SIR प्रक्रिया पूरी होते ही मध्यप्रदेश में प्रशासनिक सर्जरी की तैयारी, 15 से अधिक कलेक्टरों के तबादले संभावित
भोपाल: मध्यप्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही राज्य सरकार बड़े प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी में जुट गई है। माना जा रहा है कि विधानसभा के बजट सत्र के समापन के तुरंत बाद 15 से अधिक जिलों के कलेक्टरों के तबादले किए जा सकते हैं। 6 मार्च को सत्र समाप्त होने के साथ ही मंत्रालय से लेकर जिला स्तर तक व्यापक बदलावों की सूची जारी होने की संभावना है। इस संभावित प्रशासनिक सर्जरी को लेकर पूरे प्रशासनिक अमले में हलचल तेज हो गई है।
SIR के कारण लगी थी तबादलों पर रोक
दरअसल, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया के चलते पिछले कई महीनों से कलेक्टरों के तबादलों पर अघोषित रोक लगी हुई थी। अक्टूबर से शुरू हुई इस प्रक्रिया के दौरान राज्य सरकार बिना चुनाव आयोग की अनुमति के नए तबादले या पदस्थापनाएं नहीं कर सकती थी। शनिवार को मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के साथ ही SIR की प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी हो गई, जिसके बाद प्रशासनिक बदलाव का रास्ता साफ हो गया है।
SIR के दौरान केवल एक बड़ा बदलाव देखने को मिला था। जनवरी में अशोकनगर कलेक्टर आदित्य सिंह का तबादला किया गया था और उनकी जगह साकेत मालवीय को नियुक्त किया गया। इसके लिए सरकार ने तीन अधिकारियों के नामों का पैनल चुनाव आयोग को भेजा था और अनुमति मिलने के बाद ही पदस्थापना की गई थी। अब जबकि SIR की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है, सरकार व्यापक स्तर पर बदलाव करने के मूड में नजर आ रही है।
मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के बीच चर्चा
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन के बीच कलेक्टरों की नई पदस्थापना को लेकर प्रारंभिक चर्चा हो चुकी है। बताया जा रहा है कि कुछ जिलों के कलेक्टरों की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक प्रदर्शन को लेकर शासन स्तर पर असंतोष है। हाल ही में आयोजित कलेक्टर-कमिश्नर सम्मेलन में मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों के पालन की समीक्षा भी इस निर्णय का आधार बनी है।
मुख्य सचिव अनुराग जैन दो बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कलेक्टरों और कमिश्नरों के कार्यों की समीक्षा कर चुके हैं। शासन स्तर पर विकास कार्यों की प्रगति, कानून-व्यवस्था की स्थिति, राजस्व वसूली, जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और शिकायत निवारण व्यवस्था जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
सामान्य प्रशासन विभाग ने तैयार की रिपोर्ट
सामान्य प्रशासन विभाग ने कलेक्टरों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की प्रदर्शन रिपोर्ट तैयार कर ली है। जिन अधिकारियों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया गया है या जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायतें शासन तक पहुंची हैं, उनके तबादले लगभग तय माने जा रहे हैं।
मैदानी स्तर पर केवल कलेक्टर ही नहीं, बल्कि अपर कलेक्टरों में भी बड़े पैमाने पर बदलाव हो सकता है। जिन अधिकारियों को एक ही स्थान पर ढाई वर्ष से अधिक समय हो चुका है, उन्हें भी स्थानांतरित किए जाने की संभावना है। इसके अलावा मंत्रालय स्तर पर भी कुछ सचिव स्तर के अधिकारियों को नए विभाग सौंपे जा सकते हैं।
पदोन्नति और संवर्ग प्रबंधन की चुनौती
एक जनवरी 2026 से 71 आईएएस अधिकारियों को पदोन्नति दी गई है। इनमें 11 जिलों के कलेक्टर अपर सचिव पद पर प्रमोट हुए हैं। हालांकि सरकार तत्काल उन्हें हटाने के बजाय कुछ मामलों में छूट दे सकती है, ताकि प्रशासनिक संतुलन बना रहे।
प्रदेश में 44 आईएएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं, जिससे राज्य में संवर्ग प्रबंधन पर दबाव बना हुआ है। प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारियों की कमी के कारण कई महत्वपूर्ण विभाग सचिव स्तर के अधिकारियों को सौंपे गए हैं। ऐसे में आगामी प्रशासनिक सर्जरी केवल कलेक्टरों के तबादले तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मंत्रालय और वरिष्ठ प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
बजट सत्र के बाद जारी हो सकती है सूची
6 मार्च को विधानसभा का बजट सत्र समाप्त होने के बाद कभी भी तबादलों की सूची जारी की जा सकती है। प्रशासनिक हलकों में इस संभावित फेरबदल को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है। जिन जिलों में विकास कार्यों की रफ्तार धीमी पाई गई है या जहां शासन की प्राथमिक योजनाओं के क्रियान्वयन में कमी रही है, वहां बदलाव की संभावना अधिक मानी जा रही है।
राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सरकार की कार्यशैली को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। मुख्यमंत्री द्वारा हाल के महीनों में प्रशासनिक जवाबदेही और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली पर विशेष जोर दिया गया है।
व्यापक प्रशासनिक बदलाव की संभावना
सूत्रों का कहना है कि यह केवल नियमित तबादला प्रक्रिया नहीं होगी, बल्कि व्यापक प्रशासनिक पुनर्संरचना का हिस्सा हो सकती है। कुछ जिलों में नए अधिकारियों की तैनाती के जरिए सरकार विकास योजनाओं की गति तेज करना चाहती है।
इसके साथ ही भ्रष्टाचार की शिकायतों और प्रशासनिक ढिलाई पर सख्त संदेश देने की भी तैयारी है। शासन स्तर पर यह स्पष्ट संकेत दिए जा रहे हैं कि प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन ही आगे की पदस्थापनाओं का आधार होगा।
निष्कर्ष
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी होते ही मध्यप्रदेश में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। 15 से अधिक कलेक्टरों के तबादले की संभावना के बीच पूरा प्रशासनिक अमला आगामी सूची का इंतजार कर रहा है। बजट सत्र के बाद जारी होने वाली सूची प्रदेश की प्रशासनिक दिशा और प्राथमिकताओं को स्पष्ट करेगी।
यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस प्रशासनिक सर्जरी के जरिए किस तरह शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाती है।
