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MP MBBS Interns’ Protest: स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर आंदोलन तेज, भूख हड़ताल टली लेकिन कार्य बहिष्कार जारी; मरीजों की बढ़ी परेशानी

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Published On: 27 July 2026
MBBS interns protest in Madhya Pradesh demanding an increase in monthly stipend from ₹14,337 to ₹30,000, as work boycott affects hospital services and patient care in Bhopal
— MBBS interns protest in Madhya Pradesh demanding an increase in monthly stipend from ₹14,337 to ₹30,000, as work boycott affects hospital services and patient care in Bhopal

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MP MBBS Interns’ Protest: स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर आंदोलन तेज, भूख हड़ताल टली लेकिन कार्य बहिष्कार जारी; मरीजों की बढ़ी परेशानी

भोपाल। मध्य प्रदेश के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में कार्यरत एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। इंटर्न डॉक्टरों द्वारा ₹14,337 से बढ़ाकर ₹30,000 प्रतिमाह स्टाइपेंड किए जाने की मांग को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर असर डालना शुरू कर दिया है। जहां एक ओर इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों को न्यायसंगत बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अस्पतालों में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि प्रस्तावित अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को फिलहाल एक दिन के लिए स्थगित कर दिया गया है, लेकिन इंटर्न डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया है कि कार्य बहिष्कार और अन्य विरोध कार्यक्रम पहले की तरह जारी रहेंगे, जब तक सरकार उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं देती।

स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन तेज

एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर्स एसोसिएशन लंबे समय से स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग कर रहा है। संगठन का कहना है कि वर्तमान में मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न डॉक्टरों को ₹14,337 प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जाता है, जो देश के कई अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है।

इंटर्न डॉक्टरों का तर्क है कि वे अस्पतालों में नियमित चिकित्सकों की तरह जिम्मेदारियां निभाते हैं। ओपीडी, आईपीडी, इमरजेंसी, लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर सहित कई महत्वपूर्ण विभागों में उनकी भूमिका बेहद अहम होती है। इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड उनकी मेहनत और बढ़ती महंगाई के अनुरूप नहीं है।

इसी मांग को लेकर प्रदेशभर के इंटर्न डॉक्टर आंदोलनरत हैं और सरकार से स्टाइपेंड बढ़ाकर ₹30,000 प्रतिमाह करने की मांग कर रहे हैं।

भूख हड़ताल फिलहाल स्थगित, लेकिन आंदोलन जारी

एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर्स एसोसिएशन के अनुसार, भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में डॉ. कृष्णा और डॉ. संकेत सहित अन्य इंटर्न डॉक्टरों द्वारा मंगलवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू किए जाने की घोषणा की गई थी।

हालांकि भूख हड़ताल शुरू होने से पहले चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त धनराजू ने आंदोलनकारी प्रतिनिधियों से संपर्क किया और उन्हें मंगलवार को वार्ता के लिए आमंत्रित किया। आयुक्त ने आश्वासन दिया कि स्टाइपेंड वृद्धि सहित सभी मांगों पर गंभीरता से चर्चा की जाएगी।

सरकार के इस आश्वासन का सम्मान करते हुए इंटर्न डॉक्टरों ने भूख हड़ताल को फिलहाल एक दिन के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया, ताकि बातचीत के जरिए समाधान निकल सके।

9 जुलाई से जारी है आंदोलन

इंटर्न डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि भूख हड़ताल भले ही टाल दी गई हो, लेकिन 9 जुलाई 2026 से चल रहा आंदोलन और कार्य बहिष्कार पूरी तरह जारी रहेगा।

डॉक्टरों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर लिखित आदेश जारी नहीं करती, तब तक नियमित कार्य शुरू नहीं किया जाएगा। उनका मानना है कि केवल मौखिक आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा।

अस्पतालों की व्यवस्था पर दिखने लगा असर

इंटर्न डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार का सबसे अधिक असर प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में दिखाई देने लगा है। विशेष रूप से भोपाल के हमीदिया अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने लगी हैं।

इंटर्न डॉक्टर अस्पतालों की दैनिक कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। मरीजों की प्रारंभिक जांच, वार्ड प्रबंधन, केस हिस्ट्री तैयार करना, इमरजेंसी में सहयोग, लेबर रूम और ऑपरेशन थिएटर में सहायता जैसे अनेक कार्य इंटर्न डॉक्टर नियमित रूप से करते हैं।

इनकी अनुपस्थिति के कारण अस्पतालों में कार्यभार बढ़ गया है, जिससे मरीजों को उपचार के लिए अधिक समय तक इंतजार करना पड़ रहा है।

स्ट्रेचर और व्हीलचेयर खुद खींचने को मजबूर परिजन

हमीदिया अस्पताल से सामने आए दृश्य स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। कर्मचारियों और इंटर्न डॉक्टरों की कमी के चलते कई स्थानों पर मरीजों के परिजन स्वयं स्ट्रेचर और व्हीलचेयर खींचते दिखाई दिए।

