं प्रस्तुत किया गया। ऐसे में उपभोक्ता ने उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया। उनका तर्क था कि डीलर ने उन्हें उनकी सहमति के बिना अतिरिक्त खर्चे के लिए मजबूर किया और यह कार्य अनुचित व्यापार व्यवहार के अंतर्गत आता है।</p>
<h3 data-start="1958" data-end="1976"><strong data-start="1958" data-end="1974">डीलर का पक्ष</strong></h3>
<p data-start="1978" data-end="2373">कार डीलर ने अपनी जवाबी याचिका में कहा कि वाहन में एक्सेसरीज पहले से ही लगी थीं और उपभोक्ता ने पूरी जानकारी के साथ भुगतान किया। डीलर ने यह भी दावा किया कि एक्सेसरीज खरीदना अनिवार्य नहीं था और ग्राहक की इच्छा पर निर्भर करता था। इसके अतिरिक्त, डीलर ने यह बताया कि उन्होंने 5,912 रुपये वापस करने के लिए पहले से ही चेक तैयार किया था। उनका तर्क था कि उपभोक्ता ने स्वेच्छा से गाड़ी ली और भुगतान किया।</p>
<h3 data-start="2375" data-end="2395"><strong data-start="2375" data-end="2393">आयोग का निर्णय</strong></h3>
<p data-start="2397" data-end="2833">सुनवाई के दौरान आयोग ने मामले की बारीकी से जांच की। आयोग ने पाया कि डीलर यह साबित नहीं कर सका कि वाहन में एक्सेसरीज कंपनी द्वारा पहले से लगी थीं। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया कि उपभोक्ता पर एक्सेसरीज खरीदने का दबाव बनाया गया और अतिरिक्त राशि वसूली गई। यह व्यवहार <strong data-start="2661" data-end="2687">अनुचित व्यापार व्यवहार</strong> के अंतर्गत आता है। आयोग ने डीलर को दोषी ठहराते हुए आदेश दिया कि उपभोक्ता को कुल 15,912 रुपये लौटाए जाएं और 2,000 रुपये प्रकरण व्यय भी दिया जाए।</p>
<p data-start="2835" data-end="2995">इस निर्णय से यह संदेश स्पष्ट हुआ कि उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना अत्यंत आवश्यक है और जबरन कोई भी सेवा या सामान बेचने का प्रयास अनुचित और गैरकानूनी है।</p>
<h3 data-start="2997" data-end="3033"><strong data-start="2997" data-end="3031">उपभोक्ता अधिकार और कानूनी पहलू</strong></h3>
<p data-start="3035" data-end="3141">भारत में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत उपभोक्ताओं को कई अधिकार प्राप्त हैं। इनमें से प्रमुख हैं:</p>
<ol data-start="3143" data-end="3679">
<li data-section-id="w4hh89" data-start="3143" data-end="3241"><strong data-start="3146" data-end="3168">सुरक्षा का अधिकार:</strong> उपभोक्ता किसी भी वस्तु या सेवा से उत्पन्न खतरे से सुरक्षित रह सकता है।</li>
<li data-section-id="1cdjk7" data-start="3242" data-end="3333"><strong data-start="3245" data-end="3267">जानकारी का अधिकार:</strong> उपभोक्ता को खरीदी गई वस्तु या सेवा की पूरी जानकारी मिलनी चाहिए।</li>
<li data-section-id="1f6m8w2" data-start="3334" data-end="3451"><strong data-start="3337" data-end="3358">विकल्प का अधिकार:</strong> उपभोक्ता को अपनी इच्छानुसार किसी भी वस्तु या सेवा को खरीदने या अस्वीकार करने का अधिकार है।</li>
<li data-section-id="14wfhl9" data-start="3452" data-end="3563"><strong data-start="3455" data-end="3493">अनुचित व्यापार व्यवहार से सुरक्षा:</strong> कोई भी व्यवसायी जबरन वस्तु या सेवा बेचने के लिए दबाव नहीं डाल सकता।</li>
<li data-section-id="1xxrbby" data-start="3564" data-end="3679"><strong data-start="3567" data-end="3584">हानि का दावा:</strong> यदि उपभोक्ता को किसी भी तरह की हानि होती है, तो वह कानूनी कार्रवाई करके मुआवजा मांग सकता है।</li>
</ol>
