PM Modi ‘ड्रामा’ टिप्पणी विवाद: कांग्रेस का कड़ा पलटवार, बोली— असल मुद्दों पर चर्चा करें | Kharge attacks PM Modi | Parliament Winter Session
संसद के शीतकालीन सत्र (Winter Session) की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विपक्ष पर लगाए गए “ड्रामा करने” वाले आरोप ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। प्रधानमंत्री के इस बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी को “सबसे बड़ा ड्रामेबाज” तक कह दिया।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ, जब संसद सत्र शुरू होने से ठीक पहले प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया से कहा कि—
“संसद में ड्रामा नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए… विपक्ष ड्रामा करना चाहता है।”
प्रधानमंत्री के इसी बयान को लेकर कांग्रेस ने पलटवार की राजनीति तेज कर दी है और इसे जनता के असल मुद्दों से ध्यान भटकाना बताया है।
कांग्रेस का पलटवार: ‘प्रधानमंत्री सबसे बड़े ड्रामेबाज’
प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणी के तुरंत बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री असल मुद्दों से बचने के लिए “ड्रामेबाजी” कर रहे हैं।
खरगे ने आरोप लगाया कि—
“सरकार 11 सालों से संसदीय परंपराओं को रौंद रही है। असल मुद्दों पर चर्चा करने से बचने के लिए प्रधानमंत्री ड्रामेबाजी कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि भाजपा को जनता का ध्यान भटकाने वाले ऐसे नाटकों को छोड़कर बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक असमानता और देश के संसाधनों की लूट जैसे असल मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
खरगे ने पीएम मोदी को घेरते हुए आगे कहा—
“आम आदमी संकट में है। बेरोजगारी रिकॉर्ड स्तर पर है। महंगाई लोगों की कमर तोड़ रही है। लेकिन सत्ता में बैठे लोग ड्रामेबाजी कर रहे हैं, जिम्मेदारी से भाग रहे हैं।”
खरगे का बड़ा आरोप: ‘एसआईआर प्रक्रिया में काम के बोझ से BLO जान दे रहे’
कांग्रेस अध्यक्ष ने इलेक्ट्रोल रोल और SIR प्रक्रिया की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने कहा:
“SIR प्रक्रिया की अव्यवस्था के कारण BLO लगातार जान दे रहे हैं। विपक्ष इन मुद्दों को संसद में उठाएगा। वोट चोरी और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर संकट बहुत बड़ा मुद्दा है।”
प्रधानमंत्री मोदी का बयान: ‘यहां ड्रामा नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए’
सत्र शुरू होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि:
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“संसद चर्चा की जगह है, ड्रामा करने की नहीं।”
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“नारे लगाने के लिए पूरा देश पड़ा है, यहां नीति पर चर्चा होनी चाहिए।”
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“राजनीति में नकारात्मकता कुछ काम आ सकती है, लेकिन राष्ट्र निर्माण में सकारात्मक सोच जरूरी है।”
पीएम मोदी के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया।
कांग्रेस की प्रियंका गांधी का जवाब: ‘जनता के मुद्दों को उठाना ड्रामा नहीं’
प्रधानमंत्री की “ड्रामा” टिप्पणी का जवाब देते हुए कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा—
“चुनाव, SIR प्रक्रिया और प्रदूषण जैसे बड़े मुद्दों पर चर्चा संसद में ही होनी है। यह किसी प्रकार का ड्रामा नहीं है। लोकतांत्रिक ढंग से जनता के मुद्दों को उठाना विपक्ष का कर्तव्य है।”
उन्होंने कहा कि संसद बहस का मंच है, बहस को ड्रामा बताना लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ है।
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल का हमला: ‘खुद नारे लगवाते हैं, हमें नारे न लगाने की सलाह देते हैं’
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने भी प्रधानमंत्री पर व्यंग्य कसते हुए कहा कि:
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भाजपा खुद “मोदी-मोदी” के नारे लगवाती है।
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संसद में प्रवेश करते समय कई मंत्री और सांसद नारेबाजी कर चुके हैं।
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लेकिन अब वही पार्टी दूसरों को नारे न लगाने की सलाह दे रही है।
केसी वेणुगोपाल ने कहा कि नेहरू, इंदिरा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री जैसे पूर्व प्रधानमंत्रियों के समय कभी ऐसी नारेबाजी की संस्कृति नहीं थी।
उन्होंने कहा—
“विपक्ष का काम सरकार की आलोचना करना है। सरकार नारे लगाए और हम पर आरोप लगाए, यह दोहरा चरित्र है।”
कांग्रेस का बड़ा सवाल: क्या सरकार असल मुद्दों से भाग रही है?
कांग्रेस ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि:
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सरकार बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक असमानता पर चर्चा नहीं चाहती।
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विपक्ष जब भी बड़ा मुद्दा उठाता है, उसे “ड्रामा” कहकर खारिज किया जाता है।
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सरकार प्रश्नों से भाग रही है और संसद को एकतरफा मंच बनाना चाहती है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार ही नहीं, बल्कि कर्तव्य भी है।
विपक्ष की मांग: SIR प्रक्रिया, प्रदूषण और बेरोजगारी पर विस्तृत चर्चा हो
सत्र में विपक्ष निम्न मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहा है:
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SIR प्रक्रिया की अनियमितताएँ
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BLO पर बढ़ता काम का बोझ और मौत के मामले
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बढ़ती बेरोजगारी
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महंगाई पर नियंत्रण
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प्रदूषण और जलवायु संकट
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आर्थिक असमानताएँ और संसाधनों का निजीकरण
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वोटर लिस्ट और चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता
विपक्ष का कहना है कि ये मुद्दे “ड्रामा” नहीं बल्कि देश के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न हैं।
निष्कर्ष: संसद सत्र की शुरुआत में ही जुबानी जंग तेज
संसद का शीतकालीन सत्र अभी शुरू ही हुआ है और राजनीतिक माहौल पहले दिन से ही गरम है।
प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणी ने विपक्ष को आक्रामक किया है और कांग्रेस इसे एक बड़ा हथियार बनाकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि—
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क्या संसद में असल मुद्दों पर चर्चा होगी?
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या फिर यह सत्र भी आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक विवाद में उलझकर रह जाएगा?
