—Advertisement—

तीर्थयात्रा आत्मशांति और आत्मकल्याण का माध्यम: आचार्य उदारसागर

Author Picture
Published On: 24 October 2026
hhhhhhhhhhhhhhhh

—Advertisement—

तीर्थयात्रा आत्मशांति और आत्मकल्याण का माध्यम: आचार्य उदारसागर

ज्ञानतीर्थ में रविवार, 25 अक्टूबर को होगा भगवान आदिनाथ का वार्षिक महामस्तकाभिषेक

मनोज जैन नायक

मुरैना जीवन की भागदौड़, मानसिक तनाव और अनेक उलझनों के बीच मनुष्य अपने भीतर की शांति खोता जा रहा है। तीर्थयात्रा व्यक्ति को आत्मचिंतन करने, स्वयं को समझने और जीवन को सही दिशा देने का अवसर देती है। तीर्थों के दर्शन से आध्यात्मिक प्रेरणा मिलती है और श्रद्धालु संयम, धैर्य, सकारात्मकता तथा आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लेते हैं। यह विचार आचार्यश्री उदारसागर महाराज ने एबी रोड स्थित श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन ज्ञानतीर्थ क्षेत्र में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए।

आचार्यश्री ने कहा कि जैन दर्शन में तीर्थों का विशेष महत्व है। तीर्थंकरों की स्मृतियों और संतों की साधना से जुड़े तीर्थ धर्म, दर्शन और आत्मशुद्धि के केंद्र हैं। यहां आकर श्रद्धालुओं को भगवान के उपदेशों को समझने और अपने जीवन का मूल्यांकन करने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि तीर्थयात्रा तभी सार्थक होती है, जब दर्शन-वंदना के साथ भगवान के आदर्शों को भी व्यक्ति अपने आचरण में अपनाए।

दर्शन के साथ आचरण में भी आएं भगवान के आदर्श

आचार्यश्री उदारसागर महाराज ने कहा कि तीर्थयात्रा को केवल धार्मिक परंपरा या पुण्य अर्जन तक सीमित नहीं रखना चाहिए। यह अपने विचारों और व्यवहार में सुधार लाने का भी अवसर है। यात्रा के दौरान व्यक्ति कुछ समय के लिए सांसारिक चिंताओं से दूर होकर आत्मचिंतन कर सकता है। तीर्थों का शांत वातावरण, पैदल विहार और धार्मिक गतिविधियां मन में नई ऊर्जा का संचार करती हैं।

उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपनी आत्मा के स्वरूप को समझने का प्रयास करना चाहिए। जब श्रद्धालु तीर्थस्थलों पर जाकर भगवान के उपदेशों पर विचार करते हैं और उन्हें जीवन में उतारने का प्रयास करते हैं, तभी यात्रा का उद्देश्य पूरा होता है। तीर्थों की वंदना व्यक्ति को सदाचार और आत्मकल्याण की दिशा में प्रेरित करती है।

अहिंसा जीवन जीने की कला: मुनिश्री उपशांतसागर

hhhhhhhhhhhhhhhhhhhh 1hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh
धर्मसभा में मुनिश्री उपशांतसागर महाराज ने अहिंसा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैन धर्म की मूल भावना प्रत्येक जीव के प्रति करुणा, मैत्री और सम्मान रखना है। अहिंसा का अर्थ केवल किसी जीव को शारीरिक पीड़ा नहीं पहुंचाना नहीं है, बल्कि मन में द्वेष न रखना, वाणी से किसी को आहत न करना और व्यवहार में कठोरता से बचना भी है।

मुनिश्री ने कहा कि क्रोध, मान, छल और लोभ व्यक्ति के मानसिक संतुलन को प्रभावित करते हैं। ईर्ष्या और कटुता रखने वाला व्यक्ति स्वयं भी अशांत रहता है। इसके विपरीत क्षमा, विनम्रता, संयम और करुणा का भाव जीवन में शांति लाता है। अहिंसा का पालन बाहरी प्रदर्शन से नहीं, बल्कि अंतर्मन की निर्मलता और व्यवहार की शुद्धता से होता है।

उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा और स्वार्थ के कारण आपसी संबंधों में कटुता बढ़ रही है। ऐसे समय में भगवान महावीर के अहिंसा संदेश को अपनाना जरूरी है। प्रत्येक व्यक्ति को वाणी पर संयम रखना, क्रोध के स्थान पर क्षमा को चुनना और सभी जीवों के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए। विचारों की शुद्धता से परिवार और समाज में सद्भाव स्थापित हो सकता है। अहिंसा आत्मकल्याण के साथ विश्वशांति का भी आधार है।

आचार्य संघ ने किए भगवान आदिनाथ के दर्शन

शनिवार को आचार्यश्री उदारसागर महाराज एवं मुनिश्री उपशांतसागर महाराज ससंघ श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर से पदविहार करते हुए ज्ञानतीर्थ जिनालय पहुंचे। श्रद्धालुओं ने पाद-प्रक्षालन और आरती कर संतों का स्वागत किया।

इसके बाद आचार्यश्री और मुनिश्री ने 54 फुट ऊंची कृत्रिम पहाड़ी पर विराजमान मूलनायक भगवान आदिनाथ स्वामी के दर्शन-वंदन किए। मुनिराज प्रतिमा के सामने एकाग्रता से ध्यानमग्न रहे। दर्शन के बाद उन्होंने मंत्रोच्चार के साथ भगवान आदिनाथ को त्रिवार नमोस्तु निवेदित किया। जिनालय का वातावरण भक्तिमय रहा। ज्ञानतीर्थ परिसर में साधुचर्या से जुड़ी धार्मिक क्रियाएं पूरी करने के बाद आचार्य संघ ने रात्रि विश्राम किया।

प्रातः 9 बजे से शुरू होगा महामस्तकाभिषेक

hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh 1
श्री 1008 आदिनाथ दिगम्बर जैन ज्ञानतीर्थ क्षेत्र में रविवार, 25 अक्टूबर को आचार्यश्री उदारसागर महाराज ससंघ के सान्निध्य में बड़े बाबा भगवान आदिनाथ स्वामी का वार्षिक महामस्तकाभिषेक होगा। कार्यक्रम प्रातः 9 बजे से प्रारंभ होगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नगर से ज्ञानतीर्थ तक निःशुल्क आवागमन वाहन व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम के समापन पर वात्सल्य भोज रखा गया है। आयोजकों ने सकल जैन समाज और धर्मप्रेमियों से महोत्सव में शामिल होकर भगवान आदिनाथ की वंदना करने का आग्रह किया है।

 

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp