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	<title>27 Percent Reservation &#8211; Swaraj Vani</title>
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	<title>27 Percent Reservation &#8211; Swaraj Vani</title>
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		<title>एमपी में OBC आरक्षण पर बड़ा फैसला: होल्ड 13% पदों पर अनारक्षित सूची से नियुक्ति के निर्देश की रिपोर्ट</title>
		<link>https://swarajvani.com/mp-obc-reservation-high-court-reportedly-orders-appointments-to-withheld-13-posts-from-list/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Palak Rajput]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 09 Oct 2026 11:20:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[JABALPUR]]></category>
		<category><![CDATA[27 Percent Reservation]]></category>
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		<category><![CDATA[Jabalpur High Court]]></category>
		<category><![CDATA[Madhya Pradesh News]]></category>
		<category><![CDATA[OBC Quota]]></category>
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					<description><![CDATA[एमपी में OBC आरक्षण पर बड़ा फैसला: होल्ड 13% पदों पर अनारक्षित सूची से नियुक्ति के निर्देश की रिपोर्ट जबलपुर। मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण और सरकारी भर्तियों में रोके गए ... <a title="एमपी में OBC आरक्षण पर बड़ा फैसला: होल्ड 13% पदों पर अनारक्षित सूची से नियुक्ति के निर्देश की रिपोर्ट" class="read-more" href="https://swarajvani.com/mp-obc-reservation-high-court-reportedly-orders-appointments-to-withheld-13-posts-from-list/" aria-label="Read more about एमपी में OBC आरक्षण पर बड़ा फैसला: होल्ड 13% पदों पर अनारक्षित सूची से नियुक्ति के निर्देश की रिपोर्ट">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1 data-pm-slice="1 1 []"><strong>एमपी में OBC आरक्षण पर बड़ा फैसला: होल्ड 13% पदों पर अनारक्षित सूची से नियुक्ति के निर्देश की रिपोर्ट</strong></h1>
<p><strong>जबलपुर।</strong> मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण और सरकारी भर्तियों में रोके गए 13 फीसदी पदों को लेकर महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी करने वाले संशोधन को निरस्त करते हुए विवादित पदों पर अनारक्षित सूची के पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट में आरक्षण की 50 फीसदी सीमा को फैसले का प्रमुख आधार बताया गया है। हालांकि, विस्तृत लिखित निर्णय की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए इसके क्रियान्वयन और अलग-अलग भर्तियों पर प्रभाव को आधिकारिक आदेश के आधार पर समझना आवश्यक होगा।</p>
<h2><strong>वर्ष 2019 में बढ़ाया गया था ओबीसी आरक्षण</strong></h2>
<p>मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण का विवाद वर्ष 2019 में शुरू हुआ था। तत्कालीन राज्य सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण 14 फीसदी से बढ़ाकर 27 फीसदी करने का प्रावधान किया था। पहले अध्यादेश और बाद में संशोधन कानून के माध्यम से यह बदलाव किया गया।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट के 19 फरवरी 2026 के आदेश में इस घटनाक्रम का विवरण दर्ज है। इसके अनुसार, आरक्षण बढ़ाने के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान बढ़े हुए आरक्षण को लागू करने पर अंतरिम प्रतिबंध लगाए गए थे। बाद के भर्ती विज्ञापनों और संशोधित निर्देशों को लेकर भी न्यायिक विवाद सामने आए।</p>
<h2><strong>क्यों रोके गए थे 13 फीसदी पद?</strong></h2>
<p>ओबीसी आरक्षण की पुरानी और बढ़ी हुई सीमा के बीच 13 प्रतिशत अंकों का अंतर है। विवाद के दौरान इसी अतिरिक्त हिस्से से संबंधित पदों पर नियुक्तियों को लेकर अनिश्चितता बनी रही। भर्ती प्रक्रियाओं को पूरी तरह रोकने के बजाय निर्विवाद हिस्से में नियुक्तियां आगे बढ़ाने की व्यवस्था अपनाई गई।</p>
<p>हाईकोर्ट के फरवरी 2023 के आदेश में दर्ज व्यवस्था के अनुसार, 87 फीसदी पदों पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी थी। शेष 13 फीसदी रिक्तियों के लिए ओबीसी और अनारक्षित अभ्यर्थियों की अलग-अलग चयन सूचियां तैयार करने का प्रावधान था। न्यायिक विवाद के परिणाम के आधार पर संबंधित सूची लागू की जानी थी।</p>
