Sonam Wangchuk की देशवासियों से अपील, बोले- 2047 तक विकसित भारत के लिए शुरू करनी होगी ‘शांत क्रांति’
स्वतंत्रता दिवस से पहले वीडियो संदेश जारी कर देश के भविष्य और राजनीतिक व्यवस्था पर जताई चिंता
नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 80वें स्वतंत्रता दिवस से पहले देशवासियों से एक ‘शांत क्रांति’ की शुरुआत करने की अपील की है। सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में वांगचुक ने भारत के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक नेतृत्व को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने लोगों से ऐसे निःस्वार्थ, निर्भीक और चरित्रवान लोगों के नाम सुझाने को कहा, जो देश के भविष्य के लिए नई सोच और बेहतर दिशा देने में सक्षम हों।
देश के भविष्य को लेकर जताई चिंता
वांगचुक ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत खराब थी और इस दौरान उन्होंने देश और उसके भविष्य को लेकर काफी विचार किया। उन्होंने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित और सम्मानित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के लिए देश की मौजूदा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भारत से कभी पीछे या बराबरी पर रहने वाले कई देश आज विकास के कई मानकों पर आगे निकल चुके हैं। इस संदर्भ में उन्होंने थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे देशों का उदाहरण देते हुए प्रति व्यक्ति जीडीपी का उल्लेख किया।
‘2047 का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण हो सकता है’
वांगचुक ने चेतावनी दी कि यदि मौजूदा परिस्थितियों में पर्याप्त बदलाव नहीं हुआ तो 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य मुश्किल हो सकता है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को देश के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था पिछड़ी रहेगी तो देश का भविष्य भी प्रभावित होगा।
उनके अनुसार, भारत के युवाओं और नागरिकों को देश के भविष्य को लेकर गंभीरता से विचार करना होगा और ऐसी व्यवस्था के निर्माण में योगदान देना होगा, जिसमें योग्य एवं ईमानदार नेतृत्व को आगे आने का अवसर मिले।
राजनीतिक दल नहीं, व्यवस्था में बदलाव की जरूरत
वांगचुक ने कहा कि समस्या केवल किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है। उन्होंने छात्रों के हालिया आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोगों ने बदलाव की मांग उठाई और कुछ मामलों में परिवर्तन भी देखने को मिले।
उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का भी जिक्र किया, लेकिन कहा कि केवल किसी व्यक्ति या मंत्री के बदलने से व्यवस्था में बड़ा बदलाव आना जरूरी नहीं है। उनका कहना है कि देश में व्यापक स्तर पर व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है।
उन्होंने अलग-अलग राज्यों में अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों पर हुई कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकारों के दौरान ऐसी परिस्थितियां सामने आई हैं। इसलिए उनका सवाल किसी एक पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था को लेकर है।
भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का किया जिक्र
वांगचुक ने 2012-13 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को याद करते हुए कहा कि उस समय बड़े स्तर पर बदलाव की मांग उठी थी। आंदोलन के बाद सरकार भी बदली, लेकिन उनके अनुसार लगभग 12 साल बाद भ्रष्टाचार और अन्याय अलग-अलग रूपों में फिर बड़ी चुनौती बनकर सामने हैं।
उन्होंने कहा कि केवल सरकार बदलने से स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। इसके लिए ऐसी राजनीतिक व्यवस्था की जरूरत है जिसमें बेहतर चरित्र, ईमानदारी और देशहित को प्राथमिकता देने वाले लोग नेतृत्व में आएं।
‘नेता सही होंगे तो देश सही दिशा में जाएगा’
वांगचुक ने राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि देश को सही दिशा में ले जाने के लिए अच्छे नेताओं का चुनाव जरूरी है। उनके मुताबिक, जब नेतृत्व सही दिशा में होगा तो देश भी सही रास्ते पर आगे बढ़ सकेगा।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश में आज भी कई ऐसे नेता हैं जो ईमानदारी और सिद्धांतों के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे नेताओं के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी चिंता व्यवस्था में व्यापक सुधार को लेकर है।
आपराधिक मामलों वाले सांसदों पर चिंता
वांगचुक ने संसद में आपराधिक मामलों का सामना कर रहे सांसदों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि करीब आधे सांसदों पर आपराधिक मामले हैं और करीब एक तिहाई सांसदों पर हत्या, दुष्कर्म और अपहरण जैसे गंभीर आरोप हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी एक राजनीतिक दल या सत्ता पक्ष-विपक्ष को निशाना नहीं बना रहे हैं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नेतृत्व की गुणवत्ता को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।
देश के ‘बेस्ट माइंड्स’ को जोड़ने की कोशिश
वांगचुक ने कहा कि वह देश के ऐसे ‘बेस्ट माइंड्स’ को एक साथ लाना चाहते हैं, जो भारत के भविष्य को लेकर गंभीरता से सोचते हों और समाधान देने की क्षमता रखते हों। हालांकि, उन्होंने केवल बुद्धिजीवियों या विचार रखने वाले लोगों तक अपनी अपील सीमित नहीं रखी।
उन्होंने लोगों से ऐसे व्यक्तियों के नाम सुझाने को कहा जो निःस्वार्थ, निर्भीक, चरित्रवान और सिद्धांतों पर चलने वाले हों तथा देश के लिए कुछ करने की क्षमता रखते हों।
हर राज्य से योग्य लोगों के नाम सुझाने की अपील
वांगचुक ने कहा कि लद्दाख में रहने के कारण उनके लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद ऐसे लोगों की पहचान करना आसान नहीं है। इसलिए उन्होंने देशवासियों से अपने-अपने राज्य और क्षेत्र से कम से कम एक ऐसे व्यक्ति का नाम सुझाने की अपील की।
उनका उद्देश्य ऐसे लोगों को एक मंच पर लाना है, जो राजनीति से ऊपर उठकर देश के भविष्य, शिक्षा, प्रशासन और व्यवस्था में सुधार के लिए अपनी सोच और सुझाव साझा कर सकें।
‘क्या भारत दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन शुरू कर सकता है?’
अपने वीडियो संदेश में वांगचुक ने देशवासियों के सामने सवाल रखा कि क्या मिलकर भारत का दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन शुरू किया जा सकता है। उन्होंने इसे किसी हिंसक आंदोलन के रूप में नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण और सकारात्मक बदलाव की दिशा में नागरिक भागीदारी के रूप में प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि वह ऐसे लोगों के साथ देश के विभिन्न राज्यों और शहरों में जाकर संवाद करना चाहते हैं और लोगों से भारत के भविष्य को लेकर उनके विचार और सुझाव जानना चाहते हैं।
स्वतंत्रता दिवस पर मांगी ‘विशेष भेंट’
वांगचुक ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशवासियों से एक अलग तरह की ‘भेंट’ मांगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने क्षेत्र से ऐसे योग्य, ईमानदार और निःस्वार्थ व्यक्ति का नाम सुझाएं, जो देश के भविष्य के लिए योगदान देने की क्षमता रखता हो।
उनकी अपील का केंद्र देश के राजनीतिक नेतृत्व और व्यवस्था में शांतिपूर्ण बदलाव की आवश्यकता है। अब देखना होगा कि उनकी इस अपील पर देशभर से कैसी प्रतिक्रिया सामने आती है और उनके द्वारा सुझाए गए संवाद एवं नागरिक सहभागिता के प्रयास किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।
