सायला में श्री सूरि राजेन्द्र संघोदय चातुर्मास 2026 जारी है। आचार्य श्रीमद् विजय जयरत्नसूरीश्वरजी म.सा. के सानिध्य में मासक्षमण, नवकार आराधना, पक्खीधर और पर्युषण पर्व सहित विविध आयोजन होंगे।
सायला श्री सूरि राजेन्द्र संघोदय चातुर्मास 2026: 8 सितंबर से पर्युषण पर्व, होंगे विविध धार्मिक आयोजन
सायला (रिपोर्टर ब्रजेश बोहरा)। सायला श्री सूरि राजेन्द्र संघोदय चातुर्मास 2026 के शुभ अवसर पर दियावट पट्टी की दिव्यधरा सायला नगरी में श्री नमस्कार महामंत्र सहित विभिन्न धार्मिक एवं चातुर्मासिक आराधनाओं का आयोजन किया जा रहा है। चातुर्मास के दौरान साधु-साध्वी भगवंतों के सानिध्य में श्रद्धालुओं को विविध धार्मिक आराधनाओं में सहभागी बनने का अवसर मिलेगा।
सायला में चातुर्मास को लेकर उत्साह
दियावट पट्टी की सायला नगरी में आयोजित सायला श्री सूरि राजेन्द्र संघोदय चातुर्मास 2026 को लेकर श्रीसंघ एवं श्रद्धालुओं में उत्साह का वातावरण है। चातुर्मास अवधि में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों और आराधनाओं का आयोजन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार किया जाएगा।
युग प्रभावक पुण्यसम्राट गुरुदेव श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी म.सा. के पट्टधर एवं कृपासिन्धु संयमवयः स्थविर योगिराज श्री शान्ति विजयजी म.सा. के शिष्य परम पूज्य भाण्डवपुर तीर्थोद्धारक, मरुधरमणि, सूरिमंत्र आराधक आचार्यदेव श्रीमद् विजय जयरत्न सूरीश्वरजी म.सा. आदि श्रमण-श्रमणीवृन्द का चातुर्मास में शुभ सानिध्य एवं आशीर्वाद श्रद्धालुओं को प्राप्त होगा।
चातुर्मास में होंगे प्रमुख धार्मिक आयोजन
आयोजक श्री सौधर्म बृहत्तपोगच्छीय त्रिस्तुतिक जैन श्वेताम्बर संघ, सायला के अनुसार चातुर्मास के दौरान अलग-अलग धार्मिक आराधनाओं का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए मासक्षमण तप, नवकार आराधना, पक्खीधर सहित पर्युषण पर्व और अन्य धार्मिक कार्यक्रम विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे।जैन परंपरा में पर्युषण पर्व को आध्यात्मिक साधना, आत्मचिंतन और धार्मिक आराधना से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है।
17 अगस्त से मासक्षमण तप
चातुर्मासिक धार्मिक कार्यक्रमों के तहत 17 अगस्त 2026 से मासक्षमण तप का शुभारंभ होगा। इसके बाद 20 अगस्त से नवकार आराधना प्रारंभ होगी। श्रद्धालु निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार इन धार्मिक आराधनाओं में सहभागी बनकर धर्मलाभ प्राप्त करेंगे।
1 सितंबर से पक्खीधर आराधना
आयोजक श्रीसंघ के अनुसार 1 सितंबर 2026 से पक्खीधर यानी 15 उपवास का प्रारंभ होगा। चातुर्मास के दौरान होने वाली इन धार्मिक आराधनाओं को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है।
8 सितंबर से पर्युषण पर्व
इसके बाद जैन धर्म के प्रमुख पर्व पर्युषण पर्व का शुभारंभ 8 सितंबर 2026 को होगा। पर्युषण के दौरान धार्मिक आराधना, साधना और आध्यात्मिक गतिविधियों के माध्यम से श्रद्धालु धर्म से जुड़ते हैं। जैन धार्मिक परंपरा में पर्युषण को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नयन से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है।
12 सितंबर को वीरजन्म वांचन
12 सितंबर 2026 को श्री वीरजन्म वांचन का आयोजन श्रद्धा एवं भक्ति के साथ किया जाएगा। इसी अवसर पर श्री धनचंद्रसूरि की 104वीं पुण्यतिथि भी श्रद्धापूर्वक मनाई जाएगी।
यह आयोजन चातुर्मास के धार्मिक कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण रहेगा और इसमें श्रद्धालुओं की सहभागिता रहेगी।
15 सितंबर को साँवत्सरिक महापर्व
चातुर्मास के निर्धारित धार्मिक कार्यक्रमों के क्रम में 15 सितंबर 2026 को श्री साँवत्सरिक महापर्व का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर श्रद्धालु धार्मिक आराधना में सहभागी बनेंगे।
जैन परंपरा में साँवत्सरिक और पर्युषण से जुड़े धार्मिक अवसर आत्मचिंतन, क्षमा और आध्यात्मिक साधना की भावना से जुड़े माने जाते हैं।
श्रद्धालुओं से सायला पहुंचने का आह्वान
श्रीसंघ की ओर से समस्त श्रद्धालुओं से भावभरा आह्वान किया गया है कि वे चातुर्मास अवधि में सायला पधारें और साधु-साध्वी भगवंतों के दर्शन-वंदन का लाभ लें। साथ ही विभिन्न धार्मिक आराधनाओं में सहभागी बनकर धर्मलाभ प्राप्त करें।चातुर्मास के दौरान साधु-साध्वी भगवंतों का सानिध्य श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
आयोजन स्थल और श्रीसंघ की तैयारियां
मीडिया प्रभारी ब्रजेश बोहरा ने बताया कि चातुर्मास का आयोजन श्री राजेन्द्रसूरि जैन आराधना भवन, श्री पार्श्वनाथ जैन मंदिर के पास, सायला में होगा।चातुर्मास को लेकर श्रीसंघ में उत्साह का वातावरण है। श्रद्धालु विभिन्न आराधनाओं में सहभागी बनने की तैयारियों में जुटे हुए हैं। आयोजक श्रीसंघ की ओर से अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागी बनने की अपील की गई है।
