Supreme Court of India ने मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से जुड़े लंबे समय से लंबित मामलों में एक अहम आदेश जारी किया है, जिससे अब इस पूरे विवाद की सुनवाई की दिशा बदल गई है। कोर्ट ने कई मामलों को वापस Madhya Pradesh High Court भेजते हुए स्पष्ट किया है कि अब इन पर अंतिम बहस हाई कोर्ट में ही होगी।
इस आदेश के बाद प्रदेश में ओबीसी आरक्षण से जुड़े कानूनी विवाद के जल्द निपटारे की उम्मीद बढ़ गई है। दरअसल, यह मामला लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के बीच प्रक्रिया संबंधी उलझनों में फंसा हुआ था।
क्या है Supreme Court का नया आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया आदेश में दो विशेष अनुमति याचिकाओं (SLP) को हाई कोर्ट से रिकॉल कर लिया है। इसके साथ ही 52 ऐसे मामलों को, जो पहले सुप्रीम कोर्ट में लंबित थे लेकिन ट्रांसफर आदेश में शामिल नहीं हो पाए थे, अब औपचारिक रूप से हाई कोर्ट को ट्रांसफर कर दिया गया है।
इस फैसले के बाद अब ओबीसी आरक्षण से जुड़े सभी प्रमुख मामले एक ही मंच यानी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुने जाएंगे। इससे सुनवाई की प्रक्रिया में एकरूपता आएगी और निर्णय जल्द आने की संभावना बढ़ेगी।
पहले क्यों फंसा था मामला
वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और विनायक प्रसाद शाह के अनुसार, ओबीसी आरक्षण से जुड़े सभी मामलों को पहले मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था। ये मामले सुप्रीम कोर्ट की दो अलग-अलग खंडपीठों के समक्ष लंबित थे।
हालांकि, 19 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इनमें से कई मामलों को वापस हाई कोर्ट भेजने का आदेश दिया था। लेकिन उस आदेश में कुछ मामले शामिल नहीं हो पाए थे, जिससे कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही थी।
रिव्यू याचिका के बाद बदला फैसला
इस स्थिति को सुधारने के लिए ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से रिव्यू याचिका दायर की गई थी। अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने इस याचिका में कहा था कि 19 फरवरी का आदेश त्रुटिपूर्ण है और सभी मामलों को स्पष्ट रूप से ट्रांसफर किया जाना चाहिए।
इस रिव्यू याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश में संशोधन किया और अब 52 अतिरिक्त मामलों को भी हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया।
इसके अलावा, दो महत्वपूर्ण मामलों—दीपक कुमार पटेल बनाम मध्य प्रदेश शासन और हरिशंकर बरोदिया बनाम मध्य प्रदेश शासन—को सुप्रीम कोर्ट ने अपने पास सुनवाई के लिए रिकॉल कर लिया है।
अब हाई कोर्ट में होगी अंतिम बहस
नए आदेश के बाद अब लगभग सभी मामले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में केंद्रित हो गए हैं। इससे कानूनी प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। हाई कोर्ट में अब इन मामलों की अंतिम सुनवाई शुरू होगी, जिसमें 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण की वैधता और लागू करने की प्रक्रिया पर फैसला लिया जाएगा।
यह मामला प्रदेश की राजनीति और सामाजिक समीकरणों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ओबीसी वर्ग लंबे समय से 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग कर रहा है, जबकि इसके खिलाफ भी कई याचिकाएं दायर की गई हैं।
क्या है पूरा विवाद
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया था। लेकिन इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई, जिसके बाद यह मामला कानूनी विवाद में फंस गया।
मुख्य विवाद यह है कि आरक्षण की कुल सीमा 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसलों में कहा गया है। ऐसे में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने पर यह सीमा पार होने की आशंका जताई गई।
सरकार और समाज की नजरें फैसले पर
अब जब सभी मामले हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए तैयार हैं, तो सरकार, राजनीतिक दलों और समाज के विभिन्न वर्गों की नजरें इस फैसले पर टिकी हुई हैं।
ओबीसी वर्ग के संगठनों को उम्मीद है कि कोर्ट उनके पक्ष में फैसला देगा और लंबे समय से लंबित आरक्षण लागू हो सकेगा। वहीं, विरोध करने वाले पक्ष का कहना है कि संवैधानिक सीमा का पालन जरूरी है।
निष्कर्ष
Supreme Court के इस ताजा आदेश ने ओबीसी आरक्षण मामले में नई दिशा दे दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हाई कोर्ट में होने वाली अंतिम बहस के बाद क्या निर्णय आता है।
यह फैसला न केवल मध्य प्रदेश की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति को प्रभावित करेगा, बल्कि देशभर में आरक्षण नीति से जुड़े मामलों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
