चुनाव आयोग में अंदरूनी विवाद? वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त के खिलाफ दो चुनाव आयुक्तों ने की थी शिकायत
RTI से सामने आई जानकारी के अनुसार, बिना चर्चा अधिकारियों के कामकाज का बंटवारा बदलने का लगाया था आरोप; कैबिनेट सचिवालय की कार्रवाई का विवरण नहीं
नई दिल्ली। चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग के खिलाफ कैबिनेट सचिवालय में शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि गर्ग ने आयोग और संबंधित अधिकारियों से चर्चा किए बिना वरिष्ठ अधिकारियों के कामकाज का बंटवारा बदलने का आदेश जारी किया।
इस मामले में सामने आई जानकारी के मुताबिक, शिकायत के बाद कैबिनेट सचिवालय की ओर से कोई कार्रवाई किए जाने का विवरण उपलब्ध नहीं है। शिकायत में उठाए गए आरोप और उन पर कोई आधिकारिक निष्कर्ष—दोनों अलग-अलग बातें हैं। फिलहाल आरोपों पर मनीष गर्ग या चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई है।
कामकाज के बंटवारे को लेकर उठाया गया सवाल
शिकायत का मुख्य मुद्दा वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कामकाज के बंटवारे में बदलाव से जुड़ा था। चुनाव आयुक्तों का आरोप था कि यह बदलाव आयोग और संबंधित अधिकारियों से चर्चा किए बिना किया गया। शिकायत के अनुसार, वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग ने अधिकारियों की जिम्मेदारियों के बंटवारे में बदलाव का आदेश जारी किया था।
चुनाव आयोग जैसे संस्थान में अधिकारियों के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा प्रशासनिक कामकाज का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसलिए इस तरह के बदलाव को लेकर शिकायत का सामने आना आयोग की आंतरिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि बदलाव किन अधिकारियों या किन विशिष्ट कार्यक्षेत्रों से संबंधित था।
दो चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिवालय को लिखा था पत्र
RTI से मिली जानकारी के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिवालय में शिकायत दर्ज कराई थी। दोनों ने वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग के खिलाफ आरोपों को संबंधित अधिकारियों के कामकाज के बंटवारे में बदलाव से जोड़ा।
यह शिकायत चुनाव आयोग के भीतर प्रशासनिक निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर असहमति का संकेत देती है। शिकायत में यह सवाल उठाया गया था कि क्या अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव से पहले आयोग और संबंधित अधिकारियों से चर्चा की गई थी। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या उन पर जांच के निष्कर्षों की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
RTI जवाब से सामने आया मामला
यह पूरा मामला सूचना का अधिकार कानून के तहत मिली जानकारी के बाद सार्वजनिक चर्चा में आया। RTI के जरिए प्राप्त विवरण में शिकायत और उसके बाद की कार्रवाई से जुड़ी जानकारी सामने आई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शिकायत कैबिनेट सचिवालय तक पहुंची थी, लेकिन शिकायत मिलने के बाद किसी कार्रवाई का उल्लेख नहीं किया गया।
RTI से मिले जवाब में शिकायत के बाद कार्रवाई न होने की बात सामने आने से यह सवाल भी उठ रहा है कि मामले को आगे किस स्तर पर देखा गया। हालांकि, उपलब्ध विवरण में यह स्पष्ट नहीं है कि शिकायत पर कोई आंतरिक विचार-विमर्श हुआ या संबंधित पक्षों से जवाब मांगा गया। इस संबंध में अधिकृत जानकारी सामने आने पर मामले की स्थिति साफ हो सकती है।
आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस विवाद में शिकायतकर्ताओं की ओर से लगाए गए आरोपों की जानकारी ही सामने आई है। मनीष गर्ग की प्रतिक्रिया, चुनाव आयोग का पक्ष और कैबिनेट सचिवालय की ओर से शिकायत पर की गई किसी आगे की कार्रवाई का विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए शिकायत में लगाए गए आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
अब इस मामले में संबंधित अधिकारियों और चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी। यदि आयोग या कैबिनेट सचिवालय की ओर से कोई स्पष्टीकरण जारी किया जाता है, तो उससे यह समझने में मदद मिलेगी कि कामकाज के बंटवारे में बदलाव का निर्णय किस प्रक्रिया के तहत लिया गया था और शिकायत पर क्या कदम उठाए गए। फिलहाल RTI से सामने आई जानकारी ने चुनाव आयोग के प्रशासनिक कामकाज और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर चर्चा शुरू कर दी है।