<h2><strong>अनारक्षित सूची से नियुक्तियों की खबर</strong></h2>
<p>ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने होल्ड पदों पर अनारक्षित सूची के पात्र उम्मीदवारों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए हैं। यह खबर उन अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनकी चयन प्रक्रिया का विवादित हिस्सा लंबे समय से लंबित है।</p>
<p>हालांकि, निर्देश की खबर सामने आने और वास्तविक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बीच विभागीय कार्रवाई आवश्यक होगी। संबंधित भर्ती संस्थाओं को आदेश के अनुसार चयन सूचियों और पात्रता का परीक्षण करना होगा। इसके बाद ही अभ्यर्थियों की व्यक्तिगत स्थिति स्पष्ट होगी। केवल परीक्षा उत्तीर्ण करना या किसी सूची में नाम होना अपने आप तत्काल नियुक्ति की पुष्टि नहीं है।</p>
<h2><strong>50 फीसदी सीमा पर केंद्रित रहा विवाद</strong></h2>
<p>आरक्षण की 50 फीसदी सीमा इस मामले का महत्वपूर्ण प्रश्न रही है। प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है कि अदालत ने इस सीमा से आगे जाने के लिए आवश्यक परिस्थितियों और सरकार की ओर से प्रस्तुत आधारों का परीक्षण किया।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़े हुए आरक्षण के समर्थन में दिए गए तथ्यों को पर्याप्त नहीं माना गया। आरक्षण संबंधी निर्णय में किसी वर्ग की जनसंख्या के साथ सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व जैसे पहलुओं पर भी चर्चा हुई। न्यायालय के निष्कर्षों और उनके कानूनी संदर्भ को पूरी तरह समझने के लिए विस्तृत निर्णय महत्वपूर्ण रहेगा।</p>
<h2><strong>सभी भर्तियों की स्थिति एक साथ तय नहीं मानें</strong></h2>
<p>अलग-अलग सरकारी भर्तियों के विज्ञापन, परिणाम और चयन प्रक्रिया की स्थिति भिन्न हो सकती है। कुछ मामलों में दस्तावेज सत्यापन पूरा हो चुका होगा, जबकि अन्य में परिणाम या चयन सूची से संबंधित कार्रवाई बाकी हो सकती है।</p>
<p>इसलिए अभ्यर्थियों को किसी दूसरी परीक्षा की सूचना के आधार पर अपनी नियुक्ति का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। आदेश किन भर्ती प्रक्रियाओं पर लागू होता है और उनके लिए क्या निर्देश दिए गए हैं, यह संबंधित संस्था की आधिकारिक सूचना से स्पष्ट होगा। भर्ती वर्ष, पद और चयन सूची का सही विवरण देखना जरूरी है।</p>
<h2><strong>अभ्यर्थियों के लिए आधिकारिक सूचना अहम</strong></h2>
<p>प्रभावित उम्मीदवारों को अपनी भर्ती संस्था की वेबसाइट पर परिणाम और नियुक्ति संबंधी सूचनाएं देखनी चाहिए। आवेदन क्रमांक, परीक्षा परिणाम, चयन सूची और दस्तावेज सत्यापन से जुड़े प्रमाण सुरक्षित रखना उपयोगी होगा।</p>
<p>यदि कोई संशोधित सूची जारी होती है, तो उसमें अपना नाम और श्रेणी संबंधी विवरण ध्यान से जांचें। सोशल मीडिया पर मिलने वाले संदेश को आधिकारिक आदेश मानने से पहले उसकी पुष्टि करें। नियुक्ति के लिए आवश्यक दस्तावेज या निर्धारित समय-सीमा की जानकारी संबंधित विभाग की सूचना से ही लें।</p>
<h2><strong>लिखित निर्णय से स्पष्ट होगा अगला चरण</strong></h2>
<p>ओबीसी आरक्षण का विवाद राज्य की सरकारी भर्तियों और अभ्यर्थियों की प्रतीक्षा से जुड़ा रहा है। ताजा खबर ने होल्ड पदों की प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना सामने रखी है। फिर भी नियुक्तियों का पूरा दायरा और लागू शर्तें लिखित आदेश तथा भर्ती संस्थाओं की कार्रवाई से तय होंगी।</p>
<p>फिलहाल अभ्यर्थियों के लिए अपनी चयन सूची की स्थिति और आगामी आधिकारिक निर्देश सबसे महत्वपूर्ण हैं। इनके सामने आने पर स्पष्ट होगा कि संबंधित पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ाई जाएगी।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>MP :  OBC आरक्षण केस में Supreme Court का बड़ा फैसला, 52 मामले हाई कोर्ट ट्रांसफर</title>
		<link>https://swarajvani.com/supreme-court-transfers-obc-reservation-k/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 30 Mar 2026 11:05:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[27 Percent Reservation]]></category>
