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Maharajganj दुकानदार ने स्मार्ट मीटर गड़बड़ी पर बिजली विभाग को 1.69 लाख का नोटिस भेजा

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Published On: 6 April 2026
Maharajganj

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Maharajganj के दुकानदार ने बिजली विभाग को भेजा 1.69 लाख का नोटिस, स्मार्ट मीटर की गड़बड़ी से हुआ भारी नुकसान

उत्तर प्रदेश के Maharajganj जिले में बिजली विभाग और एक दुकानदार के बीच विवाद ने नया रूप ले लिया है। जिले के धनेवा-धनेई चौराहे पर स्थित दुकानदार अजय गुप्ता ने बिजली विभाग को कुल 1.69 लाख रुपये का नोटिस भेजा है। इस विवाद की जड़ स्मार्ट मीटर की गड़बड़ी और विभागीय तकनीकी खामी में छिपी है, जिसने दुकानदार को भारी आर्थिक नुकसान उठाने पर मजबूर कर दिया।

मामला कैसे शुरू हुआ?

अजय गुप्ता के अनुसार, उनकी दुकान पर स्मार्ट मीटर लगा हुआ है, जो बिजली की खपत को ऑनलाइन रजिस्टर करता है और बिलिंग के लिए विभागीय सर्वर से जुड़ा रहता है। 23 मार्च 2026 को वह अपने दुकान के बिजली बिल का भुगतान करने गए, लेकिन सर्वर खराब होने की वजह से उनका भुगतान नहीं हो सका। तकनीकी खामी के बावजूद, अगले दिन 24 मार्च को उन्होंने वेबसाइट पर दिख रहे 8618 रुपये का भुगतान किया।

इसके बावजूद, 26 मार्च को अचानक उनकी दुकान पर बिजली आपूर्ति बंद हो गई। दुकानदार ने बिजली विभाग से संपर्क किया, तो उन्हें बताया गया कि उनके खाते में 5444 रुपये बकाया है। इसे उन्होंने 29 मार्च को जमा किया।

हालांकि, मीटर बार-बार माइनस बकाया दिखा रहा था। इसके कारण उन्हें 1500 रुपये और फिर 500 रुपये अतिरिक्त जमा करने पड़े। कुल मिलाकर चार दिन बिजली आपूर्ति बाधित रहने से उनके दुकान में रखा दूध, पनीर और खोया खराब हो गया, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ।

उपभोक्ता का आरोप

अजय गुप्ता का कहना है कि अगर पहली बार में ही सही बिल प्रदर्शित होता, तो उन्हें बार-बार भुगतान करने की आवश्यकता नहीं पड़ती और उनका यह नुकसान नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि विभागीय तकनीकी खामी और बिल अपडेट में देरी की वजह से उन्हें सात दिन में पांच बार बिल जमा करना पड़ा, बावजूद इसके बिजली आपूर्ति बाधित रही।

उपभोक्ता ने आरोप लगाया कि विभाग की यह लापरवाही सीधे उनके आर्थिक नुकसान का कारण बनी। उन्होंने कहा, “मैंने समय पर सभी बिल जमा कर दिए थे, लेकिन तकनीकी खराबी की वजह से बिजली कट गई और मेरे व्यवसाय को गंभीर नुकसान हुआ।”

नोटिस और कानूनी कार्रवाई

इस मामले में अजय गुप्ता ने अधिवक्ता केसरी नंदन तिवारी के माध्यम से बिजली विभाग के एक्सईएन को नोटिस भेजा है। नोटिस में दुकानदार ने 15 दिनों के भीतर 1.69 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की है। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि अगर तय समय में भुगतान नहीं किया गया, तो वह उपभोक्ता फोरम में वाद दर्ज कराएंगे, जिसमें विभाग को नोटिस खर्च और अधिवक्ता फीस भी वहन करनी होगी।

नोटिस में विशेष रूप से यह उल्लेख किया गया है कि दुकानदार को हुए नुकसान में केवल खराब हुए दूध, पनीर और खोये का ही नहीं, बल्कि समय की बर्बादी और बार-बार बिल जमा करने के कारण हुई मानसिक तनाव और अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी शामिल है।

स्मार्ट मीटर और विभागीय खामियां

स्मार्ट मीटर की व्यवस्था को आधुनिक तकनीक के तौर पर लागू किया गया है, ताकि बिजली का उपभोग और बिलिंग दोनों ऑनलाइन और सही समय पर हो सकें। लेकिन महाराजगंज के इस मामले ने यह स्पष्ट कर दिया कि तकनीकी खामियां कभी-कभी गंभीर आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती हैं।

स्मार्ट मीटर में तकनीकी खराबी के कारण बकाया राशि बार-बार गलत दिखना और भुगतान प्रक्रिया में देरी ने उपभोक्ता की परेशानी को बढ़ा दिया। अजय गुप्ता का आरोप है कि विभाग का ऑनलाइन सर्वर बार-बार फेल हो रहा था, जिससे वास्तविक बकाया और दिखाए जा रहे बिल में अंतर आ गया।

दुकानदारों के लिए आर्थिक नुकसान

चार दिन बिजली आपूर्ति न होने के कारण दुकानदार का व्यवसाय ठप हो गया। दूध, पनीर और खोये जैसी जमे हुए या ताजगी बनाए रखने वाले उत्पाद खराब हो गए। इससे उनका सीधे तौर पर आर्थिक नुकसान हुआ, जो लाखों में मापा जा सकता है। दुकानदार का कहना है कि अगर विभाग ने समय रहते समस्या का समाधान किया होता, तो यह नुकसान नहीं होता।

विभाग की प्रतिक्रिया

हालांकि अभी तक बिजली विभाग की तरफ से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अधिकारी दंग हैं और नोटिस के बारे में विचार कर रहे हैं। यह मामला प्रशासन और विभागीय अधिकारियों के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है कि तकनीकी खामियों और विलंब के कारण उपभोक्ताओं को नुकसान नहीं होना चाहिए।

विशेषज्ञों की राय

ऊर्जा और उपभोक्ता अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में उपभोक्ता को कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं। स्मार्ट मीटर तकनीक सही ढंग से काम न करने पर उपभोक्ता नुकसान का दावा कर सकता है। अधिवक्ता केसरी नंदन तिवारी ने स्पष्ट किया कि नोटिस भेजना एक कानूनी प्रक्रिया है और अगर विभाग ने समय पर मुआवजा नहीं दिया, तो उपभोक्ता फोरम में केस दायर करना उचित रहेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, बिजली विभाग को चाहिए कि वह सर्वर और मीटर की तकनीकी खामियों को तुरंत ठीक करे, ताकि भविष्य में ऐसे नुकसान की पुनरावृत्ति न हो।

निष्कर्ष

महराजगंज के इस मामले ने यह स्पष्ट कर दिया कि तकनीकी सुधार के बावजूद, विभागीय खामियां और देरी उपभोक्ताओं के लिए भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती हैं। अजय गुप्ता का कदम न केवल अपने नुकसान की भरपाई का है, बल्कि यह अन्य उपभोक्ताओं के लिए भी सतर्कता और अधिकारों की लड़ाई का उदाहरण है।

यदि बिजली विभाग ने नोटिस के अनुसार समय पर मुआवजा नहीं दिया, तो मामला उपभोक्ता फोरम और उसके बाद कानूनी लड़ाई तक पहुंच सकता है। यह घटना स्मार्ट मीटर प्रणाली और बिजली विभाग के कामकाज में सुधार की आवश्यकता को उजागर करती है।

यह मामला पूरे जिले और राज्य के अन्य व्यापारियों के लिए भी चेतावनी के रूप में काम करेगा कि तकनीकी खामियों और भुगतान संबंधी त्रुटियों के खिलाफ वे अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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