—Advertisement—

OBC के लिए 27% आरक्षण हमारा संवैधानिक हक़, कोई कृपा नहीं: डॉ. अतुल मलिकराम

Author Picture
Published On: 19 January 2026
WhatsApp Image 2026 01 19 at 3.07.02 PM

—Advertisement—

OBC के लिए 27% आरक्षण कोई कृपा नहीं, हमारा संवैधानिक हक़: डॉ. अतुल मलिकराम

भोपाल, जनवरी 2026।
राजधानी भोपाल के भेल दशहरा मैदान में रविवार को OBC -SC-ST संयुक्त मोर्चा द्वारा आयोजित विशाल आम सभा में राजनीतिक रणनीतिकार डॉ. अतुल मलिकराम ने प्रदेश सरकार से ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण को शीघ्र बहाल करने की स्पष्ट और दो टूक मांग की। इस सभा में प्रदेशभर से 70 से अधिक सामाजिक संगठनों की सहभागिता रही, जिससे यह कार्यक्रम सामाजिक न्याय की लड़ाई का एक बड़ा मंच बनकर उभरा।

सभा को संबोधित करते हुए डॉ. मलिकराम ने कहा कि OBC समाज के संवैधानिक अधिकारों को वर्षों से अधर में रखा गया है, जो न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि संविधान की भावना के भी खिलाफ है। उन्होंने सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर रिक्तियों में 27 प्रतिशत आरक्षण दर्शाया जाता है, वहीं दूसरी ओर 13 प्रतिशत पदों को होल्ड कर दिया जाता है, जिससे ओबीसी समाज के युवाओं का भविष्य अधर में लटक जाता है।

“27% आरक्षण कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं”

डॉ. अतुल मलिकराम ने अपने संबोधन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि 27 प्रतिशत आरक्षण कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार है। उन्होंने कहा,

“हम किसी का हक़ नहीं मार रहे हैं, बल्कि अपने हक़ की मांग कर रहे हैं। यह कृपा नहीं, बल्कि हमारा संवैधानिक अधिकार है। जब तक ओबीसी समाज को उसका पूरा हक़ नहीं मिलेगा, तब तक सामाजिक समानता और न्याय की बात अधूरी रहेगी।”

उन्होंने कहा कि OBC  समाज देश की आबादी का बड़ा हिस्सा है और आर्थिक, सामाजिक व शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए आरक्षण एक आवश्यक व्यवस्था है। वर्षों से लंबित इस मुद्दे को अब और टालना सरकार के लिए उचित नहीं है।

सरकार पर दोहरे रवैये का आरोप

डॉ. मलिकराम ने कहा कि सरकार एक ओर नियुक्तियों में 27 प्रतिशत आरक्षण की बात करती है, लेकिन दूसरी ओर 13 प्रतिशत पदों को होल्ड कर देना OBC समाज के साथ अन्याय है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोर्ट से जुड़ी प्रक्रिया का बहाना बनाकर पदों को खाली छोड़ा जा रहा है, तो फिर ओबीसी युवाओं को रोजगार के अवसर कैसे मिलेंगे?

उन्होंने कहा कि यह स्थिति हजारों युवाओं के सपनों को तोड़ रही है, जो वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। सरकार को चाहिए कि वह इस मुद्दे पर स्पष्ट नीति बनाए और आरक्षण को पूरी तरह लागू करे।

निजी क्षेत्र में भी आरक्षण की वकालत

सभा में डॉ. अतुल मलिकराम ने एक और अहम मुद्दा उठाते हुए कहा कि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग को निजी क्षेत्र में भी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज देश में रोजगार का बड़ा हिस्सा निजी क्षेत्र में सृजित हो रहा है, लेकिन वहां सामाजिक न्याय की अवधारणा लगभग नदारद है।

डॉ. मलिकराम ने कहा,

“जब सरकारी क्षेत्र में आरक्षण लागू है, तो निजी क्षेत्र इससे बाहर क्यों रहे? सामाजिक असमानता को खत्म करने के लिए निजी कंपनियों में भी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण लागू होना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि सामाजिक संतुलन भी मजबूत होगा।

27% Reservation for OBCs Is Our Constitutional Right, Not Charity: Dr. Atul Malikram
27% Reservation for OBCs Is Our Constitutional Right, Not Charity: Dr. Atul Malikram
70 से अधिक संगठनों की भागीदारी

इस आम सभा की खास बात यह रही कि प्रदेशभर से 70 से अधिक सामाजिक संगठनों ने इसमें हिस्सा लिया।
विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों, समाजसेवियों और युवाओं ने मंच से सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की और 27 प्रतिशत आरक्षण की बहाली की मांग को मजबूती से उठाया।

सभा में मौजूद लोगों ने एक स्वर में कहा कि अब और इंतजार नहीं किया जाएगा और यदि सरकार ने शीघ्र कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

सामाजिक न्याय की लड़ाई में अहम हस्तक्षेप

डॉ. अतुल मलिकराम की सक्रियता को प्रदेश की राजनीति में सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि वे वर्तमान में केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल की पार्टी अपना दल (एस) की मध्य प्रदेश इकाई के साथ सक्रिय भूमिका में हैं।

वे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश प्रभारी आर. बी. सिंह पटेल के साथ मिलकर संगठन निर्माण तथा आगामी चुनावों की रणनीतिक तैयारी में जुटे हुए हैं।साथ ही वे लगातार ओबीसी, एससी और एसटी समाज से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक मंचों पर उठाते रहे हैं।

युवाओं के भविष्य पर संकट

सभा में वक्ताओं ने कहा कि आरक्षण से जुड़े फैसलों में देरी का सबसे ज्यादा नुकसान ओबीसी समाज के युवाओं को हो रहा है।
प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाने के बाद भी हजारों अभ्यर्थी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।

डॉ. मलिकराम ने कहा कि यह केवल रोजगार का मुद्दा नहीं है, बल्कि सम्मान और बराबरी का सवाल भी है।जब तक ओबीसी समाज को बराबरी का हक़ नहीं मिलेगा, तब तक लोकतंत्र की नींव कमजोर होती रहेगी।

सरकार से शीघ्र निर्णय की मांग

सभा के अंत में OBC -SC-STसंयुक्त मोर्चा ने सरकार से अपील की कि वह जल्द से जल्द 27 प्रतिशत आरक्षण को पूरी तरह बहाल करे और होल्ड किए गए पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करे।

डॉ. अतुल मलिकराम ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने इस मुद्दे पर जल्द कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो प्रदेशभर में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

निष्कर्ष

भोपाल की इस आम सभा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि OBC समाज अपने संवैधानिक अधिकारों को लेकर अब और चुप नहीं रहने वाला।
डॉ. अतुल मलिकराम के नेतृत्व में उठी यह आवाज सरकार के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि 27 प्रतिशत आरक्षण कोई कृपा नहीं, बल्कि संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रदेश सरकार इस मुद्दे पर कब और क्या निर्णय लेती है, क्योंकि इससे न केवल लाखों युवाओं का भविष्य जुड़ा है, बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा भी तय होगी।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp