छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद ने सौंपा ज्ञापन, जल्द बहाली की उठाई मांग
दैनिक स्वराज वाणी समाचार पत्र
विशेष संवाददाता की खबर।
शमशाबाद:
शमशाबाद में उच्च शिक्षा मंत्री के नाम प्राचार्य को सौंपा ज्ञापन, विद्यार्थियों को प्रतिनिधित्व देने की मांग
शमशाबाद। मध्यप्रदेश में छात्रसंघ चुनाव जल्द से जल्द बहाल कराने की मांग को लेकर अखिल आर्यावर्त संघ अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने शासकीय महाविद्यालय शमशाबाद में ज्ञापन सौंपा। संगठन के कार्यकर्ताओं ने उच्च शिक्षा मंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन महाविद्यालय के प्राचार्य को सौंपकर प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव आयोजित कराने के संबंध में शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।
ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने कहा कि लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को अपनी समस्याओं और मांगों को प्रभावी तरीके से रखने के लिए उचित मंच नहीं मिल पा रहा है। छात्रसंघ चुनाव विद्यार्थियों के नेतृत्व विकास और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की समझ के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
वर्ष 2010 से नहीं हुए छात्रसंघ चुनाव
ज्ञापन सौंपने के दौरान अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद के प्रांत अध्यक्ष राजकुमार विश्वकर्मा ने बताया कि मध्यप्रदेश में वर्ष 2010 के बाद से छात्रसंघ चुनाव आयोजित नहीं किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस अवधि में प्रदेश में विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव और ग्राम पंचायत चुनाव सहित कई महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं संपन्न हो चुकी हैं, लेकिन विद्यार्थियों के प्रतिनिधित्व से जुड़े छात्रसंघ चुनाव को लेकर अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
उन्होंने कहा कि छात्रसंघ चुनाव विद्यार्थियों के लिए लोकतंत्र की पहली पाठशाला होते हैं। इन चुनावों के माध्यम से युवा नेतृत्व क्षमता, संगठन कौशल और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझते हैं। उन्होंने कहा कि कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर छात्रों को अपनी समस्याओं को उठाने और समाधान के लिए प्रयास करने का अवसर छात्रसंघ के माध्यम से मिलता है।
वर्ष 2017 में भी उठी थी मांग
प्रांत अध्यक्ष ने बताया कि वर्ष 2017 में भी प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग जोर-शोर से उठी थी। उस समय सरकार और विद्यार्थियों के बीच इस विषय पर चर्चा भी हुई थी, लेकिन बाद में कोरोना महामारी और लॉकडाउन जैसी परिस्थितियों के कारण छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
उन्होंने कहा कि अब परिस्थितियां सामान्य हैं और प्रदेश में सभी प्रकार की चुनावी एवं प्रशासनिक गतिविधियां नियमित रूप से संचालित हो रही हैं। ऐसे में छात्रसंघ चुनाव को भी पुनः प्रारंभ किया जाना चाहिए।
विद्यार्थियों की आवाज को मिलेगा मंच
विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव केवल पद प्राप्त करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यह विद्यार्थियों को अपनी जिम्मेदारियों को समझने और समाज के प्रति सकारात्मक भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की कई समस्याएं होती हैं, जिनमें शिक्षा व्यवस्था, सुविधाएं, पुस्तकालय, छात्रावास, परीक्षा संबंधी विषय और अन्य शैक्षणिक मुद्दे शामिल हैं। छात्रसंघ के माध्यम से विद्यार्थी इन समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचा सकते हैं और उनके समाधान के लिए प्रभावी प्रयास कर सकते हैं।
संगठन ने कहा कि युवाओं को राजनीति और सामाजिक नेतृत्व की प्रारंभिक शिक्षा छात्र जीवन से ही मिलती है। छात्रसंघ चुनाव इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की पहल
ज्ञापन में कहा गया कि छात्रसंघ चुनाव लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। जब विद्यार्थियों को चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिलता है तो उनमें लोकतांत्रिक मूल्यों, मतदान के महत्व और जिम्मेदार नेतृत्व की भावना विकसित होती है।
विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने कहा कि देश का युवा वर्ग भविष्य का नेतृत्वकर्ता है। ऐसे में उन्हें कॉलेज स्तर से ही नेतृत्व और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने का अवसर मिलना चाहिए।
सरकार से जल्द आदेश जारी करने की मांग
संगठन ने उच्च शिक्षा विभाग और मध्यप्रदेश सरकार से मांग की है कि छात्रसंघ चुनाव को लेकर जल्द से जल्द दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। संगठन ने कहा कि प्रदेश के सभी महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में पारदर्शी प्रक्रिया के तहत छात्रसंघ चुनाव आयोजित कराए जाएं।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट नियम बनाए जाएं, जिससे विद्यार्थियों को समान अवसर मिल सके और छात्र प्रतिनिधि अपने दायित्वों का बेहतर तरीके से निर्वहन कर सकें।
आंदोलन की चेतावनी
प्रांत अध्यक्ष राजकुमार विश्वकर्मा ने कहा कि यदि सरकार द्वारा छात्रसंघ चुनाव की मांग पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होगा।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की मांगों को लगातार नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही छात्रसंघ चुनाव कराने को लेकर आदेश जारी नहीं किया गया तो अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता प्रदेश स्तर पर आंदोलन करेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर संगठन प्रदेश के विद्यालयों और महाविद्यालयों में तालाबंदी जैसे कदम उठाने के लिए मजबूर होगा। हालांकि संगठन की प्राथमिकता यही है कि सरकार बातचीत और सकारात्मक निर्णय के माध्यम से इस समस्या का समाधान करे।
शमशाबाद इकाई के पदाधिकारी रहे उपस्थित
ज्ञापन सौंपने के अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद के कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। इनमें प्रमुख रूप से प्रांत अध्यक्ष राजकुमार विश्वकर्मा, जिला अध्यक्ष विदिशा नीलेश धाकड़ सहित शमशाबाद इकाई के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल थे।
कार्यकर्ताओं ने प्राचार्य को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया जल्द शुरू की जानी चाहिए।
विद्यार्थियों में दिखा उत्साह
छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर विद्यार्थियों में भी उत्साह देखने को मिला। संगठन के कार्यकर्ताओं ने कहा कि प्रदेश के युवा लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उनका मानना है कि चुनाव होने से विद्यार्थियों को अपनी बात रखने के लिए मजबूत मंच मिलेगा।
उन्होंने कहा कि छात्रसंघ के माध्यम से आने वाले प्रतिनिधि कॉलेज प्रशासन और विद्यार्थियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सकते हैं।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश में छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी परिषद ने ज्ञापन के माध्यम से सरकार का ध्यान इस विषय की ओर आकर्षित किया है। संगठन का कहना है कि छात्रसंघ चुनाव विद्यार्थियों के अधिकार, नेतृत्व विकास और लोकतांत्रिक शिक्षा के लिए जरूरी हैं।
अब सभी की नजर उच्च शिक्षा विभाग और प्रदेश सरकार के अगले कदम पर है। यदि सरकार इस दिशा में निर्णय लेती है तो लंबे समय बाद प्रदेश के महाविद्यालयों में छात्र प्रतिनिधित्व की प्रक्रिया फिर से शुरू हो सकती है।