		<category><![CDATA[High Court]]></category>
		<category><![CDATA[India News]]></category>
		<category><![CDATA[Madhya Pradesh]]></category>
		<category><![CDATA[OBC Reservation]]></category>
		<category><![CDATA[Reservation Policy]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Court]]></category>
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					<description><![CDATA[Supreme Court of India ने मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से जुड़े लंबे समय से लंबित मामलों में एक अहम आदेश जारी किया है, जिससे अब इस पूरे ... <a title="MP :  OBC आरक्षण केस में Supreme Court का बड़ा फैसला, 52 मामले हाई कोर्ट ट्रांसफर" class="read-more" href="https://swarajvani.com/supreme-court-transfers-obc-reservation-k/" aria-label="Read more about MP :  OBC आरक्षण केस में Supreme Court का बड़ा फैसला, 52 मामले हाई कोर्ट ट्रांसफर">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p data-start="99" data-end="432"><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Supreme Court of India</span></span> ने मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से जुड़े लंबे समय से लंबित मामलों में एक अहम आदेश जारी किया है, जिससे अब इस पूरे विवाद की सुनवाई की दिशा बदल गई है। कोर्ट ने कई मामलों को वापस <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Madhya Pradesh High Court</span></span> भेजते हुए स्पष्ट किया है कि अब इन पर अंतिम बहस हाई कोर्ट में ही होगी।</p>
<p data-start="434" data-end="636">इस आदेश के बाद प्रदेश में ओबीसी आरक्षण से जुड़े कानूनी विवाद के जल्द निपटारे की उम्मीद बढ़ गई है। दरअसल, यह मामला लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के बीच प्रक्रिया संबंधी उलझनों में फंसा हुआ था।</p>
<h2 data-section-id="16u3kv5" data-start="638" data-end="677"><strong>क्या है Supreme Court का नया आदेश</strong></h2>
<p data-start="678" data-end="949">सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया आदेश में दो विशेष अनुमति याचिकाओं (SLP) को हाई कोर्ट से रिकॉल कर लिया है। इसके साथ ही 52 ऐसे मामलों को, जो पहले सुप्रीम कोर्ट में लंबित थे लेकिन ट्रांसफर आदेश में शामिल नहीं हो पाए थे, अब औपचारिक रूप से हाई कोर्ट को ट्रांसफर कर दिया गया है।</p>
<p data-start="951" data-end="1144">इस फैसले के बाद अब ओबीसी आरक्षण से जुड़े सभी प्रमुख मामले एक ही मंच यानी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुने जाएंगे। इससे सुनवाई की प्रक्रिया में एकरूपता आएगी और निर्णय जल्द आने की संभावना बढ़ेगी।</p>
<h3 data-section-id="1ct4v94" data-start="1146" data-end="1176"><strong>पहले क्यों फंसा था मामला</strong></h3>
<p data-start="1177" data-end="1420">वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और विनायक प्रसाद शाह के अनुसार, ओबीसी आरक्षण से जुड़े सभी मामलों को पहले मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था। ये मामले सुप्रीम कोर्ट की दो अलग-अलग खंडपीठों के समक्ष लंबित थे।</p>
<p data-start="1422" data-end="1622">हालांकि, 19 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इनमें से कई मामलों को वापस हाई कोर्ट भेजने का आदेश दिया था। लेकिन उस आदेश में कुछ मामले शामिल नहीं हो पाए थे, जिससे कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही थी।</p>
<h3 data-section-id="fpjub8" data-start="1624" data-end="1661"><strong>रिव्यू याचिका के बाद बदला फैसला</strong></h3>
<p data-start="1662" data-end="1907">इस स्थिति को सुधारने के लिए ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से रिव्यू याचिका दायर की गई थी। अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने इस याचिका में कहा था कि 19 फरवरी का आदेश त्रुटिपूर्ण है और सभी मामलों को स्पष्ट रूप से ट्रांसफर किया जाना चाहिए।</p>
<p data-start="1909" data-end="2058">इस रिव्यू याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश में संशोधन किया और अब 52 अतिरिक्त मामलों को भी हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया।</p>