<p data-start="3681" data-end="3844">इस मामले में आयोग ने स्पष्ट किया कि जबरन एक्सेसरीज लगाने और राशि वसूलने का प्रयास उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है और यह अनुचित व्यापार व्यवहार के अंतर्गत आता है।</p>
<h3 data-start="3846" data-end="3876"><strong data-start="3846" data-end="3874">व्यवसायियों के लिए संदेश</strong></h3>
<p data-start="3878" data-end="4155">इस निर्णय के माध्यम से यह संदेश भी गया कि व्यवसायियों को उपभोक्ताओं के अधिकारों का सम्मान करना होगा। कोई भी व्यापारिक निर्णय उपभोक्ता की सहमति के बिना नहीं लिया जा सकता। यदि उपभोक्ता असहमति जताता है, तो व्यवसायी को उस पर दबाव बनाने या अतिरिक्त शुल्क वसूलने का अधिकार नहीं है।</p>
<h3 data-start="4157" data-end="4192"><strong data-start="4157" data-end="4190">उपभोक्ता जागरूकता की आवश्यकता</strong></h3>
<p data-start="4194" data-end="4476">यह मामला उपभोक्ताओं के लिए भी चेतावनी का काम करता है। उपभोक्ताओं को चाहिए कि वे अपनी खरीदारी के दौरान पूरी जानकारी लें, किसी भी अतिरिक्त शुल्क या सेवाओं को केवल अपनी सहमति से स्वीकार करें। यदि किसी प्रकार का दबाव बनाया जाए, तो तत्काल उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।</p>
<h4 data-start="4478" data-end="4492"><strong data-start="4478" data-end="4490">निष्कर्ष</strong></h4>
<p data-start="4494" data-end="4876">ग्वालियर उपभोक्ता आयोग का यह आदेश उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा और अनुचित व्यापार व्यवहार को रोकने में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल उपभोक्ता संगीता गुप्ता के लिए न्याय सुनिश्चित करता है, बल्कि अन्य उपभोक्ताओं और व्यवसायियों के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह निर्णय दर्शाता है कि कानूनी व्यवस्था उपभोक्ताओं के पक्ष में है और व्यवसायियों को अनुचित दबाव नहीं बनाने दिया जाएगा।</p>
<p data-start="4878" data-end="5169">इस प्रकार, उपभोक्ता आयोग ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत में उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा प्राथमिकता है और किसी भी व्यवसायी को जबरन वस्तु या सेवा बेचने का अधिकार नहीं है। उपभोक्ताओं को भी अपनी जागरूकता बढ़ानी चाहिए और किसी भी अनुचित व्यवहार के खिलाफ कानूनी कदम उठाने से हिचकिचाना नहीं चाहिए।</p>
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		<title>Rewa: खिड़की खरीद में वजन अंतर की शिकायत का भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने किया सफल समाधान</title>
		<link>https://swarajvani.com/rewa-indian-human-rights-coperative-trust-resolve/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 09:02:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[MADHAY PRADESH NEWS]]></category>
		<category><![CDATA[consumer rights]]></category>
		<category><![CDATA[customer justice]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Human Rights Cooperative Trust]]></category>
		<category><![CDATA[Rewa]]></category>
		<category><![CDATA[v]]></category>
		<category><![CDATA[window weight discrepancy]]></category>
