दिग्विजय सिंह की यात्रा में बच्चों से नारे लगवाने के आरोप, NHRC ने जांच के दिए निर्देश
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दो सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी; यात्रा में बच्चों को शामिल करने के मामले में लगाए गए आरोपों की होगी जांच
भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की यात्रा में बच्चों को शामिल करने और उनसे राजनीतिक नारे लगवाने के आरोपों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लिया है। आयोग ने मामले की जांच के आदेश देते हुए संबंधित अधिकारियों से दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने को कहा है। फिलहाल यह मामला आरोपों और जांच के निर्देशों तक सीमित है। आयोग की ओर से आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
यात्रा से जुड़े घटनाक्रम को लेकर शिकायत की गई थी कि इसमें बच्चों को शामिल किया गया और उनसे राजनीतिक नारे लगवाए गए। शिकायत में बच्चों की भागीदारी और उनके कथित इस्तेमाल पर सवाल उठाए गए। इसी के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मामले को संज्ञान में लिया और जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश जारी किए।
दो सप्ताह में मांगी गई कार्रवाई रिपोर्ट
NHRC ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे मामले की जांच कर दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट आयोग को भेजें। इस रिपोर्ट में जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी दी जानी है। आयोग के निर्देश के बाद संबंधित अधिकारियों को शिकायत में लगाए गए आरोपों की पड़ताल करनी होगी।
कार्रवाई रिपोर्ट मांगे जाने का अर्थ यह है कि आयोग ने मामले पर संबंधित पक्षों से जानकारी तलब की है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि आरोप साबित हो गए हैं या किसी व्यक्ति के खिलाफ दोष तय कर दिया गया है। जांच और रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यात्रा में बच्चों की भूमिका क्या थी और शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
यात्रा में बच्चों की मौजूदगी पर उठे सवाल
शिकायत का प्रमुख बिंदु यात्रा में बच्चों की मौजूदगी और उनसे नारे लगवाए जाने का आरोप है। शिकायतकर्ता की ओर से इस बात पर आपत्ति जताई गई कि बच्चों को राजनीतिक गतिविधि में शामिल किया गया। इस मामले में आयोग अब संबंधित अधिकारियों से तथ्य जुटाने और घटनाक्रम की जांच करने को कह रहा है।
बच्चों से जुड़े मामलों में उनकी सुरक्षा, सहमति और हितों को ध्यान में रखते हुए तथ्यों की जांच की जाती है। इस प्रकरण में भी अधिकारियों को यह देखना होगा कि बच्चे किस परिस्थिति में यात्रा में शामिल हुए और क्या उनसे नारे लगवाए जाने का आरोप सही है। हालांकि, फिलहाल उपलब्ध जानकारी में बच्चों की संख्या, उनकी पहचान, यात्रा में उनकी भागीदारी की अवधि या नारे से संबंधित विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है।
शिकायत के आधार पर आयोग ने लिया संज्ञान
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को मिली शिकायत के बाद इस मामले पर कार्रवाई की गई। आयोग ने संबंधित अधिकारियों से जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। शिकायत में उठाए गए मुद्दों की गंभीरता को देखते हुए अब यह जांच का विषय होगा कि घटना के दौरान क्या हुआ और बच्चों की भागीदारी किस प्रकार रही।
किसी शिकायत पर संज्ञान लेना जांच की प्रक्रिया शुरू करने का कदम है। इससे यह नहीं माना जा सकता कि आरोपों की पुष्टि हो चुकी है। संबंधित पक्षों के जवाब, उपलब्ध साक्ष्य और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। आयोग रिपोर्ट मिलने के बाद मामले की समीक्षा कर सकता है और आवश्यक होने पर आगे के निर्देश जारी कर सकता है।
जांच के बाद साफ होगी स्थिति
अब संबंधित अधिकारियों की जांच और दो सप्ताह में भेजी जाने वाली कार्रवाई रिपोर्ट पर ध्यान रहेगा। रिपोर्ट में शिकायत के तथ्यों, बच्चों की मौजूदगी और कथित नारों से जुड़े पहलुओं की जानकारी दी जा सकती है। इसके बाद आयोग यह तय करेगा कि मामले में आगे किसी कार्रवाई या अतिरिक्त जांच की जरूरत है या नहीं।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की यात्रा को लेकर सामने आए इस मामले में अभी तक आयोग ने जांच के निर्देश और रिपोर्ट की समयसीमा तय की है। यात्रा में बच्चों को शामिल करने और उनसे राजनीतिक नारे लगवाने के आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। तब तक इसे शिकायत में लगाए गए आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