<p data-start="2060" data-end="2234">इसके अलावा, दो महत्वपूर्ण मामलों—दीपक कुमार पटेल बनाम मध्य प्रदेश शासन और हरिशंकर बरोदिया बनाम मध्य प्रदेश शासन—को सुप्रीम कोर्ट ने अपने पास सुनवाई के लिए रिकॉल कर लिया है।</p>
<h3 data-section-id="64r5kd" data-start="2236" data-end="2273"><strong>अब हाई कोर्ट में होगी अंतिम बहस</strong></h3>
<p data-start="2274" data-end="2544">नए आदेश के बाद अब लगभग सभी मामले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में केंद्रित हो गए हैं। इससे कानूनी प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। हाई कोर्ट में अब इन मामलों की अंतिम सुनवाई शुरू होगी, जिसमें 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण की वैधता और लागू करने की प्रक्रिया पर फैसला लिया जाएगा।</p>
<p data-start="2546" data-end="2750">यह मामला प्रदेश की राजनीति और सामाजिक समीकरणों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ओबीसी वर्ग लंबे समय से 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग कर रहा है, जबकि इसके खिलाफ भी कई याचिकाएं दायर की गई हैं।</p>
<h3 data-section-id="1xokyf3" data-start="2752" data-end="2776"><strong>क्या है पूरा विवाद</strong></h3>
<p data-start="2777" data-end="2957">मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया था। लेकिन इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई, जिसके बाद यह मामला कानूनी विवाद में फंस गया।</p>
<p data-start="2959" data-end="3172">मुख्य विवाद यह है कि आरक्षण की कुल सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसलों में कहा गया है। ऐसे में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने पर यह सीमा पार होने की आशंका जताई गई।</p>
<h3 data-section-id="pq6okl" data-start="3174" data-end="3211"><strong>सरकार और समाज की नजरें फैसले पर</strong></h3>
<p data-start="3212" data-end="3353">अब जब सभी मामले हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए तैयार हैं, तो सरकार, राजनीतिक दलों और समाज के विभिन्न वर्गों की नजरें इस फैसले पर टिकी हुई हैं।</p>
<p data-start="3355" data-end="3542">ओबीसी वर्ग के संगठनों को उम्मीद है कि कोर्ट उनके पक्ष में फैसला देगा और लंबे समय से लंबित आरक्षण लागू हो सकेगा। वहीं, विरोध करने वाले पक्ष का कहना है कि संवैधानिक सीमा का पालन जरूरी है।</p>
<h3 data-section-id="sisdxw" data-start="3544" data-end="3558"><strong>निष्कर्ष</strong></h3>
<p data-start="3559" data-end="3726">Supreme Court के इस ताजा आदेश ने ओबीसी आरक्षण मामले में नई दिशा दे दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हाई कोर्ट में होने वाली अंतिम बहस के बाद क्या निर्णय आता है।</p>
<p data-start="3728" data-end="3881">यह फैसला न केवल मध्य प्रदेश की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति को प्रभावित करेगा, बल्कि देशभर में आरक्षण नीति से जुड़े मामलों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>OBC के लिए 27% आरक्षण हमारा संवैधानिक हक़, कोई कृपा नहीं: डॉ. अतुल मलिकराम</title>
		<link>https://swarajvani.com/27-reservation-for-obc-is-our-constitutional-right/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Kumkum Soni]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 19 Jan 2026 11:37:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Bhopal news]]></category>
		<category><![CDATA[27 Percent Reservation]]></category>
		<category><![CDATA[Bhopal News]]></category>
		<category><![CDATA[Dr. Atul Malikram]]></category>
		<category><![CDATA[OBC Reservation]]></category>
		<category><![CDATA[OBC Rights]]></category>
		<category><![CDATA[Social Justice]]></category>
