पूज्य स्वामी हरिशंकरानन्द सरस्वती महाराज (श्री जम्मू वाले बाबा जी) ब्रह्मलीन, षोडशी भंडारा 7 अगस्त को
संवाददाता : कौशिक पण्डित
धर्म, साधना और समाज सेवा के लिए समर्पित रहा संत जीवन
धार। अत्यंत दुःख एवं गहरे शोक के साथ यह सूचना दी गई है कि पूज्य स्वामी हरिशंकरानन्द सरस्वती महाराज, जिन्हें श्रद्धालु प्रेम और आस्था से श्री जम्मू वाले बाबा जी के नाम से जानते थे, 23 जुलाई 2026, गुरुवार को ब्रह्मलीन हो गए। उनके देह त्याग की खबर से उनके अनुयायियों, भक्तों और धर्मप्रेमी जनों में शोक की लहर व्याप्त है।
स्वामी हरिशंकरानन्द सरस्वती महाराज ने अपना संपूर्ण जीवन धर्म, आध्यात्मिक साधना, मानव सेवा और समाज कल्याण के कार्यों के लिए समर्पित कर दिया था। उन्होंने अपने जीवन के माध्यम से लोगों को सत्य, धर्म, संस्कार और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उनका व्यक्तित्व आध्यात्मिक ऊर्जा, सरलता और करुणा का प्रतीक माना जाता था।
संत परंपरा और आध्यात्मिक मार्गदर्शन में महत्वपूर्ण योगदान
भारतीय संस्कृति में संतों और आध्यात्मिक गुरुओं का स्थान सदैव विशेष रहा है। संत समाज को केवल धार्मिक मार्गदर्शन ही नहीं देते, बल्कि जीवन में नैतिकता, सदाचार और मानवता के मूल्यों को स्थापित करने का कार्य भी करते हैं।
स्वामी हरिशंकरानन्द सरस्वती महाराज ने भी अपने जीवनकाल में इसी परंपरा को आगे बढ़ाया। उन्होंने लोगों को धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों का भी बोध कराया। उनके प्रवचन, विचार और जीवन शैली अनेक लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहे।
उनका मानना था कि मनुष्य का वास्तविक जीवन तभी सार्थक होता है जब वह स्वयं के साथ-साथ समाज और जरूरतमंद लोगों के कल्याण के लिए कार्य करे। इसी भावना के साथ उन्होंने सदैव सेवा और परोपकार को प्राथमिकता दी।
सेवा, साधना और मानव कल्याण के प्रति समर्पण
स्वामी हरिशंकरानन्द सरस्वती महाराज का जीवन त्याग और तपस्या का उदाहरण रहा। उन्होंने आध्यात्मिक साधना के साथ समाज सेवा को भी अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाया।
उन्होंने लोगों को धर्म के वास्तविक स्वरूप को समझाते हुए प्रेम, भाईचारे और सहयोग की भावना को बढ़ावा दिया। उनके संपर्क में आने वाले श्रद्धालु उनके शांत स्वभाव, मधुर व्यवहार और आध्यात्मिक ज्ञान से प्रभावित होते थे।
महाराज जी ने अपने जीवन में अनेक लोगों को सकारात्मक सोच अपनाने और कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा दी। उनके द्वारा दिए गए आध्यात्मिक संदेश आज भी उनके अनुयायियों के लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं।
भक्तों और अनुयायियों में शोक की लहर
महाराज जी के ब्रह्मलीन होने की सूचना मिलते ही उनके अनुयायियों और श्रद्धालुओं में गहरा दुःख व्याप्त हो गया। बड़ी संख्या में भक्तों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके साथ बिताए आध्यात्मिक अनुभवों को स्मरण किया।
श्रद्धालुओं का कहना है कि स्वामी हरिशंकरानन्द सरस्वती महाराज का जाना एक अपूरणीय क्षति है। हालांकि संतों का जीवन शरीर तक सीमित नहीं होता, उनके विचार, शिक्षाएं और संस्कार हमेशा समाज का मार्गदर्शन करते रहते हैं।
भक्तों ने कहा कि महाराज जी ने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि सच्ची आध्यात्मिकता वही है जिसमें मानव सेवा और करुणा का भाव शामिल हो।
षोडशी (भंडारा) कार्यक्रम का आयोजन 7 अगस्त को
स्वामी हरिशंकरानन्द सरस्वती महाराज की स्मृति में उनकी षोडशी (भंडारा) का आयोजन शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को किया जाएगा। यह कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और भावपूर्ण वातावरण में संपन्न होगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 10 बजे से होगा। इस अवसर पर श्रद्धालु, अनुयायी, संत समाज और धर्मप्रेमीजन उपस्थित होकर पूज्य महाराज को श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे।
षोडशी कार्यक्रम के माध्यम से भक्तजन महाराज जी के आध्यात्मिक जीवन, उनके उपदेशों और समाज सेवा के कार्यों को स्मरण करेंगे। साथ ही उनकी आत्मिक शांति के लिए प्रार्थना करेंगे।
कार्यक्रम स्थल पर श्रद्धालुओं से पहुंचने का आह्वान
षोडशी (भंडारा) कार्यक्रम का आयोजन निम्न स्थान पर किया जाएगा—
श्री देवल बाबा शिव मंदिर, अंजदा रोड,
श्री चुडूबाई माता मंदिर राजपूत धर्मशाला,
वराह नगर, बड़ा बड़दा, तहसील मनावर,
जिला धार (मध्य प्रदेश)।
आयोजकों द्वारा सभी श्रद्धालुओं, भक्तों और धर्मप्रेमी नागरिकों से अपील की गई है कि वे कार्यक्रम में शामिल होकर पूज्य स्वामी हरिशंकरानन्द सरस्वती महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करें।
संत की शिक्षाएं सदैव करेंगी मार्गदर्शन
स्वामी हरिशंकरानन्द सरस्वती महाराज भले ही आज भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी शिक्षाएं, विचार और आशीर्वाद सदैव भक्तों के साथ रहेंगे।
उनका जीवन यह संदेश देता है कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवता, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलना ही सच्चे धर्म का स्वरूप है।
महाराज जी द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलकर उनके अनुयायी समाज में प्रेम, सहयोग और सेवा की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प ले रहे हैं।
श्रद्धा और विश्वास के साथ होगा स्मरण
षोडशी भंडारा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि उस महान संत व्यक्तित्व के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर है, जिन्होंने अपना जीवन समाज और धर्म के लिए समर्पित किया।
श्रद्धालुओं को विश्वास है कि स्वामी हरिशंकरानन्द सरस्वती महाराज की आध्यात्मिक ऊर्जा और उनके द्वारा दिए गए संस्कार आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करते रहेंगे।
उनका जीवन सदैव धर्म, सेवा, साधना और मानव कल्याण के आदर्श के रूप में स्मरण किया जाता रहेगा।