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					<description><![CDATA[ग्राहक को मिला न्याय, ट्रस्ट की त्वरित कार्रवाई से विक्रेता ने लौटाई अतिरिक्त राशि Rewa, MP : भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने Rewa जिले में खिड़की खरीद के दौरान ... <a title="Rewa: खिड़की खरीद में वजन अंतर की शिकायत का भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने किया सफल समाधान" class="read-more" href="https://swarajvani.com/rewa-indian-human-rights-coperative-trust-resolve/" aria-label="Read more about Rewa: खिड़की खरीद में वजन अंतर की शिकायत का भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने किया सफल समाधान">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1 data-start="196" data-end="284"><strong data-start="196" data-end="282">ग्राहक को मिला न्याय, ट्रस्ट की त्वरित कार्रवाई से विक्रेता ने लौटाई अतिरिक्त राशि</strong></h1>
<p><strong>Rewa, MP :</strong> भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने Rewa जिले में खिड़की खरीद के दौरान उत्पन्न हुए वजन अंतर की शिकायत का सफल समाधान किया है। यह मामला स्थानीय ग्राहकों के लिए उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा और मानव अधिकारों के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है।</p>
<p>इस मामले की शुरुआत तब हुई जब रीवा जिले के एक ग्राहक ने ट्रस्ट को शिकायत भेजी। शिकायत में बताया गया कि उन्होंने एक खिड़की खरीदी थी, जिसका वजन मशीन द्वारा मापने पर अंतर पाया गया। एक मशीन ने <strong>24 किलो 100 ग्राम</strong> और दूसरी मशीन ने <strong>21 किलो 800 ग्राम</strong> का वजन दर्ज किया। इस अंतर ने ग्राहक में संदेह पैदा कर दिया और उन्होंने तुरंत <strong>भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट</strong> से संपर्क किया।</p>
<h2><strong>शिकायत का तुरंत समाधान</strong></h2>
<p>शिकायत मिलने के बाद ट्रस्ट की रीवा जिला अध्यक्ष <strong>श्रीमती अलका मिश्रा</strong> ने मामले की त्वरित जांच की। श्रीमती मिश्रा तुरंत मौके पर पहुंचीं और दुकान में उपलब्ध मशीनों और उपकरणों का परीक्षण किया। उन्होंने विक्रेता से विवरण और तकनीकी जानकारी ली।</p>
<p>जांच में यह पाया गया कि दुकान की <strong>वजन मशीन में तकनीकी खराबी</strong> थी। इसके कारण वजन सही तरीके से नहीं दिख रहा था। विक्रेता ने अपनी गलती स्वीकार की और ग्राहक से <strong>अतिरिक्त ली गई राशि तुरंत वापस</strong> कर दी।</p>
<p>इस प्रकार, <strong>भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट</strong> के सक्रिय हस्तक्षेप के कारण मामला <strong>शांतिपूर्ण और प्रभावी तरीके से हल</strong> हो गया। ग्राहक को न्याय मिला और यह सुनिश्चित हुआ कि उनके अधिकारों की रक्षा की गई है।</p>
<h3><strong>ट्रस्ट का उद्देश्य और दृष्टिकोण</strong></h3>
<p>इस अवसर पर ट्रस्ट के <strong>राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह यादव</strong> ने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल <strong>जनजागरूकता</strong> फैलाना ही नहीं है, बल्कि <strong>व्यवहारिक स्तर पर मानव अधिकारों और उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा करना</strong> भी है। उन्होंने कहा कि रीवा इकाई द्वारा किया गया यह त्वरित समाधान संगठन की <strong>सक्रियता और जनसेवा भावना</strong> का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।</p>
<p>सुनील सिंह यादव ने आगे कहा कि भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट का मिशन है कि हर नागरिक, चाहे वह किसी भी आर्थिक या सामाजिक पृष्ठभूमि से क्यों न हो, <strong>अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो और उन्हें सुरक्षित रख सके।</strong> उन्होंने कहा कि संगठन यह सुनिश्चित करता है कि सभी शिकायतें समयबद्ध और निष्पक्ष तरीके से सुनी जाएँ और उनका समाधान किया जाए।</p>
<h4><strong>Rewa इकाई की सक्रियता</strong></h4>
