शाहपुर कुंडी टोल पर जनता से ‘धोखा’: टैक्स पूरा, सड़क अधूरी; गड्ढों में गुम हुआ NH-46 का सफर
संदीप तायड़े, स्वराज वाणी सारनी/घोड़ाडोगरी
सारनी। “जनता पूरा टोल दे और बदले में उसे गड्ढों से भरी सड़क मिले, क्या हमारे देश में अब यही व्यवस्था बची है?” यह सवाल आज बैतूल-भोपाल हाईवे (NH-46) से गुजरने वाले हर उस यात्री की जुबान पर है, जो अपनी गाढ़ी कमाई से टोल टैक्स तो पूरा चुका रहा है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर सिर्फ हिचकोले और वाहनों का नुकसान झेलने को मजबूर है।
शाहपुर कुंडी टोल (एनएच-46) पर आज भी सड़क पूरी तरह मानकों के अनुरूप तैयार नहीं है। इसके बावजूद, टोल प्रबंधन द्वारा यात्रियों से पूरी दर पर वसूली बदस्तूर जारी है। भोपाल से बैतूल तक के सफर में अब यह समझना मुश्किल हो गया है कि सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क।
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इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू स्वयं टोल प्लाजा के भीतर से सामने आया है। शाहपुर कुंडी टोल प्लाजा के कुछ कर्मचारियों ने, नाम न छापने की शर्त पर, एक कड़वी सच्चाई उजागर की है। दबी जुबान में उनका कहना है कि “जब मीडिया में सड़क की खराब स्थिति और टोल वसूली के मुद्दे पर प्रमुखता से खबरें प्रकाशित होती हैं, तभी प्रशासन और निर्माण एजेंसी कुंभकर्णी नींद से जागते हैं और कम से कम सड़क की मरम्मत व रखरखाव पर ध्यान दिया जाता है।”
इतना ही नहीं, कर्मचारियों ने यह भी दावा किया है कि खराब सड़क और अन्य अव्यवस्थाओं के कारण उन्हें प्रतिदिन लगभग 2 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। विवादों और हादसों के डर से उन्हें रोजाना कैमरों की रिकॉर्डिंग भी बार-बार जांचनी पड़ती है, जिससे कार्य का दबाव और तनाव दोनों बढ़ गए हैं।
जवाबदेही किसकी? सुविधाओं के नाम पर सिर्फ रसीद!
जब आम नागरिकों से टोल टैक्स की पूरी पाई-पाई वसूली जा रही है, तो उन्हें सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और मानकों के अनुरूप सड़क उपलब्ध कराना राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और संबंधित एजेंसियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि सड़क अधूरी है, तो पूर्ण टोल वसूली क्यों? घटिया मरम्मत का टेंडर पास करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब? यात्रियों की सुरक्षा और उनके वाहनों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
यदि सड़क निर्माण मानकों के अनुरूप नहीं है, तो पूर्ण टोल वसूली न केवल अनैतिक है, बल्कि जनता के साथ सीधा धोखा है। अब वक्त आ गया है कि व्यवस्था जवाब दे—क्या यात्रियों को सुरक्षित सफर की सुविधा मिलेगी या उनके हाथ में सिर्फ टोल की रसीद थमा दी जाएगी? यह सवाल अब जवाब मांगता है, और संबंधित विभाग को अपनी जिम्मेदारी से भागने नहीं दिया जा सकता।
