पुण्य सम्राट सूत्र ज्ञान अभिवृद्धि योजना के भव्य समापन समारोह में देशभर से 500 से अधिक ज्ञानार्थियों का सम्मान किया गया। गच्छाधिपति श्रीमद विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी महाराजा ने धर्म, संस्कार और पाठशाला शिक्षा के महत्व पर प्रेरणादायी संदेश दिया।
पुण्य सम्राट सूत्र ज्ञान अभिवृद्धि योजना में 500 ज्ञानार्थियों का सम्मान, धर्म संस्कारों का दिया गया संदेश
मेघनगर।
पुण्य सम्राट सूत्र ज्ञान अभिवृद्धि योजना के अंतर्गत आयोजित भव्य समापन समारोह श्री जयंतसेन म्यूजियम, मोहनखेड़ा महातीर्थ में धार्मिक वातावरण और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर देशभर से आए 500 से अधिक ज्ञानार्थियों ने सहभागिता कर धार्मिक अध्ययन, सूत्र ज्ञान एवं परीक्षाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
पुण्य सम्राट सूत्र ज्ञान अभिवृद्धि योजना का भव्य समापन
मोहनखेड़ा महातीर्थ में आयोजित पुण्य सम्राट सूत्र ज्ञान अभिवृद्धि योजना के समापन अवसर पर गच्छाधिपति हृदय सम्राट श्रीमद विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी महाराजा की पावन निश्रा प्राप्त हुई। कार्यक्रम में साधु-साध्वी भगवंतों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की।
धर्म का संस्कार जीवन बनाता है – गच्छाधिपति श्रीमद विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी
अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में गच्छाधिपति श्रीमद विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी महाराजा ने कहा कि—“धर्म का संस्कार ही जीवन का वास्तविक निर्माण करता है। बाल्यकाल में प्राप्त धार्मिक शिक्षा एवं संस्कार व्यक्ति को आदर्श जीवन की दिशा प्रदान करते हैं।”उन्होंने कहा कि प्रत्येक माता-पिता का यह कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से पाठशाला भेजें, ताकि उनमें धर्म, संस्कार, अनुशासन और सदाचार जैसे गुण विकसित हो सकें।
500 से अधिक ज्ञानार्थियों ने लिया भाग
पुण्य सम्राट सूत्र ज्ञान अभिवृद्धि योजना के अंतर्गत देशभर के 500 से अधिक ज्ञानार्थी मोहनखेड़ा पहुंचे। उन्होंने विभिन्न धार्मिक विषयों, सूत्र अध्ययन एवं ज्ञानवर्धक गतिविधियों में सहभागिता की।कार्यक्रम के दौरान ज्ञानार्थियों का भव्य बहुमान किया गया। इस सम्मान समारोह ने बच्चों में धार्मिक अध्ययन के प्रति नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार किया।
धार्मिक परीक्षाएं और सूत्र वाचन का आयोजन
समारोह में साधु-साध्वी भगवंतों ने बच्चों से विभिन्न सूत्रों का वाचन कराया तथा धार्मिक ज्ञान से संबंधित प्रश्न पूछे।इस दौरान—
- दो प्रतिक्रमण
- पंच प्रतिक्रमण
तक के ज्ञानार्थियों के टेस्ट एवं परीक्षाएं आयोजित की गईं।उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
मेघनगर के 09 ज्ञानार्थियों एवं शिक्षिकाओं का हुआ बहुमान
पुण्य सम्राट सूत्र ज्ञान अभिवृद्धि योजना में स्थानीय राज राजेन्द्र जयंतसेन पाठशाला के 09 ज्ञानार्थियों का विशेष सम्मान किया गया।सम्मानित ज्ञानार्थियों में शामिल रहे—
- केतन कावड़िया
- ऐशू कोठारी
- खुशी बाफना
- लब्धि कोठारी
- परी जैन
- रीति लोढ़ा
- आरवी रांका
- अवधि कोठारी
- चेरी जैन
इसके साथ ही पाठशाला शिक्षिकाओं—
- श्रीमती स्नेहलता कावड़िया
- श्रीमती निशा बाफना
- श्रीमती चेतना कोठारी
का भी सम्मान किया गया।
गांधीमुथा परिवार ने किया सम्मान
योजना लाभार्थी सायला निवासी श्री मांगीलालजी एवं श्रीमती प्रेमाबेन गांधीमुथा परिवार (राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय श्री राजेन्द्र जैन महिला परिषद) द्वारा सभी ज्ञानार्थियों एवं शिक्षिकाओं को मेमेंटो एवं नकद पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।
समाजजनों ने जताया हर्ष
स्थानीय बच्चों की उल्लेखनीय प्रगति पर श्रीसंघ अध्यक्ष शांतिलाल लोढ़ा, ज्ञान मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष मनोहर चौरडिया, परिषद अध्यक्ष देवेंद्र जैन सहित श्रीसंघ एवं समाजजनों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
निष्कर्ष
पुण्य सम्राट सूत्र ज्ञान अभिवृद्धि योजना केवल एक धार्मिक अध्ययन कार्यक्रम नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को धर्म, संस्कार, अनुशासन और सदाचार से जोड़ने का एक सशक्त अभियान बनकर उभरी है। मोहनखेड़ा महातीर्थ में आयोजित इस भव्य आयोजन ने यह संदेश दिया कि धार्मिक शिक्षा और संस्कार ही समाज एवं राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला हैं।