<p>रीवा जिला अध्यक्ष <strong>श्रीमती अलका मिश्रा</strong> ने कहा कि शिकायत मिलने के तुरंत बाद <strong>मौके पर जाकर जांच करना और समस्या का वास्तविक कारण जानना</strong> उनकी प्राथमिकता थी। उन्होंने बताया कि ग्राहक और विक्रेता दोनों से बातचीत के बाद ही सच्चाई सामने आई।</p>
<p>श्रीमती मिश्रा ने कहा कि विक्रेता ने मशीन की तकनीकी खराबी स्वीकार की और <strong>अतिरिक्त राशि ग्राहक को लौटाई।</strong> इस मामले ने यह भी दर्शाया कि <strong>सक्रिय निगरानी और त्वरित हस्तक्षेप</strong> से उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की जा सकती है।</p>
<h5><strong>संगठन के अन्य पदाधिकारियों का दृष्टिकोण</strong></h5>
<p>इस अवसर पर संगठन के अन्य पदाधिकारी—<strong>शिवम तिवारी, कृष्णा यादव, डॉ. प्रेम कुमार वैद्य, युवराज सिंह राठौर, मनीष गुप्ता, जीवनलाल जैन, रामवेश सिंह कुशवाह</strong>—ने संयुक्त रूप से बयान दिया कि भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट <strong>देशभर में आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध</strong> है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल शिकायतों को दर्ज करना नहीं है, बल्कि <strong>समस्या का त्वरित और न्यायपूर्ण समाधान करना</strong> भी है। इसके लिए ट्रस्ट <strong>स्थानीय इकाइयों और पदाधिकारियों को सक्रिय रखता है</strong>, ताकि नागरिकों को समय पर सहायता मिल सके।</p>
<h6><strong>उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा</strong></h6>
<p>भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट का यह उदाहरण यह दर्शाता है कि <strong>साधारण नागरिक भी अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज़ उठा सकते हैं।</strong></p>
<ul>
<li>खिड़की के वजन में अंतर जैसे मामूली मुद्दों को नजरअंदाज करना कभी-कभी बड़े अन्याय की ओर ले जा सकता है।</li>
<li>उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाता है बल्कि <strong>मानसिक और सामाजिक विश्वास को भी प्रभावित करता है।</strong></li>
<li>ट्रस्ट का यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि <strong>हर नागरिक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और सतर्क रहे।</strong></li>
</ul>
<p>संगठन ने सभी नागरिकों से अपील की कि अगर वे <strong>किसी भी प्रकार के अन्याय, शोषण या उपभोक्ता अधिकार उल्लंघन</strong> का शिकार हों, तो तुरंत ट्रस्ट से संपर्क करें। संगठन यह सुनिश्चित करता है कि <strong>समयबद्ध और प्रभावी सहायता</strong> प्रदान की जाएगी।</p>
<h3><strong>निष्कर्ष</strong></h3>
<p>रीवा में खिड़की के वजन अंतर का यह मामला दर्शाता है कि <strong>सक्रिय निगरानी, त्वरित कार्रवाई और जागरूकता</strong> से आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की जा सकती है।</p>
<ul>
<li>ट्रस्ट की सक्रियता और स्थानीय पदाधिकारियों की तत्परता ने यह साबित किया कि <strong>संगठन केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि व्यवहारिक रूप से कार्यशील</strong> है।</li>
<li>ग्राहक को न्याय मिला और विक्रेता ने अपनी गलती स्वीकार की, जिससे मामला <strong>शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा।</strong></li>
<li>यह उदाहरण अन्य नागरिकों के लिए भी प्रेरणा है कि <strong>अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाएँ और सही माध्यम से न्याय प्राप्त करें।</strong></li>
</ul>
<p>भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने यह संदेश दिया कि <strong>संगठन का मुख्य उद्देश्य है मानव अधिकारों और उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा</strong>, और यह सभी नागरिकों के लिए हमेशा <strong>सुलभ और मददगार</strong> रहेगा।</p>
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