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					<description><![CDATA[OBC के लिए 27% आरक्षण कोई कृपा नहीं, हमारा संवैधानिक हक़: डॉ. अतुल मलिकराम भोपाल, जनवरी 2026। राजधानी भोपाल के भेल दशहरा मैदान में रविवार को OBC -SC-ST संयुक्त मोर्चा ... <a title="OBC के लिए 27% आरक्षण हमारा संवैधानिक हक़, कोई कृपा नहीं: डॉ. अतुल मलिकराम" class="read-more" href="https://swarajvani.com/27-reservation-for-obc-is-our-constitutional-right/" aria-label="Read more about OBC के लिए 27% आरक्षण हमारा संवैधानिक हक़, कोई कृपा नहीं: डॉ. अतुल मलिकराम">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1><strong>OBC के लिए 27% आरक्षण कोई कृपा नहीं, हमारा संवैधानिक हक़: डॉ. अतुल मलिकराम</strong></h1>
<p><strong>भोपाल, जनवरी 2026।</strong><br />
राजधानी भोपाल के भेल दशहरा मैदान में रविवार को OBC -SC-ST संयुक्त मोर्चा द्वारा आयोजित विशाल आम सभा में राजनीतिक रणनीतिकार डॉ. अतुल मलिकराम ने प्रदेश सरकार से ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण को शीघ्र बहाल करने की स्पष्ट और दो टूक मांग की। इस सभा में प्रदेशभर से 70 से अधिक सामाजिक संगठनों की सहभागिता रही, जिससे यह कार्यक्रम सामाजिक न्याय की लड़ाई का एक बड़ा मंच बनकर उभरा।</p>
<p>सभा को संबोधित करते हुए डॉ. मलिकराम ने कहा कि OBC समाज के संवैधानिक अधिकारों को वर्षों से अधर में रखा गया है, जो न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि संविधान की भावना के भी खिलाफ है। उन्होंने सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर रिक्तियों में 27 प्रतिशत आरक्षण दर्शाया जाता है, वहीं दूसरी ओर 13 प्रतिशत पदों को होल्ड कर दिया जाता है, जिससे ओबीसी समाज के युवाओं का भविष्य अधर में लटक जाता है।</p>
<h2><strong>“27% आरक्षण कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं”</strong></h2>
<p>डॉ. अतुल मलिकराम ने अपने संबोधन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि 27 प्रतिशत आरक्षण कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार है। उन्होंने कहा,</p>
<blockquote><p><strong><em>“हम किसी का हक़ नहीं मार रहे हैं, बल्कि अपने हक़ की मांग कर रहे हैं। यह कृपा नहीं, बल्कि हमारा संवैधानिक अधिकार है। जब तक ओबीसी समाज को उसका पूरा हक़ नहीं मिलेगा, तब तक सामाजिक समानता और न्याय की बात अधूरी रहेगी।”</em></strong></p></blockquote>
<p>उन्होंने कहा कि OBC  समाज देश की आबादी का बड़ा हिस्सा है और आर्थिक, सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए आरक्षण एक आवश्यक व्यवस्था है। वर्षों से लंबित इस मुद्दे को अब और टालना सरकार के लिए उचित नहीं है।</p>
<h3><strong>सरकार पर दोहरे रवैये का आरोप</strong></h3>
<p>डॉ. मलिकराम ने कहा कि सरकार एक ओर नियुक्तियों में 27 प्रतिशत आरक्षण की बात करती है, लेकिन दूसरी ओर 13 प्रतिशत पदों को होल्ड कर देना OBC समाज के साथ अन्याय है।<br />
उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोर्ट से जुड़ी प्रक्रिया का बहाना बनाकर पदों को खाली छोड़ा जा रहा है, तो फिर ओबीसी युवाओं को रोजगार के अवसर कैसे मिलेंगे?</p>
<p>उन्होंने कहा कि यह स्थिति हजारों युवाओं के सपनों को तोड़ रही है, जो वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। सरकार को चाहिए कि वह इस मुद्दे पर स्पष्ट नीति बनाए और आरक्षण को पूरी तरह लागू करे।</p>
<h4><strong>निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की वकालत</strong></h4>
<p>सभा में डॉ. अतुल मलिकराम ने एक और अहम मुद्दा उठाते हुए कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग को निजी क्षेत्र में भी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।<br />
उन्होंने कहा कि आज देश में रोजगार का बड़ा हिस्सा निजी क्षेत्र में सृजित हो रहा है, लेकिन वहां सामाजिक न्याय की अवधारणा लगभग नदारद है।</p>
<p>डॉ. मलिकराम ने कहा,</p>
<blockquote><p><em><strong>“जब सरकारी क्षेत्र में आरक्षण लागू है, तो निजी क्षेत्र इससे बाहर क्यों रहे? सामाजिक असमानता को खत्म करने के लिए निजी कंपनियों में भी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण लागू होना चाहिए।”</strong></em></p></blockquote>
<p>उन्होंने कहा कि इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि सामाजिक संतुलन भी मजबूत होगा।</p>
