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Ram Mandir चढ़ावा चोरी केस में डिजिटल सबूत मिले, WhatsApp चैट और फोटो-वीडियो से जांच तेज हुई

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Published On: 3 July 2026
Ram Mandir

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Ram Mandir Donation Scam: Digital Evidence Reveals WhatsApp Chats, 

प्रस्तावना: राम मंदिर चढ़ावा घोटाले में नया मोड़

अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच लगातार नए और चौंकाने वाले खुलासों के साथ आगे बढ़ रही है। ताजा अपडेट में पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन से महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत मिले हैं, जिनमें WhatsApp चैट, फोटो और वीडियो शामिल हैं।

इन साक्ष्यों को जांच एजेंसियां बेहद अहम मान रही हैं और इनकी अब फोरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क और लेनदेन की कड़ियों को जोड़ा जा सके।

डिजिटल सबूतों की बरामदगी: जांच में बड़ा सुराग

जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन से कई प्रकार के डिजिटल सबूत मिले हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • WhatsApp चैट्स
  • फोटो और वीडियो
  • डिलीट किए गए संदेशों के निशान
  • नकदी से जुड़ी तस्वीरें
  • पार्टी और मीटिंग की रिकॉर्डिंग

इन सबूतों के आधार पर जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि कथित चोरी की रकम का उपयोग कैसे किया गया और इसमें कौन-कौन शामिल था।

WhatsApp चैट से खुला नेटवर्क का राज

जांच सूत्रों के अनुसार, आरोपियों के बीच अधिकतर बातचीत WhatsApp के माध्यम से होती थी। इसका कारण यह बताया जा रहा है कि चढ़ावे की गिनती और प्रबंधन के दौरान खुले में बातचीत करना संभव नहीं था।

चैट्स में कथित तौर पर:

  • पैसे निकालने की योजना
  • रकम के बंटवारे का तरीका
  • लेनदेन का समय और स्थान
  • अंदरूनी तालमेल से जुड़े संदेश

जैसे संकेत मिले हैं। पुलिस इन चैट्स को केस की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मान रही है।

डिलीट डेटा रिकवर करने की कोशिश

जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि कुछ मोबाइल फोन से चैट्स और संदेश डिलीट किए गए थे।

अब:

  • फोरेंसिक विशेषज्ञ डिलीट डेटा रिकवर करने में लगे हैं
  • डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए छुपे संदेशों को पुनः प्राप्त करने की कोशिश की जा रही है
  • डेटा रिकवरी से पूरे नेटवर्क की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है

फोटो और वीडियो से बढ़ा शक

मोबाइल फोन से बरामद तस्वीरें और वीडियो भी जांच में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

इनमें:

  • कुछ लोग बड़ी मात्रा में नकदी के साथ दिखाई दे रहे हैं
  • कुछ वीडियो में आरोपी पार्टी करते हुए नजर आ रहे हैं
  • संदिग्ध गतिविधियों के दृश्य भी रिकॉर्ड हुए हैं

जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या यह नकदी मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी है।

SIT की पूछताछ और ट्रस्ट अधिकारियों से सवाल

मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अयोध्या में ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारियों से गहन पूछताछ की।

पूछताछ में शामिल रहे:

  • चंपत राय
  • अनिल मिश्रा
  • गोपाल राव

इनसे करीब चार घंटे तक सवाल-जवाब किए गए। इस दौरान चढ़ावे के ऑडिट और प्रबंधन से जुड़े दस्तावेज भी जांच टीम ने अपने कब्जे में लिए।

सूत्रों के अनुसार, कई सवालों के जवाब संतोषजनक नहीं मिले, जिसके बाद जांच और आगे बढ़ाने के संकेत दिए गए हैं।

ट्रस्ट से जुड़े जमीन सौदों पर भी जांच की नजर

जांच अब केवल चढ़ावे तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका दायरा बढ़कर ट्रस्ट से जुड़े जमीन सौदों तक पहुंच गया है।

पुलिस:

  • नजूल जमीन सौदों की जांच कर रही है
  • बिचौलियों की सूची तैयार की जा रही है
  • संदिग्ध लेनदेन की जानकारी जुटाई जा रही है

हालांकि फिलहाल मुख्य फोकस चढ़ावे की कथित चोरी पर ही है।

राजनीतिक बयानबाजी से गरमाया मामला

इस पूरे मामले ने राजनीतिक स्तर पर भी बहस छेड़ दी है।

7 जून:

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार पर निशाना साधते हुए जांच पर सवाल उठाए।

आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह ने भी मामले को गंभीर बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

10 जून:

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने मामले की जांच की पुष्टि करते हुए कहा कि दोषी पाए जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

13 जून:

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर SIT का गठन किया गया।

14 जून:

चढ़ावे की गिनती से जुड़े एक कर्मचारी के घर से बड़ी नकदी बरामद होने की खबर ने मामले को और गंभीर बना दिया।

17–18 जून:

एक पूर्व ड्राइवर से जुड़े व्यक्ति पर करोड़ों की संपत्ति बनाने और संदिग्ध लेनदेन के आरोप सामने आए।

22 जून:

जनहित याचिका दायर कर CBI या स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग की गई।

23–25 जून:

SIT ने प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी और FIR दर्ज की गई, जिससे जांच ने औपचारिक गति पकड़ ली।

26–30 जून:

इस्तीफे, छापेमारी और राजनीतिक हलचल के बीच मामला लगातार सुर्खियों में बना रहा।

1–2 जुलाई:

नई बरामदगी और संपत्ति रिकवरी की कार्रवाई ने जांच को और तेज कर दिया।

जांच एजेंसियों का फोकस क्या है?

वर्तमान में जांच का मुख्य फोकस निम्न बिंदुओं पर है:

  • डिजिटल सबूतों की फोरेंसिक जांच
  • पैसों की ट्रेल (Money Trail)
  • संदिग्ध संपत्तियों की पहचान
  • डिलीट डेटा रिकवरी
  • नेटवर्क में शामिल लोगों की पहचान

आगे क्या हो सकता है?

जांच एजेंसियों का मानना है कि:

  • आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं
  • कुछ और गिरफ्तारियां संभव हैं
  • वित्तीय लेनदेन का पूरा नेटवर्क सामने आ सकता है
  • राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई बढ़ सकती है

निष्कर्ष

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले ने अब एक बड़े डिजिटल और वित्तीय जांच केस का रूप ले लिया है। WhatsApp चैट, फोटो और वीडियो जैसे डिजिटल सबूतों ने जांच को नई दिशा दी है।

फिलहाल SIT, पुलिस और फोरेंसिक टीम मिलकर इस पूरे मामले की परतें खोलने में जुटी हैं। आने वाले दिनों में यह मामला और भी बड़े खुलासों की ओर बढ़ सकता है, जो पूरे प्रकरण की तस्वीर बदल सकता है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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