भोपाल-मुंबई में SAGA Group पर ED की बड़ी कार्रवाई, ₹1.53 करोड़ कैश और ₹5.25 करोड़ का सोना-चांदी जब्त; ₹30 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति फ्रीज
SAGA Group Ponzi Scam: कथित ₹10,000 करोड़ के SAGA Group पोंजी घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मध्य प्रदेश के भोपाल और महाराष्ट्र के मुंबई में बड़ी कार्रवाई की है। ED की नई दिल्ली स्थित हेडक्वार्टर यूनिट ने 13 से 16 अगस्त 2026 के बीच SAGA Group से जुड़े लोगों और सहयोगियों के कई आवासीय और कारोबारी ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी के मुताबिक, इस कार्रवाई में बड़ी मात्रा में नकदी, विदेशी मुद्रा, सोना-चांदी, महंगी गाड़ियां और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं।
तलाशी के दौरान ED ने ₹1.53 करोड़ नकद, करीब ₹35 लाख की विदेशी मुद्रा और लगभग ₹5.25 करोड़ मूल्य के सोने के आभूषण व चांदी जब्त किए हैं। इसके अलावा नौ हाई-एंड वाहनों को भी जब्त किया गया है। एजेंसी ने कथित अपराध से अर्जित रकम से जुड़ी ₹30 करोड़ से अधिक की वित्तीय संपत्तियां भी फ्रीज की हैं। इनमें सूचीबद्ध शेयर और सिक्योरिटीज, म्यूचुअल फंड, LIC पॉलिसियां और बैंक बैलेंस शामिल हैं।
13 से 16 अगस्त तक चली ED की कार्रवाई
ED के अनुसार यह कार्रवाई Prevention of Money Laundering Act (PMLA), 2002 के तहत की गई। भोपाल और मुंबई में SAGA Group के कथित प्रमुख नियंत्रक समीर अग्रवाल और उनके सहयोगियों से जुड़े परिसरों की तलाशी ली गई। जांच के दौरान एजेंसी को ऐसे दस्तावेज भी मिले हैं, जिन्हें कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क और निवेशकों से जुटाई गई रकम के प्रवाह को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ED की जांच कई राज्यों में दर्ज FIR के आधार पर आगे बढ़ रही है। इनमें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों में Loni Urban Multi-State Credit & Thrift Co-operative Society (LUCC) तथा उससे जुड़ी सहकारी संस्थाओं के खिलाफ दर्ज मामले शामिल हैं। एजेंसी का आरोप है कि इन संस्थाओं के जरिए आम लोगों को आकर्षक निवेश योजनाओं का लालच दिया गया।
ज्यादा रिटर्न का लालच देकर निवेश जुटाने का आरोप
जांच एजेंसी के मुताबिक, SAGA Group और उससे संबद्ध संस्थाओं ने कथित तौर पर वर्ष 2009 से लोगों को Recurring Deposit, Fixed Deposit और Monthly Income जैसी योजनाओं में निवेश के लिए प्रेरित किया। निवेशकों को कथित तौर पर ऊंचे और निश्चित रिटर्न का भरोसा दिया जाता था।
ED का आरोप है कि लोगों को यह विश्वास दिलाया गया कि उनका निवेश तीन से पांच साल में दो से तीन गुना तक हो सकता है। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कार जैसे इनाम देने का दावा भी किया गया। एजेंसी के मुताबिक, इन वादों के पीछे ऐसी कोई वास्तविक कारोबारी गतिविधि नहीं थी, जिससे इतने ऊंचे रिटर्न का भुगतान संभव हो।
₹10 हजार करोड़ से ज्यादा जुटाने का आरोप
ED के मुताबिक, कथित फर्जी बैंकिंग व्यवस्था और अवास्तविक रिटर्न के वादों के जरिए SAGA Group ने जनता से ₹10,000 करोड़ से अधिक की रकम जुटाई। एजेंसी का कहना है कि शुरुआती दौर में कुछ निवेशकों को भुगतान किया गया, लेकिन बाद में जुटाई गई रकम का बड़ा हिस्सा कथित तौर पर समीर अग्रवाल और उनके सहयोगियों द्वारा निजी इस्तेमाल, संपत्तियों में निवेश और एजेंटों को कमीशन देने में लगाया गया।
जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि जनता से जुटाई गई रकम का बड़ा हिस्सा नकद में लिया जाता था। इसके बाद रकम को विभिन्न माध्यमों से आगे भेजकर कथित तौर पर संपत्तियों और दूसरी परिसंपत्तियों में लगाया गया।
50 से ज्यादा शेल कंपनियों का नेटवर्क
जांच के दौरान एजेंसी ने कथित तौर पर 50 से अधिक शेल कंपनियों के नेटवर्क का पता लगाया है। इन कंपनियों का इस्तेमाल कथित तौर पर धन को अलग-अलग खातों और संस्थाओं के बीच ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, मुंबई में कई शेल कंपनियों के बैंक खातों के जरिए निवेशकों से जुटाई गई रकम को प्राप्त करने और अलग-अलग लेनदेन में घुमाने का आरोप है।
ED का आरोप है कि रकम को देश और विदेश में चल-अचल संपत्तियों में लगाने के लिए शेल कंपनियों और कथित हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इन सभी आरोपों की जांच अभी जारी है।
SAGA Group के CMD समीर अग्रवाल फरार
ED के मुताबिक, समीर अग्रवाल, जिन्हें SAGA Group का CMD और प्रमुख नियंत्रक बताया गया है, फिलहाल फरार हैं और एजेंसी के अनुसार उन्होंने देश छोड़ दिया है। इससे पहले भी इस मामले में जांच आगे बढ़ चुकी है। एक प्रमुख समूह अधिकारी रवि शंकर तिवारी को 14 जुलाई को PMLA के तहत गिरफ्तार किए जाने और 24 जुलाई को विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई है।
जांच अभी जारी
ED की ताजा कार्रवाई के बाद इस कथित पोंजी घोटाले में जांच और तेज होने की संभावना है। एजेंसी अब जब्त दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खातों, निवेश और कथित शेल कंपनियों के बीच हुए लेनदेन की जांच कर रही है।
फिलहाल ED की कार्रवाई और आरोप जांच का हिस्सा हैं। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।