<figure id="attachment_302830" aria-describedby="caption-attachment-302830" style="width: 342px" class="wp-caption aligncenter"><img fetchpriority="high" decoding="async" class=" wp-image-302830" src="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/01/WhatsApp-Image-2026-01-19-at-3.07.01-PM-300x189.jpeg" alt="27% Reservation for OBCs Is Our Constitutional Right, Not Charity: Dr. Atul Malikram" width="352" height="222" srcset="https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/01/WhatsApp-Image-2026-01-19-at-3.07.01-PM-300x189.jpeg 300w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/01/WhatsApp-Image-2026-01-19-at-3.07.01-PM-768x483.jpeg 768w, https://swarajvani.com/wp-content/uploads/2026/01/WhatsApp-Image-2026-01-19-at-3.07.01-PM.jpeg 966w" sizes="(max-width: 352px) 100vw, 352px" /><figcaption id="caption-attachment-302830" class="wp-caption-text">27% Reservation for OBCs Is Our Constitutional Right, Not Charity: Dr. Atul Malikram</figcaption></figure>
<h5><strong>70 से अधिक संगठनों की भागीदारी</strong></h5>
<p>इस आम सभा की खास बात यह रही कि प्रदेशभर से 70 से अधिक सामाजिक संगठनों ने इसमें हिस्सा लिया।<br />
विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों, समाजसेवियों और युवाओं ने मंच से सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की और 27 प्रतिशत आरक्षण की बहाली की मांग को मजबूती से उठाया।</p>
<p>सभा में मौजूद लोगों ने एक स्वर में कहा कि अब और इंतजार नहीं किया जाएगा और यदि सरकार ने शीघ्र कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।</p>
<h6><strong>सामाजिक न्याय की लड़ाई में अहम हस्तक्षेप</strong></h6>
<p>डॉ. अतुल मलिकराम की सक्रियता को प्रदेश की राजनीति में सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है।<br />
गौरतलब है कि वे वर्तमान में केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल की पार्टी अपना दल (एस) की मध्य प्रदेश इकाई के साथ सक्रिय भूमिका में हैं।</p>
<p>वे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश प्रभारी आर. बी. सिंह पटेल के साथ मिलकर संगठन निर्माण तथा आगामी चुनावों की रणनीतिक तैयारी में जुटे हुए हैं।साथ ही वे लगातार ओबीसी, एससी और एसटी समाज से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक मंचों पर उठाते रहे हैं।</p>
<pre><strong>युवाओं के भविष्य पर संकट</strong></pre>
<p>सभा में वक्ताओं ने कहा कि आरक्षण से जुड़े फैसलों में देरी का सबसे ज्यादा नुकसान ओबीसी समाज के युवाओं को हो रहा है।<br />
प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाने के बाद भी हजारों अभ्यर्थी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p>डॉ. मलिकराम ने कहा कि यह केवल रोजगार का मुद्दा नहीं है, बल्कि सम्मान और बराबरी का सवाल भी है।जब तक ओबीसी समाज को बराबरी का हक़ नहीं मिलेगा, तब तक लोकतंत्र की नींव कमजोर होती रहेगी।</p>
<pre><strong>सरकार से शीघ्र निर्णय की मांग</strong></pre>
<p>सभा के अंत में OBC -SC-STसंयुक्त मोर्चा ने सरकार से अपील की कि वह जल्द से जल्द 27 प्रतिशत आरक्षण को पूरी तरह बहाल करे और होल्ड किए गए पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करे।</p>
<p>डॉ. अतुल मलिकराम ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने इस मुद्दे पर जल्द कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो प्रदेशभर में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।</p>
<pre><strong>निष्कर्ष</strong></pre>
<p>भोपाल की इस आम सभा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि OBC समाज अपने संवैधानिक अधिकारों को लेकर अब और चुप नहीं रहने वाला।<br />
डॉ. अतुल मलिकराम के नेतृत्व में उठी यह आवाज सरकार के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि 27 प्रतिशत आरक्षण कोई कृपा नहीं, बल्कि संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है।</p>
<p>अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रदेश सरकार इस मुद्दे पर कब और क्या निर्णय लेती है, क्योंकि इससे न केवल लाखों युवाओं का भविष्य जुड़ा है, बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा भी तय होगी।</p>
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