अस्पताल में भर्ती मरीजों को एक वार्ड से दूसरे वार्ड तक ले जाने में भी परिजनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई मरीजों ने उपचार में देरी और व्यवस्थाओं के प्रभावित होने की शिकायत भी की।

हालांकि अस्पताल प्रशासन आवश्यक सेवाओं को सामान्य बनाए रखने का प्रयास कर रहा है, लेकिन इंटर्न डॉक्टरों की कमी का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

मरीजों पर पड़ रहा सीधा प्रभाव

प्रदेश के विभिन्न जिलों से इलाज कराने भोपाल आने वाले मरीजों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह आंदोलन लंबा चलता है तो ओपीडी सेवाओं, भर्ती मरीजों की देखभाल और इमरजेंसी सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।

यद्यपि वरिष्ठ चिकित्सक और अन्य मेडिकल स्टाफ आवश्यक सेवाओं को संभालने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन इंटर्न डॉक्टरों की भूमिका को पूरी तरह प्रतिस्थापित करना आसान नहीं है

आईएमए जूनियर डॉक्टर्स नेटवर्क का मिला समर्थन

इस आंदोलन को अब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन – जूनियर डॉक्टर्स नेटवर्क (IMA-JDN) मध्य प्रदेश का भी समर्थन मिल गया है।

आईएमए-जेडीएन के प्रदेश महासचिव डॉ. कुलदीप गुप्ता ने मुख्यमंत्री और चिकित्सा शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर इंटर्न डॉक्टरों की मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है।

उन्होंने कहा कि इंटर्न डॉक्टर अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत कड़ी हैं और उन्हें सम्मानजनक स्टाइपेंड मिलना चाहिए।

24 से 36 घंटे तक लगातार ड्यूटी

डॉ. कुलदीप गुप्ता ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि इंटर्न डॉक्टर अक्सर 24 से 36 घंटे तक लगातार ड्यूटी करते हैं।

वे ओपीडी, आईपीडी, इमरजेंसी, लेबर रूम, ऑपरेशन थिएटर सहित अस्पताल के लगभग सभी महत्वपूर्ण विभागों में सक्रिय रहते हैं।

इतनी लंबी ड्यूटी और भारी कार्यभार के बावजूद उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड बेहद कम है, जो वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

अन्य राज्यों से तुलना में पीछे मध्य प्रदेश

आंदोलनकारी डॉक्टरों का कहना है कि देश के कई राज्यों में इंटर्न डॉक्टरों को मध्य प्रदेश की तुलना में कहीं अधिक स्टाइपेंड दिया जाता है।

उनका तर्क है कि समान शैक्षणिक योग्यता, समान कार्य और समान जिम्मेदारियों के बावजूद मध्य प्रदेश के इंटर्न डॉक्टरों को अपेक्षाकृत कम आर्थिक सहायता मिल रही है।

इसी असमानता को दूर करने के लिए वे लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

सरकार से क्या है डॉक्टरों की मांग?

इंटर्न डॉक्टरों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं—

  • मासिक स्टाइपेंड ₹14,337 से बढ़ाकर ₹30,000 किया जाए।
  • स्टाइपेंड वृद्धि का आदेश लिखित रूप में जारी किया जाए।
  • आंदोलनरत डॉक्टरों के खिलाफ किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
  • मेडिकल कॉलेजों में इंटर्न डॉक्टरों की समस्याओं के समाधान के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
  • भविष्य में स्टाइपेंड का समय-समय पर पुनरीक्षण किया जाए।

सरकार और डॉक्टरों के बीच वार्ता पर टिकी उम्मीदें

चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा आंदोलनकारी प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए बुलाया गया है। डॉक्टरों को उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगी।

यदि बैठक में सहमति बनती है तो आंदोलन समाप्त हो सकता है और अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य हो जाएंगी। वहीं यदि कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तो आंदोलन और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि इंटर्न डॉक्टर किसी भी सरकारी अस्पताल की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। वे न केवल चिकित्सा सेवाओं में सहयोग करते हैं बल्कि वरिष्ठ चिकित्सकों और मरीजों के बीच समन्वय की भूमिका भी निभाते हैं।

ऐसे में लंबे समय तक कार्य बहिष्कार जारी रहने से चिकित्सा सेवाओं पर दबाव बढ़ सकता है। सरकार और डॉक्टरों के बीच जल्द समाधान निकलना मरीजों और स्वास्थ्य व्यवस्था—दोनों के हित में माना जा रहा है।

निष्कर्ष

मध्य प्रदेश में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन अब राज्य सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। भूख हड़ताल फिलहाल स्थगित होने से बातचीत की संभावना बनी है, लेकिन कार्य बहिष्कार जारी रहने के कारण सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।

एक ओर इंटर्न डॉक्टर अपने कार्य के अनुरूप सम्मानजनक स्टाइपेंड की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मरीजों को उपचार में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अब सभी की निगाहें सरकार और आंदोलनकारी डॉक्टरों के बीच होने वाली बैठक पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि स्वास्थ्य सेवाएं कब तक सामान्य हो पाएंगी और इंटर्न डॉक्टरों की मांगों पर क्या फैसला लिया जाता है.

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