जीवन में धर्म को ठुकराने वाला डर-डर की ठोकर खाता है: साध्वी विरागरसा श्री जी महाराज साहब
महिदपुर रोड स्थित श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में चातुर्मास प्रवचन
महिदपुर रोड। श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के लिए विराजित परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब एवं साध्वी विरागरसा श्री जी महाराज साहब ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, संयम और आत्मकल्याण का संदेश दिया। धर्मसभा में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे और साध्वीश्री के मंगलकारी प्रवचनों का लाभ प्राप्त किया।
साध्वी विरागरसा श्री जी महाराज साहब ने कहा कि जीवन में जो व्यक्ति धर्म को ठुकराता है, वह डर-डर की ठोकर खाता है। मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसे प्राप्त करने के बाद प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आत्मा के हित और कल्याण के लिए चिंतन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसार के भौतिक सुख क्षणिक होते हैं, जबकि धर्म व्यक्ति को स्थायी शांति और आत्मिक आनंद प्रदान करता है।
धर्म ही जीवन को सही दिशा प्रदान करता है
धर्मसभा में साध्वीश्री ने कहा कि धर्म केवल धार्मिक क्रियाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक श्रेष्ठ कला है। धर्म व्यक्ति को संयम, सदाचार, अहिंसा और आत्मनियंत्रण का मार्ग दिखाता है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भोजन आवश्यक है, उसी प्रकार आत्मा की शुद्धि और विकास के लिए धर्म आवश्यक है। मनुष्य को अपने जीवन में अच्छे कर्मों का संचय करना चाहिए और हमेशा धर्म के मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए।
साध्वीश्री ने श्रद्धालुओं को प्रेरणा देते हुए कहा कि धर्म की रक्षा के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए। यदि हम धर्म की रक्षा करेंगे तो धर्म भी हमारी रक्षा करेगा। धर्म के प्रभाव से ही व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।
तप, त्याग और साधना का बताया महत्व
साध्वी विरागरसा श्री जी महाराज साहब ने जैन धर्म में तप और साधना के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे धार्मिक संकल्प भी व्यक्ति के जीवन में बड़े आध्यात्मिक परिवर्तन ला सकते हैं।
उन्होंने बताया कि एक नवकारसी के पच्चखाण से 100 वर्ष, एक आयंबिल तप के पच्चखाण से एक हजार करोड़ वर्ष और एक उपवास के पच्चखाण से दस हजार करोड़ वर्ष के नरक आयुष्य का क्षय होता है।
साध्वीश्री ने कहा कि तपस्या और संयम केवल शरीर को कष्ट देने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आत्मा को शुद्ध करने और कर्मों के बंधन को कम करने का साधन है। धार्मिक साधना के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन को श्रेष्ठ बना सकता है।
दुर्लभ मानव जीवन का सदुपयोग करने का संदेश
प्रवचन के दौरान साध्वीश्री ने कहा कि मनुष्य भव बहुत कठिनाई से प्राप्त होता है। इसलिए इसे केवल सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति में व्यर्थ नहीं करना चाहिए, बल्कि आत्मा के कल्याण के लिए प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जीवन में धन, प्रतिष्ठा और सुविधाएं आवश्यक हैं, लेकिन इनके साथ धर्म और आध्यात्मिकता का होना भी जरूरी है। धर्म के बिना जीवन अधूरा रहता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित रूप से धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने, जिनवाणी का श्रवण करने और संयमित जीवन जीने का आह्वान किया।

चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन हो रहे प्रवचन
जैन समाज मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने जानकारी देते हुए बताया कि श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के अवसर पर प्रतिदिन सुबह 9:15 बजे से 10:15 बजे तक साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब के मंगलकारी प्रवचन आयोजित किए जा रहे हैं।
इन प्रवचनों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और जिनवाणी रूपी ज्ञान की गंगा में स्नान कर अपने जीवन को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बना रहे हैं।
चातुर्मास के दौरान धार्मिक प्रवचन, आराधना, स्वाध्याय और विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। समाजजन इन कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक भाग लेकर धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
भंडारी परिवार ने लिया साधार्मिक भक्ति का लाभ
शुक्रवार को साधार्मिक भक्ति प्रभावना एवं संपूर्ण दिवस के धार्मिक आयोजन का लाभ पारसमल, निलेश कुमार एवं अक्षत कुमार भंडारी परिवार खरवा वाला द्वारा लिया गया।
इस अवसर पर परिवार की ओर से धार्मिक आयोजन में सहयोग किया गया और उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी धर्म आराधना का लाभ प्राप्त किया।
समाज के सभी वर्गों की रही सहभागिता
मंगलकारी धर्मसभा में समाज के सभी वर्गों के लोगों ने भाग लिया। नवयुवक, महिला मंडल, बहू परिषद, तरुण परिषद और बालिका परिषद सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
सभी श्रद्धालुओं ने साध्वीश्री के प्रवचनों को ध्यानपूर्वक सुना और जीवन में धर्म, संयम तथा सदाचार अपनाने का संकल्प लिया।
धर्म मार्ग पर चलने से होता है आत्मकल्याण
साध्वीश्री ने अपने प्रवचन के अंत में कहा कि धर्म व्यक्ति को भय से मुक्त करता है और जीवन में सही मार्ग दिखाता है। धर्म के प्रभाव से व्यक्ति न केवल अपने जीवन को बेहतर बनाता है, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणादायी बनता है।
उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे धर्म के प्रति अपनी आस्था को मजबूत करें और नियमित रूप से आध्यात्मिक साधना में समय लगाएं। धर्म और संयम के मार्ग पर चलकर ही आत्मा का वास्तविक कल्याण संभव है।
