राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: चंपत राय और अनिल मिश्रा आरोपी नहीं, चार्जशीट में गवाह
अयोध्या। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित चोरी और हेराफेरी के मामले में पुलिस ने करीब 74 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच में CCTV फुटेज, बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल चैट, कॉल डिटेल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ी की कड़ियों को जोड़ा गया है।
चार्जशीट के अनुसार, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आरोपी नहीं बनाया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इन लोगों के नाम गवाहों की सूची में शामिल हैं। चार्जशीट में कुल 133 गवाहों का उल्लेख किया गया है।
जून में सामने आया था चढ़ावे की चोरी का मामला
जांच के मुताबिक, 3 जून 2026 को चढ़ावे की रकम की गिनती के दौरान कथित चोरी का मामला सामने आया था। इसके बाद 4 जून को भी चोरी की एक अन्य घटना पकड़ी गई। जांच एजेंसी के अनुसार, CCTV फुटेज की पड़ताल में चढ़ावे की रकम को कथित तौर पर हटाने या छिपाने की 105 घटनाओं की पहचान हुई।
मामले में गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, जांच के दौरान सात आरोपियों से करीब 79.8 लाख रुपये की बरामदगी की गई। चार्जशीट में आरोपियों पर आपराधिक विश्वासघात समेत भ्रष्टाचार निवारण कानून की धाराओं के तहत कार्रवाई का उल्लेख है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा से भी हुई थी पूछताछ
मामले की जांच के शुरुआती चरण में चंपत राय और अनिल मिश्रा से भी पुलिस ने पूछताछ की थी। जून में FIR दर्ज होने और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद दोनों ने ट्रस्ट में अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।
अब दाखिल चार्जशीट में दोनों को आरोपी बनाए जाने के बजाय गवाहों की सूची में रखा गया है। इसका मतलब यह है कि इस चार्जशीट के आधार पर उन पर इस मामले में आरोपित के तौर पर मुकदमा नहीं चलाया गया है।
जांच में CCTV फुटेज को अहम सबूत माना गया
SIT और पुलिस की जांच में मंदिर परिसर के चढ़ावा गिनती केंद्र के CCTV फुटेज को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, कथित तौर पर चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी बैंक में जमा होने से पहले ही गिनती केंद्र में हुई। बाद में रकम को बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया में चोरी होने का कोई सबूत जांच में सामने नहीं आने की बात चार्जशीट से जुड़ी रिपोर्टों में कही गई है।
इस मामले की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई थी। अदालत को बताया गया था कि पहली गिरफ्तारी के 90 दिन पूरे होने से पहले चार्जशीट दाखिल करना जरूरी था। इसके बाद 23 सितंबर को आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई।
फिलहाल मामले में अदालत के समक्ष दाखिल चार्जशीट और उसमें दर्ज साक्ष्यों के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया चलेगी। चार्जशीट में किसी व्यक्ति को आरोपी बनाया जाना अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है; अंतिम निर्णय अदालत की प्रक्रिया के बाद होगा।
